सोचें, फिर जलाएं दीया!

हे लक्ष्मी मां। आप भारत मां को कब तक अंधकार में रखेंगी? कब तक हमें हमारे पाप की सजा देती रहेंगी? हम वह क्या करें, जिससे हम सद्बुद्धि पाएं, हमें सत्य और असत्य का भेद समझ आए?