लोकसभा में आंदोलन की गूंज

राज्यसभा के बाद अब लोकसभा में भी विपक्षी सांसदों ने केंद्र सरकार के बनाए तीन कृषि कानूनों के खिलाफ पिछले 76 दिन से चल रह किसान आंदोलन का मुद्दा उठाया।

वार्ता के लिए तैयार हैं किसान

केंद्र सरकार के बनाए तीन कृषि कानूनों का विरोध कर रहे किसान संगठन सरकार के साथ वार्ता के लिए तैयार हो गए हैं। उन्होंने केंद्र सरकार से कहा है कि वह वार्ता के लिए तारीख बताए, किसान तैयार हैं।

वापस हो कृषि कानून, गणतंत्र दिवस पर न शुरू हो नई परंपरा : मायावती

बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने केंद्र सरकार से तीनों नए कृषि कानून वापस लेने का अनुरोध किया है। उन्होंने कहा कि 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस पर किसी नई परम्परा की शुरूआत न हो।

समाधान निकलना ही नहीं था

अब ये साफ है कि सरकार और आंदोलनकारी किसान संगठनों के बीच बातचीत टूट चुकी है। बातचीत के पहले दिन से अंदाजा था कि यही होगा। सरकार की मंशा पहले आंदोलन को थकाने की थी।

सौ किलोमीटर लंबी ट्रैक्टर रैली

केंद्र सरकार के बनाए तीन कृषि कानूनों का विरोध कर रहे किसान संगठन 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस के मौके पर ऐतिहासिक ट्रैक्टर परेड निकालेंगे। किसानों को रैली की अनुमति दिए जाने के एक दिन बाद रविवार को पुलिस ने रैली का रूट भी तय कर दिया है।

कानूनों पर अमल कब तक रूक सकता है?

केंद्र सरकार के बनाए तीन कृषि कानूनों के विरोध में चल रहे किसान आंदोलन को खत्म कराने और किसानों को दिल्ली की सीमा से उठा कर उनके घर भेजने के जितने प्रयास हुए हैं

केंद्र ने किसानों के साथ ब्लफ खेला है!

केंद्र सरकार ने कृषि कानूनों का विरोध कर रहे किसानों के सामने अपनी तरफ से जो सबसे अच्छा प्रस्ताव रखा है वह कानूनों पर डेढ़ साल के लिए रोक लगाने का है। सरकार को भरोसा था कि किसान इसके तकनीकी पहलुओं में नहीं जाएंगे और इसे स्वीकार करेंगे।

पूर्व सैनिकों के लिए सेना का निर्देश

केंद्र सरकार के बनाए तीन कृषि कानूनों के विरोध में आंदोलन कर रहे किसानों को पूर्व सैनिकों का बड़ा समर्थन मिल रहा है। पूर्व सैनिकों के कई संगठनों ने खुले समर्थन का ऐलान किया है

किसानों को यों मनाएँ

किसानों के साथ हुई सरकार की पिछली बात से आशा बंधी थी कि दोनों को बीच का रास्ता मिल गया है। डेढ़ साल तक इन कृषि-कानूनों के टलने का अर्थ क्या है ? क्या यह नहीं कि यदि दोनों के बीच सहमति नहीं हुई तो ये कानून हमेशा के लिए टल जाएंगे।

किसानों को 24 घंटे का अल्टीमेटम!

केंद्र सरकार ने किसानों को तेवर दिखाया है। तीन केंद्रीय कृषि कानूनों का विरोध कर रहे किसानों के साथ 11 दौर की वार्ता के बाद शुक्रवार को सरकार ने दो टूक अंदाज में कह दिया कि वह अब किसानों से बात नहीं करेगी।

सत्र से पहले खत्म होगा आंदोलन!

संसद के बजट सत्र से पहले सरकार आंदोलन खत्म कराने का प्रयास कर रही है। देश के कई राज्यों के किसान पिछल 57 दिन से दिल्ली की सीमा पर आंदोलन कर रहे हैं।

किसान-आंदोलनः आशा बंधी

कल किसान नेताओं और मंत्रियों के सार्थक संवाद से यह आशा बंधी है कि इस बार का गणतंत्र-दिवस, गनतंत्र दिवस में कदापि नहीं बदलेगा। यों भी हमारे किसानों ने अपने अहिंसक आंदोलन से दुनिया के सामने बेहतरीन मिसाल पेश की है।

किसानों को नामंजूर प्रस्ताव

केंद्र सरकार के बनाए तीन कृषि कानूनों का विरोध कर रहे किसान संगठनों की सरकार के साथ 11वें दौर की वार्ता शुक्रवार को होगी।

कानून बनाते समय वार्ता की नहीं सोची!

केंद्र सरकार ने कृषि कानून बनाते समय वार्ता के बारे में नहीं सोचा। तब सरकार ने न किसानों से बात की, न कृषि विशेषज्ञों से बात की, न सांसदों से बात की, न बिल को वार्ता के लिए संसदीय समिति में भेजा और न संसद के अंदर बात की

किसान अपना हठ छोड़ें एवं सकारात्मक बातचीत के लिए आगे आएं : उमा

मध्यप्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री एवं भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की वरिष्ठ नेता उमा भारती ने नए कृषि कानूनों को लेकर किसानों के लंबे समय से जारी आंदोलन को अनुचित ठहराते हुए कहा है

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