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गद्दी पर रहेंगे, शासन क्या करेंगे!

दूसरे कार्यकाल के दो साल पूरे होते-होते प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की वहीं स्थिति है, जो 2014 से पहले तब के प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की हो गई थी। वे अपने आखिरी तीन साल प्रधानमंत्री रहे यानी गद्दी पर बैठे रहे लेकिन शासन नहीं कर पाए। उन्होंने अगले तीन साल सिर्फ घटनाओं पर प्रतिक्रिया दी। हवा के साथ बहते रहे और अंत नतीजा कांग्रेस की ऐतिहासिक पराजय का निकला। यह भी पढ़ें: भारतः ये दो साल! नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भाजपा भी उसी नतीजे पर पहुंचेगी यह अभी नहीं कहा जा सकता है क्योंकि मनमोहन सिंह के मुकाबले मोदी प्रो एक्टिव होकर स्थितियों को संभालने का प्रयास करेंगे। परंतु मोदी सरकार का घटनाओं पर अब नियंत्रण नहीं है। इकबाल भी धीरे धीरे खत्म हो रहा है। सरकार की साख और विश्वसनीयता सात साल में सबसे निचले स्तर पर है। पहली बार ऐसा हुआ है कि उनके समर्थकों के मन में भी अविश्वास पैदा है। कोराना वायरस का संक्रमण शुरू होने से पहले सब कुछ मोदी के कंट्रोल में दिख रहा था। लेकिन पहले संकट ने ही सब कुछ संभाल लेने की उनकी क्षमता पर बड़ा सवालिया निशान लगा दिया। वे कोरोना संकट को नहीं संभाल सके, देश का आर्थिक संकट उनके… Continue reading गद्दी पर रहेंगे, शासन क्या करेंगे!

राजनीतिक नुकसान के दो बरस

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनके गृह मंत्री अमित शाह को दूसरे कार्यकाल के दो बरस में जितना राजनीतिक नुकसान हुआ है उतना उनके पूरे राजनीतिक करियर में नहीं हुआ होगा। भाजपा ने पिछले दो साल में अपने कई राजनीतिक सहयोगी गंवा दिए। महाराष्ट्र में दशकों से भाजपा की सहयोगी रही शिव सेना ने उसका साथ छोड़ दिया। शिव सेना की तरह ही सबसे पुरानी सहयोगियों में से एक अकाली दल ने कृषि कानूनों और किसान आंदोलन के मुद्दे पर भाजपा का साथ छोड़ दिया। महाराष्ट्र में राजू शेट्टी, बिहार में उपेंद्र कुशवाहा, असम में हाग्राम मोहिलारी जैसे अनेक छोटे छोटे क्षत्रपों ने भाजपा का साथ छोड़ दिया। हो सकता है कि भाजपा को अभी इसके नुकसान का अंदाजा नहीं हो रहा हो पर आने वाले दिनों में सहयोगियों की कमी उसे परेशान करेगी। यह भी पढ़ें: भारतः ये दो साल! लोकसभा चुनाव जीतने के बाद अगस्त के महीने में अनुच्छेद 370 का फैसला कराने और नागरिकता कानून बदलवाने के बाद लग रहा था कि अब आगे कोई भी चुनाव जीतने से भाजपा को कोई नहीं रोक सकता है। लेकिन इन दोनों फैसलों के बाद दो राज्यों- महाराष्ट्र व हरियाणा में में विधानसभा के चुनाव हुए। भाजपा ने महाराष्ट्र की सत्ता… Continue reading राजनीतिक नुकसान के दो बरस

दुनिया में डंका बजने का मिथक टूटा

जिस तरह से दूसरे कार्यकाल के दो साल में घरेलू मोर्चे पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अजेय होने और सब कुछ संभाल लेने वाले नेता की छवि टूटी और लोगों को लगा कि वे भी एक आम नेता की तरह हैं, जो किसी बड़े संकट में फेल हो सकते हैं तो उसी तरह दुनिया में डंका बजने का मिथक भी टूटा। ध्यान रहे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने खुद अपने भाषणों से, उनकी पार्टी के आईटी सेल ने, उनके प्रवक्ताओं और समर्थकों ने यह प्रचार किया हुआ है कि पहली बार दुनिया में भारत की आवाज गंभीरता से सुनी जा रही है और यह मोदी की वजह से हुआ है। यह भी पढ़ें: भारतः ये दो साल! मोदी ने इसके लिए सबसे ज्यादा मेहनत की। अमेरिका के राष्ट्रपतियों से दोस्ती दिखाने से लेकर चीन के राष्ट्रपति को झूला झुलाने और रूस के राष्ट्रपति के साथ अनौपचारिक वार्ता करने तक सब कुछ किया। उन्होंने अपनी वैश्विक छवि चमकाने के लिए दुनिया भर के देशों को पीपीई किट्स, मास्क आदि भिजवाए और जब वैक्सीन बन कर आ गई तो अपने लोगों को लगवाने की बजाय दुनिया के कई देशों को अनुदान में बांटने लगे। लेकिन इन सबका अंत नतीजा यह है कि भारत… Continue reading दुनिया में डंका बजने का मिथक टूटा

झूठ को फिर भी शर्म नहीं!

मैं थक गया, सूख गई स्याही.. पर झूठ न हारा। सांसे फडफडा कर मर गई… पर झूठ न पसीजा। गिद्धों ने नौचा जिंदा इंसानों (मरीजों) को.. पर झूठ नहीं लजाया। लोभी-लालची बन गए नरपशु…पर झूठ नहीं कांपा। चिताओं से जल उठे श्मशान …पर झूठ नहीं जला। शवों पर टूट पड़े कुत्ते… पर झूठ नहीं ठिठका।… गंगा रो पड़ी लाशों से… पर झूठ नहीं रोया। देवता हुए रूष्ट… पर झूठ नहीं घबराया। दुनिया सन्न लावारिश देश के लावारिशों को देख…पर झूठ आंकड़ों से चिंघाडता हुआ। दुनिया दौडी आई..पर झूठ मगरूर। गरीब-गुरबे बिना कफन रेत में दबते हुए… पर झूठ को फिर भी शर्म नहीं! हां, झूठ ही है कलियुग! हिंदुओं की काल नियति! कलियुगी हिंदुओं की गुरूता का गरूर! …बिना बुद्धी, बिना लाज, बिना शर्म, बिना भावना, बिना संवेदना और बिना आंसू के। हे झूठमेव जयते का कलियुग… और भय-भक्ति, दासता, दीनता-हीनता, नरसंहार, लूट के सतत सफर के बाद 21वीं सदी के सन् इक्कीस में गंगा किनारे जा बने हिंदू जीवन की टायर-घासलेटी चिता के मुक्ति फोटो… क्या कोई विचलित? 33 करोड़ देवी-देवताओं के कलियुगी रूपों के लाखों मठाधीश साधू-संतों, करोड़ों भक्तों में क्या किसी की उफ! यह भी पढ़ें: कहां है पुण्यभूमि का गौरव मैं फिर लिखने लगा.. जबकि निश्चय… Continue reading झूठ को फिर भी शर्म नहीं!

साहेब तुम्हारे रामराज में..

सन् इक्कीस का राजा… महाबली, महा भाग्यवान। पर क्या सचमुच? राजा का भाग्य तो प्रजा का सुख होता है। राजा भाग्यवान होता तो भला वह हेडलाइन बनवाने में क्यों खपा होता?  क्यों राजा को लंगूरों की फौज की जरूरत होती? क्यों वह आंकड़े बनवाते हुए होता? राजा का भाग्य प्रजा से है, प्रजा का भाग्य अच्छे वक्त से है तो वक्त का अच्छा या बुरा होना क्या राजा के कर्मों का परिणाम नहीं? वक्त का कमाल देखिए कि जिस कवियत्री (पारुल खक्कर) को गुजरात के लोग भजन लेखन के लिए जानते थे, उन्होने वक्त की हकीकत पर सिर्फ चौदह लाईनों में मन के उद्गार लिखे और राजा का कथित भाग्य कंपकंपा गया। वे और उनके ट्रौल-लंगूर सैनिक उन पर टूट पड़े… यह मजाल।… पर सत्य तो सत्य। अपने आप कविता का कई भाषाओं में अनुवाद हुआ और पारूल खक्कर गुजरात में घर-घर चर्चित। उस कविता का यह हिंदी अनुवाद हैः एक साथ सब मुर्दे बोले ‘सब कुछ चंगा-चंगा’ साहेब तुम्हारे रामराज में शव-वाहिनी गंगा ख़त्म हुए शमशान तुम्हारे, ख़त्म काष्ठ की बोरी थके हमारे कंधे सारे, आँखें रह गई कोरी दर-दर जाकर यमदूत खेले मौत का नाच बेढंगा साहेब तुम्हारे रामराज में शव-वाहिनी गंगा नित लगातार जलती चिताएँ राहत माँगे… Continue reading साहेब तुम्हारे रामराज में..

जान से बड़ा कुछ भी नहीं

आपने भी सुना होगा अच्छा सोचो, शुभ-शुभ सोचो, पॉजिटिव बनो! बकौल मोहन भागवत…. जो चले गए वो एक तरह से मुक्त हो गए,….ये जीवन मरण का चक्र चलता रहता है, जैसे मनु्ष्य मैले और पुराने कपड़े त्याग कर नए कपड़े बदलता है, वैसे पुराना शरीर छोड़ कर नया शरीर धारण करके आता है….हम अपने मन को निगेटिव नहीं होने देंगे। हमें मन को पॉजिटिव रखना है!….. तो विचार करे सर्वेश्वर दयाल सक्सेना लिखित कविता पर और उसकी इस पंक्ति पर- जो विवेक, खड़ा हो लाशों को टेक, वह अंधा है। देश कागज पर बना नक्शा नहीं होता यदि तुम्हारे घर के एक कमरे में आग लगी हो तो क्या तुम दूसरे कमरे में सो सकते हो? यदि तुम्हारे घर के एक कमरे में लाशें सड़ रहीं हों तो क्या तुम दूसरे कमरे में प्रार्थना कर सकते हो? यदि हां तो मुझे तुम से कुछ नहीं कहना है। यह भी पढ़ें: कहां है पुण्यभूमि का गौरव देश कागज पर बना नक्शा नहीं होता कि एक हिस्से के फट जाने पर बाकी हिस्से उसी तरह साबुत बने रहें और नदियां, पर्वत, शहर, गांव वैसे ही अपनी-अपनी जगह दिखें अनमने रहें। यदि तुम यह नहीं मानते तो मुझे तुम्हारे साथ नहीं रहना है।… Continue reading जान से बड़ा कुछ भी नहीं

राष्ट्र के नाम

सब कुछ raashtr के नाम पर है। भारत को महान बनाने के नाम पर है। गंगा-बनारस सब देश का गौरव बढ़ाने के लिए हैं।

कहां है पुण्यभूमि का गौरव

राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ के नीति-सिद्धांत का कोर बिंदु पुण्यभूमि के गौरव में है। हम और वे का पूरा सिद्धांत इस बात पर है कि भारत जिनकी मातृभूमि है उनकी पुण्यभूमि दूसरी जगह कैसे हो सकती है? फिर इस पुण्यभूमि की आज ऐसी हालत क्यों है? इस पुण्यभूमि पर कैसा संकट आया हुआ है और इस संकटकाल में जिनके ऊपर इसकी रक्षा का भार है वे क्या कर रहे हैं? इस महान गौरवशाली सभ्यता का प्रतिनिधित्व करने वाले कहां हैं? साहिर ने आजादी के थोड़े समय बाद ही लिखा था- जरा मुल्क के रहबरों को बुलाओ, ये कूचे-ये गलियां-ये मंजर दिखाओ। आज फिर यह कहने का समय है। मुल्क के रहबरों को बाहर निकलना चाहिए। गंगा की रेती में दबी या गंगा की लहरों में डूबती-उतराती लाशों को देखना चाहिए। गलियों से उठते क्रंदन को सुनना चाहिए। अस्पतालों के अंदर-बाहर हो रही प्रार्थनाओं की आवाजें सुनने की कोशिश करनी चाहिए। इंसानियत के नाते नहीं तो अपनी पुण्यभूमि की रक्षा करने की जिम्मेदारी के नाते ही इसे बचाने की कोशिश करनी चाहिए। राष्ट्रकवि दिनकर ने आजादी से पहले और बाद में भी कई मौकों पर पुण्यभूमि के संकट का आख्यान लिखा और मुल्क के रहबरों व नागरिकों को ललकारते हुए उन्हें हकीकत… Continue reading कहां है पुण्यभूमि का गौरव

वक्त आज.. मैंने हवाओं से पूछा!

दुनिया भर से आ रहे चिंता जताने वाले संदेश, सरोकार दिखाने वाले सवालों से इनबॉक्स भरे हैं। मैं कई दिनों तक उनकी अनदेखी करती हूं पर सवालों में चिंता बढ़ती जाती है। ….. लेकिन मैं उनसे क्या कहूं? क्या यह कहूं मैं ठीक हूं, जबकि यहां से हजार किलोमीटर दूर शवों के ऊपर टायर और केरोसीन डाल कर उन्हे जलाया जा रहा है?…. झूठ है कि सब ठीक है, मरीजों की संख्या कम हो रही है, जबकि गांवों में लोग सामूहिक रूप से अपनों का जलप्रवाह कर रहे हैं। अब मैं भूल चुकी हूं कि साफ हवा की गंध कैसी होती है। लेकिन मैं कह सकती हूं कि बाहर की हवा भी अंदर की हवा की तरह बासी और जहरीली है। इसमें भय की कच्ची गंध, पागलपन का पसीना और मुश्किलों की सड़ांध है। पिछली बार से बदला हुआ..इस बार घबराहट में होने वाली खरीद नहीं है। मैगी के पैकेट खरीद कर घरों में नहीं भरे जा रहे हैं और न चावल, दाल, पास्ता या चटनी-केचअप की खरीद हो रही है, खुशबूदार बॉडीवॉश या यहां तक कि आटा-मैदा भी खरीद कर नहीं भरा जा रहा है। इस बार सड़कों पर आवारा कुत्ते घबराए हुए नहीं हैं। वे खाना देने वाले… Continue reading वक्त आज.. मैंने हवाओं से पूछा!

भारत माता

मां!…क्षमा करें…मेरे पास न वंदना है, न जय। उलटे मैं अपनी कल्पना, आपके चित्र, आपकी दशा से कंपायमान हूं, व्यथित हूं….आपकी धरा पर धरा के मूर्त अनुभव में। कंपकंपाहट इसलिए कि भागीरथ जिस धरा पर लाए थे गंगा, उसमें मानव अर्थियां बहती हुईं। जिस धरा पर ज्ञान-विज्ञान-सत्य की पावन, गंगा अविरल थी वह अब मूर्खता-गोबर-झूठ की टर्र-टर्र वाला कुंआ है। जो ऋषि-मुनियों की थी दिव्यधरा…. कण कण में था बल विक्रम, पौरुषता का आह्वान..  वह अब दास्य और भक्ति वृत्ति में रची पकी है। सभी हो गए हैं भाग्य भरोसे! जिस धरा पर उन्नत शीश हिमालय की कालजयी सुरक्षा थी उसे दुश्मन चीन रौंदता हुआ। जिस धरा पर रोगों का नाश करने वाली चंडिके (स्तुवद्भ्यो भक्तिपूर्वं त्वाम चण्डिके व्याधिनाशिनि) का वास था वहां दसों दिशाओं में नर-नारी रोते हुए। यह भी पढ़ें: सांस! हे मां..आप ही हैं न भारत नाम के राष्ट्र-राज्य की माता? क्या आप आज पृथ्वी की उस भूमि को पहचान पा रही हैं, जिसे अपने केसरिया आंचल, भगवा ध्वज, और शक्तिमान-रौद्र सिंह के तेज से राष्ट्रभाव की दिव्य चेतना में आपने रंगा था। जिसको ले कर बांग्ला साहित्यकार किरनचंद्र बन्दोपाध्याय ने नाटक के जरिए और पत्रकार-गद्यकार बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय ने ‘वंदेमातरम’ लिख कोटी-कोटी हिंदुओं में चेतना बनवाई कि ‘जननी… Continue reading भारत माता

16 मईः हमारी तारीख, हमारी प्राप्ति, पर चिंता की भी तारीख!

हम तिथियों की महत्ता मानते हुए, उसकी पूजा करते हुए जीते है। उनका खास अर्थ उसके खास भाव से होता है। तारीख विशेष के हम कतृज्ञ होते हैं। तारीख बहाना होती है उत्सव का, समझने का, रस-रंग में डूबने का। उनसे हम इसलिए भी प्रेम करते है क्योंकि वे जीवन के मकसद की याद दिलाती हैं। तारीखें उष्म, मूल्यवान और स्वप्निल होती हैं। 16 मई एक ऐसी ही खास तारीख है, खास अर्थ लिए हुए। यह भी पढ़ें :   त्रासद है यह नया भारत यह तारीख हमारे लिए, ‘नया इंडिया’ की छोटी सी टीम के लिए उत्सव की है तो राहत के साथ चिंता की भी। उत्सव-संतोष-खुशी इसलिए कि ‘नया इंडिया’ आज अपने अस्तित्व के 11 वर्ष पूरे कर रहा है। लंबी सांस के साथ राहत इस कारण कि बिना प्राण वायु, साधन-संसाधन-विज्ञापन के बावजूद ‘नया इंडिया’ जिंदा है। लेकिन दिल-दिमाग बोझिल है इस सवाल से कि– क्या हम बदहाल-अंधकारमय वक्त में लक्ष्मी के श्राप, धन-साधन की अनिश्चितता, अभाव में जिंदा रह पाएंगे? पिछले दो साल, तिल-तिल कर खत्म होती ऑक्सीजन के… उत्सव रूखे-सूखे लेकिन वही सवालों की आग जलाने, फड़फड़ा देने वाली। पिछले वर्ष में ‘नया इंडिया’ फरवरी से ही शत-प्रतिशत घर से काम में बनता-निखरता और धार… Continue reading 16 मईः हमारी तारीख, हमारी प्राप्ति, पर चिंता की भी तारीख!

Dharmveer Jakhar Aapni pathshala : राजस्थान पुलिस का कांस्टेबल धर्मवीर जाखड़ कैसे बना गरीबों का मसीहा?

चूरू। मिलिए राजस्थान पुलिस के उस कांस्टेबल से जो गरीब बहनों का भाई बन गया। जिसने भीख मांगने वालों हाथों में कटोरे की जगह कलम थमा दी और कचरा बीनने वालों की पीठ पर बोरे की जगह बस्ता लाद दिया। कांस्टेबल का नाम है धर्मवीर जाखड़। राजस्थान में सबसे अधिक सर्दी व गर्मी के लिए पहचाने जाने वाले चूरू में धर्मवीर जाखड़ किसी परिचय का मोहताज नहीं हैं। इन्हें चूरू में बतौर कांस्टेबल डयूटी करते, आपणी पाठशाला में बच्चों को पढ़ाते और गरीब बहनों के घर शादी में भात भरते हुए देखा जा सकता है।   धर्मवीर जाखड़, कांस्टेबल चूरू पुलिस बता दें कि धर्मवीर जाखड़ चूरू जिले की राजगढ़ तहसील के गांव खारियावास के रहने वाले हैं। वर्ष 2011 में राजस्थान पुलिस में भर्ती हुए थे। चूरू महिला पुलिस थाना समेत कई जगहों पर पदस्थापित रह चुके हैं। राजस्थान पुलिस की नौकरी में भले ही धर्मवीर ​जाखड़ की सेवा की जगह बदलती रहती है, मगर इनके नेक इरादे कभी नहीं बदलते। ये झुग्गी झोपड़ियों वाले बच्चों की जिंदगी संवारने के साथ—साथ कई गरीब परिवार की जीने की राह आसान करने में लगे हैं। कहानी UPSC पास करने वालीं तीन सगी बहनों की, दो IAS व तीसरी IRS बनी, ताना… Continue reading Dharmveer Jakhar Aapni pathshala : राजस्थान पुलिस का कांस्टेबल धर्मवीर जाखड़ कैसे बना गरीबों का मसीहा?

रविशंकर प्रसाद की प्रेस वार्ता : महाराष्ट्र में एक मंत्री का लक्ष्य सौ करोड़ है तो बाकी का क्या है?

नई दिल्ली | महाराष्ट्र सरकार के गृहमंत्री अनिल देशमुख (Maharashtra Home Minister Anil Deshmukh) पर पुलिस अधिकारियों के माध्यम से करोड़ों रुपये वसूली के लगे गंभीर आरोपों के बाद बीजेपी लगातार उद्धव ठाकरे (Uddhav Thackrey) की गठबंधन सरकार (Mahavikas Aghadi Government) पर हमलावर हो रही है। केंद्रीय कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद (Law Minister Ravi Shankar Prasad) ने मंगलवार को सवाल उठाते हुए कहा कि महाराष्ट्र सरकार में जब एक मंत्री का टारगेट सौ करोड़ रुपए है, तो बाकी के मंत्रियों का कितना होगा? प्रसाद ने मंगलवार को पार्टी मुख्यालय पर प्रेस कांफ्रेंस बुलाकर कहा कि भारत के इतिहास में ये पहली बार हुआ कि किसी पुलिस कमिश्नर स्तर के अधिका​री ने लिखा है कि राज्य के गृह मंत्री ने मुंबई से 100 करोड़ रुपये महीना वसूली का टार्गेट तय किया है। प्रसाद ने आगे कहा कि जब एक मंत्री का टार्गेट 100 करोड़ रुपये है तो बाकी का कितना होगा? आपको याद दिला दें कि महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कुछ दस्तावेजों के साथ कहा है कि ट्रांसफर और पोस्टिंग के नाम पर भी वसूली चल रही थी। वो भी छोटे मोटे ऑफिसर्स की ही नहीं बल्कि बड़े बड़े अखिल भारतीय पुलिस सेवा के अधिकारियों की भी। सचिन… Continue reading रविशंकर प्रसाद की प्रेस वार्ता : महाराष्ट्र में एक मंत्री का लक्ष्य सौ करोड़ है तो बाकी का क्या है?

West Bengal Election 2021 : लगातार दो बार CM बनीं ममता बनर्जी के पास कितनी सम्पत्ति है?

कोलकाता। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2021 में मतदान का पहला चरण शुरू होने में सप्ताहभर का समय बचा है। बंगाल की 294 सीटों के लिए 27 मार्च से लेकर 29 अप्रेल तक वोट डाले जाएंगे। दो मई को मतों की गणना होगी। West Bengal Assembly Elections 2021 के मैदान में ममता बनर्जी ने तीसरी बार सीएम बनने के लिए ताल ठोक रखी है। ममता बनर्जी ने बंगाल की नंदीग्राम ​सीट से नामांकन पत्र दाखिल किया है। नामांकन पत्र दाखिल करते समय ममता दीदी ने चुनाव आयोग को दिए अपने शपथ पत्र में संपत्ति का भी खुलासा किया है। इसे भी पढ़ें-  BJP सांसद ने फिर दिया विवादित बयान कहा- तीसरे बच्चे को जन्म देने के पहले सरकार से लेना होगा NOC ममता बनर्जी के शपथ पत्र के अनुसार उनके पास 69 हजार 255 रुपए कैश हैं। खुद का कोई मकान, कार व खेती या व्यावसायिक इस्तेमाल के लिए जमीन नहीं है। करीब 18 लाख 82 हजार की अचल संपत्ति है। इसके अलावा 9 ग्राम 750 मिलीग्राम के आभूषण हैं। बता दें कि पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2021 के शपथ पत्र में ममता बनर्जी ने साल 2019 व 2018 की इनकम का भी जिक्र किया है। साल 2019—20 में ममता दीदी की कुल आय दस लाख… Continue reading West Bengal Election 2021 : लगातार दो बार CM बनीं ममता बनर्जी के पास कितनी सम्पत्ति है?

Bengal election 2021 : सड़क के खंभे बताएंगे ‘दीदी’ को कैसे लगी चोट, फोरेंसिक विभाग ने की जांच

kolkata: बंगाल चुनाव (Bengal election) को लेकर देशभर में चर्चाएं हो रही हैं. केंद्र में बैठी BJP सरकार बंगाल में किसी भी तरह से सत्ता हासिल करने को आतुर है. दूसरी तरफ बंगाल की सीएम ममता बनर्जी (MAMTA BANERJEE) भी BJP के हर दाव का करारा जवाब दे रही है. 10 मार्च को बंगाल के नंदीग्राम (NANDIGRAM) में दीदी के घायल होने के बाद से जैसे बंगाल के चुनाव में एक नया मोड़ आ गया है. अभी भी दीदी की चोट को लेकर TMC ओर BJP के कार्यकर्ताओं के बीच जबानी जंग जारी है. हालांकि चुनाव आयोग ने ममता ‘दीदी’ के चोटिल होने को एक दुर्घटना (ACCIDENT) करार दे दिया था. इसके बाद भी दोनों ही पार्टियां एक दूसरे पर हमलावर है. इसा कड़ी में आज राज्य के फोरेंसिक विभाग (Forensic Department ) ने नंदीग्राम में उन इलाकों के खंभों का निरीक्षण किया है जहां ममता बनर्जी चुनाव प्रचार के दौरान घायल हुई थीं. राज्य सरकार खंभों की जांच कर ये जानने का प्रयास कर रही है कि आखिर ऐसा भी क्या हुआ जिससे ममता बनर्जी घायल हो गयी. इसे भी पढ़ें- Bengal election 2021 : ओवैसी की बारात छोड़कर दुल्हा हुआ फरार ! नंदीग्राम में सड़क किनारे खंभों का किया… Continue reading Bengal election 2021 : सड़क के खंभे बताएंगे ‘दीदी’ को कैसे लगी चोट, फोरेंसिक विभाग ने की जांच

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