दुशासन, तुगलक, रावण से तुलना

भारत के राजनीतिक विमर्श और संवाद की भाषा का स्तर कितना गिर सकता है यह हर दिन को देखने को मिलता है। कई बार लगता है कि भाषा का स्तर इससे नीचे का नहीं हो सकता है पर उसके अगले ही दिन नेता उस स्तर को पार कर जाते हैं।

पीके क्या डिप्टी सीएम पद मांग रहे थे?

प्रशांत किशोर संशोधित नागरिकता कानून, सीएए, राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर और राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर का विरोध कर रहे थे। पर क्या उनका विरोध करना ऐसी बात थी, जिसके लिए नीतीश कुमार ने उनको निशाना बनाया और फिर पार्टी से निकाल दिया?

भाजपा दुशासन और तुगलक की पार्टी: ममता

कोलकाता। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने संशोधित नागरिकता कानून और एनआरसी को लेकर केंद्र सरकार और भाजपा पर बेहद तीखा हमला बोला है। उन्होंने मंगलवार को पश्चिम बंगाल के नादिया जिले में संशोधित नागरिकता कानून, सीएए के खिलाफ रैली की। इस मौके पर उन्होंने लोगों को सीएए के खिलाफ एकजुट होने के लिए कहा। ममता ने भाजपा को निशाना बनाते हुए कहा- तृणमूल कांग्रेस भाजपा की तरह दुशासनों की पार्टी नहीं। वे  मुहम्मद बिन तुगलक की औलाद हैं। दिल्ली चुनाव को लेकर उन्होंने भाजपा पर आरोप लगाया कि वे जीत नहीं सकते इसलिए गोलियां चला रहे।  मुख्यमंत्री ने आगे कहा- भाजपा देश में सीएए, एनआरसी और एनपीआर जबरदस्ती लागू करना चाहती है। मैं इसे किसी भी तरह से रोकूंगी। जब तक मैं न कहूं किसी को अपने आधार कार्ड या परिवार के सदस्यों की जानकारी नहीं सौंपे। अगर मेरे पास मेरी मां का जन्म प्रमाणपत्र नहीं है, तो क्या वे मुझे देश से बाहर कर देंगे। ममता बनर्जी ने कहा कि सीएए एनपीआर-एनआरसी काला जादू की तरह है। इनके कारण लोग डरे हुए हैं।

धरना सेकुलर तो विरोध से ध्रुवीकरण कैसे?

शाहीन बाग़ के धरने से हिन्दू विरोधी सेकुलर जमात बहुत गदगद थी। इस जमात का वह सपना भी पूरा हो गया था कि शाहीन बाग जैसे धरने देश के हर शहर में हो| अब मुम्बई, लखनऊ, भोपाल, जयपुर आदि जगहों पर भी धरने शुरू हो गए हैं| शाहीन बाग़ धरने के आयोजक शरजिल इमाम गिरफ्तारी से पहले देश भर में घूम कर सेकुलर जमात का सपना पूरा कर रहा था। पर उस के भाषणों के दर्जन भर वीडियो सामने आने के बाद आन्दोलन के सेकुलर नहीं होने का भंडा फूट गया| फिलहाल नहीं कह सकते कि सेकुलर जमात का यह भ्रम दूर हुआ या नहीं कि मुसलमान तो सेकुलर है पर हिन्दू साम्प्रदायिक है। सेकुलर जमात का वह मकसद पूरा नहीं हो सका कि 1974 जैसा जेपी आन्दोलन बन जाए। इस की बड़ी वजह यह है कि 2014 के बाद भारत बदला है। हिन्दुओं को समझ आने लगा है कि सेकुलरिज्म , संविधान, लोकतंत्र के नाम पर कैसे उसे इमोशनल ब्लैकमेल किया जाता रहा है| उन्हें समझ आ गया है कि सेकुलर शब्द का इस्तेमाल उन्हीं के खिलाफ किया जाता था। इसलिए सेकुलरिज्म के नाम पर हिन्दू अब उतने मुखर नहीं रहे , जितने 2014 से पहले हुआ करते थे।… Continue reading धरना सेकुलर तो विरोध से ध्रुवीकरण कैसे?

सरकार बनाएगी नई जनसंख्या नीति

केंद्र में सत्ता में आने के बाद से ही नरेंद्र मोदी की सरकार शिक्षा नीति बनाने का प्रयास कर रही है। शिक्षा नीति बनाने के क्रम में तीन शिक्षा मंत्री बन चुके हैं। अभी तक यह नीति मसौदे से आगे नहीं बढ़ पाई है। इस बीच खबर है कि केंद्र सरकार नई राष्ट्रीय जनसंख्या नीति बनाने जा रही है।

राज्यों से बेहतर संबंध चाहता है केंद्र

रायपुर। नागरिकता कानून सहित कई केंद्रीय कानूनों और योजनाओं पर राज्यों के साथ चल रहे टकराव के बीच केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने दावा किया है कि केंद्र चाहता है कि राज्यों से बेहतर संबंध हों। गृह मंत्री अमित शाह ने छत्तीसगढ़ में मध्य क्षेत्रीय परिषद, सीजेडसी की बैठक में मंगलवार को कहा कि केंद्र सभी राज्यों के साथ बेहतर तालमेल बना कर रखना चाहता है। शाह ने केंद्र और राज्यों के बीच विचार-विमर्श के लिए बनाए गए मंच सीजेडीसी की 22वीं बैठक की अध्यक्षता की, जिसमें नया रायपुर में सुरक्षा और आधारभूत संरचना सहित कई मुद्दों पर चर्चा हुई। इस बैठक में अमित शाह ने कहा- केंद्र सभी राज्यों के साथ बेहतर तालमेल बनाए रखना चाहता है। उन्होंने कहा कि केंद्र सभी राज्यों को उनकी बेहतरी के लिए हर संभव सहायता देगा। इससे पहले कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ ने कहा कि केंद्र और राज्यों के बीच टकराव के कई मुद्दे हैं, हालांकि उन्होंने किसी खास मुद्दे का जिक्र नहीं किया। कमलनाथ ने कहा- केंद्र और राज्य के बीच समन्वय बना रहे, यह बहुत जरूरी है। बहुत सारे ऐसे मुद्दे हैं जो टकराव के मुद्दे हैं, और टकराव से हानि ही नहीं होती,… Continue reading राज्यों से बेहतर संबंध चाहता है केंद्र

हाई कोर्ट ने यूपी सरकार से मांगा जवाब

लखनऊ। संशोधित नागरिकता कानून, सीएए के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे लोगों पर उत्तर प्रदेश पुलिस की कार्रवाई को लेकर हाई कोर्ट ने राज्य सरकार से जवाब तलब किया है। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने इस बारे में राज्य सरकार को रिपोर्ट देने के लिए कहा है। गौरतलब है कि दिसंबर में सीएए संसद से पास होने के बाद राज्य के कई शहरों में विरोध प्रदर्शन हुए थे। प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पुलिस ने कड़ी कार्रवाई की थी, जिसके वीडियो भी वायरल हुए थे। बहरहाल, कई शहरों में प्रदर्शन के दौरान हुई हिंसा की न्यायिक जांच की मांग करती हुई कई याचिकाएं हाई कोर्ट में दायर की गई थीं। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने सभी याचिकाओं पर एक साथ सुनवाई की और राज्य सरकार ने हलफनामा के साथ जवाब दाखिल किया। लेकिन अदालत राज्‍य सरकार के हलफनामे से संतुष्‍ट नहीं हुई। हाई कोर्ट ने कई बिंदुओं पर राज्य सरकार से रिपोर्ट मांगी है। अदालत ने पूछा कि प्रदर्शनकारियों की ओर से अब तक कितनी शिकायतें की गई हैं और उनमें से कितनी शिकायतों पर पुलिस ने एफआईआर दर्ज की है। अदालत ने हिंसा में मारे गए 23 प्रदर्शनकारियों की मौत के मामले में दर्ज एफआईआर और पोस्‍टमॉर्टम रिपोर्ट भी तलब की है। इसके अलावा… Continue reading हाई कोर्ट ने यूपी सरकार से मांगा जवाब

मुसलमानों की देशभक्ति?

पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने उन शांतिपूर्ण आंदोलनों की तारीफ की है, जो नए नागरिकता कानून के विरोध में चल रहे हैं। उनका कहना है कि इससे भारत का लोकतंत्र मजबूत हो रहा है। मैं तो इस कथन से भी थोड़ा आगे जाता हूं। मेरा कहना है कि यह आंदोलन चाहे इस गलतफहमी के आधार पर चल रहा है कि इस नए कानून से देश के मुसलमानों की नागरिकता छिन जाएगी जबकि इस कानून का संबंध सिर्फ उन मुसलमान शरणार्थियों से है, जो बांग्लादेश, पाकिस्तान और अफगानिस्तान से आ सकते हैं। भारत में रहनेवाले मुसलमान नागरिकों से इस कानून का कुछ लेना-देना नहीं है लेकिन वे और उनके साथ हिंदू और सिख नौजवान मिलकर जिस उत्साह से देश में प्रदर्शन कर रहे हैं, वह अपने आप में अनुपम है। इसके कई कारण हैं। पहला, तो यही कि देश में लोकतंत्र मजबूत हो रहा है। विरोध को पूरी आजादी है। दूसरा, यह आंदोलन अहिंसक है।। खून-खराबा बिल्कुल नहीं है। तीसरा, मुस्लिम महिलाएं पहली बार घर से बाहर निकल कर प्रदर्शन कर रही हैं। उनमें जागृति फैल रही है। हजार-बारह सौ साल में किसी मुस्लिम देश में भी ऐसा दृश्य कभी नहीं दिखा। चौथा, हिंदू-मुस्लिम एकता का यह प्रदर्शन भी अपूर्व है।… Continue reading मुसलमानों की देशभक्ति?

सीएए के नरम प्रतिरोध की राजनीति

शशांक राय – संशोधित नागरिकता कानून, सीएए पर देश बंटा हुआ है। इससे पहले संभवतः कभी ऐसा मौका नहीं आया, जब किसी कानून को लेकर इस किस्म का विभाजन हुआ हो। मंडल आयोग की रिपोर्ट लागू करना एक मौका था। समाज तब भी बंटा था पर सड़क पर उतर कर हो रहा कानून का विरोध जल्दी ही समाप्त हो गया था। इस बार नागरिकता कानून के विरोध में चल रहे आंदोलन का दायरा भी बड़ा है, तीव्रता भी बड़ी है, इसकी वजह से हुआ सामाजिक विभाजन भी ज्यादा गहरा है और प्रतिरोध निरंतरता भी ज्यादा है। पिछले करीब डेढ़ महीने से इसे लेकर विरोध चल रहा है। राजधानी दिल्ली से लेकर सुदूर किसी राज्य के छोटे से जिले में भी इस पर विरोध हो रहा है। कुछ जगहों पर इसका समर्थन भी हो रहा है पर समर्थन में हो रहा प्रदर्शन मोटे तौर पर प्रायोजित है। वह भाजपा की ओर से कराया जा रहा है या सरकार की ओर से कानून के समर्थन में रैलियां हो रही हैं। संशोधित नागरिकता कानून के विरोध के दो पहलू हैं। एक बड़ा तबका है, जो इसका बहुत मुखर होकर विरोध कर रहा है। उसमें पूर्वोत्तर की कुछ पार्टियां और अपनी भाषा, अस्मिता बचाने… Continue reading सीएए के नरम प्रतिरोध की राजनीति

जजपा, अकाली दल क्यों नहीं लड़े?

जिस तरह दिल्ली के चुनाव में यह बड़ा सवाल है कि जदयू और लोजपा ने भाजपा से क्यों तालमेल कर लिया उसी तरह का सवाल है कि अकाली दल और हरियाणा में भाजपा की सहयोगी जननायक जनता पार्टी चुनाव क्यों नहीं लड़े? पहले कहा जा रहा था कि भाजपा अकाली दल को चार सीटें देने जा रही है और जजपा को पांच-छह सीट दी जा सकती है।

अखिलेश सीएए पर बहस को तैयार, ‘डंके की चोट’ शब्द को लेकर तंज कसा

लखनऊ। समाजवादी पार्टी (सपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने बुधवार को कहा कि वह नागरिकता कानून (सीएए) और विकास को लेकर भाजपा के लोगों से बहस के लिए तैयार हैं। उन्होंने अमित शाह के कहे शब्द ‘डंके की चोट’ पर तंज कसते हुए कहा कि यह राजनेताओं की भाषा नहीं हो सकती। बुधवार को जनेश्वर मिश्र की पुण्यतिथि पर जनेश्वर मिश्र पार्क में आयोजित कार्यक्रम में अखिलेश ने कहा कि बहुमत के कारण भाजपा आम लोगों की आवाज नहीं दबा सकती। उन्होंने कहा कि भाजपा जब चाहे तब, सीएए और विकास के मुद्दे पर उनसे बहस करने को वह तैयार हैं। वह उन्हें सिर्फ जगह और मंच के बारे में बता दे। अखिलेश बोले, सीएए का विरोध सिर्फ सपा ही नहीं कर रही है, समूचे देश में लोग सड़कों पर उतर आए हैं, बड़ी संख्या में महिलाएं भी धरना दे रही हैं। भाजपा वाले धर्म के नाम पर नागरिकों के साथ भेदभाव कब तक करेंगे। वोट के लिए भारत की आत्मा को क्यों खत्म कर रही है भाजपा? पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा, डंके की चोट पर.. यह राजनेताओं की भाषा नहीं हो सकती। कितनी अफसोस की बात है कि मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम व श्रीकृष्ण की धरती पर, हमारे प्रदेश… Continue reading अखिलेश सीएए पर बहस को तैयार, ‘डंके की चोट’ शब्द को लेकर तंज कसा

देश के दुश्मनों की भाषा बोल रही कांग्रेस और सपा: योगी

लखनऊ। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि नागरिकता कानून (सीएए) के बारे में दुष्प्रचार किया जा रहा है। कांग्रेस, सपा और अन्य विपक्षी दल देश के अंदर देश के दुश्मनों की भाषा बोल रहे हैं। ऐसे में मौन नहीं रहा जा सकता। योगी मंगलवार को सीएए के समर्थन में राजधानी के बंगला बाजार इलाके के रामकथा पार्क में आयोजित भारतीय जनता पार्टी की क्षेत्रीय रैली को संबोधित कर रहे थे। इस दौरान उन्होंने कहा, पैसा देकर आगजनी करवाई जा रही है और धरना दिलवाकर लोगों को गुमराह किया जा रहा है, लेकिन झूठ के पांव नहीं होते, जो सत्य है वह सत्य ही रहेगा।  वामपंथ की इस पीढ़ी को जड़ से उखाड़ फेंकने की जरूरत है। आज देश के खिलाफ साजिश हो रही है। कांग्रेस, सपा और अन्य विपक्षी दल देश के अंदर देश के दुश्मनों की भाषा बोल रहे हैं। ऐसे में हम मौन नहीं रह सकते। यह खबर भी पढ़ें:- विपक्ष सीएए पर झूठ बोलकर भ्रम फैला रहा : योगी उन्होंने कहा, मानवता के व्यापक हित में उठाए गए नागरिकता संसोधन कानून के विषय में हम सबको एक-एक व्यक्ति को बताना चाहिए कि यह कानून नागरिकता देने का है, छीनने का नहीं। मुख्यमंत्री योगी ने… Continue reading देश के दुश्मनों की भाषा बोल रही कांग्रेस और सपा: योगी

निर्मला को नागरिकता की चिंता!

देश की वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने नागरिकता कानून का विरोध करने और उसके खिलाफ प्रस्ताव पास करने वाले दो राज्यों- केरल और पंजाब के खिलाफ तीखा हमला किया। उन्होंने कहा कि कोई भी राज्य संशोधित नागरिकता कानून को लागू करने से इनकार नहीं कर सकता है।

सबकी नजर सुप्रीम कोर्ट पर

यह पहली बार हुआ है कि कोई कानून पास करने के बाद सरकार उसके समर्थन में प्रचार कर रही है और विपक्ष उसके विरोध में प्रचार कर रहा है। सरकार को अपने मंत्रियों और पार्टी कार्यकर्ताओं को उतार कर संशोधित नागरिकता कानून का समर्थन कराना पड़ रहा है तो दूसरी ओर आम लोग इसके विरोध में प्रदर्शन कर रहे हैं।

चिदंबरम क्या एनपीआर के पक्ष में?

कांग्रेस में नागरिकता कानून को लेकर बहुत तरह के कंफ्यूजन हैं। कांग्रेस के नेता एक सुर में संशोधित नागरिकता कानून, सीएए के साथ साथ राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर, एनपीआर और राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर, एनआरसी तीनों का विरोध कर रहे हैं।

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