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देखो, बूझो भावी भारत की फोटो!

पता नहीं नरेंद्र मोदी-अमित शाह, भाजपा, संघ ने गुजरे सप्ताह भावी भारत की तस्वीरों को बूझा या नहीं? हां, पांच-दस-बीस साल बाद भारत के जिलों, शहरों में वहीं लगातार हुआ करेगा जैसा हाल में दिल्ली, लखनऊ, मुंबई, कोलकाता, आदि उन दर्जनों जगह दिखा है, जहां नमाजी टोपी- दाढ़ी याकि वह विशेष पहनावे वाली आबादी है, जिसका संकेत देते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक जनसभा में कहा था कि नागरिकता संशोधन कानून का विरोध करने वालों को उनके पहनावे से जानो। तभी संभव है कि गुरुवार की तस्वीरों में खास पहनावे की भीड़ देख मोदी-शाह मन ही मन उछले हों कि वाह, मुसलमान अब सड़कों पर है तो हमारे हिंदू वोट और पक्के। बन रहा है 2024 में जीत का पक्का रोडमैप! बावजूद इसके संभव है कि मोदी-शाह-योगी के दिमाग में भी ख्याल आया हो कि ऐसा यदि भारत में नियमितता से होने लगा, विरोध-प्रदर्शनों ने यदि कश्मीर घाटी वाली दशा को भारत के महानगरों में लाइव बनवा दिया तो आगे क्या होगा? दिल्ली में मंगलवार-बुधवार को जो हुआ और जामिया नगर सीलमपुर, जाफराबाद आदि में पत्थरबाजी, उपद्रव, पुलिस ठुकाई की श्रीनगर जैसी जो तस्वीरें बनीं तो सोचना जरूरी है कि दिल्ली के तुर्कमान गेट के अंदर की पुरानी दिल्ली… Continue reading देखो, बूझो भावी भारत की फोटो!

नागरिकता कानून और संघवाद का संकट

शशांक राय– प्रधानमंत्री बनने के बाद से नरेंद्र मोदी ने सबसे ज्यादा बार सहकारी संघवाद का जिक्र किया होगा। जब वे गुजरात के मुख्यमंत्री होते थे तब भी वे देश के संघीय ढांचे को लेकर सबसे ज्यादा चिंतित रहते थे। तब की मनमोहन सिंह की सरकार जब भी कोई नई नीति लाती थी तो नरेंद्र मोदी उसे भारत के संघीय ढांचे की कसौटी पर कसते थे। मुख्यमंत्री रहते हुए उन्होंने इसी कसौटी पर जीएसटी से लेकर एनसीटीसी तक की व्यवस्था का विरोध किया था। वे उस समय के तमाम विपक्षी मुख्यमंत्रियों को एकजुट करते थे और केंद्र के ऊपर दबाव बनाते थे। पर अफसोस की बात है कि जब से वे खुद प्रधानमंत्री बने हैं तब से यह संघीय ढांचा ही सबसे ज्यादा चुनौतियां झेल रहा है। अभी केंद्र सरकार ने नागरिकता कानून को संशोधित किया है। यह केंद्र के अधिकार का विषय था और संसद में केंद्र सरकार के पास बहुमत का आंकड़ा है। इसलिए उसने संशोधन बिल पास करा कर नागरिकता कानून को बदल दिया। अब एक एक करके राज्यों की सरकारों ने इसका विरोध शुरू कर दिया है। पहले पश्चिम बंगाल सरकार ने कहा कि वह इस कानून को लागू नहीं करेगी। इसके बाद केरल सरकार ने… Continue reading नागरिकता कानून और संघवाद का संकट

यूपी में तनाव, कई जिलों में इंटरनेट बंद

लखनऊ। नागरिकता कानून पर हुए हिंसक प्रदर्शनों के बाद उत्तर प्रदेश के कई जिलों में रविवार को भी तनाव बना रहा। रविवार को उत्तर प्रदेश के कम से कम 21 जिलों में इंटरनेट बंद रहा। इस बीच राज्य के कई हिस्सों में दुकानों को सील करने का काम होता रहा। गौरतलब है कि हिंसक प्रदर्शनों के बाद मुख्यमंत्री ने कहा था कि हिंसा करने वालों की पहचान करके उनके खिलाफ कार्रवाई होगी, उनकी दुकानें सील की जाएंगी और सरकारी संपत्ति के नुकसान की वसूली उनसे की जाएगी। इस बीच उत्तर  प्रदेश में हुई हिंसा में मरने वालों की संख्या 16 हो गई है। शुक्रवार और शनिवार को राज्य के कई हिस्सों में हिंसा हुई थी। शनिवार को कानपुर में हिंसा हुई थी। एक पुलिस चौकी को फूंक दिया गया था और पुलिस पर पथराव भी हुआ थी। पुलिस ने जवाबी कार्रवाई की और प्रदर्शनकारियों पर लाठीचार्ज किया। यूपी के रामपुर में भी पथराव और तोड़फोड़ हुई। भारी तादाद में पुलिस बल की मौजूदगी के बावजूद काफी देर तक विरोध और हंगामा चलता रहा। रविवार को हिंसा नहीं हुई पर तनाव बना रहा। इससे पहले शुक्रवार को उत्तर प्रदेश के करीब 22 जिलों में प्रदर्शन हुआ था, जिसमें ज्यादातर मौतें हुई… Continue reading यूपी में तनाव, कई जिलों में इंटरनेट बंद

मुसलमानों से नाइंसाफी नहीं: गडकरी

नागपुर। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को नई दिल्ली में भाजपा की रैली में नागरिकता कानून को लेकर देश के मुसलमानों को भरोसा दिलाया तो केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने नागपुर में एक रैली में उसी अंदाज में मुसलमानों को भरोसा दिलाया। गडकरी ने शनिवार को हुई रैली में कहा कि नागरिकता कानून भारत के मुसलमानों के खिलाफ नहीं है। उन्होंने कहा कि नया कानून लाकर एनडीए सरकार मुसलमानों के साथ कोई नाइंसाफी नहीं कर रही है। गडकरी ने कांग्रेस पर वोट बैंक की राजनीति के लिए दुष्प्रचार करने का भी आरोप लगाया। नागरिकता कानून के समर्थन में निकाली गई रैली को संबोधित करते हुए गडकरी ने मुसलमानों को भरोसा दिलाया। इस रैली का आयोजन एक स्थानीय संगठन ने किया, जिसे भाजपा और राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ का समर्थन प्राप्त है। गडकरी ने कहा- अफगानिस्तान, पाकिस्तान और बांग्लादेश के धार्मिक अल्पसंख्यकों को इंसाफ देने के लिए सरकार द्वारा लिया गया यह फैसला भारत के मुसलमानों के खिलाफ नहीं है। हम मुसलमानों को देश से बाहर भेजने की बात नहीं कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि सरकार की एकमात्र चिंता देश में रह रहे विदेशी घुसपैठियों की है। मंत्री ने कहा कि मुसलमानों को समझना चाहिए कि कांग्रेस उनके विकास में मदद… Continue reading मुसलमानों से नाइंसाफी नहीं: गडकरी

इस आंदोलन से मोदी-शाह के मजे!

उन्नीस जनवरी को नागरिकता कानून के खिलाफ उत्तर प्रदेश के शहरों, देश के विभिन्न महानगरों में जो विरोध, प्रदर्शन, आंदोलन हुआ वह विपक्ष के लिए आत्मघाती है। बतौर प्रमाण उस शाम योगी आदित्यनाथ का हुंकारा था कि उपद्रवियों को देख लेंगे। उनके चेहरे वीडियो में रिकार्डेड हैं। जो नुकसान हुआ है वह उनसे वसूलेंगे। मतलब मुख्यमंत्री के चेहरे पर घबराहट, परेशानी, कानून-व्यवस्था बिगड़ने का गम नहीं था, पुलिस पर गुस्सा नहीं था, बल्कि उपद्रवियों को मजा चखाने का निश्चय था। अब यह बताने की जरूरत नहीं है कि लखनऊ या संभल जैसे शहरों में उस दिन जो उपद्रव हुआ तो भीड़ का इलाका और चेहरे कौन थे? और ध्यान रहे योगी की तरह टीवी पर ऐसे असम के मुख्यमंत्री सोनोवाल ने कड़ा रूख नहीं दर्शाया जबकि असम में हिंसा भी हुई, लोग भी मरे, भाजपा विधायकों-मंत्रियों के घर पत्थर फेंके गए और कई इलाकों में सब कुछ ठप्प है! सो, नागरिकता कानून पर अखाड़ा सज गया है। एक तरफ सेकुलर, उसका झंडाबरदबार विपक्ष और मुसलमान है तो दूसरी और वे मोदी-शाह-योगी हैं, जिनसे हिंदू घरों में मैसेज गया है कि देखो-देखो विरोध-प्रदर्शन करने वालों के चेहरों को, उनके पहनावे को। ये मुसलमान हैं, जिहादी, अलगाववादी-माओवादी हैं। जाहिर है जो है… Continue reading इस आंदोलन से मोदी-शाह के मजे!

संविधान की लड़ाई का मुगालता

कांग्रेस पार्टी ने अपने मुख्यमंत्रियों से कहा है कि वे नागरिकता कानून के विरोध में सड़क पर उतरें और प्रदर्शन करें। सो, उसके मुख्यमंत्री 28 दिसंबर को संविधान बचाओ मार्च कर रहे हैं। यह सिर्फ कांग्रेस पार्टी नहीं है, जिसको यह मुगालता है कि केंद्र सरकार के हिंदुवादी राष्ट्रवाद के एजेंडे को वह संविधान बचाने के नाम पर काउंटर कर लेगी। कांग्रेस की तरह समाजवादी पार्टी, बहुजन समाज पार्टी, राष्ट्रीय जनता दल, वामपंथी पार्टियां, डीएमके आदि सबको यह भ्रम है कि संविधान बचाने के नाम पर देश की जनता उनके साथ खड़ी होगी और भाजपा के एजेंडे को फेल कर देगी। इससे जाहिर हो रहा है कि देश की सबसे बड़ी विपक्षी पार्टी से लेकर तमाम प्रादेशिक क्षत्रपों की नजदीकी और दूर की नजर दोनों खराब हो गए हैं। वे न तो निकट भविष्य का खतरा बूझ पा रहे हैं और भविष्य में आने वाली चुनौती को देख पा रहे हैं। यहीं कारण है कि ऐसे समय में भी बहुजन समाज पार्टी को लग रहा है कि उसे कांग्रेस के साथ नहीं जाना चाहिए। सपा को लग रहा है कि उसको बसपा के साथ नहीं जाना चाहिए। सीपीएम और सीपीआई को लग रहा है कि उन्हें तृणमूल कांग्रेस के साथ… Continue reading संविधान की लड़ाई का मुगालता

बंगाली उप राष्ट्रीयता के धोखे में ममता

ममता बनर्जी जुझारू और स्ट्रीट फाइटर नेता होने के साथ साथ एक सभ्य और सुसंस्कृत महिला भी हैं। उन्होंने साहित्य, कला, फिल्म, पत्रकारिता से जुड़े लोगों को अपनी पार्टी की टिकट देकर लोकसभा या राज्यसभा में पहुंचाया। वे कविताएं लिखती हैं, पेंटिंग्स करती हैं और गाने भी गाती हैं। वे जब भी दिल्ली आती हैं और अपनी पार्टी के सांसदों के साथ बैठती हैं तो सहज सांस्कृतिक बांग्ला भाव से वे खुद भी गाने गाती हैं और उनके दूसरे सांसद भी गाते हैं। वे रविंद्र संगीत जानती हैं और उनको बांग्ला भाषा की गौरवशाली संस्कृति के बारे में सब कुछ पता है। तमाम हिंसक टकरावों के बावजूद ये सारे गुण पश्चिम बंगाल के वामपंथी नेताओं में भी थे, जिनसे दो दशक से ज्यादा समय तक ममता लड़ती रहीं। पर इस बार उनका पाला ऐसे लोगों से पड़ा है, जिनको इन सब चीजों से कोई लेना देना नहीं है। उनके लिए हर चीज सत्ता पाने का साधन है। ममता बनर्जी को यह बात लोकसभा चुनाव के नतीजों से समझ में आ जानी चाहिए थी। पर हैरानी की बात है कि वे अब भी इस भ्रम में हैं कि बंगाली उप राष्ट्रीयता का उनका दांव भाजपा के हिंदुवादी राष्ट्रवाद की काट है।… Continue reading बंगाली उप राष्ट्रीयता के धोखे में ममता

यूपी के कई जिलों में बवाल, छह मरे

नई दिल्ली। संशोधित नागरिकता कानून और प्रस्तावित एनआरसी के खिलाफ शुक्रवार को उत्तर प्रदेश में हिंसक प्रदर्शनों के दौरान पुलिस के साथ झड़प में कम से कम छह लोगों की मौत हो गयी वहीं राष्ट्रीय राजधानी में भी हजारों लोगों ने रैलियां निकालीं तथा शाम होते होते यहां भी हिंसक प्रदर्शन शुरू हो गये जिसके बाद पुलिस को लाठी चार्ज करना पड़ा। कई राज्यों में सीएए और एनआरसी के खिलाफ प्रदर्शन हो रहे हैं जिसके बाद सरकार ने इस तरह का संकेत दिया है कि वह इस संबंध में सुझावों पर विचार करने को तैयार है। दिल्ली के दरियागंज इलाके में प्रदर्शनकारियों ने एक कार को आग के हवाले कर दिया तथा सुरक्षा बलों पर पथराव किया। पुलिस ने भीड़ को तितर-बितर करने के लिए भीड़ पर पानी की बौछार की और लाठी चार्ज किया।दिल्ली, महाराष्ट्र के कुछ हिस्सों और कर्नाटक-केरल के सीमावर्ती इलाकों से छिटपुट हिंसा की खबरें हैं। उत्तर प्रदेश के कई शहरों, कर्नाटक के कुछ शहरों एवं राष्ट्रीय राजधानी के विभिन्न हिस्सों में मोबाइल इंटरनेट तथा एसएमएस सेवाओं पर रोक लगा दी गयी है। हालांकि दिल्ली में कुछ लोगों ने पुलिस को गुलाब का फूल भेंट कर शांति का संदेश देने का प्रयास किया। संवेदनशील क्षेत्रों में… Continue reading यूपी के कई जिलों में बवाल, छह मरे

सवाल पुलिस के रवैये का

नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ हो रहे विरोध प्रदर्शनों में पुलिस और सुरक्षा बलों की भूमिका पर कई गहरे सवाल उठे हैं। दिल्ली के जामिया मिल्लिया में विशेष रूप से दिल्ली पुलिस के खिलाफ जरूरत से ज्यादा बल इस्तेमाल करने और सख्ती से पेश आने के आरोप लगे। अलीगढ मुस्लिम विश्वविद्यालय में जामिया से भी पहले विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए थे। वहां से भी पुलिस के लाठीचार्ज करने और आंसू गैस का प्रयोग करने की खबरें आई थीं। बताया जा रहा है कि वहां पुलिस कार्रवाई में कम से कम 60 लोग घायल हुए। पूर्वोत्तर के राज्यों में भी प्रदर्शनों को खत्म करने के लिए पुलिस की ओर से अत्यधिक बल-प्रयोग किया गया। बताया जाता है कि वहां पुलिस ने गोलियां भी चलाईं। दिल्ली के ही सफदरजंग अस्पताल के अधिकारियों ने कहा कि जामिया में पुलिस की कार्रवाई में घायल हुए जिन छात्रों को लाया गया, उनमें से दो के शरीर पर गोली लगने के घाव हैं। दिल्ली पुलिस ने इससे पहले गोली चलाने के आरोपों से साफ इंकार कर दिया था। उधर दिल्ली पुलिस ने 10 लोगों को हिरासत में भी लिया, पर उनमें से एक भी छात्र नहीं निकला। इस से सवाल यह उठ रहा है कि… Continue reading सवाल पुलिस के रवैये का

पीड़ित कौन, अल्पसंख्यक कौन?

जैसा असम, त्रिपुरा और बंगाल की घटनाओं ने फिर दिखाया – भारत में हिन्दू समाज बहुसंख्यक की तरह न रहता है, न सोचता है। नागरिकता कानून पर सब से पहला विरोध उन्होंने ही किया। यह कोई अपवाद घटना नहीं है। महाराष्ट्र में शिव सेना ने भी इस का विरोध किया, जो भाजपा से भी प्रखर हिन्दूवादी मानी जाती रही है। यह भी नोट करना चाहिए कि कांग्रेस, सपा, बसपा, कम्युनिस्ट पार्टियाँ भी मूलतः हिन्दुओं से भरी पार्टियाँ हैं। उन में कहने को इक्का-दुक्का मुसलमान हैं। मजे की बात कि इस विडंबना को एक बार स्वयं सुप्रीम कोर्ट ने भी नोट किया। बाल पाटिल तथा अन्य बनाम भारत सरकार (2005) मामले में निर्णय देते हुए न्यायाधीशों ने स्पष्ट लिखा, “ ‘हिन्दू’ शब्द से भारत में रहने वाले विभिन्न प्रकार के समुदायों का बोध होता है। यदि आप हिन्दू कहलाने वाला कोई व्यक्ति ढूँढना चाहें तो वह नहीं मिलेगा। … भारतीय समाज में लोगों का कोई हिस्सा या समूह बहुसंख्यक होने का दावा नहीं कर सकता। हिन्दुओं में सभी अल्पसंख्यक हैं।”  मगर दुर्भाग्य! सुप्रीम कोर्ट ने भी इस अल्पसंख्यक के लिए कुछ न किया। यह कोई बढ़ा-चढ़ा कर कही बात नहीं। बल्कि गंभीर सचाई है हिन्दू न केवल दुनिया में, बल्कि भारत… Continue reading पीड़ित कौन, अल्पसंख्यक कौन?

दिल्ली में कश्मीर जैसे हालात

नई दिल्ली। गुरुवार को राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के हालात कश्मीर जैसे बन गए। कई इलाकों में इंटरनेट बंद करना पड़ा और 20 से ज्यादा मेट्रो स्टेशन करीब पूरे दिन बंद रहे। कई इलाकों में सड़कें बंद रहीं और लोग जाम में फंसे रहे। दिल्ली-गुड़गांव हाईवे पर गुरुवार को दस किलोमीटर लंबा जाम लगा रहा। नागरिकता कानून के विरोध में उतरे लोगों की जगह जगह पर पुलिस के साथ झड़प हुई और लोगों को हिरासत में लिया गया। दिल्ली में लाल किला, जामिया नगर, मंडी हाउस सहित कई इलाकों में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हुआ। इसकी वजह से राजीव चौक, मंडी हाउस सहित 20 से ज्यादा मेट्रो स्टेशन बंद करने पड़े। कई इलाकों में फोन, एसएमएस और इंटरनेट सेवाएं भी बंद करवा दी गईं। मोबाइल सेवा देने वाली कंपनियों ने बताया कि सरकार के निर्देश पर उन्होंने सेवा स्थगित की है। हाल के दिनों में यह संभवतः पहली बार हुआ है कि राष्ट्रीय राजधानी में संचार सेवाओं पर पाबंदी लगानी पड़ी। इससे पहले कश्मीर, असम, त्रिपुरा आदि जगहों पर संचार सेवाओं पर पाबंदी की खबरें थीं। गुरुवार को होने वाले प्रदर्शनों की वजह से दिल्ली में लाल किला क्षेत्र के आसपास धारा 144 लागू कर दी गई थी। निषेधाज्ञा का… Continue reading दिल्ली में कश्मीर जैसे हालात

अगस्त क्रांति मैदान में जुटे हजारों लोग

मुंबई। नागरिकता कानून के विरोध में देश की वित्तीय राजधानी मुंबई में गुरुवार की शाम को हजारों लोग सड़क पर उतरे। करीब 70 संगठनों के लोगों ने विरोध प्रदर्शन में हिस्सा लिया। मुंबई के ऐतिहासिक अगस्त क्रांति मैदान में हुए इस प्रदर्शन में कई फिल्मी सितारों और फिल्मकारों ने भी हिस्सा लिया। उन्होंने पूरे प्रदर्शन को अराजनीतिक बनाए रखा। प्रदर्शन में शामिल लोगों ने शिक्षण संस्थानों में और छात्रों के ऊपर हुई पुलिस कार्रवाई का भी विरोध किया। इस प्रदर्शन को कांग्रेस, एनसीपी, समाजवादी पार्टी आदि ने समर्थन दिया था। नागरिकता कानून के खिलाफ सोशल मीडिया में अभियान चला रहे अभिनेता खुले में विरोध प्रदर्शन में शामिल हुए। फिल्म अभिनेता फरहान अख्तर, अभिनेत्री स्वरा भास्कर, फिल्मकार अनुराग कश्यप, कबीर खान जैसी फिल्मी हस्तियां गुरुवार के प्रदर्शन में शामिल हुईं। इससे पहले फरहान अख्तर ने कहा था कि वे संशोधित नागरिकता कानून के खिलाफ प्रदर्शन करने के लिए सड़क पर उतरेंगे, क्योंकि सिर्फ सोशल मीडिया पर गुस्सा जाहिर करने का वक्त अब निकल चुका है। इसके आयोजकों ने मैदान में लगे सभी राजनीतिक झंडों को हटवा दिया था। प्रदर्शन को देखते हुए अगस्त क्रांति मैदान के आसपास की सभी दुकानों को बंद करवाया गया, ट्रैफिक भी डाइवर्ट कर दिया गया। मुंबई… Continue reading अगस्त क्रांति मैदान में जुटे हजारों लोग

ममता, राहुल, केजरीवाल ने किया विरोध

नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने गुरुवार को लगातार चौथे दिन नागरिकता कानून के विरोध में कोलकाता में रैली निकाली। उन्होंने रैली में कहा- निष्पक्ष संगठन जैसे यूनाइटेड नेशंस या राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग को एक समिति का गठन करवाना चाहिए जो नागरिकता संशोधन कानून मामले पर जनमत संग्रह करवा सके। ताकि यह पता लग सके कि कितने लोग इसके समर्थन में हैं और कितने इसके विरोध में। ममता ने कहा- भाजपा की स्थापना 1980 में हुई थी। आज वो हमसे 1970 के नागरिकता दस्तावेज मांग रही है। कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने सरकार का विरोध करते हुए कहा- सरकार को कोई अधिकार नहीं है कि वह भारत की आवाज और शांतिपूर्ण प्रदर्शन को दबाने के लिए इंटरनेट, टेलीफोन, कॉलेज और मेट्रो को बंद करे। यह भारत की आत्मा की बेइज्जती है। उनकी और कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने भी दिल्ली में इंटरनेट, मेट्रो बंद किए जाने और प्रदर्शन को दबाने का विरोध किया। दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने नागरिकता कानून का विरोध करते कहा- मौजूदा वक्त में देश भर में कानून व्यवस्था की स्थिति ध्वस्त हो चुकी है। केंद्र से अपील करता हूं कि नागरिकता कानून को वापस लें और युवाओं को रोजगार दे।

विपक्ष के लिए परीक्षा की घड़ी

सुशांत कुमार- देश के विपक्ष के लिए परीक्षा की घड़ी है। लोकसभा चुनाव के बाद से हाशिए में पड़ी विपक्षी पार्टियों के पास एकजुट होने का भी मौका है और लोगों को सरकार के एजेंडे के बारे में बताने का भी सही समय है। लोग खुद भी अपने अनुभवों से समझ रहे हैं। तभी महाराष्ट्र और हरियाणा के विधानसभा चुनाव से ठीक पहले जम्मू कश्मीर से अनुच्छेद 370 के ज्यादातर प्रावधानों को हटाने और राज्य को दो केंद्र शासित प्रदेशों में बांटने का केंद्र सरकार का फैसला भाजपा को बहुत ज्यादा चुनावी लाभ नहीं पहुंचा पाया। हालांकि दोनों राज्यों में भाजपा का प्रदर्शन खराब नहीं कहा जा सकता है पर इन चुनावों में ही विपक्षी पार्टियों को भी लोगों ने ताकत दी। लोगों के इस मैसेज को समझना होगा। दोनों राज्यों में भाजपा के विरोध में लड़ी पार्टियों के वोट और उनकी सीटों में इजाफा इस बात का संकेत है कि लोग चाहते हैं कि विपक्ष रहे और मजबूत रहे। ध्यान रहे मजबूत विपक्ष लोकतंत्र की बुनियादी जरूरत है और देश के लोग इस बात को समझते हैं। तभी महाराष्ट्र और हरियाणा में कांग्रेस के हाशिए में होने के बावजूद लोगों ने उसे वोट दिया। कांग्रेस के लोग भी इस बात… Continue reading विपक्ष के लिए परीक्षा की घड़ी

क्यों डर रही है सरकार?

आंदोलन, प्रदर्शन और धरने से लोकतंत्र की खूबसूरत तस्वीरें बनती हैं। कितने अच्छे ढंग से इस बात को डॉक्टर राम मनोहर लोहिया ने कहा है कि ‘सड़कें सूनी हो जाएंगी तो संसद आवारा हो जाएगी’! असल में लोकतंत्र की खूबसूरती इसी में है कि इसकी सड़कें आबाद रहें। केंद्र की मौजूदा सरकार और सरकार का नेतृत्व कर रही भाजपा का इतिहास भले समाजवाद का नहीं रहा है पर जयप्रकाश नारायण के आंदोलन की विरासत का कुछ अंश तो उसके हिस्से में भी आया ही है। फिर भी उसकी सरकार क्यों आंदोलनों, प्रदर्शनों और धरनों से डर रही है? वह भी छात्रों के आंदोलन से? देश भर के छात्र आंदोलित हैं। करीब 15 राज्यों में बड़े शिक्षण संस्थानों में छात्रों ने जामिया मिलिया इस्लामिया यूनिवर्सिटी और अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी में छात्रों पर हुई पुलिस कार्रवाई के विरोध में प्रदर्शन किया। आमतौर पर प्रदर्शनों से दूर रहने वाले आईआईटी, आईआईएम और इंडियन इंस्टीच्यूट ऑफ साइंस, बेंगलुरू के छात्रों ने भी प्रदर्शन में हिस्सा लिया। दिल्ली से लेकर कोलकाता, चेन्नई, मुंबई, बेंगुलरू, कानपुर, हैदराबाद, पटना, बनारस सहित कोई भी बड़ा शहर ऐसा नहीं है, जहां छात्र और नौजवान आंदोलन के लिए सड़क पर नहीं निकले। केंद्र की भाजपा सरकार के साढ़े पांच साल… Continue reading क्यों डर रही है सरकार?

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