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Thursday, May 13, 2021
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पेडमिक

जिंदगीनामा ठहरा, ठिठका!

 ‘पंडित का जिंदगीनामा’ लिखना कोई साढ़े तीन महिने स्थगित रहा। ऐसा होना नहीं चाहिए था। आखिर जब मौत हवा में व्याप्त है तो जिंदगी पर  सोचना अधिक हो जाता है। तब स्मृति, आस्था, जिंदगी के गुजरे वक्त की याद ज्यादा कुनबुनाती है।

लंदनः समझदारी की पाठशाला

जिंदगी को समझने और जीने की अपनी तीसरी लोकेशन लंदन है। मैं जनसत्ता की तरफ से 1985 में पहली बार लंदन गया। वह मेरी पहली विदेश यात्रा थी।

दिल्ली की चौखटः मेरा और भारत का सार!

लोग मेरा अहोभाग्य कहेंगे जो मैं देश की चौखट दिल्ली में रहा। हां, दिल्ली का एक अर्थ दहलीज, चौखट भी है। इस चौखट में छुपा हैभारत का तिलिस्म! मैंने इसलोकेशन के तिलिस्म को भेदने की कोशिश मेंजिंदगी के 45 वर्ष जाया किए।

भोपालगंज

जिंदगी लोकेशन और पात्रों की भीड़ लिए होती है। आपकी भी होगी। अपनी लोकेशन को याद करेंगे तो जिंदगी के शहर, कॉलोनी, मोहल्ले फ्लैशबैक में दौड़ेंगे।

गर्मी में लगी जो बुरी लत!

मेरा लिखना, पढ़ने की बुरी लत से है! मतलब बचपन की बुरी लत से मैं बना हुआ हूं। पिता अखबार मंगाते थे तो मेरे लिए पराग, चंदामामा भी लगवाई। बाद में नंदन। इससे किस्से-कहानियों का कौतुक बना तो सामान्य ज्ञान भी।

छोटी बातों का यादगार वक्त

यदि इंसान के वश में वक्त विशेष को लौटाना, उसमें दोबारा जीना संभव होता तो वह जिंदगी के किस वक्त में दोबारा जीना चाहता? गुजरी जिंदगी के किस हिस्से को फ्लैशबैक के पर्दे पर पहले देखता?

मृतक संख्या छह हजार से ज्यादा

कोरोना वायरस के संक्रमण से मरने वालों की संख्या में लगातार इजाफा हो रहा है

सातवें दिन घटी संक्रमितों की संख्या!

दुनिया भर में कोरोना वायरस के संक्रमितों की संख्या में लगातार छह दिन तक औसतन एक लाख से ज्यादा की बढ़ोतरी के बाद सातवें दिन इसमें थोड़ी कमी आई।

खूंटे, रिश्ते और आजादी

‘मैं’, ‘मैं’ हूं! ‘मैं’ अकेला! खाली हाथ आए थे खाली हाथ जाएंगे। लेकिन जिंदगी तो प्राप्त परिवार,प्राप्त रिश्तेदारी, जिम्मेवारी व सामाजिकता में बंधी होती है।

दो लाख पांच हजार संक्रमित

देश में कोरोना वायरस के मरीजों की संख्या बढ़ कर दो लाख से ज्यादा हो गई है। मंगलवार की देर शाम तक देश में संक्रमितों की कुल संख्या दो लाख पांच हजार से ज्यादा हो गई है।
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