क्या है फ्रांस की खूनी ग्लेशियर की कहानी, आइये जानते है वैज्ञानिकों का जुबानी

फ्रांस : क्या आपने कभी किसी ग्लेशियर को लाल होते देखा है..सभी का जवाब ना ही आएगा और काफी हद तक यह सच भी है लेकिन फ्रांस के एल्प्स की पहाड़ियों पर ग्लेशियर लाल होने लगे है। सफेद ग्लेशियर अचानक से लाल होने लगे है। इसे अलग-अलग कयास लगाए जा रहे है। कोई इसे नरसंहार की निशानी बता रहा है तो कोई इसे जीवों के कत्लेआम से जोड़ रहा है। लेकिन वैज्ञानिकों ने ऐसी किसी भी आशंका से इनकार किया है। वैज्ञानिको द्वारा इसकी जांच की जा रही है। इसे विज्ञान की भाषा में ग्लेशियर का खून कहा जाता है और इसकी सच्चाई का पता लगाने के लिए एक प्रोजेक्ट भी शुरू किया गया है। also read: ड्रैगन की नापाक हरकत! पूर्वी लद्दाख में गरजे चीनी लडाकू विमान, भारत भी चौकस, तैयार किए Rafale वैज्ञानिकों का एल्पएल्गा प्रोजेक्ट लिवसाइंस की रिपोर्ट के अनुसार फ्रांस में अचानक से ग्लेशियर के लाल होने के बाद वैज्ञानिकों द्वारा इसकी जांच की जा रही है। फ्रांस के वैज्ञानिकों ने इसके लिए एल्पएल्गा प्रोजेक्ट की शुरुआत की है। ग्लेशियर में यह खून 3,280 फीट से लेकर 9,842 फीट तक ही जमा हुआ है। इतनी ऊंचाई में जमा खीन की इस प्रोजेक्ट के द्वारा जांच की जा… Continue reading क्या है फ्रांस की खूनी ग्लेशियर की कहानी, आइये जानते है वैज्ञानिकों का जुबानी

सवाल साख का है

जलवायु परिवर्तन के मुद्दे पर अमेरिका की साख इतनी कमजोर है कि वहां से होने वाली घोषणाएं दिलचस्पी से ज्यादा सवाल पैदा करती हैं। इसीलिए राष्ट्रपति जो बाइडेन ने जलवायु परिवर्तन के मुकाबले के लिए जो अमेरिकी योजना पेश की है, हालांकि वो प्रभावशाली है, लेकिन उसकी विश्वसनीयता पर सवाल बने हुए हैँ। ये सवाल वाजिब है कि अगर 2024 के चुनाव में रिपब्लिकन पार्टी जीत गई, तो क्या होगा? इससे पहले दो मौकों पर डेमोक्रेटिक राष्ट्रपतियों की जलवायु वचनबद्धता को उनके बाद निर्वाचित हुए रिपब्लिकन राष्ट्रपति तोड़ चुके हैँ। 1997 में बिल क्लिंटन ने अमेरिका को क्योतो प्रोटोकॉल का हिस्सा बनाया था। लेकिन साल 2001 में जीते जॉर्ज डब्लू बुश ने उससे अपने देश को निकाल लिया। बराक ओबामा ने 2015 में पेरिस संधि को संपन्न कराने में सक्रिय भूमिका निभाई। लेकिन 2017 में रिपब्लिकन राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने इस संधि से अमेरिका को अलग कर लिया। तो मुद्दा यह है कि वही कहानी फिर नहीं दोहराई जाएगी, इसकी क्या गारंटी है? वैसे बाइडेन सचमुच ये योजना लागू कर पाएंगे, यह भी तय नहीं है। घोषित योजना पर अमल के लिए संसदीय मंजूरी की जरूरत होगी। सीनेट के समीकरण को देखते हुए ये हासिल करना भी बाइडेन प्रशासन के… Continue reading सवाल साख का है

दिल्ली-एनसीआर में सरकारी संस्थाओं ने ही तोड़े नियम, सीपीसीबी ने भेजा नोटिस

दिल्ली-एनसीआर में सरकारी संस्थाओं ने ही प्रदूषण से निपटने से जुड़े नियम-कायदों को नजरअंदाज कर दिया। इस पर केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) ने आधे दर्जन सरकारी संस्थाओं को नोटिस भेजकर

केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के नोटिस पर एक्शन ले दिल्ली सरकार : जावडेकर

दिल्ली में प्रदूषण रोकने में लापरवाही होता देख केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) ने दिल्ली सरकार को नोटिस जारी किया है। जिस पर पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन

जलवायु परिवर्तन की गहरी मार

भारत के बड़े शहर जलवायु परिवर्तन की गहरी मार झेल रहे हैं। अति वृष्टि से बाढ़ जैसी हालत बनने या जल की कमी की समस्या लगभग हर शहर में है।

इस बार दिवाली कैसे मनाएं ?

इस बार दिवाली कैसे मनाई जाए, यह बहस सारे देश में चल पड़ी है। पश्चिम एशिया के देशों ने ईद मनाने में सावधानियां बरतीं और गोरों के देश क्रिसमिस पर उहा—पोह में हैं। दिवाली बस एक सप्ताह में ही आ रही है लेकिन उसके पहले ही देश में धुआंधार हो गया है।

प्रदूषण पर पार पाना सरकार की जिम्मेदारी : सुप्रीम कोर्ट

उच्चतम न्यायालय ने दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण के मामले पर सुनवाई दीपावाली की छुट्टियों के बाद करने का आज निर्णय लिया।

भाजपा ने केजरीवाल से पूछा- क्या फोटो खिंचाने से प्रदूषण खत्म होगा?

ठंड के मौसम में दिल्ली-एनसीआर में बढ़ते प्रदूषण के बीच सियासी लड़ाई भी छिड़ चुकी है। भाजपा ने मुख्यमंत्री केजरीवाल को प्रदूषण से निपटने में फेल बताया है।

राजनीतिक दल मिलकर काम करें तो राजधानी में प्रदूषण पर नियंत्रण संभव : केजरीवाल

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने आज कहा कि यदि सभी सरकारें और राजनीतिक दल राजनीति करने की बजाय साथ मिलकर काम करें तो राजधानी में प्रदूषण पर चार वर्ष से कम समय में नियंत्रण पाया जा सकता है।

दिल्ली में हवा की गुणवत्ता ‘बहुत खराब’

सर्दियां शुरू होने से पहले ही राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में हवा की गुणवत्ता खराब होने लगी और प्रदूषण बढ़ने लगा है। दिल्ली में हवा की गुणवत्ता बहुत खराब स्तर पर पहुंच गई है। हर साल सर्दियों में पंजाब और हरियाणा के किसान धान की फसल काटने के बाद बची हुई पराली जलाते हैं, जिससे दिल्ली की हवा की गुणवत्ता बेहद खराब हो जाती है।

दिल्ली के प्रदूषण का 96 फीसदी स्थानीय कारकों से : जावड़ेकर

पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री प्रकाश जावडेकर ने आज कहा कि दिल्ली के प्रदूषण 96 फीसदी स्थानीय कारकों से और मात्र चार फीसदी पराली के कारण है।

जावडेकर ने प्रदूषण के खिलाफ किया जंग का ऐलान

पराली जलने से प्रदूषण की समस्या को लेकर गुरुवार को दिल्ली, हरियाणा, पंजाब, राजस्थान और उत्तर प्रदेश के पर्यावरण मंत्रियों और अधिकारियों के साथ वर्चुअल मीटिंग के बाद केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावडेकर

जब यूरोप में है ये हाल!

आम तौर पर यूरोप को स्वच्छ और मानव विकास के पैमानों पर बहुत ऊपर माना जाता है। लेकिन हाल में यूरोपियन एनवायरनमेंट एजेंसी (ईईए) की आई एक रिपोर्ट ने हैरान करने वाली जानकारी दी है।

राज्य अपना पर्यावरण बजट बढ़ाएं: जावड़ेकर

पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री प्रकाश जावडेकर ने प्रदूषण कम करने के लिए राज्यों से अपना पर्यावरण बजट बढ़ाने तथा आम लागों से सहयोग की आज अपील की। ‘नील गगन

लॉकडाउन से शहरों में 50 फीसदी कम हुआ प्रदूषण

कोरोना वायरस ‘कोविड-19’ महामारी के मद्देनजर किये गये लॉकडाउन से इस महामारी पर काफी हद तक ब्रेक लगाने में कामयाबी के साथ ही पर्यावरण भी काफी स्वच्छ हुआ है।

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