बतौर प्रकाशक श्याम सुंदरजी

जब दिल्ली आया था तब एक बुजुर्ग परिचित ने मुझे सलाह दी थी कि जब कभी किसी से निकटता बढ़ानी हो या दोस्ती करनी हो तो इस बात का ध्यान रखना कि वह व्यक्ति अपने परिवार व दोस्तों के साथ कैसे संबंध रखता है। अगर वह उनका सम्मान करता है व उनके साथ अच्छे संबंध… Continue reading बतौर प्रकाशक श्याम सुंदरजी