कोरोना विमर्श के केंद्र में मजदूर

यह मामूली बात नहीं है कि मजदूर इस समय सार्वजनिक और लोकप्रिय विमर्श के केंद्र में हैं। चाहे जिस वजह से हैं, पर देश में उनकी चर्चा हो रही है। उनके हालात पर तबसरा हो रहा है। अलग अलग कारणों से अलग अलग समूह उनको लेकर चिंता में हैं।

ट्रेनों से 80 हजार मजदूर घर पहुंचे

कोरोना वायरस के संक्रमण की वजह से देश के अलग अलग हिस्सों में फंसे प्रवासी मजदूरों को निकालने के लिए चलाई गई श्रमिक स्पेशल ट्रेनों से अब तक 80 हजार मजदूरों को निकाला जा चुका है।

मजदूरों से हमदर्दी क्यों नहीं?

केंद्र सरकार ने जब प्रवासी मजदूरों को उनके घर पहुंचाने की इजाजत दी और लंबे समय तक भ्रम के बाद आखिरकार ट्रेन से उन्हें ले जाने का एलान किया, तो लाखों लोगों ने राहत की सांस ली।

मजदूरों की यात्रा पर राजनीति

भारत सरकार ने यह फैसला देर से किया लेकिन अच्छा किया कि प्रवासी मजदूरों की घर वापसी के लिए रेलें चला दीं। यदि बसों की तरह रेलें भी गैर-सरकारी लोगों के हाथ में होतीं या राज्य सरकारों के हाथ में होतीं वे उन्हें कब की चला देते।

मजदूरों से ट्रेन किराया वसूलने पर विपक्ष नाराज

देश के अलग अलग हिस्सों में फंसे प्रवासी मजदूरों, छात्रों और दूसरे लोगों के लिए चलाई गई विशेष ट्रेन से यात्रा करने वालों से किराया वसूले जाने को लेकर विपक्षी पार्टियों ने नाराजगी जताई है।

मजदूरों के लिए चली विशेष ट्रेन

कोरोनावायरस महामारी से रोकथाम के चलते देशव्यापी लॉकडाउन के बीच तेलंगाना से झारखंड के लिए एक विशेष ट्रेन में 1200 प्रवासियों को रवाना किया गया।

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