Corona : महामारी और रोजी रोटी की जंग में हारा प्रवासी मजदूर, घर वापसी करने पर मजबूर

नई दिल्ली| देश में बढ़ती कोरोना महामारी (Corona Epidemic) को लेकर मजदूर लोगों की हालत ख़राब होती जा रही है और कोरोना के मामलों में लगातार बढ़ोतरी जारी है लोग बेवस, हताश हो कर अपने घरों के लिए निकल पड़ें है इसी बीच दिल्ली के आनंद विहार बस स्टैंड (Anand Vihar Bus Stand) और यूपी कौशाम्बी बस स्टैंड (UP Kaushambi bus stand) पर रोजी रोटी और कोरोना (Corona) बीमारी की जंग में एक बार फिर प्रवासी मजदूर (Migrant Laborer) हार चुके हैं। जिसके बाद मजदूर (Laborer) पलायन करने पर मजबूर हो गए हैं। पिछले साल की तरह सैकड़ों किलो मीटर पैदल न चलना पड़े इस डर से प्रवासी मजदूर (Migrant Laborer) दिल्ली छोड़ अभी से अपने घर वापसी कर रहे हैं। राजधानी दिल्ली में कोरोना (Corona) के बढ़ते मामलों ने सरकार को भी बेचैन कर दिया है। इसे भी पढ़ें –  राजस्थान : राज्य के सबसे बड़े कोविड अस्पताल  RUHS से आयी डराने वाली तस्वीरें जिसके बाद दिल्ली में आज रात 10 बजे से 26 अप्रैल को सुबह 6 बजे तक लॉकडाउन लगा दिया है। घोषणा होते ही प्रवासी मजदूर (Migrant Laborer) अपने घर भागने लगे हैं। क्या बच्चे और क्या बुजुर्ग सभी सर पर सामान लाधे फिर अपने घर भागने… Continue reading Corona : महामारी और रोजी रोटी की जंग में हारा प्रवासी मजदूर, घर वापसी करने पर मजबूर

Bihar : घर लौटे प्रवासी मजदूरों को सताने लगी रोजगार की चिंता, लेकिन अपने प्रदेश पहुंचने का सुकून भी

पटना | कोरोना (Corona) की दूसरी लहर में देश के करीब-करीब सभी हिस्सों में संक्रमितों की संख्या बढ़ने के बाद बिहार (Bihar) के परदेसी अब वापस अपने प्रदेश लौटने लगे हैं। इन्हें अपने राज्य लौटने के लिए रेलवे ने कई विशेष ट्रेनें भी चलाई हैं। लौटे प्रवासी मजदूरों (migrant workers) को अब काम की चिंता सताने लगी है। कोई किसानी की बात कर रहा है, तो कई लोग मजदूरी की बात कर रहे हैं। बिहार की राजधनी पटना से सटे मोकामा के सैकड़ों लोग अन्य प्रदेशों में रहकर अपना पेट पालते थे। ऐसे कई लोग वापस अपने गांव चले आए हैं। घोसवारी गांव के रहने वाले आनंद कुमार कहते हैं कि इस गांव के दर्जनों लोग बाहर कमाने गए थे और अब लॉकडाउन (Lockdown) की आशंका के बाद वापस घर लौट आए हैं या लौटने की तैयारी कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि पिछले वर्ष जब लॉकडाउन (Lockdown) लगा था, तब भी वापस आए थे। उसके बाद काम नहीं मिला तब फिर वापस चले गए थे। अब एकबार फिर लॉकडाउन (Lockdown) के कारण लोग लौटने को विवश हैं। घोसवारी के पास के गांव के रहने वाले सूबेदार राय मुंबई में रहकर सुरक्षा गार्ड की नौकरी करते थे। पूरे परिवार को… Continue reading Bihar : घर लौटे प्रवासी मजदूरों को सताने लगी रोजगार की चिंता, लेकिन अपने प्रदेश पहुंचने का सुकून भी

कितना कुछ बदल गया

कोरोना वायरस की महामारी शुरू होने के बाद एक साल में कितना कुछ बदल गया है। इसमें कुछ बदलाव अच्छे हैं तो कुछ खराब और कुछ बहुत खराब। इनके अलावा कुछ ऐसे भी बदलाव हैं, जो पहले भी मायने नहीं रखते थे और अब तो खैर उनका कोई मतलब ही नहीं है। जैसे कोरोना वायरस का संक्रमण शुरू हुआ तो ताली-थाली बजवाई गई, घरों के बाहर दीये जलवाए गए, अस्पतालों के ऊपर हेलीकॉप्टर से फूल बरसाए गए और सेना की बैंड से धुन बजवाई गई। कहा गया स्वास्थ्यकर्मियों के प्रति आभार जताने के लिए ऐसा है। तो क्या अब उनके प्रति आभार जताने की जरूरत नहीं है? अगर है तो फिर क्यों नहीं ऐसा कोई इवेंट हो रहा है? अगर उस समय ताली-थाली बजाने से ऐसी कॉस्मिक वेब्स उत्पन्न हो रही थीं, जिनसे कोरोना खत्म हो रहा था तो अब भी वैसा कुछ आयोजन होना चाहिए। लेकिन हुआ इसके उलटा है। जितने लोगों ने ज्यादा जोर-शोर से ताली-थाली बजाई थी वे सब लोग कोरोना संक्रमित मिले हैं। महानायक अमिताभ बच्चन से लेकर क्रिकेट के भगवान सचिन तेंदुलकर तक और परेश रावल से लेकर अक्षय कुमार तक! यह भी पढ़ें: कोरोना: भारत में तब-अब एक साल में एक बड़ा बदलाव यह… Continue reading कितना कुछ बदल गया

Corona के बढ़ते मामलों के कारण फिर से पलायन की तैयारी कर रहे मुंबई के प्रवासी मजदूर

मुंबई। महाराष्ट्र में Corona महामारी एक बार फिर अपने चरम पर है। इस बीच मुंबई और मुंबई महानगर क्षेत्र (एमएमआर) में काम करने वाले हजारों प्रवासियों को एक बार फिर पलायन का डर सताने लगा है, किसी भी समय अपने गृह नगर लौटने की संभावना हो सकती है इसलिए एक बार फिर से मजदूर लोगों ने अपने बैग पैक का मन बना रहे है क्योकि राज्य में Corona के मामले बढ़ते जा रहे है पिछले साल महामारी फैलने के बाद लगाए गए Lockdown के कारण महाराष्ट्र से हजारों प्रवासी मजदूरों को पलायन करना पड़ा था। जब Lockdown खुला और सामान्य स्थिति लौटने लगी तो यह मजदूर भी अपने काम पर लौट आए थे। अब उन्हें काम पर लौटे मुश्किल से छह महीने भी नहीं हुए हैं, मगर उन्हें एक बार फिर पलायन का डर सताने लगा है राज्य में corona virus की दूसरी लहर चल रही है और रोजाना हजारों मामले सामने आ रहे हैं। यही वजह है कि वह पहले से ही अपना बैग पैक करने लगे हैं। इसे भी पढ़ें – Bihar: कोरोना के बढ़ते मामलों साथ दिहाड़ी मजदूरों की बढ़ी परेशानी, जानें मजदूरों की बातें Maharashtra में रात में Curfew लगाया गया है, जबकि दिन में काम से… Continue reading Corona के बढ़ते मामलों के कारण फिर से पलायन की तैयारी कर रहे मुंबई के प्रवासी मजदूर

भारत के हाल का आईना

कोरोना महामारी और लॉकडाउन की आम जिंदगी पर कैसी मार पड़ी है, इसे अगर देखना हो तो गुजरात के शहर सूरत पर गौर करनी चाहिए। वहां के हाल पर हाल में आई रिपोर्टों ने मार्मिक तस्वीर पेश की है।

विशेष ट्रेनों में 97 मजदूर मरे थे

कोरोना वायरस का संक्रमण रोकने के लिए अचानक लागू किए गए लॉकडाउन की अवधि में पलायन करने वाले प्रवासी मजदूरों की मौत का आंकड़ा नहीं रखने के लिए निशाने पर आई सरकार ने अब माना है कि विशेष ट्रेनों में 97 मजदूरों की मौत हुई थी।

मजदूरों का आंकड़ा भी नहीं बताएगें!

क्या सचमुच केंद्र सरकार के पास इस बात का आंकड़ा नहीं है कि लॉकडाउन के दौरान शहरों और महानगरों से पलायन करने वाले करीब एक करोड़ मजदूरों में से पलायन के दौरान कितने मरे और कितने लोगों की नौकरी गई?

सरकार की कमाल की प्राथमिकता

केंद्र सरकार ने संसद में खड़े होकर साफ कह दिया कि लॉकडाउन में पलायन करने वाले मजदूरों की मौत का आंकड़ा उसके पास नहीं है और इसलिए मुआवजा देने का सवाल ही नहीं उठता है।

टेलीविजन चैनलों पर बड़ा सवाल है

केंद्र सरकार के श्रम व नियोजन मंत्रालय ने मॉनसून सत्र के पहले दिन लिखित जवाब में बता दिया कि उसके पास प्रवासी मजदूरों का डाटा नहीं है।

सोनू सूद से सीखों अदानी, अंबानी!

आज जब कोरोना काल के दौरान देश के जाने माने उद्योगपति जैसे अंबानी, अदानी फिल्म स्टार अमिताभ बच्चन, अक्षय कुमार आदि के बारे में पढ़ता हूं तो मुझे बचपन की एक कहावत याद हो आती है।

महामारी के मारे मजदूर

लॉकडाउन में ढील के बावजूद शहरों में कारोबार अभी सामान्य नहीं हुआ है। इसके बावजूद यहां से वापस गए प्रवासी मजदूर यहां लौटने को मजबूर हो रहे हैं। दरअसल, गांवों में सीमित विकल्पों के कारण उन्हें वापस शहर की ओर लौटना पड़ रहा है।

बाहर से लौटे मजदूरों की चिंता

बिहार में अक्टूबर-नवंबर में चुनाव नहीं कराने के पक्ष में भाजपा नेताओं ने प्रवासी मजदूरों का भी तर्क दिया है।

शहर वापसी को तैयार हैं अधिकांश प्रवासी मजदूर: कारोबारी संगठन

कोरोना का कहर अभी थमा नहीं है, लेकिन रोजी-रोटी के खातिर प्रवासी दोबारा औद्योगिक शहरों का रुख करने लगे हैं। कारोबारी बताते हैं कि अधिकांश मजदूर लौटने को तैयार हैं,

मजदूरों की राहत बढ़ाएं

तालाबंदी के दौरान जो करोड़ों मजदूर अपने गांवों में लौट गए थे, उन्हें रोजगार देने के लिए सरकार ने महात्मा गांधी रोजगार योजना (मनरेगा) में जान डाल दी थी।

प्रवासी मजदूरों को सुपरहीरो मानते हैं सोनू सूद

बॉलीवुड अभिनेता सोनू सूद खुद को नहीं बल्कि प्रवासी मजदूरों को सुपर हीरो मानते हैं। कोरोना संकट के बीच सोनू सूद की एक अलग ही छवि सामने आई है।

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