विपक्ष, पीके की राजनीति अपने आप!

गजब बात है जो यूपी में विधायक, छोटी पार्टियां अपने आप अखिलेश यादव की और देखते हुए हैं। ऐसे ही विपक्ष के तमाम नेता चुनाव प्रबंधक प्रशांत किशोर की और देखते हुए हैं! तभी संभव है अखिलेश यादव और प्रशांत किशोर बदले वक्त, बेकाबू घटनाओं के अगले बादशाह हों। कितनी मजेदार बात है जो मायावती की सोच का मतलब जान कर बसपा के विधायक अखिलेश यादव की तरफ भागते हुए हैं। भाजपा बनाम सपा के सीधे मुकाबले का वैसा ही मैदान यूपी में बनता लगता है, जैसे बंगाल में भाजपा बनाम तृणमूल का बना था। जो हो रहा है वह अपने आप हो रहा है। बसपा अपने आप बिखर रही है तो पंजाब में अकाली और बसपा का एलायंस भी वक्त की मजबूरी में ऐसा बना है कि भाजपा छह महीने बाद पंजाब में पूरी तरह अछूत होगी और उसके हिंदू वोट आप या कांग्रेस को ट्रांसफर होते हुए होंगे। यह भी पढ़ें: राजनीति में उफान, लाचार मोदी! वक्त ने, बंगाल ने प्रशांत किशोर को भी अखिल भारतीय राजनीति का मौका दिया है। किसने सोचा होगा कि वे शरद पवार के साथ बैठ उन्हें समझाते हुए होंगे कि आगे, सन् 2024 में क्या कुछ संभव है? वे 2024 में विपक्ष… Continue reading विपक्ष, पीके की राजनीति अपने आप!

तीन साल पहले ही राजनीति शुरू

पिछले महीने नरेंद्र मोदी सरकार ने दूसरे कार्यकाल की दूसरी सालगिरह मनाई। सो, लोकसभा के चुनाव तीन साल के बाद होने हैं। लेकिन अभी से विपक्ष की राजनीति शुरू हो गई। यह कम हैरानी की बात नहीं है कि विपक्ष की राजनीति प्रादेशिक पार्टियां कर रही हैं। सबसे बड़ी विपक्षी पार्टी कांग्रेस अभी केंद्र सरकार और भाजपा से ट्विटर पर लड़ने में लगी है। ऐसे में दो सवाल खड़े होते हैं। पहला तो यह कि तीन साल पहले लोकसभा चुनाव के नजरिए से विपक्ष के राजनीति शुरू करने का क्या मकसद है और दूसरा कि प्रादेशिक पार्टियों के पहल करने का क्या मतलब है? यह भी पढ़ें: राजनीति में उफान, लाचार मोदी! पहले सवाल का जवाब भाजपा की राजनीति से जुड़ा है। असल में इस समय देश भर में भाजपा के अंदर कलह की खबरें हैं। दूसरे, पांच राज्यों के चुनाव नतीजों ने भाजपा और नरेंद्र मोदी व अमित शाह के अब तक सफल होती रही चुनाव रणनीति की फॉल्टलाइन्स को जाहिर कर दिया है। तीसरे, कोरोना वायरस के संकट में नरेंद्र मोदी के गवर्नेंस मॉडल और संकट प्रबंधन की उनकी क्षमता पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। तभी विपक्षी पार्टियों को ऐसा लग रहा है कि इस समय केंद्र… Continue reading तीन साल पहले ही राजनीति शुरू

संघीय मोर्चा बनाएंगी पार्टियां

पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी की जीत के साथ ही संघीय मोर्चा बनाने की अटकलें फिर से तेज हो गई हैं। पिछले लोकसभा चुनाव से पहले इसका गंभीर प्रयास हुआ था। तब तेलंगाना के मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव ने देश भर के प्रादेशिक क्षत्रपों को एकजुट करने का प्रयास किया था। उन्होंने अपने राज्य में चुनाव समय से थोड़ा पहले करा लिया था। इसलिए लोकसभा के चुनाव के समय उनको समय मिल गया था। वे ममता बनर्जी से मिलने कोलकाता भी गए थे । उन्होंने टीडीपी के नेता और आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू से भी बात की थी और डीएमके नेता एमके स्टालिन से भी बात की थी। अब स्टालिन भी मुख्यमंत्री बन गए हैं और ममता बनर्जी भी लोकसभा में खराब प्रदर्शन के झटके से उबर कर फिर से राज्य की मुख्यमंत्री बन गई हैं। इसलिए अब संघीय मोर्चे का प्रयास फिर तेज होगा। कहा जा रहा है कि ममता बनर्जी इसकी पहल करेंगी या उनकी तरफ से उनके चुनाव रणनीतिकार रहे प्रशांत किशोर इसकी पहल करेंगे। ध्यान रहे प्रशांत किशोर का सीधा संबंध जगन मोहन रेड्डी, एमके स्टालिन, अरविंद केजरीवाल और उद्धव ठाकरे से है। इन चारों के लिए उन्होंने चुनाव प्रबंधन का काम किया है।… Continue reading संघीय मोर्चा बनाएंगी पार्टियां

संघीय मोर्चे से क्या भाजपा को फायदा?

भाजपा को हराने के लिए कांग्रेस पार्टी को छोड़ कर अगर संघीय मोर्चा बनता है तो क्या भाजपा को उसका फायदा मिलेगा? यह लाख टके का सवाल है, जिसका सबसे बेहतर जवाब चुनाव रणनीतिकार प्रशांत किशोर दे सकते हैं। उनके पास आंकड़े हैं और इसलिए उनको पता होगा कि किसी तीसरे पक्ष की मौजूदगी से भाजपा को कितना फायदा होता है। असम का नतीजा इसकी मिसाल है, जहां दो क्षेत्रीय पार्टियों- असम जातीय परिषद और रायजोर दल को मिले वोट की वजह से भाजपा चुनाव जीती है। ध्यान रहे असम में भाजपा और कांग्रेस गठबंधन के वोट में एक फीसदी का ही अंतर है। इतने से ही दोनों के बीच 40 से ज्यादा सीटों का अंतर हो गया। ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि दो क्षेत्रीय पार्टियों और अन्य ने मिल कर 13 फीसदी से ज्यादा वोट लिए। कम से कम राज्यों के चुनाव में भाजपा को हमेशा वोट काटने वाली एक पार्टी चाहिए होती है, चुनाव जीतने के लिए। सो, अगर लोकसभा चुनाव में कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूपीए और भाजपा के नेतृत्व वाले एनडीए के मुकाबले एक संघीय मोर्चा चुनाव में उतरता है तो उसका फायदा भाजपा को हो सकता है। यह संघीय मोर्चा भाजपा विरोधी वोट ही लेगा। इसका… Continue reading संघीय मोर्चे से क्या भाजपा को फायदा?

पीके की चुनौती का क्या होगा?

ममता बनर्जी के चुनाव रणनीतिकार प्रशांत किशोर ने चुनाव से पहले एक चुनौती दी थी। उन्होंने कहा था कि भाजपा किसी हाल में दो अंक से आगे नहीं जा पाएगी यानी तीन अंक में नहीं पहुंचेगी। उन्होंने ट्विट करके यह बात कही थी और लोगों से यह भी कहा था कि इस ट्विट को सेव कर लिया जाए, नतीजों के दिन बात करेंगे। बाद में जब भाजपा नेताओं ने उनके एक अनौपचारिक बातचीत का संपादित ऑडियो लीक करके कहा कि वे मान रहे हैं कि तृणमूल कांग्रेस नहीं जीतेगी। तब भी उन्होंने यह बात दोहराई कि भाजपा सौ सीट नहीं जीतेगी। उस समय प्रशांत किशोर ने दो चुनौती दी थी। पहली चुनौती तो यह थी कि अगर भाजपा एक सौ सीट पार कर गई तो वे चुनाव प्रबंधन का काम छोड़ देंगे। इस पर तंज करते हुए भाजपा के प्रभारी कैलाश विजयवर्गीय ने कहा था कि बंगाल चुनाव के बाद देश एक चुनाव प्रबंधक खो देगा। उसी समय प्रशांत किशोर ने दूसरी चुनौती दी थी कि भाजपा के जो नेता दो सौ सीट मिलने का दावा कर रहे हैं, अगर उतनी सीटें नहीं आती हैं तो क्या वे राजनीति छोड़ेंगे? भाजपा को दो सौ क्या सौ सीट भी नहीं मिली।… Continue reading पीके की चुनौती का क्या होगा?

West Bengal Election 2021 : तीसरे चरण में शाह ने घटा दी सीटें!

पश्चिम बंगाल में तीसरे चरण के मतदान में क्या भाजपा को पहले से कम सीटें आ रही हैं? अमित शाह की भविष्यवाणी से तो कम से कम ऐसा ही लग रहा है। चूंकि चुनाव आयोग ने एक्जिट पोल पर रोक लगा रखी है इसलिए बंगाल के चुनाव नतीजों के बारे में समझने के लिए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की भविष्यवाणी ही एकमात्र सहारा है। उन्होंने तीसरे चरण के मतदान के बाद भविष्यवाणी करते हुए बताया कि तीन चरण की 90 सीटों में से भाजपा को 63 से 68 सीट मिल सकती है। सोचें, उनको किसी प्रशांत किशोर जैसे चुनाव रणनीतिकार की क्या जरूरत है, जब वे खुद हर चरण के बाद इतनी बारीकी से सीटों की संख्या बता रहे हैं! बहरहाल, पहले चरण की 30 सीटों के बाद उन्होंने कहा था कि भाजपा 26 सीट जीतेगी। दूसरे चरण में 30 सीटों के मतदान के बाद कहा कि 24 सीट जीतेगी, भाजपा। इस तरह पहले दो चरण की 60 सीटों में से उन्होंने भाजपा के 50 सीट जीतने की भविष्यवाणी की। लेकिन तीसरे चरण के बाद आंकड़ा 63 से 68 का रहा। इसका मतलब है कि अमित शाह की नजर में तीसरे चरण में भाजपा की स्थिति पहले पहले जैसी… Continue reading West Bengal Election 2021 : तीसरे चरण में शाह ने घटा दी सीटें!

पीके के दावे पर विजयवर्गीय का तंज

पश्चिम बंगाल की सत्तारूढ़ पार्टी तृणमूल कांग्रेस के लिए चुनाव प्रबंधन का काम संभाल रहे प्रशांत किशोर ने विधानसभा चुनाव में भाजपा के दो सौ सीट जीतने के लक्ष्य का मजाक उड़ाते हुए दावा किया कि पार्टी को दहाई का आंकड़ा पार करने के लिए भी संघर्ष करना होगा

भाजपा से बचने की तृणमूल की रणनीति

भारतीय जनता पार्टी और तृणमूल कांग्रेस के बीच पश्चिम बंगाल में शह और मात का खेल चल रहा है। भाजपा के नेता लगातार प्रदेश का दौरा कर रहे हैं और राज्य सरकार पर हमले कर रहे हैं।

प्रशांत किशोर का प्रबंधन कितना काम आएगा?

पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस मुश्किल दौर से गुजर रही है। ममता बनर्जी की सरकार और पार्टी दोनों कई तरफ से घिरे हैं।

प्रशांत किशोर क्या कर रहे हैं?

देश के नंबर एक चुनाव रणनीतिकार प्रशांत किशोर के अपने राज्य में चुनाव हो रहा है और उनका कहीं अता-पता नहीं है। बिहार में और बिहार से बाहर भी लोग पूछ रहे हैं कि वे कहां हैं और क्या कर रहे हैं

बंगाल में बिहार को दोहरा पाएंगे पीके?

प्रशांत किशोर के लिए जिस तरह पांच साल पहले बिहार का चुनाव प्रतिष्ठा का सवाल था वैसा ही इस बार पश्चिम बंगाल का चुनाव है।

प्रशांत किशोर उपचुनाव में काम नहीं कर रहे

मध्य प्रदेश में अभी 24 सीटों के उपचुनाव की घोषणा नहीं हुई है पर सोशल मीडिया और कई जगह मुख्यधारा की मीडिया में यह खबर आने लगी कि कांग्रेस ने चुनाव रणनीतिकार प्रशांत किशोर से संपर्क किया है

ममता ने शुरू किया प्रचार

तृणमूल कांग्रेस की अध्यक्ष और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने अगले साल मई में होने वाले विधानसभा चुनाव के लिए प्रचार शुरू कर दिया है। राज्यसभा उम्मीदवारों की घोषणा के तुरंत बाद ममता बनर्जी की पार्टी की ओर से राजधानी कोलकाता सहित दूसरे इलाकों में ममता बनर्जी के बड़े बड़े पोस्टर और होर्डिंग लगा दिए गए।

प्रशांत की जमानत याचिका खारिज

जनता दल (यूनाइटेड) से निष्कासित चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर की मुश्किलें बढ़ सकती हैं, क्योंकि पटना की एक अदालत ने कंटेंट चोरी मामले में प्रशांत किशोर की जमानत अर्जी आज खारिज कर दी।

पीके राज्यसभा गए तो बिहार में क्या होगा?

खबर है कि राजनीतिक रणनीतिकार प्रशांत किशोर को ममता बनर्जी पश्चिम बंगाल से राज्यसभा भेजेंगी। उनके लिए यह कोई बड़ी बात नहीं है। पश्चिम बंगाल में राज्यसभा की पांच सीटें खाली हो रही हैं, जिनमें से चार सीटें तृणमूल कांग्रेस को मिलेंगी। इनमें से एक सीट पर वे प्रशांत किशोर को उम्मीदवार बना सकती हैं। इसका उनको फायदा ही होगा। क्योंकि पश्चिम बंगाल में बिहार और पूर्वांचल की बड़ी आबादी है। इस वोट का बड़ा हिस्सा भाजपा के साथ है। एक लोकप्रिय बिहारी चेहरे को राज्यसभा भेजने से इस वोट में सकारात्मक असर होगा। ध्यान रहे ममता ने प्रशांत किशोर और शत्रुघ्न सिन्हा सहित बिहार के कई नेताओं को अपने राज्य से जेड श्रेणी की सुरक्षा दे रखी है। बहरहाल, अगर प्रशांत किशोर पश्चिम बंगाल से राज्यसभा में जाते हैं तो उनकी बिहार की राजनीति का क्या होगा? उन्होंने पिछले दिनों ‘बात बिहार की’ अभियान लांच किया। तीन महीने के बाद इसे राजनीतिक दल में परिवर्तित करना है। सो, एक तरफ वे बिहार में पार्टी बना कर या आम आदमी पार्टी को लांच करके राजनीति करने की तैयारी कर रहे हैं और दूसरी ओर पश्चिम बंगाल से राज्यसभा में जाने की चर्चा है। अगर वे सचमुच इस महीने होने वाले… Continue reading पीके राज्यसभा गए तो बिहार में क्या होगा?

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