बिहार में 12-15 जून के मध्य दस्तक देगा मानसून, सितंबर तक बरसेगा

पटनाः बंगाल की खाड़ी से उठा चक्रवाती तूफान यास अब ठंडा पड़ चुका है। लेकिन इसने बंगाल, ओडिशा,झारखंड और बिहार में तबाही मचाई थी। यास के प्रभाव से यहां जमकर बारिश हुई थी। लगातार बारिश के कारण जनजीवन पूरी तरह से अस्त-व्यस्त हो गया है। राजधानी पटना समेत कई जिला मुख्यालय जलमग्न हो गये है। मौसम विभाग का कहना है कि उत्तर बिहार में आज (शनिवार) भी कुछ जगहों पर भारी बारिश हो सकती है। ऐसे बिहार के अधिकतर जिलों में बादल छाए रहेंगे। मौसम विभाग ने इस बीच गया और नवादा जिला के लिए विशेष तौर पर अलर्ट जारी किया है क्योंकि यहां मध्यम से भारी बारिश के बीच वज्रपात की भी आशंका है। ऐसे में मौसम विभाग का कहना है कि 12-15 जून के मध्य बिहार में मानसून दस्तक दे सकता है। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार यास अब यूपी के पूर्वांचल क्षेत्र में प्रवेश कर चुका है और प्रदेश के अधिकतर हिस्सों में हवा की रफ्तार और बारिश की तीव्रता कम हो गई है। अगले 24 घंटों में यह और भी कम हो जाएगी। चक्रवात यास कम दबाव के क्षेत्र के रूप में बदलकर राज्य के उत्तर पश्चिम दिशा में आगे बढ़ गया है और अगले 24 घंटों… Continue reading बिहार में 12-15 जून के मध्य दस्तक देगा मानसून, सितंबर तक बरसेगा

रास्ता बन गया है, आगे की फि़क्र कीजिए

मैं आप को वह कहानी याद दिलाना चाहता हूं, जिसमें एक सोते व्यक्ति की तोंद पर से चूहा दौड़ कर निकल गया था और आधी रात उसने ऐसी हाय-तौबा मचाई कि परिवार-तो-परिवार, पूरे मुहल्ले को जगा कर इकट्ठा कर लिया।

कांग्रेस के क्षत्रप मौका देख रहे

पांच राज्यों के चुनाव नतीजों की कई तरह से व्याख्या हुई है। जिस पार्टी या नेता को जो नतीजा अपने अनुकूल लग रहा है वह उसका प्रचार कर रहा है। पश्चिम बंगाल में दो सौ से ज्यादा सीट जीतने का दावा करने वाली भाजपा 77 सीट जीतने को अपनी बड़ी जीत बता रही है तो एक भी सीट नहीं जीत पाने वाली कांग्रेस के नेता राहुल गांधी मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को बड़ी और शानदार जीत की बधाई दे रहे हैं। बंगाल से लेकर असम, तमिलनाडु, केरल और पुड्डुचेरी तक के नतीजों की ऐसी ही व्याख्या सब नेता अपने अपने हिसाब से कर रहे हैं। एक व्याख्या है कि कांग्रेस पार्टी क्षत्रपों की भी है, जिसके जरिए वे अपने लिए मौका आया देख रहे हैं। बंगाल में तृणमूल कांग्रेस, तमिलनाडु में डीएमके, पुड्डुचेरी में एनआर कांग्रेस और यहां तक कि केरल में लेफ्ट पार्टियों की जीत को लेकर भी कांग्रेस के क्षत्रप उत्साहित हैं और उनका कहना है कि अब प्रादेशिक पार्टियों का समय आ गया है। उनका कहना है कि असम के अपवाग तो छोड़ दें तो इस बार न कांग्रेस जीती है और न भाजपा। असम में भी भाजपा को असम गण परिषद और यूपीपीएल की वजह से जीत… Continue reading कांग्रेस के क्षत्रप मौका देख रहे

ना कोई सैलरी ना कोई पेंशन ..आइये जानते है ममता दीदी का सादगी भरा जीवन कैसा है

नारी शक्ति की विजय कहें या सादगी की विजय कहें..दोनों बातें एक ही इंसान ने सच कर दिखाई है। वो है बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी। एक सादा सा लिबास और हवाई चप्पल पहनें ममता दीदी सभी राजनीतिक पार्टियों पर भारी पड़ती है। यह उन्होनें बंगाल में तीसरी बार मुख्यमंत्री बन साबित भी कर दिया। ममता दीदी का कद जितना छोटा है उनका राजनीतिक करियर उतना ही बड़ा है। आज ममता बनर्जी का शपथ ग्रहण समारोह था जो अत्यंत सामान्य तरीके से हुआ। बाकी मंत्रियों को बाद में शपथ दिलाई जाएगी। सादा लिबास में लोगों के बीच अपनी लोकप्रियता स्थापित करने वाली ममता का जीवन भी उतना ही सादगी भरा है। विधायक से लेकर सांसद, कैबिनेट मंत्री और फिर तीन बार बंगाल की मुख्यमंत्री बनने के बाद भी ममता एक आम इंसान की तरह अपना जीवन बिताती हैं। सूती साड़ी और पैरों में हवाई चप्पल अब उनकी पहचान बन चुकी है और यही वजह है कि बंगाल की जनता ने लगातार तीसरी बार उन पर भरोसा जताया।एक तरफ बीजेपी की प्रचंड सेना और दूसरी तरफ अकेली ममता बनर्जी ..फिर भी ममता दीदी ने बंगाल पर जीत हासिल कर ही ली। ममता बनर्जी ने बंगाल में जीत का डंका बजाया है।… Continue reading ना कोई सैलरी ना कोई पेंशन ..आइये जानते है ममता दीदी का सादगी भरा जीवन कैसा है

कोविड में विफलता का भी नुकसान

भारतीय जनता पार्टी के नेता मानें या न मानें पर पश्चिम बंगाल के विधानसभा चुनाव में कोरोना संक्रमण की महामारी एक बड़ा मुद्दा बन गई थी। खास कर आखिरी चार चरण में। इन्हीं चार चरणों में ममता बनर्जी की पार्टी को सबसे ज्यादा फायदा हुआ। असल में चार चरण का मतदान खत्म होने तक पूरे देश में कोरोना का विस्फोट हो गया था और पश्चिम बंगाल में भी कोरोना बम फूट चुका था। जहां-जहां मतदान हो गए थे वहां कोरोना के ढेरों मामले सामने आने लगे थे। भाजपा ने तो अपनी पीआर रणनीति के तहत मीडिया में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह की सभाओं की खूब कवरेज कराई थी। लेकिन वह उलटा पड़ गया। बंगाल में चार चरण का मतदान खत्म होने तक राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली से लेकर कई भाजपा शासित राज्यों जैसे गुजरात, मध्य प्रदेश आदि में कोरोना बेकाबू हो गया था और ऑक्सीजन की कमी से लोगों के मरने की खबरें आने लगी थीं। सो, बंगाल के आखिरी चार चरण के चुनाव में यह मैसेज बना कि भाजपा के नेता कोरोना रोक नहीं पा रहे हैं और उलटे बंगाल में कोरोना फैला रहे हैं। ममता ने इसका और प्रचार किया। उन्होंने कहा कि भाजपा के… Continue reading कोविड में विफलता का भी नुकसान

मोदी की ऑक्सीजन और वक्त के ‘नतीजे’!

यों ‘वक्त’ क्षणभंगुर रूप में है। मेरे, आपके, किसी के भी ऑक्सीजन को वक्त किस क्षण डाउन कर दे, जीवन को लुप्त कर दे यह मौजूदा समय की सच्चाई है। तो कौम-देश का राजा अपने आपको कितना ही अजेय, भाग्यशाली समझे, वह असल में बदकिस्मती का सर्वाधिक मारा है। तभी अपना मानना है कि नरेंद्र मोदी जैसा बद्किस्मत दूसरा कोई प्रधानमंत्री नहीं हुआ। महामारी, महाबरबादी और मौत ही मौत की दास्तां बनाता नेतृत्व किसी मूर्ख को भले भाग्यशाली, वक्त का बलवान समझ में आए तो आए मैं तो नरेंद्र मोदी का वक्त सन् 2016 में तब से खराब समझे बैठा हूं जब उन्होंने अपने हाथों अपने भाग्य, अपने देश दोनों के पांव नोटबंदी की कुल्हाड़ी मारी। वे दुबारा भले चुने गए हों और सत्ता भोगते हुए हैं लेकिन अपने हाथों देश को मरघट बनाने वाली सत्ता का यह भोग है। सोचें लोगों की ऑक्सीजन सोख लेने वाली सत्ता! प्राणवायु ऑक्सीजन को, आर्थिकी की ऑक्सीजन को, लोकतंत्र की ऑक्सीजन को, समाज की सब की ऑक्सीजन सोखने वाला एक राजा! कल्पना करें मोदी के हाथों भारत की, भारत के लोगों की, लोगों के जीवन की कैसी बरबादी लिखी जा रही है। तो वक्त ने नरेंद्र मोदी से गलतियां करवाईं है या नरेंद्र… Continue reading मोदी की ऑक्सीजन और वक्त के ‘नतीजे’!

कांग्रेस का घटता राजनीतिक स्पेस

शायद ही किसी को याद होगा कि 2014 के बाद से पिछले सात साल में राहुल गांधी कितनी बार मीडिया के सामने आकर अपनी हार कबूल कर चुके हैं। यह उनकी भलमनसाहत है और साहस भी है कि पार्टी चुनाव हारती है तब भी वे मीडिया के सामने आते हैं और हार स्वीकार करते हैं। लेकिन सवाल है कि कांग्रेस के नेता और कार्यकर्ता कब तक उन्हें हार कबूल करते देखते रहेंगे? एकाध अपवादों को छोड़ दें तो पिछले सात साल में हर चुनाव के बाद राहुल को हार स्वीकार करनी होती है। कांग्रेस एक के बाद एक चुनाव हारती जा रही है। राज्यों के चुनाव में, जहां उसके पास मजबूत सहयोगी हैं वहां भी कांग्रेस अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पा रही है। यह हैरानी की बात है कि गठबंधन में कांग्रेस के प्रादेशिक सहयोगी को तो लोग वोट दे दे रहे हैं पर कांग्रेस को नहीं दे रहे हैं। झारखंड जैसे राज्य का एकाध अपवाद जरूर है पर बिहार से लेकर असम, केरल और तमिलनाडु तक की राजनीति का सच यह है कि कांग्रेस मजबूत सहयोगी होने के बावजूद अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पा रही है। क्या यह कांग्रेस का या राहुल गांधी के नेतृत्व वाली कांग्रेस का एंडगेम… Continue reading कांग्रेस का घटता राजनीतिक स्पेस

विजयन, सोनोवाल का राज लौटा, डीएमके भी जीती

नई दिल्ली। पांच राज्यों में हुए विधानसभा चुनावों में पश्चिम बंगाल को छोड़ कर बाकी पांच राज्यों में वास्तविक नतीजे लगभग वैसे ही आए, जैसे एक्जिट पोल में बताया गया था। तमिलनाडु में एमके स्टालिन के नेतृत्व में डीएमके ने शानदार जीत दर्ज की तो केरल में कम्युनिस्ट पार्टी का राज लगातार दूसरी बार लौटा। असम में भी भाजपा लगातार दूसरी बार चुनाव जीतने में कामयाब रही। पुड्डुचेरी में कांग्रेस चुनाव हार गई है और रंगास्वामी की पार्टी एनआर कांग्रेस के साथ तालमेल में भाजपा पहली बार सत्ता में आई है। तमिलनाडु में लगातार दो चुनाव हारने के बाद एमके स्टालिन का जादू चला। करुणानिधि और जयललिता की गैरहाजिरी में हुए पहले चुनाव में स्टालिन की कमान में डीएमके गठबंधन ने 154 सीटों के साथ शानदार जीत दर्ज की। स्टालिन की पार्टी डीएमके को अकेले दम पर पूर्ण बहुमत मिला। उनकी पार्टी ने 118 सीटों के बहुमत के आंकड़े को अपने दम पर पार कर लिया। उसने अकेले 119 सीटें मिलीं और उसकी सहयोगी कांग्रेस पार्टी भी 16 सीटें जीतने में कामयाब रही। सत्तारूढ़ अन्ना डीएमके को बड़ा झटका लगा और देर रात तक नतीजों और रूझानों में वह सिर्फ 80 सीटें जीतने में कामयाब होती दिखी। तमिल और हिंदी… Continue reading विजयन, सोनोवाल का राज लौटा, डीएमके भी जीती

कांग्रेस पर पूर्व कांग्रेसियों की नजर!

पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव नतीजे आने से पहले कई पार्टियों में अंदरखाने राजनीतिक हलचल चल रही है। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस की अध्यक्ष ममता बनर्जी ने कोलकाता में अपनी पार्टी के नेताओं की बैठक की है। वैसे तो यह बैठक चुनाव नतीजों को लेकर हुई थी लेकिन बताया जा रहा है कि इसमें नतीजों के बाद की राजनीति पर चर्चा हुई है। तृणमूल कांग्रेस के एक जानकार नेता का कहना है कि पार्टी पूर्ण बहुमत को लेकर पूरी तरह से आश्वस्त है और इसलिए पार्ट की बैठक में नतीजों के बाद राष्ट्रीय राजनीति की संभावना को लेकर ज्यादा बात हुई। दिलचस्प बात यह है कि तृणमूल नेताओं ने नतीजों के बाद की कांग्रेस की राजनीति को लेकर भी चर्चा की। असल में कांग्रेस छोड़ कर गए कई और नेताओं की नजर कांग्रेस पार्टी पर है। चुनाव नतीजों के बाद कांग्रेस के अंदर घमासान छिड़ने की संभावना है। अगर एक्जिट पोल के नतीजे सही होते हैं और कांग्रेस केरल व असम दोनों जगह हारती है तो कांग्रेस की राजनीति में कुछ तो उथल-पुथल होगी। अगर एक्जिट पोल के नतीजे सही साबित होते हैं तो राष्ट्रीय राजनीति में विपक्ष का नेतृत्व नए नेता के हाथ में जा सकता… Continue reading कांग्रेस पर पूर्व कांग्रेसियों की नजर!

पांच राज्यों में वोटों की गिनती आज

नई दिल्ली। पांच राज्यों में विधानसभा चुनावों के लिए हुए मतदान के बाद अब वोटों की गिनती की बारी है। रविवार को पांचों राज्यों में वोटों की गिनती होगी। इसके साथ ही उत्तर प्रदेश में हुए पंचायत चुनावों के लिए वोटों की गिनती रविवार को ही होगी। हाई कोर्ट ने कोरोना के बढ़ते मामलों की वजह से वोटों की गिनती पर रोक लगाने से इनकार कर दिया है। हालांकि अदालत ने कोरोना के लिए जारी दिशा-निर्देशों के साथ साथ मतगणना के दिन के लिए कुछ नए गाइडलाइंस भी जारी किए हैं। बहरहाल, पांच राज्यों में हुए विधानसभा चुनावों में सबसे ज्यादा दिलचस्पी वाला राज्य पश्चिम बंगाल है, जहां लगातार दो बार से चुनाव जीत रही तृणमूल कांग्रेस को भाजपा ने बड़ी चुनौती दी है। चुनाव के बाद हए एक्जिट पोल में दोनों के बीच लगभग बराबरी का मुकाबला दिखाया गया है। हालांकि तृणमूल कांग्रेस का पलड़ा भारी दिख रहा है। राज्य में कांग्रेस, सीपीएम और आईएसएफ के गठबंधन का सूपड़ा साफ होने की संभावना है। बंगाल में आठ चरण में मतदान हुआ था, जिसका आखिरी चरण 29 अप्रैल को पूरा हुआ। बंगाल के अलावा असम, केरल, तमिलनाडु और पुड्डुचेरी के चुनाव नतीजे भी दो मई को आएंगे। तमिलनाडु में डीएमके… Continue reading पांच राज्यों में वोटों की गिनती आज

जो मिलेगा वह भाजपा की जीत होगी!

पांच राज्यों के चुनाव नतीजे भाजपा के लिए बहुत अहम हैं। लेकिन यह समझने की बात है कि असम छोड़ कर भाजपा के पास इन राज्यों में गंवाने के लिए कुछ नहीं है। मीडिया में यह विमर्श जरूर बना है कि पश्चिम बंगाल में भाजपा हारेगी और तृणमूल कांग्रेस जीतेगी। लेकिन यह अधूरी बात है। पश्चिम बंगाल में भाजपा को हारने के लिए कुछ नहीं है और जीतने के लिए सत्ता है। उसको पिछले विधानसभा चुनाव में सिर्फ तीन सीटें मिली थीं। अगर वह एक सौ सीट जीतती है तो यह उसकी बहुत बड़ी जीत होगी। इसे हारना नहीं कह सकते हैं। हां, यह कह सकते हैं कि भाजपा बंगाल नहीं जीत सकी। लेकिन यह ध्यान रखना होगा कि वह हारेगी नहीं, उसे जो भी मिलेगा वह उसकी जीत होगी। इसी तरह पिछले चुनाव में केरल में भाजपा को सिर्फ एक सीट मिली थी और तमिलनाडु में उसका खाता भी नहीं खुला था। पुड्डुचेरी में भी उसके पास तीन विधायक थे, जिनको केंद्र सरकार ने मनोनीत किया था। यानी वहां भी पार्टी कोई भी सीट नहीं जीत सकी थी। अगर इस बार एनआर कांग्रेस और अन्ना डीएमके के साथ मिल कर भाजपा पुड्डुचेरी में सरकार में आती है तो यह… Continue reading जो मिलेगा वह भाजपा की जीत होगी!

नतीजों से फोकस हटवाने की कोशिश

कांग्रेस पार्टी के नेताओं का एक बड़ा वर्ग ऐसा है, जो विधानसभा चुनाव के नतीजों से फोकस हटवाना चाहता है। राहुल गांधी की टीम के नेता ऐसा चाहते हैं कि चुनाव नतीजों पर ज्यादा ध्यान नहीं रहे क्योंकि उनको लग रहा है कि कांग्रेस का प्रदर्शन बहुत अच्छा नहीं होने जा रहा है। केरल और असम में पार्टी को एक्जिट पोल के अनुमानों से धक्का लगा है। पार्टी का अपना आकलन भी है कि सरकार बनाने लायक बहुमत नहीं आएगा। इसी तरह पश्चिम बंगाल पार्टी दहाई के आंकड़े में बड़ी मुश्किल से पहुंच पाएगी। तमिलनाडु में जरूर उसका प्रदर्शन अच्छा होगा पर वह अपनी वजह से नहीं, बल्कि डीएमके की वजह से होगा। तभी कांग्रेस के नेता चाहते हैं कि नतीजों पर ज्याद चर्चा न हो, बल्कि मीडिया का भी सारा विमर्श कोरोना पर रहे। तभी एक्जिट पोल के नतीजों के दिन कांग्रेस के प्रवक्ता पवन खेड़ा ने लाइव डिबेट में इस पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि देश में लोग मर रहे हैं और चैनलों पर एक्जिट पोल का जश्न मनाया जा रहा है। सबको पता है कि नतीजों पर जितनी ज्यादा चर्चा होगी, राहुल के नेतृत्व पर उतने सवाल उठेंगे। आखिर केरल से वे सांसद हैं और केरल… Continue reading नतीजों से फोकस हटवाने की कोशिश

एक्जिट पोल का कोई मतलब नहीं

पश्चिम बंगाल में आखिरी चरण के मतदान के बाद 29 अप्रैल को आए एक्जिट पोल के नतीजों में बंगाल में तृणमूल कांग्रेस और भाजपा के बीच लगभग बराबरी का मुकाबला दिखाया गया है। लेकिन यह यकीन करने लायक नहीं है। हालांकि यह नहीं कहा जा सकता है कि यह गलत ही होगा या सही ही होगा, लेकिन यह तय है कि यह आकलन किसी वैज्ञानिक विधि पर आधारित नहीं है। इसका कारण यह है कि एक्जिट पोल का सैंपल साइज बहुत छोटा है। दूसरे, आखिरी चरण के मतदान का पूरी तरह से खत्म भी नहीं हुआ था कि चैनलों ने अनुमान बताने शुरू कर दिए। जाहिर है यह अनुमान पहले सात चरण की वोटिंग पर आधारित है। तीसरे, किसी चैनल के पास वोट का प्रतिशत नहीं है। ध्यान रहे वोट प्रतिशत से सीटें तय होती हैं, सीटों की संख्या बताने से वोट प्रतिशत का पता नहीं चलता है। एक्जिट पोल के नतीजों के बेमतलब होते जाने का कारण सर्वेक्षण करने वाली एजेंसियां और उन्हें दिखाने वाले मीडिया समूहों का इतिहास है। पिछले कई वर्षों से मीडिया समूह और एजेंसियां इतने पूर्वाग्रह के साथ सर्वेक्षण करती हैं कि लगभग हर बार गलत साबित होती हैं। पिछले साल के अंत में बिहार… Continue reading एक्जिट पोल का कोई मतलब नहीं

कोरोना में चुनाव आयोग भी जिम्मेदार!

वैसे तो पिछले कुछ वर्षों में भारत की लगभग सभी संवैधानिक संस्थाओं और लोकतंत्र के कथित स्तंभों ने अपनी साख गंवाई है लेकिन जैसी अक्षमता और लापरवाही चुनाव आयोग के कामकाज में देखने को मिली है वह अभूतपूर्व है। इस समय अगर पूरा देश कोरोना वायरस की दूसरी लहर के भंवर में फंसा है तो कहीं न कहीं चुनाव आयोग भी इसके लिए जिम्मेदार है। अगर पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव हिंसक और जहरीला हुआ है तो उसके लिए भी आयोग अपनी जिम्मेदारी से नहीं बच सकता है। अगर केंद्रीय सुरक्षा बलों की साख पर बट्टा लगा है और उनकी गोलीबारी में चार बेकसूर लोग मारे गए हैं तो उसके लिए भी चुनाव आयोग की जिम्मेदारी बनती है। अगर राज्य का प्रशासन पार्टी लाइन पर बंटा हुआ दिख रहा है या संघीय ढांचे पर चोट हुई है या चुनाव में धनबल का इस्तेमाल ऐतिहासिक ऊंचाई तक पहुंचा है तो चुनाव आयोग इसकी जिम्मेदारी से भी नहीं बच सकता है। अगर आज चुनाव आयोग पर यह आरोप लग रहा है कि वह भाजपा और केंद्र सरकार के कहे अनुसार काम कर रही है और विपक्षी पार्टियों के साथ भेदभाव कर रही है तो इसके लिए भी खुद आयोग जिम्मेदार है। पश्चिम… Continue reading कोरोना में चुनाव आयोग भी जिम्मेदार!

राजनीतिः सेवा नहीं, मेवा है

देश के सिर्फ पांच राज्यों में आजकल चुनाव हो रहे हैं। ये पांच राज्य न तो सबसे बड़े हैं और न ही सबसे अधिक संपन्न लेकिन इनमें इतना भयंकर भ्रष्टाचार चल रहा है, जितना कि हमारे अखिल भारतीय चुनावों में भी नहीं देखा जाता। अभी तक लगभग 1000 करोड़ रु. की चीजें पकड़ी गई हैं, जो मतदाताओं को बांटी जानी थीं। इनमें नकदी के अलावा शराब, गांजा-अफीम, कपड़े, बर्तन आदि कई चीजें हैं। गरीब मतदाताओं को फिसलाने के लिए जो भी ठीक लगता है, उम्मीदवार लोग वही बांटने लगते हैं। ये लालच तब ब्रह्मास्त्र की तरह काम देता है, जब विचारधारा, सिद्धांत, जातिवाद और संप्रदायवाद आदि के सारे पैंतरे नाकाम हो जाते हैं। कौनसी पार्टी है, जो यह दावा कर सके कि वह इन पैंतरों का इस्तेमाल नहीं करती ? बल्कि, कभी-कभी उल्टा होता है। कई उम्मीदवार तो अपने मतदाताओं को रिश्वत नहीं देना चाहते हैं लेकिन उनकी पार्टियां उनके लिए इतना धन जुटा देती हैं कि वे रिश्वत का खेल आसानी से खेल सकें। पार्टियों के चुनाव खर्च पर कोई सीमा नहीं है। हमारा चुनाव आयोग अपनी प्रशंसा में चुनावी भ्रष्टाचार के आंकड़े तो प्रचारित कर देता है लेकिन यह नहीं बताता कि कौनसी पार्टी के कौनसे उम्मीदवार के… Continue reading राजनीतिः सेवा नहीं, मेवा है

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