‘हाथी’ की सवारी छोड़कर ‘साइकिल’ चलाने वाले हैं बसपा के ये 6 विधायक, आज सपा में होंगे शामिल

मायावती की पार्टी बसपा के 6 विधायक ‘हाथी’ की सवारी छोड़कर ‘साइकिल’ चलाने के लिए मुलायम सिंह की समाजवादी पार्टी में शामिल होने जा रहे हैं।

UP में बसपा सुप्रिमो Mayawati ने भाजपा-कांग्रेस के खिलाफ खोला मोर्चा, कहा- कांग्रेस पर कैसे करे विश्वास, भाजपा के बुरे दिन शुरू

चुनावों से पहले जनता से किए जा रहे लोक लुभावन वादों पर यूपी की पूर्व सीएम और बसपा सुप्रिमो मायावती ने जमकर हमला बोला है।

Uttar Pradesh : लखीमपुर हिंसा मामले में बोलीं मायावती- सर्वोच्च न्यायालय में सुनवाई होने से न्याय की उम्मीद…

बहुजन समाज पार्टी की सुप्रीमो मायावती ने बृहस्पतिवार को कहा कि लखीमपुर खीरी मामले की सुनवाई उच्चतम न्यायालय में शुरू होने से लोगों में राहत व समुचित न्याय की उम्मीद..

न्यू इंडियाः कहां, कैसा, क्या?

जी हां, ‘न्यू इंडिया’ का सत्य, अप्रिय तथ्य इस एक लाइन में सिमटा हुआ है कि ‘उनमें ध्रुवीकरण, सख्त और मारक है’।

अल्पसंख्यक समुदाय का विकास नहीं, सिर्फ वोट बैंक के लिए SP और BSP ने किया इस्तेमाल-ओवैसी

AIMIMI प्रमुख असदुदीन ओवैसी (Asaduddin Owaisi) ने यूपी में दबदबा रखने वाली सपा और बसपा (SP And BSP) पर निशाना साधा है. समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी की आलोचना…

बसपा में सतीश मिश्रा नंबर दो?

मायावती के भाई आनंद कुमार और अब भतीजे आकाश आनंद का पहले जैसा असर नहीं। सतीश मिश्रा नए ‘पावर सेंटर’।

यूपी की जातिय प्रयोगशाला में नए प्रयोग?

केन्द्र सरकार द्वारा बनाये नये कृषि कानूनों और बढ़ती मंहगाई के बीच उत्तर प्रदेश में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव में पिछड़ी और अति पिछड़ी जातियों की अहम भूमिका होने वाली है।

पूर्वाचंल नहीं पश्चिम यूपी होगा निर्णायक

उत्तर प्रदेश में माना जाता है कि पूर्वांचल में जीत या हार किसी भी पार्टी का मुस्तकबिल तय करती है।

माया का अंसारी पर फैसला, दूसरे दलों की समस्या!

उत्तर प्रदेश में चुनावी रणभेरी बज चुकी हैं। रण में ताल ठोकने के लिए योद्धाओं के चयन पर राजनीतिक दलों में मंथन शुरू हो गया है।

UP Elecetion : ओवैसी के पोस्टरों में अयोध्या को फैजाबाद लिखने पर बवाल, संतों ने कहा नहीं होने देंगे रैली

उत्तर प्रदेश में होने वाले विधानसभा चुनाव के लिए अयोध्या केंद्र बिंदू बनता दिख रहा है. AIMIM प्रमुख असदद्दूदीन ओवैसी एक बार फिर से चर्चाओं में आ गये हैं. आगामी 7 सितंबर को ओवैसी अयोध्या में एक रैली आय

राजनीति के लिए “राम” की शरण!

उत्तरप्रदेश के विधानसभा चुनाव होने में आठ माह का समय शेष है। ऐसे में राजनीतिक दलों द्वारा अपनी तैयारियों को आरंभ करना स्वाभाविक है। इसी कड़ी में घोर जातिवादी राजनीतिक दल और दलित-उत्थान के नाम पर उपजी बहुजन समाज पार्टी (बसपा) डेढ़ दशक बाद फिर से उत्तरप्रदेश को ब्राह्मण समाज को साधने हेतु दांव चला है।

कांग्रेस को यूपी में कोई नहीं पूछ रहा

congress Ajay Lallu in UP : कांग्रेस पार्टी के उत्तर प्रदेश के अध्यक्ष अजय कुमार लल्लू ने कहा है कि कांग्रेस अकेले चुनाव लड़ने में सक्षम है। उन्होंने और भी कई बातें कही हैं, लेकिन मुख्य बात यह है कि कांग्रेस अकेले चुनाव लड़ेगी। असल में अकेले चुनाव लड़ना कांग्रेस की मजबूरी हुई है। प्रदेश की कोई भी पार्टी कांग्रेस को नहीं पूछ रही है। मंत्रीजी का रुतबा.. रेलमंत्री ने आते ही इंजीनियर से कहा कि आप मुझे सर नहीं बॉस बोलोगे बड़ी पार्टियों जैसे सपा, बसपा आदि की बात छोड़ें, कोई छोटी पार्टी भी कांग्रेस के साथ तालमेल को इच्छुक नहीं है। लगभग यही स्थिति बहुजन समाज पार्टी की भी है लेकिन उसकी प्रमुख मायावती चाहें तो कोई छोटी-मोटी पार्टी उनके साथ तालमेल कर सकती है। जैसे असदुद्दीन ओवैसी पहले बसपा से तालमेल के लिए प्रयास कर रहे थे। ऐसी छोटी पार्टियों से बसपा का तालमेल हो सकता है पर कांग्रेस के साथ तालमेल के लिए कोई छोटी पार्टी भी तैयार नहीं है। यह भी पढ़ें: सपा का छोटी पार्टियों का कुनबा ध्यान रहे उत्तर प्रदेश में एक दर्जन से ज्यादा ऐसी छोटी पार्टियां हैं, जिनका किसी न किसी खास इलाके में अच्छा असर है और मतदाताओं के बीच… Continue reading कांग्रेस को यूपी में कोई नहीं पूछ रहा

यूपी में किसकी पालकी ढोएंगे ओवैसी?

benefits from asaduddin owaisiin UP : ओवैसी के तेवरों से लगता है कि बीजेपी के बजाय सपा-बसपा ही उनके निशाने पर होंगी। दरअसल उनका मक़सद इन दोनों पार्टियों को मिलने वाले मुस्लिम वोटों को झटकना है। ….वे उन्हीं तौर-तरीक़ों के साथ उतर रहे हैं जैसा कि उनसे पहले डॉक्टर जलील फ़रीदी, डॉक्टर मसूद और डॉक्टर अयूब उतरे थे। लिहाज़ा ओवैसी का भी वही हश्र होना तय है जो इन लोगों का हुआ है। 2012 के चुनाव में पीस पार्टी का कुर्मीयों के नेतृत्व में पिछड़ों की बात करने वाले अपना दल के साथ गठबंधन था। लेखक: यूसुफ़ अंसारी benefits from asaduddin owaisiin UP  : ऑल इंडिया मजलिस ए इत्तेहादुल मुस्लिमीन के अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी ने रविवार को उत्तर प्रदेश में 100 सीटों पर विधानसभा चुनाव लड़ने का ऐलान कर दिया है। ओवैसी का उत्तर प्रदेश में ओमप्रकाश राजभर की भारतीय सुहेलदेव समाज पार्टी के साथ गठबंधन है। इसके अलावा किसी और पार्टी से गठबंधन की बात नहीं हुई है। कुछ दिनों से चर्चा थी कि ओवैसी की पार्टी का बीएसपी के साथ गठबंधन हो सकता है लेकिन मायावती ने अकेले ही चुनाव लड़ने का ऐलान करके इन अटकलों को विराम दे दिया है। असदुद्दीन ओवैसी के इस ऐलान के बाद यह… Continue reading यूपी में किसकी पालकी ढोएंगे ओवैसी?

औवेसी से यूपी में फायदा किसको?

भाजपा एआईएमआईएम के मुस्लिम कयादत के सवाल को हवा दे रही है। मुसलमानों में जितनी तेज अपने नेतृत्व की मांग होगी भाजपा को हिन्दु ध्रुविकरण करने में उतनी आसानी होगी।.. औवेसी के चुनाव लड़ने की घोषणा से उसे थोड़ी राहत मिली है। औवेसी की मुस्लिम कयादत के जवाब में हिन्दु नेतृत्व का माहौल अपने आप बनना शुरु हो गया है। और हिन्दु नेतृत्व की बात होते ही यूपी में मुख्यमंत्री योगी का प्रोफाइल अपने आप बढ़ जाता है। up assembly election owaisi : यह बहुत मजेदार है, दिलचस्प है कि पहली बार उत्तर प्रदेश में मुसलमान वोटरों पर इतना फोकस हो रहा है। मुसलमान उत्तर प्रदेश में या देश में कहीं भी इतना नहीं है कि किसी भी पार्टी को जीता या हरा सके। यह काम हमेशा से देश के बहुसंख्यक हिन्दु ही करते रहे हैं। हर चुनाव में जातीय समीकरण ही सबसे ज्यादा चर्चा का विषय होते हैं। ब्राह्मण क्या करेंगे? दलित कहां जाएंगे? ओबीसी में गैर यादवों का क्या रुख रहेगा ? जैसे सवालों से ही राजनीतिक विश्लेषणकर्ता जूझते रहते हैं। मगर इस बार औवेसी की यूपी में सौ सीट लड़ने की घोषणा ने चुनाव का नक्शा ही बदल दिया। यह भी पढ़ें: परिवार है तो कांग्रेस की… Continue reading औवेसी से यूपी में फायदा किसको?

विपक्ष, पीके की राजनीति अपने आप!

गजब बात है जो यूपी में विधायक, छोटी पार्टियां अपने आप अखिलेश यादव की और देखते हुए हैं। ऐसे ही विपक्ष के तमाम नेता चुनाव प्रबंधक प्रशांत किशोर की और देखते हुए हैं! तभी संभव है अखिलेश यादव और प्रशांत किशोर बदले वक्त, बेकाबू घटनाओं के अगले बादशाह हों। कितनी मजेदार बात है जो मायावती की सोच का मतलब जान कर बसपा के विधायक अखिलेश यादव की तरफ भागते हुए हैं। भाजपा बनाम सपा के सीधे मुकाबले का वैसा ही मैदान यूपी में बनता लगता है, जैसे बंगाल में भाजपा बनाम तृणमूल का बना था। जो हो रहा है वह अपने आप हो रहा है। बसपा अपने आप बिखर रही है तो पंजाब में अकाली और बसपा का एलायंस भी वक्त की मजबूरी में ऐसा बना है कि भाजपा छह महीने बाद पंजाब में पूरी तरह अछूत होगी और उसके हिंदू वोट आप या कांग्रेस को ट्रांसफर होते हुए होंगे। यह भी पढ़ें: राजनीति में उफान, लाचार मोदी! वक्त ने, बंगाल ने प्रशांत किशोर को भी अखिल भारतीय राजनीति का मौका दिया है। किसने सोचा होगा कि वे शरद पवार के साथ बैठ उन्हें समझाते हुए होंगे कि आगे, सन् 2024 में क्या कुछ संभव है? वे 2024 में विपक्ष… Continue reading विपक्ष, पीके की राजनीति अपने आप!

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