यूपी की जातिय प्रयोगशाला में नए प्रयोग?

केन्द्र सरकार द्वारा बनाये नये कृषि कानूनों और बढ़ती मंहगाई के बीच उत्तर प्रदेश में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव में पिछड़ी और अति पिछड़ी जातियों की अहम भूमिका होने वाली है।

पूर्वाचंल नहीं पश्चिम यूपी होगा निर्णायक

उत्तर प्रदेश में माना जाता है कि पूर्वांचल में जीत या हार किसी भी पार्टी का मुस्तकबिल तय करती है।

माया का अंसारी पर फैसला, दूसरे दलों की समस्या!

उत्तर प्रदेश में चुनावी रणभेरी बज चुकी हैं। रण में ताल ठोकने के लिए योद्धाओं के चयन पर राजनीतिक दलों में मंथन शुरू हो गया है।

UP Elecetion : ओवैसी के पोस्टरों में अयोध्या को फैजाबाद लिखने पर बवाल, संतों ने कहा नहीं होने देंगे रैली

उत्तर प्रदेश में होने वाले विधानसभा चुनाव के लिए अयोध्या केंद्र बिंदू बनता दिख रहा है. AIMIM प्रमुख असदद्दूदीन ओवैसी एक बार फिर से चर्चाओं में आ गये हैं. आगामी 7 सितंबर को ओवैसी अयोध्या में एक रैली आय

राजनीति के लिए “राम” की शरण!

उत्तरप्रदेश के विधानसभा चुनाव होने में आठ माह का समय शेष है। ऐसे में राजनीतिक दलों द्वारा अपनी तैयारियों को आरंभ करना स्वाभाविक है। इसी कड़ी में घोर जातिवादी राजनीतिक दल और दलित-उत्थान के नाम पर उपजी बहुजन समाज पार्टी (बसपा) डेढ़ दशक बाद फिर से उत्तरप्रदेश को ब्राह्मण समाज को साधने हेतु दांव चला है।

कांग्रेस को यूपी में कोई नहीं पूछ रहा

congress Ajay Lallu in UP : कांग्रेस पार्टी के उत्तर प्रदेश के अध्यक्ष अजय कुमार लल्लू ने कहा है कि कांग्रेस अकेले चुनाव लड़ने में सक्षम है। उन्होंने और भी कई बातें कही हैं, लेकिन मुख्य बात यह है कि कांग्रेस अकेले चुनाव लड़ेगी। असल में अकेले चुनाव लड़ना कांग्रेस की मजबूरी हुई है। प्रदेश की कोई भी पार्टी कांग्रेस को नहीं पूछ रही है। मंत्रीजी का रुतबा.. रेलमंत्री ने आते ही इंजीनियर से कहा कि आप मुझे सर नहीं बॉस बोलोगे बड़ी पार्टियों जैसे सपा, बसपा आदि की बात छोड़ें, कोई छोटी पार्टी भी कांग्रेस के साथ तालमेल को इच्छुक नहीं है। लगभग यही स्थिति बहुजन समाज पार्टी की भी है लेकिन उसकी प्रमुख मायावती चाहें तो कोई छोटी-मोटी पार्टी उनके साथ तालमेल कर सकती है। जैसे असदुद्दीन ओवैसी पहले बसपा से तालमेल के लिए प्रयास कर रहे थे। ऐसी छोटी पार्टियों से बसपा का तालमेल हो सकता है पर कांग्रेस के साथ तालमेल के लिए कोई छोटी पार्टी भी तैयार नहीं है। यह भी पढ़ें: सपा का छोटी पार्टियों का कुनबा ध्यान रहे उत्तर प्रदेश में एक दर्जन से ज्यादा ऐसी छोटी पार्टियां हैं, जिनका किसी न किसी खास इलाके में अच्छा असर है और मतदाताओं के बीच… Continue reading कांग्रेस को यूपी में कोई नहीं पूछ रहा

यूपी में किसकी पालकी ढोएंगे ओवैसी?

benefits from asaduddin owaisiin UP : ओवैसी के तेवरों से लगता है कि बीजेपी के बजाय सपा-बसपा ही उनके निशाने पर होंगी। दरअसल उनका मक़सद इन दोनों पार्टियों को मिलने वाले मुस्लिम वोटों को झटकना है। ….वे उन्हीं तौर-तरीक़ों के साथ उतर रहे हैं जैसा कि उनसे पहले डॉक्टर जलील फ़रीदी, डॉक्टर मसूद और डॉक्टर अयूब उतरे थे। लिहाज़ा ओवैसी का भी वही हश्र होना तय है जो इन लोगों का हुआ है। 2012 के चुनाव में पीस पार्टी का कुर्मीयों के नेतृत्व में पिछड़ों की बात करने वाले अपना दल के साथ गठबंधन था। लेखक: यूसुफ़ अंसारी benefits from asaduddin owaisiin UP  : ऑल इंडिया मजलिस ए इत्तेहादुल मुस्लिमीन के अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी ने रविवार को उत्तर प्रदेश में 100 सीटों पर विधानसभा चुनाव लड़ने का ऐलान कर दिया है। ओवैसी का उत्तर प्रदेश में ओमप्रकाश राजभर की भारतीय सुहेलदेव समाज पार्टी के साथ गठबंधन है। इसके अलावा किसी और पार्टी से गठबंधन की बात नहीं हुई है। कुछ दिनों से चर्चा थी कि ओवैसी की पार्टी का बीएसपी के साथ गठबंधन हो सकता है लेकिन मायावती ने अकेले ही चुनाव लड़ने का ऐलान करके इन अटकलों को विराम दे दिया है। असदुद्दीन ओवैसी के इस ऐलान के बाद यह… Continue reading यूपी में किसकी पालकी ढोएंगे ओवैसी?

औवेसी से यूपी में फायदा किसको?

भाजपा एआईएमआईएम के मुस्लिम कयादत के सवाल को हवा दे रही है। मुसलमानों में जितनी तेज अपने नेतृत्व की मांग होगी भाजपा को हिन्दु ध्रुविकरण करने में उतनी आसानी होगी।.. औवेसी के चुनाव लड़ने की घोषणा से उसे थोड़ी राहत मिली है। औवेसी की मुस्लिम कयादत के जवाब में हिन्दु नेतृत्व का माहौल अपने आप बनना शुरु हो गया है। और हिन्दु नेतृत्व की बात होते ही यूपी में मुख्यमंत्री योगी का प्रोफाइल अपने आप बढ़ जाता है। up assembly election owaisi : यह बहुत मजेदार है, दिलचस्प है कि पहली बार उत्तर प्रदेश में मुसलमान वोटरों पर इतना फोकस हो रहा है। मुसलमान उत्तर प्रदेश में या देश में कहीं भी इतना नहीं है कि किसी भी पार्टी को जीता या हरा सके। यह काम हमेशा से देश के बहुसंख्यक हिन्दु ही करते रहे हैं। हर चुनाव में जातीय समीकरण ही सबसे ज्यादा चर्चा का विषय होते हैं। ब्राह्मण क्या करेंगे? दलित कहां जाएंगे? ओबीसी में गैर यादवों का क्या रुख रहेगा ? जैसे सवालों से ही राजनीतिक विश्लेषणकर्ता जूझते रहते हैं। मगर इस बार औवेसी की यूपी में सौ सीट लड़ने की घोषणा ने चुनाव का नक्शा ही बदल दिया। यह भी पढ़ें: परिवार है तो कांग्रेस की… Continue reading औवेसी से यूपी में फायदा किसको?

विपक्ष, पीके की राजनीति अपने आप!

गजब बात है जो यूपी में विधायक, छोटी पार्टियां अपने आप अखिलेश यादव की और देखते हुए हैं। ऐसे ही विपक्ष के तमाम नेता चुनाव प्रबंधक प्रशांत किशोर की और देखते हुए हैं! तभी संभव है अखिलेश यादव और प्रशांत किशोर बदले वक्त, बेकाबू घटनाओं के अगले बादशाह हों। कितनी मजेदार बात है जो मायावती की सोच का मतलब जान कर बसपा के विधायक अखिलेश यादव की तरफ भागते हुए हैं। भाजपा बनाम सपा के सीधे मुकाबले का वैसा ही मैदान यूपी में बनता लगता है, जैसे बंगाल में भाजपा बनाम तृणमूल का बना था। जो हो रहा है वह अपने आप हो रहा है। बसपा अपने आप बिखर रही है तो पंजाब में अकाली और बसपा का एलायंस भी वक्त की मजबूरी में ऐसा बना है कि भाजपा छह महीने बाद पंजाब में पूरी तरह अछूत होगी और उसके हिंदू वोट आप या कांग्रेस को ट्रांसफर होते हुए होंगे। यह भी पढ़ें: राजनीति में उफान, लाचार मोदी! वक्त ने, बंगाल ने प्रशांत किशोर को भी अखिल भारतीय राजनीति का मौका दिया है। किसने सोचा होगा कि वे शरद पवार के साथ बैठ उन्हें समझाते हुए होंगे कि आगे, सन् 2024 में क्या कुछ संभव है? वे 2024 में विपक्ष… Continue reading विपक्ष, पीके की राजनीति अपने आप!

तीन साल पहले ही राजनीति शुरू

पिछले महीने नरेंद्र मोदी सरकार ने दूसरे कार्यकाल की दूसरी सालगिरह मनाई। सो, लोकसभा के चुनाव तीन साल के बाद होने हैं। लेकिन अभी से विपक्ष की राजनीति शुरू हो गई। यह कम हैरानी की बात नहीं है कि विपक्ष की राजनीति प्रादेशिक पार्टियां कर रही हैं। सबसे बड़ी विपक्षी पार्टी कांग्रेस अभी केंद्र सरकार और भाजपा से ट्विटर पर लड़ने में लगी है। ऐसे में दो सवाल खड़े होते हैं। पहला तो यह कि तीन साल पहले लोकसभा चुनाव के नजरिए से विपक्ष के राजनीति शुरू करने का क्या मकसद है और दूसरा कि प्रादेशिक पार्टियों के पहल करने का क्या मतलब है? यह भी पढ़ें: राजनीति में उफान, लाचार मोदी! पहले सवाल का जवाब भाजपा की राजनीति से जुड़ा है। असल में इस समय देश भर में भाजपा के अंदर कलह की खबरें हैं। दूसरे, पांच राज्यों के चुनाव नतीजों ने भाजपा और नरेंद्र मोदी व अमित शाह के अब तक सफल होती रही चुनाव रणनीति की फॉल्टलाइन्स को जाहिर कर दिया है। तीसरे, कोरोना वायरस के संकट में नरेंद्र मोदी के गवर्नेंस मॉडल और संकट प्रबंधन की उनकी क्षमता पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। तभी विपक्षी पार्टियों को ऐसा लग रहा है कि इस समय केंद्र… Continue reading तीन साल पहले ही राजनीति शुरू

मायावती ने सपा पर निशाना साधा

लखनऊ। उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री और बसपा प्रमुख मायावती ने अपनी पुरानी सहयोगी समाजवादी पार्टी पर तीखा हमला किया है। उन्होंने सपा के चाल और चरित्र का मुद्दा उठाया है और आरोप लगाया है कि उसका रवैया हमेशा दलित विरोधी रहा है। बहुजन समाज पार्टी के छह विधायकों के सपा प्रमुख अखिलेश यादव से मिलने के बाद नाराज मायावती ने बुधवार को सपा को निशाना बनाया। गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश में अगले साल के शुरू में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं। मंगलवार को बसपा के छह विधायक अखिलेश यादव से मिलने गए थे। उसके एक दिन बाद बुधवार को मायावती ने सोशल मीडिया के जरिए सपा पर हमला बोला। उन्होंने कहा कि सपा का चाल, चरित्र और चेहरा हमेशा से ही दलित विरोधी रहा है। उन्होंने कहा- बसपा के निलंबित विधायकों से मिलने का मीडिया में प्रचार करना एक नाटक है। यह उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनाव के बाद जिला पंचायत अध्यक्ष और ब्लॉक प्रमुख के चुनाव के लिए की गई पैंतरेबाजी से ज्यादा कुछ भी नहीं है। सपा को निशाना बनाते हुए मायावती ने कहा- घृणित जोड़-तोड़, द्वेष और जातिवाद आदि की संकीर्ण राजनीति में माहिर समाजवादी पार्टी मीडिया के सहारे यह प्रचारित करना चाहती है कि… Continue reading मायावती ने सपा पर निशाना साधा

बसपा के बागी विधायक बनाएंगे पार्टी!

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। अगले कुछ दिनों में मायावती की बहुजन समाज पार्टी टूट सकती है। पार्टी के 11 विधायक बागी होकर एक साथ आ गए हैं और उन्होंने कहा है कि एक और विधायक के साथ आते ही वे अपनी अलग पार्टी बना लेंगे। बागी विधायकों की ओर से कहा गया है कि पिछले दिनों पार्टी से निष्कासित विधायक लालजी वर्मा नई पार्टी का नेतृत्व करेंगे। गौरतलब है कि मायावती ने पिछले दिनों दो विधायकों- लालजी वर्मा और राम अचल राजभर को पार्टी से निकाल दिया था। बहरहाल, बसपा के छह बागी विधायकों ने मंगलवार को समाजवादी पार्टी के नेता अखिलेश यादव से मुलाकात की। बसपा के बागी विधायक असलम राइनी सहित छह विधायक मंगलवार को समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव से मिलने लखनऊ में उनके आवास पर पहुंचे। उसके बाद से कयास लगाया जाने लगा कि ये सभी सपा में शामिल हो सकते हैं। इनके अलावा बसपा के ही तीन और विधायक अखिलेश के संपर्क में है। इनमें बसपा से निलंबित सभी विधायक शामिल हैं। बागी विधायक असलम राइनी ने कहा कि बसपा से निकल कर बागी विधायक अपनी नई पार्टी बनाएंगे। उन्होंने… Continue reading बसपा के बागी विधायक बनाएंगे पार्टी!

25 साल बाद अकाली और बसपा साथ

चंडीगढ़। पंजाब विधानसभा चुनाव से पहले बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम हुआ है। भाजपा से अलग हुई अकाली दल ने बहुजन समाज पार्टी के साथ चुनावी तालमेल कर लिया है। दोनों पार्टियां 25 साल बाद साथ आईं हैं और मिल कर चुनाव लड़ने का फैसला किया है। चुनाव जीतने पर दलित उप मुख्यमंत्री बनाने का ऐलान कर चुके अकाली दल को बसपा के साथ आने से बड़ा फायदा होने की उम्मीद है। शिरोमणी अकाली दल और बहुजन समाज पार्टी ने शनिवार को सीटों के बंटवारे का भी ऐलान कर दिया। बसपा नेता सतीश चंद्र मिश्र की मौजूदगा में प्रेस कांफ्रेंस में गठबंधन की घोषणा करते हुए अकाली दल के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल ने इस गठबंधन को पंजाब की राजनीति में नया सवेरा बताया। उन्होंने कहा- आज ऐतिहासिक दिन है, पंजाब की राजनीति की बड़ी घटना है। बादल ने कहा कि अकाली दल और बसपा साथ मिल कर 2022 विधानसभा चुनाव और अन्य चुनाव लड़ेंगे। बादल ने सीटों की घोषणा करते हुए कहा कि राज्य की 117 विधानसभा सीटों में से बसपा 20 पर चुनाव लड़ेगी और बाकी 97 सीटों पर अकाली दल के उम्मीदवार लड़ेंगे। बसपा माझा में पांच, दोआबा में आठ और मालवा इलाके में सात सीटों पर लड़ेगी। उसके… Continue reading 25 साल बाद अकाली और बसपा साथ

यूपी में कांग्रेस क्या करेगी?

पिछले लोकसभा चुनाव के समय कांग्रेस ने जब प्रियंका गांधी वाड्रा को सक्रिय राजनीति में उतारा और उत्तर प्रदेश का प्रभारी बनाया तो लगा था कि भले लोकसभा में कांग्रेस अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पाई है लेकिन अगले विधानसभा चुनाव में वह जरूर बड़ी ताकत बनेगी। यह भी कहा जा रहा था कि प्रियंका को पार्टी मुख्यमंत्री के दावेदार के तौर पर पेश कर सकती है। लेकिन उसके बाद कांग्रेस की स्थिति ठीक होने की बजाय लगातार बिगड़ती गई। राहुल और प्रियंका दोनों के प्रयासों के बावजूद कांग्रेस अपने पैरों पर खड़ा नहीं हो पाई। पिछले दिनों हुए पंचायत चुनावों के बाद यह साफ हो गया है कि कांग्रेस हाशिए की ही पार्टी है। तभी अब सवाल है कि कांग्रेस अगले चुनाव में क्या करेगी? वह अकेले चुनाव लड़ेगी या कोई गठबंधन बनाने का प्रयास करेगी। ध्यान रहे उत्तर प्रदेश में गठबंधन के कई प्रयोग हो चुके हैं। पिछले लोकसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी, बहुजन समाज पार्टी और राष्ट्रीय लोकदल ने मिल कर चुनाव लड़ा था और उससे पहले 2017 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस और समाजवादी पार्टी मिल कर लड़े थे। ये दोनों प्रयोग असफल रहे। हालांकि कुछ अति आशावादी नेता मानते हैं कि अगर 2017 वाले गठबंधन में… Continue reading यूपी में कांग्रेस क्या करेगी?

यूपी चुनाव को लेकर बड़ा सस्पेंस

उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव को लेकर बहुत सस्पेंस बन गया है। यह सस्पेंस कई तरह का है। भाजपा क्या मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को बदलने का प्रयास कर रही है? क्या पार्टी उनके चेहरे पर चुनाव नहीं लड़ेगी? क्या जम्मू कश्मीर के उप राज्यपाल मनोज सिन्हा की प्रदेश राजनीति में वापसी होगी? क्या नया बनने वाला उप मुख्यमंत्री ही अगली बार का दावेदार होगा? क्या केशव प्रसाद मौर्य उप मुख्यमंत्री पद छोड़ कर प्रदेश अध्यक्ष की कमान संभालेंगे? भाजपा को लेकर लगाई जा रही इन अटकलों के अलावा यह भी सस्पेंस है कि विपक्षी पार्टियां क्या करेंगी? क्या सपा और रालोद साथ लड़ेंगे और क्या बसपा और कांग्रेस में तालमेल हो सकता है? समूचे विपक्ष के साथ आने का सस्पेंस भी खत्म नहीं हुआ है। इन सबके बीच सबसे बड़ा सस्पेंस यह है कि क्या राज्य में समय पर चुनाव होंगे? दिल्ली और लखनऊ के राजनीतिक हलके में इस बात की चर्चा है कि भाजपा आलकमान किसी हाल में मौजूदा मुख्यमंत्री के चेहरे पर चुनाव नहीं लड़ना चाहता है। उनको जमीन से ऐसी फीडबैक मिली है कि पार्टी अगर योगी आदित्यनाथ के चेहरे पर चुनाव लड़ती है तो भारी एंटी इन्कंबैंसी का  सामना करना पड़ सकता है। तभी कहा जा… Continue reading यूपी चुनाव को लेकर बड़ा सस्पेंस

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