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अपने समाज में नशाखोरी का ज़हर कैसे?

उभरते हुए फिल्म अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की मौत (आत्महत्या या हत्या!) की गुत्थी सुलझी भी नहीं थी कि मामले के तार ड्रग्स-कारोबार से जुड़ गए। फिल्म अभिनेत्री रिया चक्रवर्ती और उसके भाई शौविक सहित अन्य लोगों की नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) द्वारा विभिन्न धाराओं में गिरफ्तारी- इसका प्रमाण है।

सरकारी नौकरी करना चाहते थे राजेश रौशन

बालीवुड के मशहूर संगीतकार राजेश रौशन अपने संगीत से करीब पांच दशक से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर रहे है लेकिन वह संगीतकार नहीं बनकर सरकारी नौकरी करना चाहते थे।

कनिका का रिपोर्ट तीसरी बार पॉजिटिव

बालीवुड सिंगर कनिका कपूर की रिपोर्ट तीसरी बार पॉजिटिव आई है। उनमें संक्रमण का प्रकोप बना हुआ है। उनकी हालत स्थिर बनी हुई है। शेष दो की रिपोर्ट निगेटिव आई है। लखनऊ में पीजीआई में भर्ती गायिका कनिका कपूर की जांच रिपोर्ट एक बार फिर से पॉजिटिव आई है।

महिलाओं का शोषण सार्वभौमिक सच्चाई

रोमन पोलांस्की के बारे में छपी एक छोटी-सी खबर ने 37 साल पहले अमेरिका में घटी संभवतः उस ‘मीटू’ घटना की याद दिला दी जिसमें एक किशोर युवती ने एक जाने-माने फिल्म निर्देशक पर अपना यौन शोषण करने का आरोप लगाया था। वह जानी-मानी हस्ती इस मामले में सजा मिलने के बाद अमेरिका से फरार हो गया था व आज तक फरार ही चल रहा है। हुआ यह कि जब फ्रांस में एक निदेशक को अपनी फिल्म एक ऑफिसर एंड ए स्पाई के लिए फिल्म अवार्ड मिला तो यह घटना घटी। यह अवार्ड अमेरिकी अकादमी अवार्ड जैसा ही है। इस फिल्म को विभिन्न श्रेणियों में 12 अवार्ड मिले। इसके लिए अमेरिका समारोह में पोलांस्की खुद मौजूद नहीं थे क्योंकि उन्होंने कहा था कि अगर वे इस अवसर पर मौजूद रहे तो लोग उन्हें पीट-पीटकर मार देंगे। अनेक महिलाओं ने उन्हें अवार्ड दिए जाने के विरोध में उस समारोह का बहिष्कार कर दिया। पेरिस में हुए इस समारोह में देश के फिल्म उद्योग के शोषण की शिकार हुई अडीले डेनिल नामक फ्रांस की युवा व बहुचर्चित अभिनेत्री ने कहा कि पोलांस्की को यह अवार्ड दिए जाने से लगता है कि आयोजकों के लिए महिलाओं के साथ बलात्कार करना कोई बुरी चीज… Continue reading महिलाओं का शोषण सार्वभौमिक सच्चाई

क्या हो गया बॉलीवुड को?

बात गोल्डन ग्लोब अवार्ड समारोह की है। हास्य अभिनेता और निर्माता-निर्देशक रिकी गार्वेस ने फिल्मी जमात से कहा- “असल दुनिया के बारे में आपको कुछ नहीं पता है।” फिर बोले- आप में से ज्यादातर लोगों ने ग्रेटा थनबर्ग के मुकाबले कम ही समय स्कूल में बिताया होगा। आवेश में उन्होंने आगे कहा – “क्या आपको पुरस्कार मिलना चाहिए? यदि हां, तो अपने एजेंट और ईश्वर को धन्यवाद दो और फूटो यहां से! फिल्मी समुदाय के लोगों के अराजनैतिक रहने के इस उपहास की कलाकारों ने अनदेखी की मगर उस रात हर पुरस्कार विजेता ने मंच पर जाकर जलवायु संकट, लोकतंत्र और राजनेताओं की आलोचना करते हुए अपनी बात रखी।अभिनेता, अभिनेत्रियां, निर्देशक, पटकथा लेखक, संगीतकार, सजृनशील लोग अपनी-अपनी जुबां से राजनीति पर बोले। संदेह नहीं पश्चिम की फिल्मी दुनिया और उसके मंच,  ऑस्कर से लेकर बाफ्टा और ग्रैमी तक पर राजनीति पर बेबाकी से धड़ल्ले से चर्चा होती है। फिल्मकार अपने मंच का उपयोग अपना रोष व्यक्त करने में, अपनी एकजुटता दिखाने  और समाज की दशा पर चिंता, भय, राय व्यक्त करता मिलेगा। फिल्मकार समाज को प्रभावित कर रहे मुद्दों पर बेबाकी से बोलते हुए दिखते हंै। मगर अपने बॉलीवुड में? ऐसा कुछ भी नहीं! हमारे कलाकार, अभिनेता-अभिनेत्रियां, सेलेब्रिटी सब के… Continue reading क्या हो गया बॉलीवुड को?

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