भाजपा की इस जीत के क्या मायने?

बिहार में अधिकांश एग्जिट/ओपीनियन पोल के अनुमानों को धता बताकर राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) ने बिहार में पूर्ण बहुमत प्राप्त कर लिया।

मंडल के साए में आखिरी चुनाव?

तो क्या यह माना जाए कि बिहार में इस बार हुआ विधानसभा का चुनाव मंडल राजनीति के साए में हुआ आखिरी चुनाव है और पोस्ट मंडल राजनीति शुरू हो गई है

बिहारी नेताओं को एक जैसी शिकायत

बिहार के चाहे कांग्रेस के नेता हों या भाजपा के सबको एक जैसी शिकायत है। बिहार विधानसभा चुनाव में शुरू से लेकर नतीजे आने और सरकार बनाने के लिए चल रही कवायद के बीच दोनों पार्टियों के नेता एक जैसी शिकायत करते दिख रहे हैं।

बिहार में आसान नहीं होगा सरकार बनाना!

बिहार में एनडीए चुनाव जीत तो गया है और सरकार भी बन जाएगी पर इस बार यह काम आसान नहीं होगा। इसके कई कारण हैं। पहला कारण यह है कि भाजपा और जदयू दोनों को मिला कर 117 सीटें हैं

राजद हार मानने को तैयार नहीं

बिहार विधानसभा चुनाव के नतीजे आने के तीसरे दिन गुरुवार को राष्ट्रीय जनता दल के नेता तेजस्वी यादव मीडिया से मुखातिब हुए और दावा किया कि उनकी पार्टी चुनाव हारी नहीं है, बल्कि उसे हरवाया गया है।

बिहार की छोटी पार्टियों का भविष्य दांव पर

बिहार में दर्जनों की संख्या में छोटी पार्टियां हैं। बिहार प्रदेश के तमाम छोटे-बड़े नेताओं ने अपनी पार्टी बना ली है और कोई न कोई बड़ा दल उनको अपने साथ जोड़ कर उनको इतने वोट या सीटें दिलवा देता है कि उनकी राजनीति चलती रहती है।

कांग्रेस की उपयोगिता कम नहीं होगी!

बिहार विधानसभा चुनाव में सबसे ज्यादा नुकसान जनता दल यू को हुआ है पर कांग्रेस भी कम घाटे में नहीं रही है। उसकी परफारमेंस इस बार बहुत खराब हुई है।

अमेरिका पर सोचे या बिहार पर?

वक्त ने बुद्धी की कुल्फी जमा दी है। दुनिया का हर विवेकशील, समझदार, अक्लमंद, बुद्धीमान यह सोचते हुए मानसिक रोडब्लॉक, फुलस्टॉप पर होगा कि और सोचने को क्या

अच्छा हुआ जो सीएम नहीं बने तेजस्वी!

सबसे कम उम्र का मुख्यमंत्री बनने का रिकार्ड बनाने की उम्मीद लगाए तेजस्वी यादव को यह बात सुनने में अच्छी नहीं लगेगी, कि कोई उनसे कहे कि अच्छा हुआ जो वे सीएम नहीं बने।

बिहार: फिर से नीतीशे कुमार!

बिहार के चुनाव नतीजों में हेरफेर के राष्ट्रीय जनता दल के आरोपों में कितनी सच्चाई है, यह तो अब शायद ही कभी पता चलेगा। लेकिन अनेक सीटों पर संदिग्ध परिस्थितियों में चुनाव परिणाम घोषित किए गए, यह बात बहुत साफ है।

भाजपा के लिए आसान नहीं होगा बिहार

बिहार चुनाव में पहली बार ऐसा हुआ है कि कंट्रोल भारतीय जनता पार्टी के हाथ में रहा। चुनाव का एजेंडा भले तेजस्वी यादव ने सेट किया पर भाजपा ने उस पर ज्यादा ध्यान नहीं दिया।

बिहार में सामाजिक सुधार का एजेंडा चला!

इस बात की कई तरह की व्याख्या होगी कि आखिर बिहार में कौन सा मुद्दा चला, क्या हिट रहा और क्या फ्लॉप हुआ। सोशल मीडिया में मजाक चल रहा है कि बिहार के लोगों ने नौकरी से ऊपर कोरोना की वैक्सीन को चुना।

वैसा हुआ होता तो ऐसा नहीं होता!

बिहार चुनाव के नतीजों का विश्लेषण अब इस मुकाम पर पहुंच गया है कि अगर वैसा हुआ होता या वैसा नहीं हुआ होता तो अभी ऐसा नहीं होता।

नीतीश पर मोदी की मुहर

बिहार में मुख्यमंत्री पद को लेकर भाजपा नेताओं की ओर से उठाई जा रही बातों को दरकिनार करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नीतीश कुमार के नाम पर मुहर लगा दी है।

बिहार चुनाव तक यही रवैया रहेगा

भड़काऊ भाषणों पर अमित शाह के बयान और जेपी नड्डा द्वारा गिरिराज सिंह को फटकार लगाने की दो घटनाओं का एक कारण बिहार चुनाव भी लग रहा है। भाजपा को दिल्ली में हुए नुकसान का तो अंदाजा हो ही गया है, अब उसे बिहार में नीतीश कुमार के साथ चुनाव लड़ना है। वहां किसी हाल में नीतीश कुमार भड़काऊ भाषणों का एजेंडा नहीं चलने देंगे। ध्यान रहे उन्होंने संशोधित नागरिकता कानून का समर्थन किया है पर राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर का खुल कर विरोध कर चुके हैं। उन्होंने राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर में भी माता-पिता के बारे में सूचना मांगने के प्रावधान का विरोध किया है। तभी ऐसा लग रहा है कि बिहार चुनाव तक भाजपा के तेवर ऐसे ही रहेंगे। तभी देवबंद पर दिए बयान के बहाने बिहार के सबसे फायरब्रांड नेता गिरिराज सिंह को पहले ही चुप करा दिया गया है। असल में भाजपा के शीर्ष नेता एक के बाद एक राज्यों की सत्ता गंवाने से चिंता में हैं। पिछले डेढ़ साल में पांच बड़े राज्यों- मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, राजस्थान, महाराष्ट्र और झारखंड की सत्ता उसके हाथ से निकली है। दिल्ली में उसकी करारी हार हुई है और हरियाणा में भी झटका लगा है। अब उसके नेता नहीं चाहते कि… Continue reading बिहार चुनाव तक यही रवैया रहेगा

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