नौकरियां हों तो मिलें!

यह रोजगार के अवसर बढ़ने का संकेत नहीं है। इन आंकड़ों से सिर्फ यह पता चलता है कि कोरोना महामारी की दूसरी लहर के कारण जिंदगी के अस्त-व्यस्त होने के बाद जून में बहुत से कामकाज फिर से शुरू हुए। जबकि असल में भारत में बेरोजगारी की दर अब भी एक गंभीर चिंता का विषय बनी हुई है। unemployment in the country : दिल्ली सरकार ने पिछले साल कोरोना महामारी की पहली लहर आने के बाद नौकरी ढूंढन वालों और रोजगार देने वालों को जोड़ने के लिए रोजगार बाजार पोर्टल शुरू किया था। रोजगार ढूंढ रहे व्यक्ति इस पोर्टल पर अपना पंजीकरण कर सकते हैं। वहीं रोजगार देने वाले उद्यमी भी अपने यहां मौजूद अवसरों की जानकारी इस पोर्टल पर डालते हैं। पिछले महीने इस पोर्टल पर 34 हजार से ज्यादा लोगों ने नौकरी की तलाश में अपने प्रोफाइल पोस्ट किए। दूसरी तरफ नियोक्ताओं की तरफ लगभग साढ़े नौ हजार नौकरियों के अवसर की सूचना दी गई। मोदी की नई कैबिनेट के 90 प्रतिशत मंत्री करोड़पति हैं, 42% पर आपराधिक मामले : ADR की रिपोर्ट तो जो खाई है, वह स्पष्ट है। अगर इन आंकड़ों को एक सैंपल मानें, तो इसका मतलब है कि जितने लोग रोजगार ढूंढ रहे हैं,… Continue reading नौकरियां हों तो मिलें!

ये विषमता कहां ले जाएगी?

inequality india rich poor : केंद्रीय बैंक बड़ी संख्या में नोट छाप कर ब्याज दरों को कम करना चाहते थे, ताकि लोन देकर उद्योगों को बढ़ावा दे सकें और अर्थव्यवस्था को नुकसान से निकाला जा सके। लेकिन ऐसा होने के बजाए यह पैसा शेयर बाजार में लगाया गया। नतीजतन वही लोग अमीर होते रहे, जो पहले से अमीर थे। कोरोना महामारी की मार पूरी दुनिया पर पड़ी। भारत सबसे बुरी तरह प्रभावित देशों में एक रहा। ये एक आपदा है, यह मानने में कोई हिचक नहीं हो सकती। लेकिन किसी परिवार में अगर किसी आपदा से सभी बराबर पीड़ित हों, तो सब यह मान लेते हैं कि बुरा वक्त आया, तो उसका नतीजा सबको भुगतना पड़ा। लेकिन अगर बुरा वक्त किसी एक तबके लिए चमकने का मौका मिल जाए, तो समाज में सवाल उठेंगे। न सिर्फ सवाल उठेंगे, बल्कि देर सबेर असंतोष भी पैदा होगा। आज हम उसी कगार पर हैँ। एक ताजा रिपोर्ट ने बताया है कि (डॉलर को मुद्रा का आधार मानें तो) 2020 में हर भारतीय परिवार की घरेलू संपत्ति 6.1 प्रतिशत कम हो गई है। रुपये को आधार माने तो यह कमी करीब 3.7 प्रतिशत है। संपत्ति में आई इस कमी की मुख्य वजह यहां जमीन… Continue reading ये विषमता कहां ले जाएगी?

महंगाई की मारः नाक में दम

यह संतोष का विषय है कि देश में आई कोरोना की दूसरी लहर अब लौटती हुई दिखाई पड़ रही है। लोग आशावान हो रहे हैं कि हताहतों की संख्या कम होती जा रही है और अपने बंद काम-धंधों को लोग फिर शुरु कर रहे हैं। लेकिन मंहगाई की मार ने आम जनता की नाक में दम कर दिया है। ताजा सरकारी आंकड़ों के मुताबिक थोक मंहगाई दर 12.94 प्रतिशत हो गई है। सरल भाषा में कहें तो यों कहेगे कि जो चीज़ एक हजार रु. में मिलती थी, वह अब 1294 रु. में मिलेगी। ऐसा नहीं है कि हर चीज के दाम इतने बढ़े हैं। किसी के कम और किसी के ज्यादा बढ़ते हैं। जैसे सब्जियों के दाम यदि 10 प्रतिशत बढ़ते है तो पेट्रोल के दाम 35 प्रतिशत बढ़ गए। याने कुल मिलाकर सभी चीजों के औसत दाम बढ़ गए हैं। कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि मंहगाई की यह छलांग पिछले 30 साल की सबसे ऊँची छलांग है। यह भी पढ़ें: क्या कांग्रेस पाकिस्तानपरस्त? यहां तकलीफ की बात यह नहीं है कि मंहगाई बढ़ गई है बल्कि यह है कि लोगों की आमदनी घट गई है। जिस अनुपात में मंहगाई बढ़ती है, यदि उसी अनुपात में आमदनी भी… Continue reading महंगाई की मारः नाक में दम

टूटती उम्मीदों की कथा

भारत में कोरोना महामारी की दूसरी लहर ने डगमग अर्थव्यवस्था को एक तरह से अंधकार में धकेल दिया है। बैंको से निजी कर्ज लेने वालों, क्रेडिट कार्ड से कर्ज लेने वालों और प्राइवेट कंपनियों से गोल्ड लोन लेने वालों के डिफॉल्ट में पिछले महीने हुई बढ़ोतरी बढ़ती जा रही तबाही का संकेत देती है। रोजमर्रा के उपयोग की चीजें का बाजार जिस तरह अप्रैल और मई में ढहा है, उसका भी यही संकेत है कि भारत दुर्दशा अकथनीय रूप लेती जा रही है। दरअसल, ऐसी कहानी दुनिया भर में देखने को मिल रही है। इसलिए फिलहाल ऐसी भी कोई उम्मीद नहीं है कि वैश्विक अर्थव्यवस्था की मजबूती भारत को संभाल लेगी। मसलन, अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन (आईएलओ) की ताजा रिपोर्ट गौरतलब है। उसमे बताया गया है कि वैश्विक संकट के कारण 2022 तक बेरोजगारों की संख्या बढ़कर 20 करोड़ 50 लाख हो जाएगी। गरीबों की संख्या में बढ़ोतरी होने के साथ-साथ विषमता भी बढ़ेगी। आईएलओ का कहना है कि रोजगार के अवसरों में होने वाली बढ़ोतरी साल 2023 तक इस नुकसान की भरपाई नहीं कर पाएगी। ये सूरत तब की है, जब अभी पता नहीं है कि कोरोना महामारी के अभी आगे और कितने दौर आएंगे। हर दौर नई समस्याएं पैदा… Continue reading टूटती उम्मीदों की कथा

सब खलास, शिक्षा सर्वाधिक!

सत्य है मनुष्य जब है तो सब खत्म नहीं हुआ करता! फिर भारत तो 140 करोड़ लोगों की भीड़ है। उस नाते खत्म और खलास होने की बात में मेरा मतलब है कि जो इकट्ठा, संग्रहित था वह खलास। मैं नवंबर 2016 को भारत के 140 करोड लोगों का टर्निंग प्वांइट मानता हूं। तभी से लगातार लिख रहा हूं कि भारत का महा बरबादी काल प्रारंभ। लक्ष्मी की चंचलता खत्म सो भारत को वह श्राप, जिससे तय बरबादी। कोई न माने लेकिन गौर करें कि तभी से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपनी गलती को अभूतपूर्व कामयाबी करार देने के लिए भक्त लंगूरों, आईटी टीम से ऐसा झूठ बनवाया कि पूरा देश ही झूठा हो गया। नोटबंदी से शुरू झूठ महामारी को भी ‘अवसर’ बना गया। तभी भारत का एकत्र सब, भारत की बचत, आर्थिकी, प्रगति, निर्माण, शिक्षा, रोजगार, स्वास्थ्य, भारत की ऊर्जा याकि नौजवानी छीज-छीज कर खलास हुई। तभी कोरोना वायरस की महामारी आई तो उससे लड़ने के लिए हमारे पास कुछ नहीं था। हम पहले दिन से लेकर आज तक महामारी से लगातार झूठ में लड़ रहे हैं। यह भी पढ़ें: आर्थिकी भी खलास! यह भी पढ़ें: आधुनिक चिकित्सा पर शक! बारीकी से सोचें कि नवंबर 2016 से जून… Continue reading सब खलास, शिक्षा सर्वाधिक!

आर्थिकी भी खलास!

हिसाब से आर्थिकी की बरबादी को नंबर एक पर मानना चाहिए। पर मैं अशिक्षा, अज्ञानता को इसलिए अधिक घातक-गंभीर समझता हू क्योंकि यदि भारत (प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, हम-आप से लेकर आम नागरिक सभी) अशिक्षा-अज्ञान के वायरस में जकड़ गए तो आर्थिकी के सकंटों का आगे निदान ही संभव नहीं। महामारी के आगे हम लावारिस इसलिए मर रहे हैं और आगे भी मरेंगे क्योंकि अशिक्षा-अज्ञान-अंधविश्वासों में सदियों से जकड़े हुए हैं। यह भी पढ़ें: सब खलास, शिक्षा सर्वाधिक! गुजरे सप्ताह भारत की बरबादी में सन् 2020-21 की विकास दर में 7.3 प्रतिशत की गिरावट की खबर आईसबर्ग का महज ऊपरी हिस्सा था। पानी के नीचे समुद्र में 140 करोड़ लोगों का जीवन बरबादी की उन जंजीरों में जकड़ा है, जो महामारी के बाद भी जस की तस रहेगी। महामारी और कोरोना वायरस न इस साल जाने वाला है और न अगले साल। हम लोगों के चलते कोविड-19 भारत में पंचवर्षीय योजना लिए हुए हो सकता है। ध्यान रहे आर्थिकी की बरबादी नोटबंदी के बाद से है। वायरस आया तो उसने महामागर में गहरे धकेला है। इससे भारत को बाहर निकालना अब मोदी सरकार के बस की बात नहीं है। क्यों? पहली बात चंद अमीरों और सरकारी नौकरीधारियों (हाकिमों) को छोड़ कर… Continue reading आर्थिकी भी खलास!

यूथ का आज, कल दोनों खराब!

भारत दुनिया की सबसे बड़ी युवा आबादी वाला देश है। सबसे बड़ी आबादी वाले देश चीन में युवाओं की बड़ी कमी हो गई है और इसलिए चीन ने कानून बदल कर लोगों को तीन बच्चे पैदा करने की छूट दी है। इसके उलट भारत में 18 से 44 साल की उम्र के लोगों की संख्या 60 करोड़ है। यानी भारत की पूरी आबादी में 40 फीसदी से ज्यादा लोग 18 से 44 साल की उम्र वाले हैं। कोरोना वायरस के संक्रमण और उसको संभालने में भारत की विफलता ने सबसे ज्यादा इसी समूह के लोगों को प्रभावित किया है। भारत में 18 साल से कम उम्र की आबादी भी 25 फीसदी से ज्यादा है। इन बच्चों को भारत का भविष्य कहा जाता है। इन्हीं के बारे में नरेंद्र मोदी सरकार ने नारा दिया था- पढ़ेगा इंडिया, तभी तो बढ़ेगा इंडिया। एक नारा- बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ का भी दिया गया था। लेकिन कोरोना संक्रमण के बीच पढ़ाई सरकार की प्राथमिकता में रहा ही नहीं इसलिए भविष्य तो अंधकारमय हो गया है। युवाओं का वर्तमान भी पूरी तरह से चौपट हो गया है। यह भी पढ़ें: सब खलास, शिक्षा सर्वाधिक! यह भी पढ़ें: आर्थिकी भी खलास! एक-एक करके उनके लिए सारे… Continue reading यूथ का आज, कल दोनों खराब!

Bollywood News : सोनू सूद ने कहा, जरूरमंद की मदद करना ब्लॉबस्टर फिल्मों का हिस्सा बनने से बेहतर

मुंबई | कोरोना महामारी (Corona Epidemic) का प्रकोप बढ़ता ही जा रहा है कोरोना (Corona) के कारण लोगों में बेरोजगारी बढ़ती ही जा रही है गरीब, जरूरतमंद लोगों की मदद के लिए बॉलीवुड (Bollywood) अभिनेता सोनू सूद (Sonu Sood) का कहना है जरूरतमंद लोगों की मदद करना किसी ब्लॉकबस्टर फिल्म (Blockbuster Film) का हिस्सा बनने से कहीं बेहतर काम है। सोनू सूद (Sonu Sood) ,जरूरमंद लोगों की मदद करने के लिए जाने जाते हैं। कोरोना वायरस (Corona Virus) की दूसरी लहर में भी सोनू सूद का लगातार गरीब, जरूरमंद, मजदूरों और छात्रों की मदद करने का सिलसिला जारी है। सोनू सूद हजारों लोगों की मदद कर चुके हैं। सोनू सूद (Sonu Sood) ने कहा है कि जरूरमंद लोगों की मदद करना किसी ब्लॉकबस्टर फिल्म (Blockbuster Film) का हिस्सा बनने से कहीं बेहतर काम है। इसे भी पढ़ें – Bihar : कोरोना वैक्सीन लगाने का झांसा देकर लड़की के साथ किया सामूहिक बलात्कार सोनू सूद (Sonu Sood) ने ट्विटर अकाउंट पर लिखा, आधी रात को कई सारे कॉल्स के बाद अगर आप जरूरतमंदों के लिए बेड, कुछ लोगों के लिए ऑक्सीजन इंतजाम कर पाते हैं और उनकी जान बचा पाते हैं तो कसम से… यह 100 करोड़ वाली फिल्म का हिस्सा बनने… Continue reading Bollywood News : सोनू सूद ने कहा, जरूरमंद की मदद करना ब्लॉबस्टर फिल्मों का हिस्सा बनने से बेहतर

भाजपा के छोटे-बड़े नेता खुद वंशवाद का शिकार : कांग्रेस

झारखंड प्रदेश कांग्रेस ने वंशवाद के मुद्दे पर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर पलटवार करते हुए रविवार को कहा कि भाजपा बढ़ती महंगाई, बेरोजगारी, किसानों की बर्बादी और चौपट अर्थव्यवस्था समेत अन्य मूल मुद्दों से ध्यान हटाने के लिए दूसरे दलों पर वंशवाद और भाई-भतीजावाद का आरोप लगाती है, लेकिन उस पार्टी में ही एक-दो नहीं, बल्कि वंशवाद के सैकड़ों उदाहरण है।

आबादीः सरकार क्यों डरे ?

पिछले साल भाजपा सांसद राकेश सिंहा ने संसद में एक विधेयक पेश किया और मांग की कि दो बच्चों का कानून बनाया जाए याने दो से ज्यादा बच्चे पैदा करने को हतोत्साहित किया जाए।

क्योंकि ये मुद्दा नहीं है

देश में बेरोजगारी का हाल कितना बुरा है, इसे बताने के लिए अब शायद उदाहरणों की भी जरूरत नहीं है। लेकिन अफसोस की बात यह है कि ये सूरत देश में सियासी मुद्दा नहीं है।

आबादी को बढ़ने से रोकें

यदि भारत में जनसंख्या की रफ्तार जो आजकल है, वह बनी रही तो कुछ ही वर्षों में वह चीन को मात कर देगा। इस समय चीन से सिर्फ तीन-चार करोड़ लोग ही हमारे यहां कम हैं।

रोजगार के संकट का सरकार के पास समाधान नहीं: राहुल

कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने बेरोजगारी के बढ़ते संकट को लेकर सरकार को आड़े हाथ लेते हुए आज कहा कि वह सिर्फ वादा करती है और समस्या के समाधान का उसके पास कोई उपाय नहीं है।

तेजस्वी ने 10 लाख युवाओं को नौकरी देने का किया वादा

बिहार के पूर्व उपमुख्यमंत्री और राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के नेता तेजस्वी यादव ने आज मुख्यमंत्री नीतीश कुमार सरकार को बेरोजगारी के मुद्दे पर घेरते हुए वादा किया कि अगर बिहार के लोग उनकी पार्टी को मौका देते है

बढ़ती बेरोजगारी और कृषि विधेयकों को लेकर कांग्रेस का प्रदर्शन

युवाओं में बढ़ती बेरोजगारी और कृषि से जुड़े विधेयकों के विरोध में मंगलवार को भारतीय युवा कांग्रेस के कार्यकताओं ने प्रदर्शन कर नई दिल्ली में संसद भवन का घेराव किया।

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