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Friday, May 7, 2021
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भारत बंद

किसानों का भारत बंद, सड़क व रेल रोके

केंद्र सरकार के बनाए तीन कृषि कानूनों के विरोध में 121 दिन से आंदोलन कर रहे किसानों ने आंदोलन के चार महीने पूरे होने के मौके पर शुक्रवार को भारत बंद किया।

किसानों का भारत बंद: कई जगह सड़क परिवहन एवं रेल यातायात प्रभावित, तो कई जगह मिला जुला असर

जयपुर। केन्द्रीय नए कृषि कानूनों को लेकर संयुक्त किसान मोर्चा द्वारा आयोजित भारत बंद का काफी असर हुआ है . आपको बता दें कि किसानों ने कृषि कानूनों को लेकर आंदोलन किया . और कई रैलिया निकाली , रोड...

26 मार्च को भारत बंद करेंगे किसान!

केंद्र सरकार के बनाए तीन कृषि कानूनों के विरोध में 105 दिन से आंदोलन कर रहे किसानों ने 26 मार्च को संपूर्ण भारत बंद का आह्वान किया है। संयुक्त किसान मोर्चा ने कहा है कि किसान आंदोलन के चार महीने पूरे होने के मौके पर 26 मार्च को पूरे देश में बंद किया जाएगा।

कारोबारियों ने किया भारत बंद

ओडिशा में दुकानें और अन्य व्यापारिक प्रतिष्ठान बंद रहे क्योंकि ओडिशा ट्रेडर्स एसोसिएशन ने आज भारत बंद को समर्थन दिया। कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स

भारत बंद का राजस्थान में कोई असर नहीं

जीएसटी और ईंधन की बढ़ती कीमतों के खिलाफ कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) द्वारा आहूत बंद को आज राजस्थान के व्यापारियों का खास समर्थन नहीं मिला क्योंकि बाजार सुचारू रूप से खुले थे।

किसान आंदोलन का दायरा बढ़ा

केंद्र सरकार के बनाए तीन कृषि कानूनों के विरोध में दिल्ली की सीमा पर चल रहे किसान आंदोलन का दायरा बढ़ता जा रहा है। राजस्थान के कई इलाकों से लेकर पंजाब के अंदर और हरियाणा के कुछ इलाकों में भी किसानों का आंदोलन तेज हो गया है।

नई चिट्ठी, दोहराई बाते!

देश के कई राज्यों के किसान दिल्ली की कड़ाके की ठंड में दिल्ली की सीमा पर 29 दिन से प्रदर्शन कर रहे हैं और केंद्र सरकार उनकी मांगें सुनने की बजाय उनको चिट्ठी लिख रही है।

ठोस प्रस्ताव के बगैर वार्ता नहीं

केंद्र सरकार के बनाए तीन कृषि कानूनों का विरोध कर रहे किसानों ने सरकार पर टालमटोल का रवैया अपनाने का आरोप लगाते हुए अपना रुख सख्त कर लिया है।

बदलाव नहीं कानूनों की वापसी हो

केंद्र सरकार के बनाए तीन कृषि कानूनों का विरोध में 27 दिन से दिल्ली की सीमा पर और देश के कई हिस्सों में आंदोलन कर रहे किसान सरकार से वार्ता के बारे में बुधवार को फैसला करेंगे।

खुद्दार किसान और अय्यार सरकार!

एक तरफ अपने खून-पसीने से धरती का सीना चीर कर अनाज उपजाने वाले खुद्दार और मेहनतकश किसान हैं तो दूसरी ओर बाबू देवकीनंदन खत्री के उपन्यास ‘चंद्रकांता संतति’ के अय्यारों की तरह की सरकार है।
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