अगले महीने संभव बच्चों की वैक्सीन

कोरोना वायरस का संक्रमण रोकने के लिए चल रही वैक्सीनेशन अभियान के बीच अच्छी खबर है। अगले महीने यानी अगस्त में बच्चों की वैक्सीन आ सकती है।

भारत का जुलाई के अंत तक 50 करोड़ से अधिक टीकाकरण का लक्ष्य था लेकिन भारत बायोटेक के कारण रहेगा अधूरा

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Good News : बच्चों के लिए कोरोना की वैक्सीन को सितंबर तक मिलेगी हरी झंडी- डॉ. रणदीप गुलेरिया

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कोवैक्सीन सबसे महंगी क्यों है?

भारत की स्वदेशी कंपनी भारत बायोटेक की कोवैक्सीन सबसे महंगी क्यों है? यह लाख टके का सवाल है। बाकी वैक्सीन के मुकाबले इसकी कीमत बहुत ज्यादा है। ऑक्सफोर्ड-एस्ट्राजेनेका की जिस कोवीशील्ड वैक्सीन का उत्पादन सीरम इंस्टीच्यूट में हो रहा है उसके मुकाबले कोवैक्सीन की कीमत लगभग दोगुनी है। कोवीशील्ड की एक डोज 780 रुपए की है तो कोवैक्सीन की एक डोज की कीमत 1,430 रुपए है। लगातार विवादों में रही इस कंपनी की वैक्सीन के असर को लेकर भी अभी तक संदेह हैं और इसे विश्व स्वास्थ्य संगठन यानी डब्लुएचओ की मंजूरी भी नहीं है। हाल ही में इसे अमेरिका ने मंजूरी देने से इनकार किया है। इसकी कीमत का मामला इसलिए भी रहस्यमय है क्योंकि इस वैक्सीन की रिसर्च में भी भारत सरकार की एजेंसियां शामिल थीं। इंडियन कौंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च यानी आईसीएमआर के साथ मिल कर कंपनी ने यह वैक्सीन तैयार की है। पिछले दिनों इसको पेटेंट से मुक्त करने और कुछ दूसरी कंपनियों को भी इसका उत्पादन करने देने का फैसला भी हुआ। इसके बावजूद इसकी कीमत कम नहीं हुई है। कायदे से इसकी कीमत कोवीशील्ड और रूसी वैक्सीन स्पुतनिक से कम होनी चाहिए लेकिन इसकी कीमत उनसे ज्यादा है और भारत सरकार इसकी ज्यादा कीमत… Continue reading कोवैक्सीन सबसे महंगी क्यों है?

विदेशी कंपनियों की शर्त मानेगी सरकार

नई दिल्ली। अमेरिका कंपनियों की वैक्सीन जल्दी ही भारत आ सकती है। केंद्र सरकार उनकी शर्तें मानने को तैयार हो गई है। माना जा रहा है कि विदेश मंत्री एस जयशंकर की अमेरिकी कंपनियों के साथ बातचीत में कुछ सहमति बनी थी, जिसके बाद सरकार ने इस बारे में अपनी राय बदली है। तभी केंद्र सरकार मॉडर्ना और फाइजर की कोरोना वैक्सीन को जल्दी से जल्दी देश में उपलब्ध करवाने के लिए उनकी शर्तें मानने को तैयार हो गई है। ड्रग्स कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया, डीसीजीआई ने कहा है कि अगर इन कंपनियों की वैक्सीन को बड़े देशों और विश्व स्वास्थ्य संगठन, डब्लुएचओ से इमरजेंसी इस्तेमाल की मंजूरी मिली हुई है तो भारत में इनके इस्तेमाल के बाद ब्रिजिंग ट्रायल की जरूरत नहीं है। गौरतलब है कि मॉडर्ना और फाइजर उन कंपनियों में शामिल हैं, जिन्होंने भारत सरकार से अपील की थी कि वह हर्जाने और इमरजेंसी इस्तेमाल की इजाजत देने के बाद होने वाले लोकल ट्रायल की बाध्यता को खत्म करे। हालांकि सरकार ने अभी वैक्सीन के इस्तेमाल के बाद होने वाले बड़े साइड इफेक्ट को लेकर मुआवजे या जवाबदेही जैसी शर्त पर फैसला नहीं किया है। यह शर्त काफी बड़ा असर डालेगी, हालांकि इस पर भी फैसला जल्दी… Continue reading विदेशी कंपनियों की शर्त मानेगी सरकार

मानवता पर मुनाफा भारी

वैक्सीन निर्माता कंपनियां पेटेंट हटाने के खिलाफ हैं। लेकिन वे ऐसा कुछ भी नहीं करना चाहतीं, जिससे दुनिया में वैक्सीन की कमी की समस्या का समाधान निकले। वे उन कंपनियों से पार्टनरशिप करने को तैयार नहीं हैं, जो इनका उत्पादन बढ़ा सकती हैं। वैक्सीन निर्माता कंपनियों का ये रुख हैरतअंगेज है। कोरोना वैक्सीन पर से पेटेंट हटे या नहीं, ये बहस अभी भी छिड़ी हुई है। वैक्सीन निर्माता कंपनियां पेटेंट हटाने के खिलाफ हैं। लेकिन वे ऐसा कुछ भी नहीं करना चाहतीं, जिससे दुनिया में वैक्सीन की कमी की समस्या का समाधान निकले। वे उन कंपनियों से पार्टनरशिप करने को तैयार नहीं हैं, जो इनका बड़े पैमाने पर उत्पादन कर सकती हैं। वैक्सीन निर्माता कंपनियों का ये रुख हैरतअंगेज है। खुद ये कंपनियां कहती रही रहीं है कि उनकी उत्पादन क्षमता सीमित है, जिस कारण वे मांग के मुताबिक सप्लाई नहीं कर पा रही हैं। तो आखिरर दूसरी कंपनियों को फॉर्मूला देने में उन्हें हिचक क्यों है? ये कंपनियां आखिरकार उनके बौद्धिक संपदा अधिकार का पालन करते हुए ही वैक्सीन का उत्पादन करेंगी। बहरहाल, खबर यह है कि कनाडा की कंपनी बायोलीज, इजराइल की टेवा, डेनमार्क की बेवेरियन नॉर्डिक और बांग्लादेश की कंपनी इनसेप्टा कंपनी ने वैक्सीन निर्माता कंपनियों से… Continue reading मानवता पर मुनाफा भारी

राज्य कहां से लाएंगे पैसा?

पिछले साल अक्टूबर के आसपास केंद्र सरकार ने स्पष्ट कर दिया था कि राज्य वैक्सीन की खरीद नहीं करेंगे। यानी वैक्सीन की खरीद केंद्रीकृत होगी यह पिछले साल से तय था। वैक्सीन की केंद्रीकृत खरीद का फैसला पहले से हुआ था और देश के आम बजट में वैक्सीन खरीद के लिए 35 हजार करोड़ की भारी-भरकम रकम की मंजूरी हो गई थी तो राज्य क्यों अपने बजट में वैक्सीन के लिए प्रावधान करते! राज्यों ने सपने में भी नहीं सोचा था कि अचानक केंद्र सरकार एक दिन वैक्सीनेशन की नीति बदल देगी और कहेगी कि 18 से 44  साल तक की उम्र के लोगों को राज्य अपने पैसे से वैक्सीन लगवाएं। केंद्र सरकार ने राज्यों के वित्तीय प्रबंधन को संकट में डालने वाला इतना ही काम नहीं किया, बल्कि वैक्सीन बनाने वाली कंपनियों को अपनी मर्जी से कीमत तय करनी की छूट भी दे दी। अब राज्यों को कंपनियों की तय कीमत पर वैक्सीन खरीदनी है और अपनी सबसे बड़ी आबादी को अपने खर्च से वैक्सीन लगवानी है। केंद्र सरकार ने वैक्सीनेशन नीति में बदलाव करके न सिर्फ करोड़ों लोगों का जीवन खतरे में डाला है, बल्कि राज्यों के वित्तीय प्रबंधन को भी संकट में डाल दिया है। राज्यों के… Continue reading राज्य कहां से लाएंगे पैसा?

भारत में लगा स्पुतनिक का पहला टीका

हैदराबाद। कोवीशील्ड और कोवैक्सीन के बाद अब भारत में कोरोना महामारी से मुकाबले के लिए तीसरी वैक्सीन की डोज लगनी शुरू हो गई। शुक्रवार को रूसी वैक्सीन स्पुतनिक-वी की पहली डोज लगाई गई है। हालांकि यह वैक्सीन आम लोगों को अगले हफ्ते से ही उपलब्ध हो पाएगी। शुक्रवार को हैदराबाद में डॉ. रेड्डीज लैब में कस्टम फार्मा सर्विसेज के ग्लोबल हेड दीपक सप्रा को स्पुतनिक की पहली डोज लगाई गई। गौरतलब है कि डॉ. रेड्डीज लैब ही भारत में इस वैक्सीन का वितरण कर रही है और आगे वही इसका उत्पादन करेगी। (sputniks) बहरहाल, फिलहाल यह वैक्सीन हैदराबाद में यह पायलट प्रोजेक्ट के तहत सीमित अवधि के लिए उपलब्ध कराई जा रही है। डॉ. रेड्डीज ने स्पुतनिक-वी की एक डोज की कीमत 995.40 रुपए तय की है। डॉ. रेड्डीज ने कहा है कि वह अभी 948 रुपए प्रति डोज की दर से वैक्सीन आयात कर रही है। इस पर पांच फीसदी की दर से जीएसटी वसूला जा रहा है। इसके बाद वैक्सीन की कीमत 995.40 रुपए प्रति डोज हो जाती है। डॉ. रेड्डीज का कहना है कि स्पुतनिक-वी की पहली खेप एक मई को भारत पहुंची थी। इस खेप को सेंट्रल ड्रग लैबोरेटरी कसौली से 13 मई को रेगुलेटरी क्लीयरेंस… Continue reading भारत में लगा स्पुतनिक का पहला टीका

Corona Vaccine : कोवैक्सीन, कोविशील्ड या फिर स्पुतनिक-वी..किसमें कितना है दम, आइये जानते है..

कोरोना वायरस लोगों का काल बन चुका है। आये दिन बड़ी संख्या में मौत को और संक्रमितों के आंकड़े दर्ज हो रहे है। कोरोना वायरस की दूसरी लहर के बीच सरकार ने लोगों को वैक्सीनेट करने की प्रक्रिया भी तेज करने की कोशिश शुरू कर दी है। भारत में बनी दोनों वैक्सीन विदेशों में भी कारगर है।  इन सबके बीच रूस की वैक्सीन स्पुतनिक V को भी भारत में इमरजेंसी यूज की मंजूरी दे दी है और अगले सप्ताह से यह वैक्सीन भी भारत के लोगों को लगनी शुरू हो जाएगी। फिलहाल भारत में सीरम इंस्टिट्यूट की कोविशील्ड और भारत बायोटेक की कोवैक्सीन- इन दोनों वैक्सीन की डोज लग रही है। लेकिन इन तीनों में से कौन सी वैक्सीन कितनी असरदार है और किसके क्या साइड इफेक्ट्स हो सकते हैं, इस बारे में हम आपको यहां बता रहे हैं….. इसे भी पढ़ें Good News : रूसी वैक्सीन स्पुतनीक-वी का एक डोज मिलेगा 995.4 रुपये में, सबसे पहले प्राइवेट सेक्टर को मिलेगी वैक्सीन तीनों में से किस वैक्सीन की क्षमता कितनी है? प्रभावकारिता यानी वैक्सीन की क्षमता की बात करें तो रूस की स्पुतनिक V 91.6 प्रतिशत असरदार है और बीमारी की गंभीरता को कम करने में इसकी प्रतिक्रिया काफी अधिक है।… Continue reading Corona Vaccine : कोवैक्सीन, कोविशील्ड या फिर स्पुतनिक-वी..किसमें कितना है दम, आइये जानते है..

नया दावां, दो सौ करोड़ डोज

नई दिल्ली। भारत में वैक्सीन की कमी और सैकड़ों की संख्या में वैक्सीनेशन सेंटर बंद होने की खबरों के बीच भारत सरकार ने दावा किया है कि अगले पांच महीने में भारत में वैक्सीन की उपलब्धता पूरी हो जाएगी। सरकार ने कहा है कि अगस्त से दिसंबर के बीच पांच महीने में भारत में दो सौ करोड़ से ज्यादा डोज उपलब्ध हो जाएगी। इसमें से 130 करोड़ डोज सिर्फ दो कंपनियां बनाएंगी। नीति आयोग के सदस्य डॉक्टर वीके पॉल ने कहा है कि कोवीशील्ड की 75 करोड़ और कोवैक्सीन की 55 करोड़ डोज उपलब्ध हो जाएगी। एक अच्छी खबर यह भी है कि रूस की स्पुतनिक वैक्सीन अगले हफ्ते भारत आ जाएगी। भारत सरकार ने कुछ समय पहले इस वैक्सीन की मंजूरी दी थी। गुरुवार को नीति आयोग के सदस्य डॉक्टर वीके पॉल ने बताया कि वैक्सीन भारत आ गई है और अगले हफ्ते से इसे लगाया जाने लगेगा। गौरतलब है कि अभी भारत में कोवीशील्ड और कोवैक्सीन ही लगाई जा रही है। देश में कोरोना वायरस और टीकाकरण की स्थिति पर प्रेस कांफ्रेंस में बुधवार को डॉ. पॉल ने कहा कि भारत में कोविड वैक्सीन की लगभग 18 करोड़ खुराकें लगाई जा चुकी हैं। अमेरिका में यह संख्या लगभग… Continue reading नया दावां, दो सौ करोड़ डोज

OMG : वैक्सीन बनाने वाली कंपनी भारत बायोटेक के 50 कर्मचारी कोरोना संक्रमित,सोशल मीडिया यूजर्स ने कहा कि कर्मचारियों का टीकाकरण क्यों नहीं..

भारत में कोरोना काल बनकर लोगों की जान ले रहा है। एक के बाद एक बूरी खबर मिल रही है। लेकिन भारत की ही दो कंपनियों ने भारतीय जनता को सबसे बड़ी खुशी दी थी- कोरोना की वैक्सीन बनाकर। सीरम इंस्टिट्यूट और भारत बायोटेक ने कोवैक्सीन और कोविशील्ड बनाई है। लेकिन कोरोना ने वैक्सीन बनाने वालों पर भी वार किया है। भारत बायोटेक के 50 कर्मचारी कोरोना संक्रमित मिले है। भारत बायोटेक की संयुक्त प्रबंध निदेशक सुचित्रा ईला के अपने 50 कर्मचारियों के कोविड-19 से संक्रमित पाए जाने की जानकारी ट्विटर पर साझा की थी। लेकिन इस पर कुछ लोग तारीफों के पुल बांध रहे थे तो कुछ आलोचना कर रहे हैं। कुछ लोगों का कहना है कि कोवैक्सीन लोगों की जिंदगी बचा रही है जबकि कुछ ने सवाल किया कि कर्मचारियों को टीका क्यों नहीं लगाया गया। जो लोग वेक्सीन बनाकर लोगों की जिंदगी बचा रहे है उन्हें ही कोरोना हो गया। इसे भी पढ़ें WHO ने इशारों में कहा – चुनाव और कुंभ के कारण फैला कोरोना ,इवेंट्स में बरती गई कोताही संक्रमित होने के बाद भी काम कर रही कंपनी कोविड-19 रोधी टीके कोवैक्सीन की आपूर्ति बाधित होने पर कुछ नेताओं की टिप्पणियों पर ईला ने बुधवार को… Continue reading OMG : वैक्सीन बनाने वाली कंपनी भारत बायोटेक के 50 कर्मचारी कोरोना संक्रमित,सोशल मीडिया यूजर्स ने कहा कि कर्मचारियों का टीकाकरण क्यों नहीं..

भारत बायोटेक अब जल्द ही बच्चों पर वैक्सीन का ट्रायल कर सकता है शुरु, इस साल के अंत में आ सकती वैक्सीन

देश लगभग सवा साल से कोरोना वायरस के संक्रमण से जूझ रहा है। लोगों के लिए कोरोना काल बनता जा रहा है। इस बीच लोगो के लिए वैक्सीन की खुशखबरी भी आयी है। फिलहाल 18-45 वर्ष के लोगों का टीकाकरण किया जा रहा है। और अब जल्द ही बच्चों के लिए वैक्सीन भी तैयार की जाएगी। जल्द ही 2 से 18 साल के बच्चों के लिए कोरोना वैक्सीन का ट्रायल शुरू किया जा सकता है। बता दें कि हैदराबाद स्थित भारत बायोटेक ने 2 से 18 साल के बच्चों पर वैक्सीन के ट्रायल की अनुमति मांगी थी। जल्द ही बच्चों पर ट्रायल शुरु किया जाएगा। विशेषज्ञों के अनुसार भारत में कोरोना वायरस की तीसरी लहर दस्तक देने वाली है। यह सबसे ज्यादा प्रभाव बच्चों पर डालेगी। इसको लेकर पेरेंटस के बीच टेंशन बनी हुई थी। उम्मीद है कि इस खबर से उन्हें थोड़ी सी राहत मिलेगी। इसे भी पढ़ें सावधान! ज़ारी है कोरोना के इंडियन वैरिएंट का कहर, 44 देशों में दिखा इसका असर इस साल के अंत में आ सकती है वैक्सीन बता दें कि एक विशेषज्ञ समिति ने मंगलवार को 2-18 आयुवर्ग के लिए भारत बायोटेक के कोविड-19 टीके कोवैक्सीन के दूसरे/तीसरे चरण के लिए परीक्षण की सिफारिश की… Continue reading भारत बायोटेक अब जल्द ही बच्चों पर वैक्सीन का ट्रायल कर सकता है शुरु, इस साल के अंत में आ सकती वैक्सीन

कोरोना पर काबू संभव, लेकिन….

यदि विश्व स्वास्थ्य संगठन टीकों पर से पेटेंट का बंधन उठा लेता है तो 100-200 करोड़ टीकों का इंतजाम करना कठिन नहीं है। अमेरिकी, यूरोपीय, रुसी और चीनी कंपनियां चाहें तो भारत को करोड़ों टीके कुछ ही दिनों में भिजवा सकती है। खुद भारतीय कंपनियां भी इस लायक हैं कि वे हमारी टीकों की जरुरत को पूरा कर सकती हैं। खुशी की बात है कि जर्मनी के अलावा लगभग सभी देश इस मामले में भारत की मदद को तैयार हैं लेकिन असली सवाल यह है कि यदि टीके मिल जाएं तो भी 140 करोड़ लोगों को वे लगेंगे कैसे ? अभी तो हाल यह है कि विदेशों से आ रहे हजारों ऑक्सीजन-यंत्र और लाखों इंजेक्शन मरीजों तक पहुंच ही नहीं पा रहे हैं। वे या तो हवाई अड्डों पर पड़े हुए हैं या नेताओं के घरों में ढेर हो रहे हैं या कालाबाजारियों की जेब गर्म कर रहे हैं। हमारी सरकारें बग़लें झांक रही हैं। कुछ नेता लोग मन की बातें मलोर रहे हैं, उनके विरोधी मुंह की बातें फेंट रहे हैं और काम की बात कोई नहीं कर रहा है। देश की राजनीतिक पार्टियों के लगभग 15 करोड़ सदस्य, अपने-अपने घरों में बैठकर मक्ख्यिां मार रहे हैं। हमारे देश… Continue reading कोरोना पर काबू संभव, लेकिन….

कोरोना और विश्व-परिवार

ऐसा लगता है कि भारत और दक्षिण अफ्रीका की पहल अब शायद परवान चढ़ जाएगी। पिछले साल अक्तूबर में इन दोनों देशों ने मांग की थी कि कोरोना के टीके का एकाधिकार खत्म किया जाए और दुनिया का जो भी देश यह टीका बना सके, उसे यह छूट दे दी जाए। विश्व व्यापार संगठन के नियम के अनुसार कोई भी किसी कंपनी की दवाई की नकल तैयार नहीं कर सकता है। प्रत्येक कंपनी किसी भी दवा पर अपना पेटेंट करवाने के पहले उसकी खोज में लाखों-करोड़ों डाॅलर खर्च करती है। दवा तैयार होने पर उसे बेचकर वह मोटा फायदा कमाती है। यह फायदा वह दूसरों को क्यों उठाने दें ? इसीलिए पिछले साल भारत और द. अफ्रीका की इस मांग के विरोध में अमेरिका, यूरोपीय संघ, ब्रिटेन, जापान, स्विट्जरलैंड जैसे देश उठ खड़े हुए। ये समृद्ध देश अपनी गाढ़ी कमाई को लुटते हुए कैसे देख सकते थे लेकिन पाकिस्तान, मंगोलिया, केन्या, बोलिविया और वेनेजुएला- जैसे देशों ने इस मांग का समर्थन किया। अब खुशी की बात यह है कि अमेरिका के बाइडन प्रशासन ने ट्रंप की नीति को उलट दिया है। अमेरिका यदि अपना पेटेंट छोड़ने को तैयार है तो अन्य राष्ट्र भी उसका अनुसरण क्यों नहीं करेंगे? अब ब्रिटेन… Continue reading कोरोना और विश्व-परिवार

वैक्सीन के इंतजाम पर ध्यान हो

भारत सरकार ने वायरस की पहली लहर में एक बड़ी गलती यह की थी वैक्सीन की जरूरत पर ध्यान नहीं दिया। भारत सरकार इस मुगालते में रही कि पिछले 75 साल में भारत दुनिया का सबसे बड़ा वैक्सीन उत्पादक देश बना है इसलिए भारत में वैक्सीन की दिक्कत नहीं होगी। तभी जिस समय दुनिया भर के सभ्य और विकसित देशों की सरकारें वैक्सीन के ऑर्डर दे रही थीं, एंडवांस बुकिंग करा रही थीं और दुनिया भर में वैक्सीन पर चल रहे शोध में पैसा लगा रही थीं उस समय भारत सरकार इस मुगालते में रही कि भारत ने कोरोना पर विजय पा ली। यह पिछले साल अगस्त-सितंबर का समय था, जब दुनिया भर से यह खबर आने लगी थी कि वैज्ञानिक वैक्सीन बना रहे हैं और साल के अंत तक वैक्सीन आ जाएगी। साल का अंत आने से पहले ही वैक्सीन आ भी गई और दुनिया के देशों में लगने भी लगी। लेकिन भारत सरकार पता नहीं किस शुभ मुहूर्त का इंतजार करती रही! अमेरिका में 14 दिसंबर से वैक्सीन लगनी शुरू हो गई थी। उससे ठीक पहले अमेरिका ने फाइजर की वैक्सीन को मंजूरी दी थी और मंजूरी दिए जाने से पहले ही अमेरिका के 50 राज्यों में हर… Continue reading वैक्सीन के इंतजाम पर ध्यान हो

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