मुस्लिम शासन का मूल्याकंन

तारिक फतह पर जावेद अख्तर के हमले के बाद अनेक लोग भारतीय इतिहास में मुस्लिम शासन के गीत गा रहे हैं। यह यहाँ लंबे समय से इतिहास के व्यवस्थित मिथ्याकरण का ही कुफल है। जिन से यह सुधारने की अपेक्षा थी, वे खुद वैचारिक खस्ताहाल हैं।

जावेद अख्तर का मुगलिया रंग

फिल्मी हस्ती जावेद अख्तर भारत में मुगल शासन को खुशहाली का समय मानते हैं। तुलना करते हुए वे अकबर, जहाँगीर को महान और अंग्रेजों को गया-गुजरा बताते हैं। मुख्यतः इसी मतभेद पर वे तारिक फतह को हिन्दू सांप्रदायिकों का ‘प्रवक्ता’ कहते हुए जलील कर रहे हैं। 

महामारी में भी चलता सांप्रदायिक नैरेटिव?

कोरोना वायरस के संकट के समय में सांप्रदायिकता का एक बेहद खतरनाक नैरेटिव तैयार किया जा रहा है। और यह अनायास नहीं है। इसके पीछे सोची समझी, सुविचारित योजना दिख रही है।

धर्मगुरू आगे आएं, करें अपील

कोरोना वायरस से भारत की लड़ाई अजीब मोड़ लेती जा रही है। निजामुद्दीन में तबलीगी जमात के मरकज में लोग इकट्ठा हुए और संक्रमण फैला तो कुछ लोग कोराना को मुसलमान बनाने में लग गए।

सांप्रदायिक आरोप-प्रत्यारोप भी शुरू

तबलीगी जमात के मरकज में शामिल हजारों लोगों की वजह से सिर्फ कोरोना संक्रमित मरीजों की संख्या नहीं बढ़ी है, बल्कि सांप्रदायिक आरोप-प्रत्यारोप भी शुरू हो गए हैं। जिस तरह से भारत में हर समस्या को हिंदू-मुस्लिम के नजरिए से देखा जाने लगता है

निजामुद्दीन मरकज़ से 200 लोगों को जांच के लिए अस्पताल भेजा

कोरोना संक्रमण के बढ़ते खतरों के बीच दक्षिण पूर्वी दिल्ली के निजामुद्दीन स्थित तब्लीगी जमात के मरकज से दस से अधिक देशों के नागरिकों