‘मशरिक़ी हूर’ पारसी रंगमंच से रूबरू

मध्यप्रदेश नाट्य विद्यालय में नाटक ‘मशरिक़ी हूर’ देखते हुए ऐसा लग रहा था मानो छत्तीसगढ़ लोकनाट्य या हबीब तनवीर साहब की कोई प्रस्तुति देख रहा हूँ