लंदन में नए दक्षिण एशिया का सपना

लंदन के दस दिन के प्रवास में ‘दक्षिण एशियाई लोक संघ’ (पीपल्स यूनियन ऑफ साउथ एशिया) का मेरा विचार जड़ पकड़ता लगता है। पड़ौसी देशों के ही नहीं, ब्रिटेन और इजरायल के भद्र लोगों ने भी सहयोग का वादा किया है। उनका कहना था कि इस तरह के क्षेत्रीय संगठन दुनिया के कई महाद्वीपों में काम कर रहे हैं लेकिन क्या वजह है कि दक्षिण एशिया में ऐसा कोई संगठन नहीं है, जो इसके सारे देशों के लोगों को जोड़ सके।