शादियों में मजहब का अड़ंगा?

ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल ला बोर्ड ने भारत के मुसलमानों के नाम आज एक अपील जारी करके कहा है कि वे किसी गैर-मुस्लिम से शादी न करें। यदि वह ऐसा करते हैं तो यह बहुत ही दुखद और दुर्भाग्यपूर्ण होगा

और ध्वस्त बाबरी मस्जिद!

साढ़े चार सौ साल पहले 1528 की घड़ी में मंदिर ध्वंस-मस्जिद निर्माण को भुलाया नहीं जा सका तो छह दिसंबर 1992 को भी सभ्यतागत संघर्ष के इतिहास में बतौर मस्जिद ध्वंस-मंदिर निर्माण की याद्दाश्त अमिट रहेगी। उस दिन जो हुआ वह 15 अगस्त 1947 को आधी रात की आजादी से बड़ी घटना थी।

अनुभव के भी विरुद्ध

वर्तमान भाजपा सरकारें इसी बात को अपनी खूबी मानती हैं कि वे एक्सपर्ट की बातें नहीं सुनतीं। बल्कि उनके नेता अपने रॉ विज्डम यानी कच्ची बुद्धि से चलना पसंद करते हैँ। जबकि भी प्रस्तावित कानून का असर यह होगा कि समाज में हाशिए पर मौजूद लोगों को भारी नुकसान होगा। papulation control policy BJP : जनसंख्या विज्ञान के मुताबिक तो यह साफ है कि भारत में जन संख्या नियंत्रण के लिए फिलहाल ऐसे किसी कानून की जरूरत नहीं है, जिसमें आबादी बढ़ोतरी रोकने के लिए जोर-जबरदस्ती का सहारा लिया जाए। आखिर किसी परिवार को सरकारी कल्याण योजनाओं से वंचित करना भी एक प्रकार की जोर-जबरदस्ती ही है। ये जरूरत इसलिए नहीं है कि भारत में आबादी नियंत्रण की प्रक्रिया पटरी पर है। लगभग हर राज्य में रिप्लेसमेंट रेट (वह जन्म दर जिसके हासिल होने के बाद आबादी नहीं बढ़ती) हासिल करने की दिशा में उल्लेखनीय प्रगति हुई है। कुछ राज्य तो इस लक्ष्य से भी आगे बढ़ गए हैँ। बहरहाल, ऐसा करना तजुर्बे के खिलाफ है। यह आम राय है कि भारत में जनसंख्या नियंत्रण कार्यक्रम को जितना नुकसान इमरजेंसी में हुई जोर-जबरदस्ती से पहुंचा, उतना किसी और चीज से नहीं। Read also भारत में बढ़ती जनसंख्या पर चल रही… Continue reading अनुभव के भी विरुद्ध

लव जिहादः दुखद लेकिन रोचक

Love Jihad Hindu Muslim : नासिक में अभी-अभी लव जिहाद का दुखद लेकिन बड़ा रोचक किस्सा सामने आया है। वह रोचक इसलिए है कि 28 साल की एक हिंदू लड़की रसिका के माता-पिता ने सहमति दी कि वह अपने पुराने सहपाठी आसिफ खान के साथ शादी कर ले। आसिफ के माता-पिता की भी इससे सहमति थी। यह सहमति इसलिए हुई कि रसिका में थोड़ी विकलांगता थी और उसे कोई योग्य वर नहीं मिल रहा था। उसके पिता ने, जो कि जवाहरात के संपन्न व्यापारी हैं, आसिफ के माता-पिता से बात की और वे अपने बेटे की शादी रसिका के साथ करने के लिए राजी हो गए। 18 जुलाई 2021 की तारीख तय हो गई। मराठी भाषा और देवनागरी लिपि में निमंत्रण छप गए। उन पर ‘वक्रतुंड महाकाय’ वाला मंत्र भी छपा था और हवन के साथ सप्तपदी (सात फेरे) से विवाह-संस्कार संपन्न होना था। लेकिन ज्यों ही यह निमंत्रण-पत्र बंटा, नासिक में खलबली मच गई। रसिका के पिता प्रसाद अडगांवकर को धमकियां आने लगीं। इस शादी को लव-जिहाद की संज्ञा दी गई और तरह-तरह के आरोप लगने लगे। रसिका के पिता ने अपने रिश्तेदारों और मित्रों से सलाह की तो ज्यादातर ने सलाह दी कि शादी का कार्यक्रम रद्द किया… Continue reading लव जिहादः दुखद लेकिन रोचक

नीतीश को पंसद नहीं योगी का फॉर्मूला!

पटना। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को जनसंख्या नियंत्रण ( nitish kumar population policy ) का उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का फॉर्मूला पसंद नहीं आया है। उन्होंने कहा है कि देश की जनसंख्‍या को सिर्फ कानून बना कर नियंत्रित नहीं किया जा सकता, इसके लिए और भी उपाय करने होंगे। नीतीश ने अपनी पार्टी के अंदर कथित तौर पर चल रही खींचतान पर भी चुप्पी तोड़ी और कहा कि सब कुछ ठीक है। राष्ट्रीय स्तर पर जनसंख्या नियंत्रण नीति की जरूरत के बारे में पूछे जाने पर नीतीश ने कहा- एक बात हम साफ साफ कह रहे, जो राज्‍य जो करना चाहे करें लेकिन हमारा मानना है कि जनसंख्‍या को केवल कानून बना कर नियं‍त्रित नहीं किया जा सकता यह ठीक से संभव नहीं।  उन्‍होंने आगे कहा- आप चीन को ही देख लीजिए, एक से दो किया, अब दो के बाद क्‍या हो रहा है। आप किसी भी देश का हाल देख लीजिए। यह सबसे बड़ी चीज है कि महिलाएं पढ़ी-लिखी रहेंगी तो इतनी जागृति आती है कि प्रजनन दर अपने आप कम होती है। सर्वे से भी इस तरह की बातों की पुष्टि है। nitish kumar population policy : नीतीश कुमार ने कहा- मेरा मानना है कि… Continue reading नीतीश को पंसद नहीं योगी का फॉर्मूला!

जनसंख्या नीति राजनीतिक एजेंडा है!

population policy political agenda : सबसे पहले तो यह डिस्क्लेमर जरूरी है कि मैं जनसंख्या विस्फोट का समर्थन नहीं कर रहा हूं और न देश की बढ़ती आबादी पर नियंत्रण के उपायों का विरोधी हूं। आबादी को नियंत्रित करने के लिए निश्चित रूप से कुछ उपाय किए जाने चाहिए। यह भारत के लिए कई कारणों से बहुत जरूरी है और तभी देश की पहली सरकार ने 1952 में जनसंख्या नियंत्रण कानून बनाया था। भारत दुनिया का पहला देश है, जिसने जनसंख्या नियंत्रण की जरूरत समझी थी और उसके लिए कानून बनाया था। लेकिन वह कानून बाध्यकारी नहीं था और अनुपालन नहीं करने वालों के लिए किसी सख्त कार्रवाई का प्रावधान नहीं किया गया था। इमरजेंसी के समय के दो साल को छोड़ दें तो भारत में लोगों को जागरूक बना कर, स्वास्थ्य समस्याओं और संसाधनों के सीमित होने की जानकारी देकर और समझा-बूझा कर ही जनसंख्या रोकने के उपाय किए गए। देर से ही सही लेकिन ये स्वैच्छिक उपाय काम करने लगे और भारत में जनसंख्या वृद्धि की दर तेजी से स्थिर होने की तरफ बढ़ने लगी। भारत में राष्ट्रीय स्तर पर औसत प्रजनन दर 2.2 फीसदी है। किसी भी देश में अगर प्रजनन दर 2.1 फीसदी हो जाती है… Continue reading जनसंख्या नीति राजनीतिक एजेंडा है!

दो बच्चों की राजनीति

उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जनसंख्या नियंत्रण के लिए जो विधेयक ( politics of two children ) प्रस्तावित किया है, उसकी आलोचना विपक्षी दल इस आधार पर कर रहे हैं कि यह मुस्लिम-विरोधी है। यदि वह सचमुच मुस्लिम-विरोधी होता तो वह सिर्फ मुसलमानों पर ही लागू होता याने जिस मुसलमान के दो से ज्यादा बच्चे होते, उसे तरह-तरह के सरकारी फायदों से वंचित रहना पड़ता, जैसा कि मुगल-काल में गैर-मुस्लिमों के साथ कुछ मामलों में हुआ करता था लेकिन इस विधेयक में ऐसा कुछ नहीं है। यह सबके लिए समान है। क्या हिंदू, क्या मुसलमान, क्या सिख, क्या ईसाई और क्या यहूदी! politics of two children : यह ठीक है कि मुसलमानों में जनसंख्या के बढ़ने का अनुपात ज्यादा है लेकिन उसका मुख्य कारण उनकी गरीबी और अशिक्षा है। हिंदुओं में भी उन्हीं समुदायों में बच्चे ज्यादा होते हैं, जो गरीब हैं, अशिक्षित हैं और मेहनतकश हैं। जो शिक्षित और संपन्न मुसलमान हैं, उनके भी परिवार आजकल प्रायः सीमित ही होते हैं लेकिन भारत में जो लोग सांप्रदायिक राजनीति करते हैं, वे अपने-अपने संप्रदाय का संख्या-बल बढ़ाने के लिए लोगों को उकसाते हैं। ऐसे लोगों को हतोत्साहित करने के लिए उत्तरप्रदेश का यह कानून बहुत कारगर सिद्ध हो सकता… Continue reading दो बच्चों की राजनीति

सबके लिए एक-जैसा कानून कब बनेगा?

uniform code of conduct : दिल्ली उच्च न्यायालय ने एक बार फिर मांग की है कि सरकार देश के नागरिकों के लिए समान आचार संहिता ( uniform code of conduct  ) बनाए और संविधान की धारा 44 में जो अपेक्षा की है, उसे पूरा करे। समान आचार संहिता का अर्थ यह नहीं है कि देश के 130 करोड़ नागरिक एक ही भाषा बोलें, एक ही तरह का खाना खाएं या एक ही ढंग के कपड़े पहनें।उस धारा का अभिप्राय बहुत सीमित है। वह है, शादी, तलाक, उत्तराधिकार, गोद लेने आदि की प्रक्रिया में एकता। भारत में इन मामलों में इतना अधिक पोगापंथ और रूढ़िवाद चलता रहा है कि आम आदमी का जीना दूभर हो गया था। इसलिए 1955 में हिंदू कोड बिल पास हुआ लेकिन यह कानून भी कई आदिवासी और पिछड़े लोग नहीं मानते। वे अपनी घिसी-पिटी रूढ़ियों के मुताबिक शादी, तलाक, उत्तराधिकार और गोद लेने के अपने ही नियम चलाते रहते हैं। वे अपने आप को हिंदू कहते हैं लेकिन हिंदू कोड बिल को नहीं मानते। Corona Update: दुनिया में बढ़ रहा है कोरोना, सबूत हैं कि महामारी अभी खत्म नहीं हुई इसी तरह का एक तलाक का मुकदमा दिल्ली उच्च न्यायालय में आया हुआ था। उच्च न्यायालय… Continue reading सबके लिए एक-जैसा कानून कब बनेगा?

भागवत के भाषण का मतलब

RSS chief mohan Bhagwat speech : राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत का यह कहना मामूली नहीं है कि ‘यदि कोई कहता है कि मुसलमान यहां नहीं रह सकता है तो वह हिंदू नहीं है’। उनकी यह बात भी मामूली नहीं है कि ‘गाय के नाम पर दूसरों को मारने वाले हिंदुत्व के विरोधी हैं’। देश के मुसलमानों को भरोसा दिलाने वाली उनकी यह बात भी गैरमामूली नहीं है कि ‘मुसलमान इस भय चक्र में न फंसें कि भारत में इस्लाम खतरे में है’। मुस्लिम राष्ट्रीय मंच के कार्यक्रम में उनकी कही यह बात भी गौरतलब है कि ‘वे छवि बदलने या वोट बैंक की राजनीति के लिए इस कार्यक्रम में नहीं शामिल हुए। संघ राजनीति नहीं करता है और न छवि की चिंता में रहता है। संघ का काम राष्ट्र और समाज के हर वर्ग के लिए काम करना है’। यह भी पढ़ें: क्या शिव सेना-भाजपा में कोई खिचड़ी? मुस्लिम राष्ट्रीय मंच के कार्यक्रम में संघ प्रमुख का दिया पूरा भाषण पहली नजर में देखने पर लगता है कि यह संघ की विचारधारा के बारे में स्थापित धारणा से बिल्कुल उलट है। लेकिन असल में ऐसा नहीं है। इस भाषण के कुछ अंश जरूर संघ की विचारधारा से… Continue reading भागवत के भाषण का मतलब

भागवत और मोदीः हिम्मत का सवाल

bhagwat and pm modi : राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के मुखिया मोहन भागवत ने मुसलमानों के बारे में जो हिम्मत दिखाई, यदि नरेंद्र मोदी चाहते तो वैसी हिम्मत वे चीन के बारे में भी दिखा सकते थे। चीनी कम्युनिस्ट पार्टी के सौ साल पूरे होने पर चीन के राष्ट्रपति शी जिन फिंग को अनेक राष्ट्राध्यक्षों ने बधाइयां दीं लेकिन हमारे मोदीजी चुप्पी खींच गए, हालांकि दोनों की काफी दोस्ती रही है। दूध पीना और महंगा! Mother Dairy ने भी बढ़ाए दूध के दाम, कल से 2 रुपए देने होंगे ज्यादा मोदी की मजबूरी थी, क्योंकि वे बधाई देते तो कांग्रेसी उनके पीछे पड़ जाते। वे कहते कि गलवान घाटी पर हमला बोलने वाले चीन से सरकार गलबहियां कर रही है। उधर 4 जुलाई को अमेरिका का 245 वां जन्म-दिवस था। मोदी ने बाइडन को बड़ी गर्मजोशी से बधाई दी। यह बिल्कुल ठीक किया लेकिन अब पता नहीं कि चीन के स्थापना दिवस (1 अक्तूबर) पर वे उसको बधाई भेजेंगे या नहीं ? इसी प्रकार 1 अगस्त को चीन की पीपल्स आर्मी के जन्म दिन पर क्या हमारा मौन रहेगा? 15 अगस्त के मौके पर शी जिन फिंग की भी परीक्षा हो जाएगी लेकिन इनसे भी बड़ा सवाल यह है कि ब्रिक्स… Continue reading भागवत और मोदीः हिम्मत का सवाल

यूपी में किसकी पालकी ढोएंगे ओवैसी?

benefits from asaduddin owaisiin UP : ओवैसी के तेवरों से लगता है कि बीजेपी के बजाय सपा-बसपा ही उनके निशाने पर होंगी। दरअसल उनका मक़सद इन दोनों पार्टियों को मिलने वाले मुस्लिम वोटों को झटकना है। ….वे उन्हीं तौर-तरीक़ों के साथ उतर रहे हैं जैसा कि उनसे पहले डॉक्टर जलील फ़रीदी, डॉक्टर मसूद और डॉक्टर अयूब उतरे थे। लिहाज़ा ओवैसी का भी वही हश्र होना तय है जो इन लोगों का हुआ है। 2012 के चुनाव में पीस पार्टी का कुर्मीयों के नेतृत्व में पिछड़ों की बात करने वाले अपना दल के साथ गठबंधन था। लेखक: यूसुफ़ अंसारी benefits from asaduddin owaisiin UP  : ऑल इंडिया मजलिस ए इत्तेहादुल मुस्लिमीन के अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी ने रविवार को उत्तर प्रदेश में 100 सीटों पर विधानसभा चुनाव लड़ने का ऐलान कर दिया है। ओवैसी का उत्तर प्रदेश में ओमप्रकाश राजभर की भारतीय सुहेलदेव समाज पार्टी के साथ गठबंधन है। इसके अलावा किसी और पार्टी से गठबंधन की बात नहीं हुई है। कुछ दिनों से चर्चा थी कि ओवैसी की पार्टी का बीएसपी के साथ गठबंधन हो सकता है लेकिन मायावती ने अकेले ही चुनाव लड़ने का ऐलान करके इन अटकलों को विराम दे दिया है। असदुद्दीन ओवैसी के इस ऐलान के बाद यह… Continue reading यूपी में किसकी पालकी ढोएंगे ओवैसी?

हिंदुआना हरकतः हिंदुआना आदत

Religion in India : अमेरिका के प्यू रिसर्च सेंटर ने भारत की जनता के बारे में एक बड़ा रोचक सर्वेक्षण उपस्थित किया है। उसने भारत के लगभग तीस हजार लोगों से पूछताछ करके कुछ निष्कर्ष दुनिया के सामने रखे हैं। उसने भारत के विभिन्न धर्मों के प्रति लोगों की राय इकट्ठी की है। उस राय को पढ़कर लगता है कि धर्म-निरपेक्षता ( Religion in India ) या पंथ-निरपेक्षता की दृष्टि से भारत दुनिया का शायद सर्वश्रेष्ठ देश है। इस सर्वेक्षण में भारत के हिंदू, मुसलमान, सिख, जैन, बौद्ध, ईसाई और आदिवासियों से भी सवाल पूछे गए थे। 84 प्रतिशत लोगों ने कहा कि किसी भी ‘सच्चे भारतीय’ के लिए यह जरुरी है कि वह सभी धर्मों का सम्मान करे। 80 प्रतिशत लोगों ने कहा कि भारत में उनको उनके धर्म के पालन की पूर्ण स्वतंत्रता है। लेकिन उनमें से ज्यादातर लोगों ने कहा कि उनका गहरा संबंध और व्यवहार प्रायः अपने ही धर्म के लोगों के साथ ही होता है। उनका यह भी मानना था कि अंतरधार्मिक विवाह अनुचित हैं। यह भी पढ़ें: जम्मू में ड्रोन-हमला कुछ हिंदुओं की मान्यता यह भी थी कि सच्चा भारतीय वही हो सकता है, जो हिंदू है या हिंदीभाषी हैं इस तरह की बात… Continue reading हिंदुआना हरकतः हिंदुआना आदत

औवेसी से यूपी में फायदा किसको?

भाजपा एआईएमआईएम के मुस्लिम कयादत के सवाल को हवा दे रही है। मुसलमानों में जितनी तेज अपने नेतृत्व की मांग होगी भाजपा को हिन्दु ध्रुविकरण करने में उतनी आसानी होगी।.. औवेसी के चुनाव लड़ने की घोषणा से उसे थोड़ी राहत मिली है। औवेसी की मुस्लिम कयादत के जवाब में हिन्दु नेतृत्व का माहौल अपने आप बनना शुरु हो गया है। और हिन्दु नेतृत्व की बात होते ही यूपी में मुख्यमंत्री योगी का प्रोफाइल अपने आप बढ़ जाता है। up assembly election owaisi : यह बहुत मजेदार है, दिलचस्प है कि पहली बार उत्तर प्रदेश में मुसलमान वोटरों पर इतना फोकस हो रहा है। मुसलमान उत्तर प्रदेश में या देश में कहीं भी इतना नहीं है कि किसी भी पार्टी को जीता या हरा सके। यह काम हमेशा से देश के बहुसंख्यक हिन्दु ही करते रहे हैं। हर चुनाव में जातीय समीकरण ही सबसे ज्यादा चर्चा का विषय होते हैं। ब्राह्मण क्या करेंगे? दलित कहां जाएंगे? ओबीसी में गैर यादवों का क्या रुख रहेगा ? जैसे सवालों से ही राजनीतिक विश्लेषणकर्ता जूझते रहते हैं। मगर इस बार औवेसी की यूपी में सौ सीट लड़ने की घोषणा ने चुनाव का नक्शा ही बदल दिया। यह भी पढ़ें: परिवार है तो कांग्रेस की… Continue reading औवेसी से यूपी में फायदा किसको?

One Child Policy India : नाकाम योजना पर अमल

One Child Policy India : अनुभव यह है कि सामाजिक विकास के साथ परिवार नियोजन पर अमल लोग खुद करने लगते हैं। चीन में वन चाइल्ड पॉलिसी से जन्म दर चिंताजनक स्तर तक गिर गई और लैंगिक असंतुलन भी पैदा हुआ। विंडबना ही है कि जब चीन अपनी गलती सुधार रहा है, भारत में उसे दोहराया जा रहा है। असम सरकार अगर तथ्यों और अनुभव का अध्ययन करती, तो वह इस जनसंख्या नीति को कतई नहीं अपनाती। लेकिन अगर मकसद सांप्रदायिक भावनाओं को भड़काए रखने का हो, तो फिर इतिहास के अनुभवों से कुछ सीखने की उम्मीद रखना बेकार है। वरना, असम सरकार कहीं दूर नहीं देखना था। अपने पड़ोस के देश चीन की तरफ झांकना भर था, जहां 1980 के दशक में वन चाइल्ड यानी एक बच्चे की इजाजत देने की नीति लागू की गई थी। नतीजा नुकसानदेह रहा। आखिरकार 2015 में आकर चीन ने उस नीति को तिलांजलि दी। और अब अधिक बच्चों के जन्म को प्रोत्साहन देने की नीति पर चल रही है। क्यों, इस सवाल पर बाद में आएंगे। पहले गौर करें कि असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा शर्मा ने एलान किया है कि असम सरकार की विशेष योजनाओं के तहत लाभ लेने के लिए दो… Continue reading One Child Policy India : नाकाम योजना पर अमल

यह कैसा धर्मांतरण है ?

उत्तर प्रदेश के आतंकवाद निरोधक दस्ते ने धर्मांतरण के एक बहुत ही घटिया षड़यंत्र को धर दबोचा है। ये षड़यंत्रकारी कई गरीब, अपंग, लाचार और मोहताज़ लोगों को मुसलमान बनाने का ठेका लिये हुए थे। इन मजहब के दो ठेकेदारों— उमर गौतम और जहांगीर आलम कासमी— को गिरफ्तार किए जाने के बाद पता चला है कि उन्होंने एक हजार लोगों को मुसलमान बनाया है।कैसे बनाया है ? उन्हें कुरान शरीफ के उत्तम उपदेशों को समझा कर नहीं, इस्लाम के क्रांतिकारी सिद्धांतों को समझाकर नहीं और पैगंबर मोहम्मद के जीवन के प्रेरणादायक प्रसंगों को बताकर नहीं, बल्कि लालच देकर, डरा-धमकाकर, हिंदू धर्म की बुराईयां करके। नोएडा के एक मूक-बधिर आवासी स्कूल के बच्चों को फुसलाकर योजनाबद्ध ढंग से उनका धर्मांतरण करवाया गया और उनकी शादी मुस्लिम लड़कियों से करवा दी गई। यह भी पढ़ें: ईरान में रईसी की जीत यह काम सिर्फ दिल्ली और नोएडा में ही नहीं हुआ, महाराष्ट्र, केरल, आंध्र, हरियाणा और उत्तरप्रदेश में भी इस षड़यंत्र के तार फैले हुए हैं। इस घटिया काम की जांच में यह पाया गया कि उन्हें भरपूर पैसा भी मिलता रहा। इस पैसे के स्त्रोत आईएसआईएस और कुछ अन्य विदेशी एजेन्सियां भी रही हैं। इस राष्ट्रविरोधी काम को अंजाम देने का खास… Continue reading यह कैसा धर्मांतरण है ?

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