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Saturday, April 10, 2021
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मोहन भागवत

परंपरा – कर्मकांड किसकी ? राष्ट्र की या धर्म की…?

क्या ऋषिकेश की गंगा को कानपुर की मैली गंगा में भी शुद्ध रखा जा सकता हैं ? वर्षों से केंद्र की काँग्रेस और अब मोदी सरकार कोशिश करती रही हैं, पर परिणाम वही “ढाक के तीन पात” रहे।

संघ से नए लोग जाएंगे भाजपा में

भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जगत प्रकाश नड्डा ने अपनी टीम में राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ के कुछ और लोगों को शामिल करने का रास्ता बना लिया है। संघ के प्रवक्ता रहे और पार्टी में महासचिव की जिम्मेदारी निभा चुके राम माधव को राष्ट्रीय टीम में नहीं लिए जाने के बाद माना जा रहा था कि नड्डा की टीम में संघ के लोग कम होंगे।

मोहन भागवत के विचारों पर एक स्वयंसेवक

प्रत्येक वर्ष की भाँति इस वर्ष भी राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक श्री मोहन भागवत जी ने दशहरा उत्सव के उपलक्ष्य में अपना भाषण दिया उससे पहले श्री भागवत जी ने शस्त्र-पूजन किया। फिर 70 मिनट का अपना उद्बोधन किया।

क्या आर.एस.एस. हिन्दू धर्म से दूर हो रहा है?

स्वामी विवेकानन्द ने कहा था कि धर्म के बारे में अंतिम बात कही जा चुकी है। सभी अन्य मनीषियों ने भी धर्म को केवल विभिन्न रूपों में समझाने का ही कार्य किया। किसी ने उसे सुधारने या बदलने की आवश्यकता नहीं बताई।

भागवत का सरकार को पूरा समर्थन!

भारतीय जनता पार्टी और राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ का आपस में अन्योन्याश्रय संबंध है। इसके बावजूद कई मसलों पर दोनों की राय अलग होती है। संघ और उसके अनुषंगी संगठन सरकार की कई नीतियों का विरोध करते हैं। जैसे स्वदेशी जागरण मंच सरकारी कंपनियों को बेचे जाने या श्रम सुधार जैसे कदमों का विरोध करता रहा है।

बंधुत्व ही हिंदुत्व है: भागवत

हर विजयदशमी को याने दशहरे के दिन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के मुखिया नागपुर में विशेष व्याख्यान देते हैं, क्योंकि इस दिन संघ का जन्म-दिवस मनाया जाता है। इस बार संघ-प्रमुख मोहन भागवत का भाषण मैंने टीवी चैनलों पर देखा और सुना।

चीन पर भागवत का निशाना

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सरसंघचालक मोहन भागवत ने रविवार को विजयादशमी उत्सव के अवसर पर अपने संबोधन में कहा कि भारत को चीन से निपटने के लिए पूरी तरह से

क्या मुसलमान खुशहाल हैं ?

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के मुखिया श्री मोहन भागवत के इस कथन पर बड़ी बहस चल रही है कि ‘‘दुनिया में सबसे ज्यादा संतुष्ट कोई मुसलमान हैं तो भारत के मुसलमान हैं।’’ यही बात किसी मुसलमान नेता या आलिम-फाजिल के मुंह से निकलती तो उसकी बात ही कुछ और होती लेकिन ऐसी बात निकले तो कैसे निकले ?

सो, नेहरूवाद ही सांस्कृतिक राष्ट्रवाद है?

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के दो सर्वोच्च नेताओं ने कहा कि दिवंगत पूर्व-राष्ट्रपति एवं कांग्रेस नेता प्रणब मुखर्जी ‘‘संघ के मार्गदर्शक जैसे थे और उन का जाना आर.एस.एस. के लिए अपूरणीय क्षति है।

सहमति से सरकार चलाने का गुण किसने सीखा

पूर्व राष्ट्रपति, भारत रत्न प्रणब मुखर्जी के निधन के बाद उनके लिए जितनी श्रद्धांजलि लिखी गई है या उनके राजनीतिक योगदान पर जितना कुछ लिखा-कहा गया है उसकी केंद्रीय थीम यह है कि वे सहमति बनाने में माहिर राजनेता थे
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