पर्यावरण सुधरने का भ्रम

पिछले हफ्ते आई इस खबर ने कई भ्रम तोड़ दिए। इसका मतलब यह है कि प्राकृतिक मामलों में बहुत कुछ हमें जो दिखता या जिसका प्रत्यक्ष अनुभव होता है, वैसा वास्तव में नहीं होता।

बेलगाम है ग्लोबल वॉर्मिंग

कोरोना महामारी के बीच भले जलवायु परिवर्तन की चर्चा दब गई हो, लेकिन ये खतरा टला नहीं है। बल्कि बढ़ता जा रहा है।