शरणार्थियों से बेरुखी क्यों?

म्यांमार के शरणार्थियों के मामले में भारत सरकार ने क्यों निर्मम रुख अपना रखा है, इसे समझना मुश्किल है। रोहिंग्या शरणार्थियों के बारे में सरकार के ऐसे रुख पर समझा गया था कि चूंकि रोहिंग्या मुसलमान हैं, इसलिए ये मौजूदा भाजपा सरकार की हिंदुत्व की नीति से मेल नहीं खाते। सरकार किसी रूप में मुस्लिम शरणार्थियों के प्रति नरम रुख अपनाते नहीं दिखना चाहती। लेकिन अब आ रहे शरणार्थी बौद्ध हैं, जिन्हें बेरहमी से म्यांमार लौटाने पर सरकार तुली हुई है। क्या वह म्यांमार के सैनिक शासकों को नाराज नहीं करना चाहती, ताकि वे पूरी तरह चीन की गोद में ना चले जाएं? या उसे लगता है कि आज लोकतंत्र और मानव अधिकार के नाम पर जो दबाव उन सैनिक शासकों पर पड़ा है, वह कभी घूम फिर कर भारत सरकार पर भी आ सकता है? इन तथ्यों पर गौर करें। पिछले दिनों म्यांमार के कई निर्वाचित जन प्रतिनिधि भाग कर भारत आ गए। पूर्व नेशनल लीड फॉर डेमोक्रेसी सरकार (जिसका तख्ता पलटा गया) से जुड़ी संस्था सीआरपीएच के मुताबिक उन जन प्रतिनिधियों को डर था कि कई और जन-प्रतिनिधियों की तरह सेना उन्हें भी हिरासत में ले लेगी। उधर भारत के पुलिस अधिकारियों ने पुष्टि की है और कहा… Continue reading शरणार्थियों से बेरुखी क्यों?

म्यांमारः भारत दृढ़ता दिखाए

म्यांमार में सेना का दमन जारी है। 600 से ज्यादा लोग मारे गए हैं। आजादी के बाद भारत के पड़ौसी देशों— पाकिस्तान, बांग्लादेश, अफगानिस्तान, नेपाल, मालदीव— आदि में कई बार फौजी और राजनीतिक तख्ता-पलट हुए और उनके खिलाफ इन देशों की जनता भड़की भी लेकिन म्यांमार में जिस तरह से 600 लोग पिछले 60-70 दिनों में मारे गए हैं, वैसे किसी भी देश में नहीं मारे गए। म्यांमार की जनता अपनी फौज पर इतनी गुस्साई हुई है कि कल कुछ शहरों में प्रदर्शनकारियों ने फौज का मुकाबला अपनी बंदूकों और भालों से किया। म्यांमार के लगभग हर शहर में हजारों लोग अपनी जान की परवाह किए बिना सड़कों पर नारे लगा रहे हैं। लेकिन फौज है कि वह न तो लोकनायक सू ची को रिहा कर रही है और न ही अन्य छोटे-मोटे नेताओं को! उन पर उल्टे वह झूठे आरोप मढ़ रही है, जिन्हें हास्यास्पद के अलावा कुछ नहीं कहा जा सकता। यूरोप और अमेरिका के प्रतिबंधों के बावजूद म्यांमार की फौज अपने दुराग्रह पर क्यों डटी हुई है ? इसके मूल में चीन का समर्थन है। चीन ने फौज की निंदा बिल्कुल नहीं की है। अपनी तटस्थ छवि दिखाने की खातिर उसने कह दिया है कि फौज और… Continue reading म्यांमारः भारत दृढ़ता दिखाए

म्यांमार पर कूटनीति अब ठीक

मैने चार-पांच दिन पहले लिखा था कि म्यांमार (बर्मा) में चल रहे नर-संहार पर भारत चुप क्यों है ? उसका 56 इंच का सीना कहां गया लेकिन अब मुझे संतोष है कि भारत सरकार ने संयुक्त राष्ट्र संघ और दिल्ली, दोनों स्थानों से म्यांमार में चल रहे फौजी रक्तपात पर अपना मुंह खोलना शुरु कर दिया है। 56 इंच का सीना अभी न तो भारत ने दिखाया है और न ही भिड़ाया है। अभी तो उसने सिर्फ सीने की कमीज के बटनों पर उंगलियां छुआई भर हैं। इसमें शक नहीं कि म्यांमार में अभी जो कुछ हो रहा है, वह उसका आतंरिक मामला है। भारत को उससे कोई ऐसा सीधा नुकसान नहीं हो रहा है कि उससे बचने के लिए भारत अपना खांडा खड़काए लेकिन सैकड़ों निहत्थे और निर्दोष लोगों का मारा जाना न केवल लोकतंत्र की हत्या है बल्कि मानव-अधिकारों का भी हनन है। म्यांमार में फिलहाल ऐसी स्थिति नहीं बनी है, जैसी कि गोआ और पूर्वी पाकिस्तान में बन गई थी। लेकिन दो माह तक भारत की चुप्पी आश्चर्यजनक थी। उसके कुछ कारण जरुर रहे हैं। जैसे बर्मी फौज के खिलाफ बोल कर भारत सरकार उसे पूरी तरह से चीन की गोद में धकेलना नहीं चाहती होगी। बर्मी… Continue reading म्यांमार पर कूटनीति अब ठीक

भारत की विदेश नीति खत्म!

बहुत बुरा लगा अपनी ही प्रजा पर गोलियां चलाने वाली सेना के साथ भारतीय सेना की उपस्थिति की खबर सुन कर! उफ! क्या हो गया है भारत? हम किन मूल्यों, आदर्शों और संविधान में जीते हुए हैं? जो हमारा धर्म है, हमारा संविधान है, हमारी व्यवस्था है, उसमें कैसे यह संभव जो हम खूनी के साथ खड़े हों। खूनी का, लोगों का कत्लेआम करने वाली सेना, तानाशाही का भारत हौसला बढ़ाए यह हम भारतीयों के लिए, दुनिया के कथित सबसे बड़े लोकतंत्र के लिए चुल्लू भर पानी में डूब मरने वाली बात है या जिंदा रहने की बात? पता नहीं आपने जाना या नहीं कि प्रजा के खून से रंगी म्यांमारी सेना के 27 मार्च के सालाना दिवस के समारोह में भारतीय सेना के प्रतिनिधिसैनिक अटैची ने तानाशाह सेनापति का हौसला बढ़ाया। दुनिया में भारत की खबर बनी। फालतू का तर्क है कि जब बर्मा याकि म्यांमार से कूटनीतिक संबंध है तो डिफेंस अटैची को सेना की परेड में जाना ही होगा। खूनी सेनापति को सैल्यूट मारनी होगी। पर क्या अमेरिका, ब्रिटेन व यूरोपीय संघ के लोकतांत्रिक देशों के म्यांमार से कूटनीतिक रिश्ते नहीं हैं? म्यांमार में जब इनके दूतावास हैं और इन्होंने सेना की परेड में उपस्थिति दर्ज नहीं… Continue reading भारत की विदेश नीति खत्म!

कहानी से संभलेगी बात?

म्यांमार के सैनिक शासक अपनी छवि सुधारना चाहते हैं। यानी वे चाहते हैं कि जिस तरह का दमन कर रहे हैं, दुनिया उस पर ध्यान ना दे। या ध्यान दे तो यह समझे कि आखिर वे क्यों ऐसा कर रहे हैं।

आखिर क्या अच्छा हो रहा है भारत में?

म्यांमार में लोकतंत्र खत्म करके सैनिक तानाशाही आई तो भाजपा के सांसद सुब्रह्मण्यम स्वामी ने ट्विट करके भारत सरकार को ललकारा। उन्होंने कहा कि भारत सरकार इस पर चुप नहीं बैठे

जहां चाह, वहां राह

म्यांमार में इस बार सैनिक शासकों के लिए पहले जैसी आसानी नहीं है। इस बार वहां की जनता ने साफ कर दिया है कि उन्हें लोकतंत्र का गला घोंटा जाना मंजूर नहीं है

म्यांमार में गजब का जज्बा

great spirit in myanmar : म्यांमार में सैनिक तख्ता पलट के बाद इस बार वहां की जनता ने गजब का जज्बा दिखाया है।

फेसबुक ने म्यांमार के मिलिट्री कंटेंट पर प्रतिबंध लगाया

दक्षिण एशियाई देश म्यांमार में सैन्य तख्तापलट के खिलाफ विरोध प्रदर्शन जारी है। इस बीच फेसबुक ने म्यांमार की सेना द्वारा ‘गलत सूचना’ के प्रसार को रोकने के लिए चलाए जा रहे

म्यांमार में सैन्य शासन के खिलाफ प्रदर्शन

म्यांमार के सबसे बड़े शहर यंगून में सैन्य तख्तापलट के खिलाफ रविवार को हजारों लोगों ने प्रदर्शन किया और देश की सर्वोच्च नेता आंग सान सू ची की रिहाई की मांग की।

जो अंदेशा था, वो हुआ

तो आखिरकार म्यांमार में सेना ने तख्ता पलट दी। नव निर्वाचित संसद की बैठक से ठीक पहले वाली रात में वहां एक दशक पहले वाली हालत बहाल कर दी गई। आंग सान सू ची सहित तमाम राजनेता जेल में डाल दिए गए।

म्यांमार में तख्ता—पलट

भारत के पड़ौसी देश म्यांमार (बर्मा या ब्रह्मदेश) में आज सुबह-सुबह तख्ता-पलट हो गया। उसके राष्ट्रपति बिन मिन्त और सर्वोच्च नेता श्रीमती आंग सान सू की को नजरबंद कर दिया गया है

म्यांमार में सेना ने किया तख्तापलट

म्यांमार की सेना ने स्टेट काउंसलर आंग सान सु की और राष्ट्रपति विन मिंट तथा सत्तारूढ पार्टी के अन्य सदस्यों को सोमवार को हिरासत में लेने के बाद एक साल के लिए देश में आपातकाल स्थिति की घोषणा की।

भारत ने म्यांमार से लोकतांत्रिक व्यवस्था बहाल करने का आग्रह किया

भारत ने म्यांमार में तख्तापलट की घटना पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए पड़ोसी देश से लोकतांत्रिक व्यवस्था बहाल करने का आग्रह किया है। विदेश मंत्रालय द्वारा जारी एक बयान में कहा गया है

म्यांमार ने कोविड-19 के खिलाफ राष्ट्रव्यापी टीकाकरण अभियान शुरू किया

म्यांमार ने बुधवार को देशभर में कोविड -19 टीकाकरण कार्यक्रम शुरू किया। समाचार एजेंसी सिन्हुआ की रिपोर्ट के अनुसार, इस अभियान की शुरुआत उन चिकित्सा कर्मचारियों के साथ हुई

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