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Sunday, April 11, 2021
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यूपीए

न आंदोलन हो और न आलोचना

देश देश में इससे पहले भी केंद्र और राज्य सरकारों की नीतियों या फैसले के खिलाफ आंदोलन होते रहे हैं। मनमोहन सिंह की सरकार ने अपने दूसरे कार्यकाल में जितने आंदोलन और प्रदर्शन देखे, उसकी मिसाल आजाद भारत के इतिहास में नहीं है

विपक्ष न तब था न अब है!

इन दिनों जनता में नंबर एक चर्चा, नंबर एक सवाल है विपक्ष कहां है? पेट्रोल-डीजल के दाम रिकार्ड तोड़ ऊंचाई पर है, महंगाई बढ़ रही है और लोगों का रोना है कि विपक्ष नहीं है।

विपक्ष मजबूत होता तो क्या कर लेता?

विपक्ष के मजबूत होने के क्या-क्या लक्षण होते हैं? किस तरह के विपक्ष को मजबूत विपक्ष माना जाना चाहिए? अगर सदन में विपक्षी पार्टियों के ज्यादा सदस्य होंगे तब विपक्ष मजबूत माना जाएगा

कमजोर विपक्ष की बात में राजनीतिक फायदा

देश में राजनीतिक विकल्प नहीं होने का विमर्श कोई नया नहीं है। देयर इज नो ऑल्टरनेटिव यानी टीना फैक्टर की पहले भी चर्चा होती थी

संप्रग की सरकार बनी तो बिहार के युवाओं को मिलेगा रोजगार : राहुल

बिहार में नवादा के हिसुआ में चुनावी रैली को संबोधित करने के बाद कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी शुक्रवार को भागलपुर के कहलगांव पहुंचे और केंद्र सरकार पर सियासी हमला बोलते हुए महागठबंधन के प्रत्याशियों के लिए वोट मांगे।

अमर सिंह तब और अब

काफी लंबे समय के बाद एक समय के बेहद चर्चित नेता अमर सिंह के बारे में कोई खबर पढ़ी। यह खबर अब तक की उनकी शख्सियत के एकदम विपरीत थी। उन्होंने अपने पुराने दोस्त व फिल्म अभिनेता अमिताभ बच्चन...
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चुनाव आयोग के लिए कैसे कैसे विशेषण!

हाल के दिनों में वैसे तो सभी संवैधानिक संस्थाओं की गरिमा और साख गिरी है लेकिन केंद्रीय चुनाव आयोग...
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