नीतीश-तेजस्वी की केमिस्ट्री असली चीज है

बिहार में इसी बात की ज्यादा चर्चा है कि दोनों के बीच सद्भाव दिखा और मुख्यमंत्री ने तेजस्वी की तारीफ करते हुए कहा कि सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल लेकर प्रधानमंत्री से मिलने का आइडिया उनका था।

अतीत गौरव में कैद

कोई राजनीति एक विकासक्रम के साथ आगे बढ़ती है। अगर नेतृत्व इसे समझते हुए अपने एजेंडे को विकसित नहीं करता, तो वो सियासत गतिरुद्ध हो जाती है।

Corona Returns : जन्माष्टमी के पहले मथुरा से आई बुरी खबर, 3 दिनों में 6 बच्चों की मौत 40 के ज्यादा बीमार…

एक साथ छह बच्चों की मौत से हड़कंप मच गया है. सभी बच्चों की मौत बुखार आने के बाद हुई है. जिसके बाद से ग्रामीण इसे कोरोना का प्रकोप बता रहे हैं

ओबीसी वोट की चिंता में प्रादेशिक नेता

भाजपा ने प्रादेशिक पार्टियों के ओबीसी वोट बैंक में जबरदस्त सेंध लगाई है। नरेंद्र मोदी की कमान में भाजपा की पहली जीत यानी 2014 में ऐसा नहीं हुआ था।

भाजपा क्यों नहीं कराएगी जातियों की गिनती!

इसमें कोई संदेह नहीं है कि भारतीय जनता पार्टी बहुत जोर-शोर से ओबीसी राजनीति कर रही है और उसको इसका फायदा भी मिल रहा है। लेकिन पार्टी जाति आधारित जनगणना नहीं कराएगी।

जाति जनगणना, मोदी से मिले बिहार के नेता

बिहार के 10 नेताओं का एक प्रतिनिधिमंडल सोमवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिला। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने इस प्रतिनिधिमंडल की अगुवाई की।

जाति जनगणना के लिए मोदी से मिलेंगे बिहार के नेता

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आखिरकार बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को मिलने का समय दे दिया।

राज्य क्यों नहीं कराते जातियों की गिनती?

केंद्र सरकार जातियों की गिनती कराने को राजी नहीं है। सरकार ने पहले ही साफ कर दिया है। कोरोना वायरस की महामारी की वजह से जनगणना अभी तक शुरू नहीं हुई है।

chardham yatra banned : राज्य सरकार और हाइकोर्ट की तनातनी के बाद उत्तराखंड हाइकोर्ट ने चारधाम यात्रा को किया रद्द

देहरादून |  उत्तराखंड में चारधाम यात्रा पर निर्णय लेने का सिलसिला लंबे समय से चल रहा है। कभी सरकार हामी भरती है तो हाइकोर्ट रोक लगा देती है। लेकिन आखिरकार चारधाम यात्रा पर निर्णय लिया जा चुका है। तीरथ सरकार ने चारधाम यात्रा को 1 जुलाई 2021 से जिलास्तर पर खोलने का निर्णय लिया था उस फैसले पर उत्तराखंड हाइकोर्ट (Chardham Yatra banned )  ने रोक लगाई है। तीरथ सिंह रावत वाली सरकार ने कुछ समय पहले कहा था कि चारधाम यात्रा को चमोली, रूद्रप्रयाग और उत्तरकाशी जिलों के निवासियों के लिए शुरु की जा रही है। वह भी कोरोना की नेगेटिव रिपोर्ट के साथ। also read: चारधाम यात्रा को लेकर फिर बना संशय, उत्तराखंड हाइकोर्ट ने कहा- एक बार फिर विचार की जरूरत.. राज्य सरकार लाइव दर्शन की व्यवस्था करें इसके अलावा उत्तराखंड हाईकोर्ट ने राज्‍य सरकार की आधी अधूरी जानकारी को लेकर भी नाराजगी जताई है। यही नहीं, उतराखंड हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को आदेश दिया है कि वह श्रद्धालुओं ( Chardham Yatra banned ) के लिए चारधाम के लाइव दर्शन करने की व्यवस्था करे। वहीं, इस मामले की सुनवाई की अगली तारीख को लाइव दर्शन के इतंजाम पर रिपोर्ट देने का आदेश दिया है। कुछ भक्तों की यह… Continue reading chardham yatra banned : राज्य सरकार और हाइकोर्ट की तनातनी के बाद उत्तराखंड हाइकोर्ट ने चारधाम यात्रा को किया रद्द

विधानसभाओं की बैठक, किसी का ध्यान नहीं

संसद की कार्यवाही को लेकर इधर उधर कुछ चर्चा हो रही है और विपक्षी पार्टियों के नेता दोनों सदनों के पीठासीन अधिकारियों को चिट्ठी लिख कर संसद की बैठक बुलाने या संसदीय समितियों की ऑनलाइन बैठक कराने की मांग कर रहे हैं पर राज्यों में विधानसभाओं की कार्यवाही को लेकर ऐसी कोई बात नहीं हो रही है। कोरोना महामारी के बहाने राज्यों की विधानसभाएं स्थगित हैं और गिनती के सत्र हुए हैं। जहां चुनाव हुए वहां शपथ आदि कराई गई या कुछ और विधानसभाओं में बजट पास कराने का काम किया गया। बाकी सारे काम मुख्यमंत्री कार्यालय और मंत्रियों के हवाले है। एक आंकड़े के मुताबिक पिछले साल यानी 2020 में देश की विधानसभाओं की औसतन 18 दिन बैठक हुई है। सोचें, 365 दिन में से सिर्फ 18 दिन बैठक हुई। इससे पहले तीन साल में यानी 2016-19 के बीच विधानसभाओं की औसत बैठक 29 दिन हुई थी। यह भी कोई बहुत ज्यादा नहीं है। लेकिन कोरोना के बहाने राज्यों में विधानसभा की बैठक लगभग पूरी तरह से बंद कर दी गई है। विधानसभा की समितियों की बैठक भी नहीं हो रही है। हैरानी की बात है कि विपक्षी पार्टियां भी इस पर चुप्पी साधे हुए हैं। जिन राज्यों में… Continue reading विधानसभाओं की बैठक, किसी का ध्यान नहीं

Rajasthan: 21 दिनों पहले दफनाये गये युवक के कब्र से आने लगी आवाज, सुनने पहुंच गये सैकड़ों…

सीकर | देश में कोरोना की रफ्तार कुछ धीमी जरूर पड़ी है लेकिन अभी भी सावधानियां बरतने की जरूरत इसीलिए केंद्र और राज्य की सरकारें अभी भी लोगों से लगातार कोविड गाइडलाइन का पालन करने को कह रही है. इसके बाद भी लगातार देखा जा रहा है कि लोग अफवाहों में आकर भीड़ इकट्ठा कर ले रहे हैं. ताजा मामला राजस्थान की राजधानी जयपुर से सटे जिला सीकर से सामने आया जिले के एक कब्रिस्तान में उस समय अफरा-तफरी मच गई जब अचानक वहां लोगों का हुजूम जमा होने लग गया. दरअसल कब्रिस्तान में किसी ने या अफवाह फैला दी कि एक मृत व्यक्ति के कब्र से आवाजें आ रही हैं और वह फिर जिंदा हो उठा है. लोग देखने पहुंच गए कब्रिस्तान इस अफवाह के फैलते ही सैकड़ों की संख्या में लोग कब्रिस्तान में जमा होना शुरू हो गए. लोगों को विश्वास था कि यह अफवाह नहीं बल्कि सच्चाई है इसलिए लोग कब्रिस्तान में काम करने वाले व्यक्ति की बात सुनकर भी घर लौटने को तैयार नहीं हुए. इसी दौरान लोगों के भीड़ जमा होने की सूचना पुलिस को भी दे दी गई. इसके बाद पुलिस ने मौके पर पहुंचकर लोगों को कब्रिस्तान से बाहर खदेड़ना शुरू कर दिया.… Continue reading Rajasthan: 21 दिनों पहले दफनाये गये युवक के कब्र से आने लगी आवाज, सुनने पहुंच गये सैकड़ों…

राज्यों के समूह बन रहे हैं

भारत में अब तक राज्यों के मुख्यमंत्रियों या पार्टियों के नेताओं की बीच साझेदारी राजनीति को लेकर ही बनती थी। चुनाव के समय मोर्चा बनाने के लिए पार्टियों के नेता मिलते थे। लेकिन अभी कोरोना के संकट में राज्य दूसरे कारणों से अपने समूह बना रहे हैं। गैर भाजपा राज्यों के मुख्यमंत्री केंद्र सरकार पर दबाव बनाने के लिए एक साथ आ रहे हैं। केरल के मुख्यमंत्री पिनरायी विजयन ने 11 राज्यों के  मुख्यमंत्रियों को चिट्ठी लिखी है और कहा है कि वे केंद्र पर दबाव बनाएं कि वह खुद से वैक्सीन खरीदे और राज्यों को उसकी आपूर्ति करे। मुख्यमंत्री विजयन ने बहुत विस्तार से लिखी गई इस चिट्ठी में राज्यों की आर्थिक हालत के बारे में बताया है और यह भी कहा है कि जब तक पर्याप्त संख्या में लोगों को वैक्सीन नहीं लगती है तब तक हर्ड इम्यूनिटी नहीं बन सकती है। उन्होंने लिखा है कि राज्यों के टेंडर से बात नहीं बन रही है। इस बीच झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने इसी मसले पर प्रधानमंत्री को चिट्ठी लिखी है। गैर भाजपा शासित राज्यों के मुख्यमंत्री वैक्सीन नीति में बदलाव और वैक्सीन की केंद्रीकृत खरीद के लिए आगे और दबाव बनाएंगे। इसी तरह जीएसटी कौंसिल में वैक्सीन… Continue reading राज्यों के समूह बन रहे हैं

कोरोना का सबसे खराब महीना मई, एक महीने में दुनिया की सर्वाधिक मौतें भारत में..

DELHI: पिछले डेढ़ वर्ष से कोरोना भारत में तबाही मचा रहा है। हालत इतनी खराब हो गई कि एक दिन में 4 लाख मामले दर्ज होने लगे जो अभी तक का सबसे बड़ा आंकड़ा है। 54 दिन बाद मंगलवार को पिछले 24 घंटे में कोविड-19 के सबसे कम 1,27,510 नए मामले दर्ज किए गए हैं। यह पिछले 54 दिनों में सबसे कम आंकड़ा है। कोरोना संक्रमण ने मई महीने में लाखों जिंदगिया लील गया है। ऐसे-ऐसे मंजर दिखाये है जिसकी हमने कभी कल्पना भी नहीं की थी। जिनकी भयावहता याद कर आज भी रूह कांप जाती है। लेकिन अब कोरोना के मामले कम होने लगे है। मौतों का आंकड़ा भी धीरे-धीरे घटने लगा है। कोरोना की यह रफ्तार मई महीने में सर्वाधिक रही है। मई में भारत में किसी भी महीने में दुनिया के किसी भी देश से सर्वाधिक कोरोना केस और मौतें दर्ज की गई हैं। इसके साथ ही जबसे कोरोना महामारी की शुरुआत हुई है तबसे मई ही एक ऐसा महीना रहा, जिसमें सर्वाधिक मौतें हुई और सर्वाधिक केस दर्ज किए गए। कोरोना के आंकडे कम होते ही राज्य सरकार ने अनलॉक की प्रक्रिया शुरु कर दी है। लेकिन हमें यह ध्यान रखना है कि कोरोना का संक्रमण… Continue reading कोरोना का सबसे खराब महीना मई, एक महीने में दुनिया की सर्वाधिक मौतें भारत में..

संघीय ढांचे के लिए चुनौती

राजीव गांधी के सत्ता से बाहर होने के बाद केंद्र में गठबंधन की राजनीति का जो दौर शुरू हुआ था उस दौर में देश की संघीय व्यवस्था सबसे बेहतर ढंग से चली। कमजोर केंद्र की वजह से राज्यों को स्वतंत्र रूप से काम करने का मौका मिला। गठबंधन की मजबूरी में केंद्र सरकारों ने राज्यों के साथ ज्यादा विवाद नहीं बढ़ाया। करीब 25 साल की उस अवधि में राज्य सरकारों को बरखास्त करने और राष्ट्रपति शासन लगाने के फैसले भी बहुत कम हुए। एक तरह से कमजोर केंद्र की वजह से राज्यों की स्वायत्तता मजबूत हुई। यह भी पढ़ें: झूठे आंकड़ों से बढ़ेगा संकट भारत सैद्धांतिक रूप से एक अर्ध संघ है, जिसमें मजबूत केंद्र की अवधारणा के साथ शासन की संघीय व्यवस्था बनाई गई है। प्रधानमंत्री बनने के बाद नरेंद्र मोदी ने इसे सहकारी संघवाद का नाम दिया। तभी उनके प्रधानमंत्री बनने के बाद यह उम्मीद बंधी थी कि देश में संघवाद की व्यवस्था मजबूत होगी क्योंकि वे पहले नेता थे, जो 13 साल तक एक राज्य का मुख्यमंत्री रहने के बाद प्रधानमंत्री बने थे। उनसे पहले मोरारजी देसाई, वीपी सिंह, नरसिंह राव और एचडी देवगौड़ा ही ऐसे प्रधानमंत्री हुए, जो पहले मुख्यमंत्री रहे थे। लेकिन सबका मुख्यमंत्री का कार्यकाल… Continue reading संघीय ढांचे के लिए चुनौती

Corona संकट के बीच बसपा मुखिया Mayawati का ट्वीट, राज्य सरकार से की ये मांग

लखनऊ | कोरोना के बढ़ते मामलों को देखते हुए बहुजन समाज पार्टी (BSP) अध्यक्ष एवं उत्तर प्रदेश (UP) की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती (Mayawati) ने राज्य सरकार (State government) से आज मांग की कि वह उन सरकारी कर्मियों के आश्रितों को नौकरी एवं आर्थिक मदद मुहैया कराए, जिनकी पंचायत चुनाव में तैनाती के दौरान कोरोना वायरस से संक्रमित (Corona virus infected) होने के कारण मौत हो गई। मायावती (Mayawati) ने उत्तर प्रदेश में भाजपा सरकार (BJP Government) पर निशाना साधते हुए ट्वीट किया, ‘कोरोना वायरस के बढ़ते प्रकोप के चलते यदि उत्तर प्रदेश सरकार पंचायत चुनाव टाल देती, अर्थात उन्हें थोड़ा आगे बढ़ा देती, तो यह उचित होता और चुनाव ड्यूटी में लगे कई कर्मचारियों की मौत नहीं होती। इन कमियों की मौत होना अत्यंत दुःखद है। इसे भी पढ़ें – पिता को कोरोना से जूझते देख केट गारवे की बेटी ने उनसे पूछा ये सवाल मायावती (Mayawati) ने मांग की कि राज्य सरकार उन सरकारी कर्मियों के आश्रितों को नौकरी एवं आर्थिक मदद मुहैया कराए, जिनकी पंचायत चुनाव में तैनाती के दौरान कोरोना वायरस से संक्रमित होने के कारण मौत हो गई। उन्होंने कहा, ‘इसके साथ ही, अब कोरोना वायरस प्रकोप के गांव-देहात में भी काफी फैलने की आशंका है। ऐसी… Continue reading Corona संकट के बीच बसपा मुखिया Mayawati का ट्वीट, राज्य सरकार से की ये मांग

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