राणा कपूर की हिरासत 20 मार्च तक बढ़ी

विशेष अदालत ने धन शोधन के आरोप में गिरफ्तार यस बैंक के सह-संस्थापक राणा कपूर की प्रवर्तन निदेशालय को दी गयी हिरासत अवधि आज 20 मार्च तक के लिए बढ़ा दी।

धनपशुओं का यस बैंक चरना

जब मैंने यस बैंक के कारनामों के बारे में सुना तो सबसे पहले मैंने उसे स्थापित करने वाले राणा कपूर के बारे में जानना चाहा कि उन्होंने क्या कभी संस्कृत पढ़ी? इसकी वजह यह थी कि लगता हैं कि उन्हें संस्कृत के श्लोकों से काफी लगाव था।

राणा कपूर की ईडी हिरासत 16 मार्च तक बढ़ी

मुंबई। धनशोधन रोकथाम अधिनियम (पीएमएलए) की एक विशेष अदालत ने बुधवार को यस बैंक के संस्थापक राणा कपूर की प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) हिरासत पांच दिनों यानी 16 मार्च तक बढ़ा दी है। ईडी ने बुधवार को कपूर की तीन दिनों की हिरासत खत्म होने के बाद शाम को धनशोधन रोकथाम अधिनियम के तहत विशेष पीएमएलए अदालत में पेश किया। ईडी ने कपूर को आठ मार्च अलसुबह मुंबई से गिरफ्तार किया था। केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) भी कपूर के खिलाफ अलग से एक मामला दर्ज कर चुकी है।

बैंक का डूबना

यस बैंक के डूबने से एक बार फिर लोगों के मन में बैंकों में पैसा रखने को लेकर खौफ पैदा हो गया है। पिछले छह महीने में यह तीसरा मौका है जब बैंकों में जमा पैसे निकालने की सीमा ने खाताधारकों की नींद उड़ा दी। भले इस सीमा की अवधि तीस दिन रखी गई हो औरल रिजर्व बैंक व सरकार कितने ही आश्वासन क्यों न दे, लेकिन अब लोगों के भीतर पैसा डूबने जैसी अनहोनी का जो डर समा गया है, उसे दूर कर पाना आसान नहीं है। यस बैंक के खाताधारक पैसा निकालने के लिए बैंक की शाखाओं और एटीएम के बाहर धक्के खा रहे हैं और ज्यादातर जगहों से उन्हें निराशा ही हाथ लग रही है। पांच महीने पहले मुंबई के पीएमसी बैंक को ढहते हुए सबने देखा और इससे कैसा मुश्किलें खड़ी हो जाती हैं, यह भी पता चला। पैसा नहीं मिल पाने के सदमे में तो कुछ लोगों की मौत भी गई थी। जाहिर है, जो मेहनतकश और नौकरीपेशा लोग अपनी जीवन भर की गाढ़ी कमाई को बैंकों में सबसे ज्यादा सुरक्षित मान कर रखते हैं, अगर जरूरत के वक्त वही पैसा न मिले और जूब जाए तो दिल की धड़कनें ठहर जाना स्वाभाविक है। बैंकों… Continue reading बैंक का डूबना

बैंकों की बरबादी का जिम्मेदार कौन?

यस बैंक संकट में है। सरकार इसे संकट से निकालने के उपाय कर रही है। कुछ ही दिन पहले सरकार को इसी तरह का उपाय पंजाब व महाराष्ट्र कोऑपरेटिव यानी पीएमसी बैंक को बचाने के लिए करना पड़ा था। इसी तरह लक्ष्मी विलास बैंक और श्री गुरु राघवेंद्र शंकरा बैंक के मामले में भी करना पड़ा। महाराष्ट्र से लेकर तमिलनाडु और कर्नाटक तक सहकारी बैंकों में संकट आया हुआ है। लाखों खाताधारकों के पैसे इन बैंकों में अटके पड़े हैं। कहा जा सकता है कि ये सब सहकारी बैंक हैं और इनके निदेशकों की गड़बड़ी की वजह से ये बैंक बरबादी की कगार पर पहुंचे। हालांकि इनकी निगरानी का काम भी भारतीय रिजर्व बैंक के ही जिम्मे ही है और मुख्य रूप से जिम्मेदारी उसी की बनती है। अब पहली बार ऐसा हो रहा है कि शेयर बाजार में सूचीबद्ध एक बड़ा निजी बैंक बरबादी की कगार पर है। अपने अच्छे दिनों में यस बैंक की बाजार पूंजी 80 हजार करोड़ रुपए थी, जो अब घट कर चार हजार करोड़ रुपए की रह गई है। इसे बचाने के लिए भारतीय स्टेट बैंक ने करीब ढाई हजार करोड़ रुपए में इसकी 49 फीसदी हिस्सेदारी खरीदने का प्रस्ताव दिया है और कहा… Continue reading बैंकों की बरबादी का जिम्मेदार कौन?

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