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Sunday, April 11, 2021
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लालू प्रसाद यादव

चुनाव से नेता बने तेजस्वी

गैर-कांग्रेसवाद या समाजवाद की राजनीति करने वाले नेताओं में संभवतः लालू प्रसाद इकलौते नेता हैं, जिनको अपनी राजनीतिक कमान अगली पीढ़ी को ट्रांसफर करने में सबसे ज्यादा समय लगा है।

लालू को जमानत नहीं मिलने से नीतीश को राहत

राष्ट्रीय जनता दल के सुप्रीमो लालू प्रसाद को जमानत नहीं मिली। पिछले एक महीने से ज्यादा समय से उनकी जमानत का इंतजार हो रहा है। उनकी जमानत पर नौ नवंबर को सुनवाई होनी थी

लालू, नीतीश, मोदी में फर्क क्या?

बहुत गजब बात है लेकिन भारत राष्ट्र-राज्य का यथार्थ समझना है तो सोचें! हम हिंदुओं के भगवानजी ने कैसे-कैसे को क्या-क्या अवसर दिया और बदले में भारत माता को क्या प्राप्त हुआ

नीतीश क्या फेल हुए?

मैं नहीं मानता और न ही मैं लालू यादव और नरेंद्र मोदी को फेल मानता हूं। बिहार के लोग याकि हम हिंदू जो चाहते रहे हैं और हम हिंदुओं का जो डीएनए है तो उसी अनुसार हमें लालू यादव, नीतीश कुमार और नरेंद्र मोदी का नेतृत्व प्राप्त है।

भारत के सफल नेताओं की त्रासदी

भारत में जैसे नरेंद्र मोदी सफल हैं वैसे ही नीतीश कुमार भी सफल हैं और लालू प्रसाद भी। ज्योति बसु सफल थे तो नवीन पटनायक भी सफल हैं। इनकी सफलता का पैमाना यह है कि इन्होंने लंबे समय तक शासन किया।

लालू परिवार में विरासत का विवाद खत्म

लालू प्रसाद के परिवार में विरासत का विवाद खत्म हो गया है और उत्तराधिकार का मामला भी तय हो गया है। यह इस बार के चुनाव की खास बात है। पिछले साल लोकसभा चुनाव तक यह विवाद चल रहा था।

लालू प्रसाद ने लगाई जमानत की अर्जी

चारा घोटाले में लालू प्रसाद को दो मामलों में जमानत मिल चुकी है और उन्होंने तीसरे मामले में जमानत के लिए अर्जी लगाई है। गौरतलब है कि उनको तीन मामलों में सजा हुई है। इनमें से देवघर और चाईबासा ट्रेजरी से पैसे निकासी के मामले में उनको आधी सजा पूरी होने के बाद जमानत मिल गई।

एक और मामले में लालू को जमानत

चारा घोटाले से जुड़ी तीन मामलों में सजा काट रहे राष्ट्रीय जनता दल के नेता और बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद को एक और मामले में जमानत मिल गई है। झारखंड हाई कोर्ट में चाईबासा कोषागार से पैसे की निकासी के मामले में लालू प्रसाद को जमानत दे दी।

लालू के नाम से मुक्ति चाहते हैं तेजस्वी

तेजस्वी यादव की सारी राजनीति लालू प्रसाद के बनाए जातीय और सामाजिक समीकरण पर टिकी है लेकिन इस बार वे चाहते हैं कि वोटिंग लालू प्रसाद के नाम पर न हो। एक तरफ भाजपा और जदयू दोनों ने लालू प्रसाद के नाम का मुद्दा बनाया है तो दूसरी ओर तेजस्वी यादव अपने पिता के नाम से छुटकारा पाने की जद्दोजहद में लगे हैं।

बिहार के असली मुद्दे अलग हैं

बिहार के लोगों को बरगलाने का काम फिर जोर-शोर से शुरू हो गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को कहा कि ‘बिहार प्रतिभा का पावरहाउस है’। इससे सारे बिहारी फूले नहीं समा रहे हैं। हालांकि असलियत यह है कि बिहार देश और दुनिया में मजदूर सप्लाई करने की फैक्टरी भर है।
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