गरीबी पर विदेशी रपट और हम !

यह ठीक है कि 15 अगस्त 1947 को हमारी सैकड़ों वर्ष पुरानी दासता की बेड़ियां टूटी और हम स्वतंत्र हो गए। किंतु क्या मानसिक तौर पर हम अब भी गुलाम नहीं है? क्या एक राष्ट्र के रूप में हमारे चिंतन में आज भी आत्मविश्वास का अभाव और गोरी चमड़ी के प्रति अंधविश्वास नहीं झलकता है?