ब्लिंकेन से वार्ता की प्राथमिकताएं

अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन के विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकेन अपनी पहली भारत यात्रा पर दिल्ली आ रहे हैं। दो दिन की इस यात्रा में वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिलेंगे और विदेश मंत्री एस जयशंकर के साथ दोपक्षीय वार्ता करेंगे।

Myanmar Army Cruelty म्यांमार में सैन्य बर्बरता

Myanmar Army Cruelty म्यांमार की सेना अब गांवों में आगजनी कर रही है। उसने 2017 में भी सैकड़ों गांवों में आग लगा दी थी। उस समय वह रोहिंग्या मुसलमानों के खिलाफ मुहिम चला रही थी। अब ये तरीका बाकी आबादी के खिलाफ अपनाया जा रहा है। जाहिर है, विश्व समुदाय लाचार होकर सब देख रहा… Continue reading Myanmar Army Cruelty म्यांमार में सैन्य बर्बरता

हमारी विदेश नीति की फिसलन

हमारी विदेश नीति आजकल बड़ी दुविधा में फंस गई है। एक तरफ चीन ने हमारे लिए कई फिसलपट्टियां लगा दी हैं और दूसरी तरफ हमारे दोनों दोस्त- इस्राइली और फलस्तीनी हमें कोस रहे हैं। हमारे विदेश मंत्रालय की घिग्घी बंधी हुई है, जबकि हमारा विदेश मंत्री एक ऐसा आदमी है, जो विदेश मंत्री बनने के… Continue reading हमारी विदेश नीति की फिसलन

पड़ौसी देशः नई पहल जरुरी

भारत के विदेश मंत्री डा. जयशंकर आजकल अमेरिका के नेताओं, अफसरों और विदेश नीति विशेषज्ञों से गहन संवाद कर रहे हैं। यह बहुत सामयिक है, क्योंकि इस कोरोना-काल में सबका ध्यान महामारी पर लगा हुआ है और विदेश नीति हाशिए में सरक गई है। लेकिन चीन-जैसे राष्ट्र इसी मौके को अवसर की तरह इस्तेमाल कर… Continue reading पड़ौसी देशः नई पहल जरुरी

सिंहासन-सप्तपदी के सात बरस बाद

जिन्हें इतिहास की समझ है, वे जानते हैं कि हुक़्मरान जब-जब कलंदरी पर उतारू होते हैं, जनता भी तब-तब चीमटा बजाने लगती है। जिन्हें समझ कर भी यह इतिहास नहीं समझना, उनकी समझ को नमन कीजिए। लेकिन एक बात अच्छी तरह समझ लीजिए। जनता जब अपनी पर आती है तो वह किसी गांधी-वांधी, पवार-फवार, अण्णा-केजरी… Continue reading सिंहासन-सप्तपदी के सात बरस बाद

एक थे शास्त्री, एक हैं मोदी: दो विपदा, दो प्रधानमंत्री!

हम हिंदू इतिहास-याद्दाश्त में कच्चे हैं। आंखें मोतियाबिंद की मारी व बुद्धि मंद! सिर्फ वर्तमान के कुएं में जीते हैं। कितनों को भान है कि 1947 में आजादी के बाद भूख और भूखे पेट की विपदा कब थी? तो जवाब है साठ का दशक। यों भारत आजादी पहले से भूख, अकाल का मारा था। तेज… Continue reading एक थे शास्त्री, एक हैं मोदी: दो विपदा, दो प्रधानमंत्री!

चीन को बांग्लादेश का दो टूक जवाब

ढाका। चीन अपने कर्ज के जाल में फंसाए गए छोटे-छोटे देशों को धमकी देता रहता है। ऐसी ही एक धमकी उसने बांग्लादेश को दी, जिस पर बांग्लादेश ने उसे दो टूक जवाब दिया है। चीन ने बांग्लादेश की भारत से करीबी को लेकर कहा कि बांग्लादेश को क्वाड समूह में नहीं शामिल होना चाहिए। ध्यान… Continue reading चीन को बांग्लादेश का दो टूक जवाब

एक उम्मीद तो जगी

म्यांमार की हालत के बारे में दुनिया में एक तरह का असहाय होने का भाव रहा है। म्यांमार के सैनिक शासक बेरहमी से लोकतंत्र समर्थक आंदोलनकारियों की जान लेते रहे हैं, लेकिन बाहरी दुनिया से वहां किसी तरह का हस्तक्षेप नहीं हुआ है। पश्चिमी देशों ने जो पहल की उसे चीन और रूस ने नाकाम… Continue reading एक उम्मीद तो जगी

क्या बदलेगी भारत की म्यांमार नीति?

will indias myanmar policy change : अब क्या म्यांमार के प्रति भारत की नीति बदलेगी? यह सवाल इसलिए उठ रहा है क्योंकि अमेरिका के एसएंडपी डाउ जोंस के इंडेक्स से अडानी पोर्ट एंड स्पेशल इकोनॉमिक जोन को हटाने का फैसला किया गया है। डाउ जोंस की ओर से कहा गया है कि 15 अप्रैल को… Continue reading क्या बदलेगी भारत की म्यांमार नीति?

भारत की विदेश नीति खत्म!

बहुत बुरा लगा अपनी ही प्रजा पर गोलियां चलाने वाली सेना के साथ भारतीय सेना की उपस्थिति की खबर सुन कर! उफ! क्या हो गया है भारत? हम किन मूल्यों, आदर्शों और संविधान में जीते हुए हैं? जो हमारा धर्म है, हमारा संविधान है, हमारी व्यवस्था है, उसमें कैसे यह संभव जो हम खूनी के… Continue reading भारत की विदेश नीति खत्म!

भारत गूंगी गुड़िया क्यों बना रहे?

अंतरराष्ट्रीय राजनीति के हिसाब से कल तीन महत्वपूर्ण घटनाएं हुईं। एक तो अलास्का में अमेरिकी और चीनी विदेश मंत्रियों की झड़प, दूसरी मास्को में तालिबान-समस्या पर बहुराष्ट्रीय बैठक और तीसरी अमेरिकी रक्षा मंत्री की भारत-यात्रा। इन तीनों घटनाओं का भारतीय विदेश नीति से गहरा संबंध है। यदि अमेरिकी और चीनी विदेशमंत्रियों के बीच हुई बातचीत में… Continue reading भारत गूंगी गुड़िया क्यों बना रहे?

अमेरिका वापस आ गया है!

अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडेन ने दो रोज पहले अपनी विदेश नीति के बारे में पहला भाषण दिया। इससे साफ संकेत मिला कि बाइडेन के कार्यकाल में पिछले प्रशासन की तुलना में कई चीजें बदलेंगी।

इस्लामी देश और भारत

प्रमुख अरब देशों के साथ भारत के संबंध जितने घनिष्ट आजकल हो रहे हैं, उतने वे पहले कभी नहीं हुए।

पड़ौसी देशों के साथ सक्रियता

पिछले एक हफ्ते में हमारे विदेश मंत्रालय ने काफी सक्रियता दिखाई है। विदेश मंत्री जयशंकर, सुरक्षा सलाहकार अजित दोभाल और विदेश सचिव हर्ष श्रृंगला एक के बाद एक हमारे पड़ौसी देशों की यात्रा कर रहे हैं

चीन करता भारत का घेराव

गलवान घाटी के हत्याकांड पर चीन ने चुप्पी साध रखी है। लेकिन वह भारत पर सीधा कूटनीतिक या सामरिक हमला करने की बजाय अब उसके घेराव की कोशिश कर रहा है।

गरीब की जोरू बन गया है भारत!

भारत के लोक मानस में एक कहावत प्रचलित है‘गरीब की जोरू सबकी भौजाई’ यानी उसके साथ जो चाहे मजाक कर सकता है, छेड़छाड़ कर सकता है। इन दिनों भारत की स्थिति ऐसी ही होती जा रही है।

ईरान मसले पर भारत के प्रति अमेरिकी रुख दुखद : कांग्रेस

कांग्रेस ने कहा है कि ईरान पर कार्रवाई करने से पहले अमेरिका ने पिछले सप्ताह चीन तथा पाकिस्तान जैसे देशों से बात की लेकिन भारत से चर्चा करना उचित नहीं समझा, यह दुखद है और इसकी वजह मोदी सरकार की लचर विदेश नीति है।

विदेश नीतिः नरम-गरम, दोनों

कई लोग पूछ रहे हैं कि विदेश नीति के हिसाब से पिछला साल कैसा रहा? मैं कहूंगा कि खट्टा-मीठा और नरम-गरम दोनों रहा। कश्मीर के पूर्ण विलय को चीन के अलावा सभी महाशक्तियों ने भारत का आतंरिक मामला मान लिया। सउदी अरब और संयुक्त अरब अमारात (यूएई) ने भी भारत का स्पष्ट समर्थन किया। कश्मीर… Continue reading विदेश नीतिः नरम-गरम, दोनों