दलबदल रोकने का उत्तराखंड कांग्रेस का दांव

उत्तराखंड में विधानसभा चुनाव से पहले दलबदल न शुरू हो इसके लिए कांग्रेस ने नया दांव चला है।

विधानसभा में नमाज के लिए कमरा अलॉट करने पर भड़के BJP विधायक, बैठकर भजन-कीर्तन किया शुरू …

झारखंड विधानसभा में आज जमकर बवाल हुआ. हंगामे का कारण की सभा में नमाज के लिए अलग से कमरा अलॉट करना था. इसी का भारतीय जनता पार्टी के विधायक विरोध कर रहे थे….

Maharasthra : ‘थप्पड़’ के बाद अब फिल्मी बवाल, Reel पर हो रही है Real राजनीति…

नितेश राणे ने मल्टी स्टारर फिल्म राजनीति के एक सिंह को ट्वीट करते हुए शिवसेना को जवाब दिया है. नितेश का अंदाजा फिर सेना को कितना पसंद आता है यह तो देखने वाली बात होगी

Corona Returns : जन्माष्टमी के पहले मथुरा से आई बुरी खबर, 3 दिनों में 6 बच्चों की मौत 40 के ज्यादा बीमार…

एक साथ छह बच्चों की मौत से हड़कंप मच गया है. सभी बच्चों की मौत बुखार आने के बाद हुई है. जिसके बाद से ग्रामीण इसे कोरोना का प्रकोप बता रहे हैं

भाजपा नेताओं को फुरसत नहीं

संसद का सत्र खत्म होने के बाद आमतौर पर नेताओं को फुरसत हो जाती थी। सासंद अपने क्षेत्र में जाते थे और आराम से रूटीन के हिसाब से काम करते थे। लेकिन भाजपा अपने नेताओं को फुरसत नहीं दे रही है।

नेताओं के मुकदमों की वापसी मुश्किल होगी

नेताओं के ऊपर दर्ज मुकदमे अब आसानी से वापस नहीं हो पाएंगे। कई राज्यों में सत्तारूढ़ दल से जुड़े नेताओं के मुकदमे वापस किए जाने की घटनाओं के बीच सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में सख्त तेवर दिखाए हैं।

झारखंड भाजपा के पास न प्रबंधक, न चेहरा

झारखंड में भाजपा चाहती जरूर है कि जेएमएम-कांग्रेस की सरकार गिरे और भाजपा की सरकार बने। इसके लिए कुछ प्रयास किए जाने की भी खबर है। असल में भाजपा की ओर से सरकार गिराने का प्रयास पेशेवर और अनुभवी लोगों की बजाय अमेच्योर लोगों ने किया था

मध्यप्रदेश : विधानसभा का मॉनसून सत्र शुरू होने से पहले सचिवालय ने तैयार की असंसदीय शब्दों की सूची..पप्पू, फेंकू, बंटाधार, चोर, झूठा, मूर्ख पर लगाया बैन

मध्यप्रदेश की विधानसभा में अब तहजीब वाले शब्दों का प्रयोग किया जाएगा अब माननीय विधायक कुछ भी नहीं बोल सकेंगे। मध्यप्रदेश की विधानसभा के सचिवालय ने एक बड़ा निर्णय लिया है। मध्यप्रदेश में विधानसभा का मॉनसून सत्र के शुरुआत से पहले ही सचिवालय ने माननीय सांसदों के मुंह पर ताला लगाने की सोच ली है। और इसकी पूरी तैयारी भी कर ली है। ( new dictionary of mp secretariat ) सचिवालय द्वारा माननीयों के लिए  एक डिक्शनरी  तैयार की गई है। इस डिक्शनरी में सम्मिलित शब्दों का उपयोग अब विधायकगण नहीं कर सकेंगे। पप्पू, फेंकू, बंटाधार, चोर, झूठा, मूर्ख जैसे शब्द अब माननीय विधायक सदन में नहीं बोल सकेंगे। संविधान के भी कुछ नियम कायदे है। विधानसभा में कोई भी असहज शब्दों का प्रयोग ना करें इसलिए सचिवालय ने नियम निकाला है। also  read: टोक्यो ओलंपिक में भारत का प्रतिनिधित्व करने जा रहे दिल्ली के चार हीरो, मिशन एक्सीलेंस का हिस्सा रह चुके ये खिलाड़ी इन शब्दों के उपयोग पर लगाए लगाम ( new dictionary of mp secretariat ) नौ अगस्त से मध्यप्रदेश में विधानसभा का मानसून सत्र शुरू होने जा रहा है। इससे पहले असंसदीय शब्दों की सूची माननीय विधायकों को दे दी जाएगी। सचिवालय ने ऐसे कुछ शब्द तैयार… Continue reading मध्यप्रदेश : विधानसभा का मॉनसून सत्र शुरू होने से पहले सचिवालय ने तैयार की असंसदीय शब्दों की सूची..पप्पू, फेंकू, बंटाधार, चोर, झूठा, मूर्ख पर लगाया बैन

स्वतंत्र निदेशकों के लिए भी कुछ नियम बने!

rbi releases panel report : भारतीय रिजर्व बैंक ने सहकारी बैंक चलाने वालों के लिए कुछ पैमाने तय किए हैं। इसके लिए केंद्रीय बैंक ने बैंकिंग नियम 1949 में कुछ बदलाव किए हैं। इसके मुताबिक अब सहकारी बैंक में सीएमडी, एमडी या निदेशक बनने के लिए शैक्षिक योग्यता की जरूरत होगी। ऐसे लोगों को बैंकिंग के कम से कम एक विषय के साथ स्नात्तक होना होगा या सीए, एमबीआई आदि की डिग्री जरूरी होगी। इसके अलावा यह भी तय किया गया है कि सांसद, विधायक या पार्षद भी सहकारी बैंकों के एमडी, सीएमडी या निदेशक नहीं बन सकेंगे। कहा जा रहा है कि हाल में कुछ सहकारी बैंकों के डूबने या बंद होने की वजह से यह फैसला किया गया है। यह भी पढ़ें: चुनाव टलना शुरू हो गए हैं तभी सवाल है कि सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों या सरकारी बैंकों के बोर्ड में नियुक्त होने वाले स्वतंत्र निदेशकों के लिए भी ऐसा कोई नियम क्यों नहीं बनाया जा रहा है? सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियां भी तो डूब रही हैं और सरकारी बैंक भी तो लगातार घाटे में जा रहे हैं! अंग्रेजी के अखबार इंडियन एक्सप्रेस ने सूचना के अधिकार कानून के तहत जानकारी हासिल करके बताया है कि देश… Continue reading स्वतंत्र निदेशकों के लिए भी कुछ नियम बने!

यूपी, उत्तराखंड में क्या उपचुनाव नहीं होंगे?

देश में इस समय अलग अलग राज्यों में विधानसभा की 25 सीटें खाली हैं। उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल में सात-सात सीटें खाली हैं। उत्तराखंड में विधानसभा की दो सीटें खाली हैं। उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड ( election in up uttarakhand ) में अगले साल फरवरी-मार्च में विधानसभा के चुनाव होने वाले हैं। इसलिए चुनाव आयोग में यह विचार हो रहा है कि इन राज्यों में खाली सीटों पर अभी उपचुनाव नहीं कराया जाए। अभी कोरोना के हालात को देखते हुए चुनाव आयोग शायद ही चुनाव कराने का फैसला करे। अगर केसेज कम होते हैं तो अगस्त-सितंबर तक चुनाव हो सकता है। उस समय उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड विधानसभा चुनाव में चार-पांच महीने का समय ही बचा रहेगा। इस वजह से इन राज्यों में उपचुनाव नहीं भी कराया जा सकता है। यह भी पढ़ें: चिराग का दबाव काम नहीं आएगा यह भी पढ़ें: उमर को मुख्यमंत्री कौन बनाएगा? election in up uttarakhand सवाल है कि अगर उत्तराखंड में उपचुनाव नहीं हुए तो मुख्यमंत्री का क्या होगा? मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत विधायक नहीं हैं और सितंबर तक उनको विधायक बनना होगा तभी वे मुख्यमंत्री की कुर्सी पर बने रह सकते हैं। अगर आयोग उपचुनाव नहीं कराने का फैसला करता है तो… Continue reading यूपी, उत्तराखंड में क्या उपचुनाव नहीं होंगे?

मुकुल रॉय क्यों नहीं इस्तीफा दे रहे

Mukul Roy assembly : यह हैरान करने वाली बात है कि भाजपा की टिकट पर विधानसभा का चुनाव जीते मुकुल रॉय ने पार्टी छोड़ने के बाद विधानसभा से इस्तीफा नहीं दिया। तृणमूल की ओर से भी उन्हें ऐसे ही स्वीकार कर लिया गया है, जबकि तृणमूल कांग्रेस ने शुभेंदु अधिकारी के पिता शिशिर अधिकारी के लोकसभा सीट से इस्तीफा नहीं देने का मुद्दा बनाया है। ध्यान रहे शिशिर अधिकारी चुनाव से पहले भाजपा में चले गए थे लेकिन लोकसभा से इस्तीफा नहीं दिया है। तृणमूल कांग्रेस ने इसकी शिकायत लोकसभा स्पीकर से की है। लेकिन खुद तृणमूल ने मुकुल रॉय का इस्तीफा नहीं कराया है और उलटे उनको लोक लेखा समिति में शामिल कर लिया गया है। डेल्टा प्लस वैरिएंट क्या है, क्या ये कोरोना की तीसरी लहर की चेतावनी है..आइयें जानते है इसके सारे सवालों के जवाब इस बीच यह भी चर्चा है कि मुकुल रॉय को राज्यसभा में भेजा जा सकता है। अगर उनको राज्यसभा में भेजा जाना है तब तो उनके लिए और भी आसान है इस्तीफा देना, फिर उन्होंने  इस्तीफा ( Mukul Roy assembly Resign) क्यों नहीं दिया? ऐसा भी नहीं है कि उनके इस्तीफा देने से सरकार के बहुमत पर कोई फर्क पड़ता है। कहीं… Continue reading मुकुल रॉय क्यों नहीं इस्तीफा दे रहे

ना कोई सैलरी ना कोई पेंशन ..आइये जानते है ममता दीदी का सादगी भरा जीवन कैसा है

नारी शक्ति की विजय कहें या सादगी की विजय कहें..दोनों बातें एक ही इंसान ने सच कर दिखाई है। वो है बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी। एक सादा सा लिबास और हवाई चप्पल पहनें ममता दीदी सभी राजनीतिक पार्टियों पर भारी पड़ती है। यह उन्होनें बंगाल में तीसरी बार मुख्यमंत्री बन साबित भी कर दिया। ममता दीदी का कद जितना छोटा है उनका राजनीतिक करियर उतना ही बड़ा है। आज ममता बनर्जी का शपथ ग्रहण समारोह था जो अत्यंत सामान्य तरीके से हुआ। बाकी मंत्रियों को बाद में शपथ दिलाई जाएगी। सादा लिबास में लोगों के बीच अपनी लोकप्रियता स्थापित करने वाली ममता का जीवन भी उतना ही सादगी भरा है। विधायक से लेकर सांसद, कैबिनेट मंत्री और फिर तीन बार बंगाल की मुख्यमंत्री बनने के बाद भी ममता एक आम इंसान की तरह अपना जीवन बिताती हैं। सूती साड़ी और पैरों में हवाई चप्पल अब उनकी पहचान बन चुकी है और यही वजह है कि बंगाल की जनता ने लगातार तीसरी बार उन पर भरोसा जताया।एक तरफ बीजेपी की प्रचंड सेना और दूसरी तरफ अकेली ममता बनर्जी ..फिर भी ममता दीदी ने बंगाल पर जीत हासिल कर ही ली। ममता बनर्जी ने बंगाल में जीत का डंका बजाया है।… Continue reading ना कोई सैलरी ना कोई पेंशन ..आइये जानते है ममता दीदी का सादगी भरा जीवन कैसा है

Bihar: जदयू विधायक और पूर्व मंत्री Mevalal Chaudhary का कोरोना से निधन, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने जताया शोक

पटना| बिहार (Bihar) में कोरोना (Corona) के बढ़ते मामले अब लोगों को डराने लगा है। कोरोना (Corona) के मामलों में लगातार वृद्धि हो रही है इस बीच, बिहार (Bihar) में सत्ताधारी पार्टी जनता दल (युनाइटेड) (JDU) के विधायक और पूर्व शिक्षा मंत्री मेवालाल चौधरी (Mevalal Chaudhary) का कोरोना (Corona) से निधन हो गया है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार (Chief Minister Nitish Kumar) ने मेवालाल चौधरी (Mevalal Chaudhary) के निधन पर शोक व्यक्त किया है। विधायक के परिजनों के मुताबिक तीन दिन पहले चौधरी कोरोना पॉजिटिव (Corona Positive) पाए गए थे और उन्हें पटना के एक अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां आज तड़के उनकी मौत हेा गई। इसे भी पढ़ें – राजस्थान में कर्फ्यू भी नहीं रोक पा रहा कोरोना ब्लास्ट, 10 हजार पार गए नए मामले, मौतों ने भी बनाया रिकॉर्ड बिहार (Bihar) के मुख्यमंत्री कार्यालय द्वारा जारी एक बयान कहा गया है कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार (Chief Minister Nitish Kumar) ने मेवालाल चौधरी (Mevalal Chaudhary) के निधन पर शोक व्यक्त किया है। इसे भी पढ़ें – UP Panchayat Election: लखनऊ समेत 20 जिलों में आज दूसरे चरण का मतदान शुरू ,सुरक्षा व्यवस्था के पुख्ता इंतजाम मुख्यमंत्री नीतीश कुमार (Chief Minister Nitish Kumar) ने कहा कि उनका निधन दुखद है और… Continue reading Bihar: जदयू विधायक और पूर्व मंत्री Mevalal Chaudhary का कोरोना से निधन, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने जताया शोक

चिराग विलय कर सकते हैं भाजपा में!

चिराग पासवान की लोक जनशक्ति पार्टी के बिहार के इकलौते विधायक ने पार्टी विधायक दल का विलय जनता दल यू में कर दिया है। गौरतलब है कि चिराग पासवान ने भाजपा के परोक्ष समर्थन से पिछले विधानसभा चुनाव में नीतीश कुमार की पार्टी के खिलाफ मोर्चा खोला था और जदयू के कोटे वाली सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे थे। उन्होंने चुनाव में दावा किया था कि चुनाव बाद उनके समर्थन से भाजपा की सरकार बनेगी। वे असल में भाजपा की सरकार बनवाने के लिए चुनाव लड़ रहे थे। उनकी वजह से जदयू को तीन दर्जन सीटों पर नुकसान हुआ लेकिन खुद उनकी पार्टी सिर्फ एक सीट जीत पाई वह भी दो सौ वोट से भी कम अंतर से। अब उनके इकलौते विधायक राजकुमार सिंह जदयू में चले गए हैं। सो, अब चर्चा शुरू हो गई है कि चिराग पासवान अपने पिता की बनाई पार्टी का विलय भाजपा में कर सकते हैं। उनके पास फिलहाल इसके अलावा कोई चारा नहीं दिख रहा है क्योंकि नीतीश कुमार जितने नाराज हैं, उसे देखते हुए लग नहीं रहा है कि चिराग पासवान की पार्टी को एनडीए में एंट्री मिलेगी। अगर भाजपा उनको केंद्र में मंत्री बनाने की भी सोचती है तो नीतीश उसका विरोध… Continue reading चिराग विलय कर सकते हैं भाजपा में!

सदन की गरिमा का दोहरा मानदंड

पिछले दिनों बिहार विधानसभा में बजट सत्र के दौरान सरकार के लाए पुलिस बिल का विरोध करते हुए मुख्य विपक्षी राजद के विधायकों ने स्पीकर के चेंबर का घेराव किया। वहां से विधायकों को हटाने के लिए भाजपा के विधायक और विधानसभा के स्पीकर ने मार्शल के साथ साथ रैपिड एक्शन फोर्स बुलव ली और विधायकों की जम कर पिटाई कराई। बाद में भाजपा ने इस कदम का बचाव करते हुए कहा कि सदन और स्पीकर की गरिमा बचाने के लिए ऐसा किया गया। लेकिन दूसरी ओर भाजपा के विधायकों ने ओड़िशा में स्पीकर के ऊपर जूते, चप्पल फेंक कर उनकी गरिमा को तार-तार कर दिया। पिछले दिनों राज्य सरकार ने सदन में लोकायुक्त बिल पेश किया था, जिसे आनन-फानन में पास कराया जा रहा था, जैसे भाजपा की सरकार संसद में करती है। लेकिन ओड़िशा विधानसभा में भाजपा के विधायक भड़क गए और उन्होंने स्पीकर के ऊपर हमला कर दिया। स्पीकर सूरज नारायण पात्रों आसन पर बैठे रहे और भाजपा के विधायकों ने उनके ऊपर जूते-चप्पल फेंके। ईयरफोन निकाल कर आसन के ऊपर फेंका। इतने से मन नहीं भरा तो सदन में रखा गया डस्टबिन भी उठा कर स्पीकर के ऊपर फेंक दिया। बाद में स्पीकर सूरज नारायण पात्रों… Continue reading सदन की गरिमा का दोहरा मानदंड

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