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पवार बनें यूपीए अध्यक्ष: शिव सेना

महाराष्ट्र में कांग्रेस और एनसीपी के समर्थन से सरकार चला रही शिव सेना ने कांग्रेस नेतृत्व पर एक बार फिर सवाल उठाया है। शिव सेना ने कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूपीए का नया अध्यक्ष बनाने की मांग की है और इसके लिए शरद पवार का नाम सुझाया है।

विपक्ष बना सकता है पवार को नेता!

कांग्रेस को छोड़ क्या बाकी विपक्षी पार्टियां शरद पवार को अपना नेता मान सकती हैं? क्या उनको विपक्षी पार्टियां अगले चुनाव में प्रधानमंत्री पद का दावेदार बना सकती है

पवार की विचारधारा वाली बात पर हैरानी

एनसीपी के सुप्रीमो शरद पवार 12 दिसंबर को 80 साल के हुए तो उन्होंने कई जगह इंटरव्यू दिए। इसी में एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा कि किसी भी नेता को विचारधारा से समझौता नहीं करना चाहिए।

सरकार नहीं चाहती कि विपक्ष राहत का काम करे!

ऐसा लग रहा है कि केंद्र सरकार यह नहीं चाहती है कि विपक्षी पार्टियां भी राहत के काम में शामिल हों। हालांकि सरकार यह जरूर चाहती है कि देश भर के लोग खुल कर दान दें, गरीबों की मदद करें, मजदूरों को मदद करे, अपने कर्मचारियों को वेतन समय पर दें, किराएदारों से किराया न लें आदि।

अब सहमति बनाएगी सरकार?

आखिर विपक्षी नेताओं की पूछ हुई। बुधवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संसद में विपक्षी दलों के नेताओं से कोरोना संकट पर बातचीत की। यानी उनकी राय ली। गौरतलब है कि विपक्षी नेताओं की बारी खिलाड़ियों, फिल्म कलाकारों आदि जैसे सार्वजनिक जीवन के विभिन्न समूहों के बाद आई। इसके पहले प्रधानमंत्री 12 विपक्षी नेताओं से फोन पर बात कर चुके थे। मगर उनकी बारी भी बहुत बाद में आई थी। बहरहाल, यह कहा जा सकता है कि कभी ना होने से देर अच्छी होती है। लेकिन सवाल है कि विपक्ष की सलाहों पर सरकार कितना ध्यान देगी। यहां यह उल्लेखनीय है कि इस वक्त देश के ज्यादातर राज्यों में विपक्षी दलों की सरकारें हैं। अगर कोरोना से लड़ना है तो उनके सहयोग के बिना यह संभव नहीं है। ऐसे में बेहतर होता कि आरंभ से ही राष्ट्रीय आम सहमति बनाई जाती। मगर ऐसा करना वर्तमान केंद्र सरकार की फितरत में नहीं है। इसलिए ये उम्मीद कम है कि विपक्षी नेताओं से बातचीत महज रस्म अदायगी से ज्यादा कुछ साबित होगी। या सरकार विपक्ष के परामर्श पर गौर करेगी। वो ऐसा करना चाहे, तो कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने कुछ माकूल सुझाव दिए हैं। सोनिया गांधी ने प्रधानमंत्री को चिट्ठी लिख… Continue reading अब सहमति बनाएगी सरकार?

प्रशांत के खिलाफ साजिश का प्रचार शुरू

एक तरफ प्रशांत किशोर की प्रेस कांफ्रेंस ने बिहार के एनडीए नेताओं की नींद उड़ाई है तो दूसरी ओर उनके खिलाफ दुष्प्रचार भी शुरू हो गया है। हैरानी की बात है कि यह प्रचार बिहार की विपक्षी पार्टियों की ओर से किया जा रहा है।

संसद में विपक्ष रहेगा बिखरा

संसद के बजट सत्र में इस बार भाजपा के संसदीय प्रबंधकों को ज्यादा मेहनत करने की जरूरत नहीं पड़ने वाली है। विपक्षी पार्टियों ने अपने इरादे पहले ही साफ कर दिए हैं। ज्यादातर बड़ी विपक्षी पार्टियां अकेले अपनी राजनीति करने वाली हैं। सो, यह तय दिख रहा है कि विपक्ष में एकता नहीं बनेगी।

संसद का यह तूफानी सत्र

संसद का यह सत्र तूफानी होनेवाला है, इसमें किसी को ज़रा-सा भी शक नहीं है। राष्ट्रपति के भाषण के दौरान विपक्षी सदस्यों ने जो हंगामा मचाया, वह आनेवाले कल की सादी-सी बानगी है। एक अर्थ में यह सत्र तूफानी से भी ज्यादा भयंकर सिद्ध हो सकता है। अब से 50-55 साल पहले इंदिराजी के कई सत्रों को डाॅ. लोहिया और मधु लिमये के द्वारा तूफानी बनते हुए मैंने देखे हैं लेकिन यह 31 बैठकों का सत्र ऐसा होगा, जो मोदी ने कभी न पहले गुजरात में देखा होगा और न ही दिल्ली में देखा है। यह सत्र तय करेगा कि मोदी की सरकार अगले पांच साल कैसे चलेगी ? चलेगी या नहीं भी चलेगी ? देश में मचे हुए कोहराम को वह रोक पाएगी या नहीं। यह कोहराम और इसके साथ गिरती हुई आर्थिक हालत अगले छह माह में इस जबर्दस्त राष्ट्रवादी सरकार की दाल पतली कर देगी। भाजपा और संघ में जो गंभीर और दूरदृष्टि संपन्न लोग हैं, उनकी चिंता दिनोंदिन बढ़ रही है। वे अभी तक चुप हैं लेकिन वे वैसे कब तक रह पाएंगे ? भाजपा के समर्थक और गठबंधन के दल भी सरकार की ‘मजहबी-नीति’ का विरोध कर रहे हैं। वे नए नागरिकता कानून में संशोधन… Continue reading संसद का यह तूफानी सत्र

संसद सत्र में सीएए का मुद्दा रहेगा

संसद का बजट सत्र 31 जनवरी से शुरू हो रहा है। बजट सत्र का पहला हिस्सा बहुत व्यस्त रहने वाला है। सत्र की शुरुआत राष्ट्रपति के अभिभाषण और आर्थिक सर्वेक्षण से होगी। उसके अगले दिन बजट पेश होगा और फिर अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा शुरू होगी।

एनपीआर की प्रक्रिया में देरी होगी

राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर, एनपीआर की प्रक्रिया में देरी होगी। पूरे देश में यह प्रक्रिया अप्रैल से शुरू होने वाली है। कई राज्यों ने इसकी अधिसूचना जारी कर दी है। पर ऐसा लग रहा है कि अगर सरकार ने इसमें कुछ बदलाव नहीं किए और राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर, एनआरसी नहीं लाने का वादा नहीं किया तो एनपीआर की प्रक्रिया थम जाएगी।

नीतीश मानव श्रंखला के नाम पर गरीबों का पैसा खा रहे : राबड़ी

बिहार में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की महत्वाकांक्षी योजना ‘जल-जीवन-हरियाली अभियान’ के तहत 19 जनवरी को बनाए जाने वाली राज्यव्यापी मानव श्रंखला को लेकर लगातार विपक्षी पार्टियां निशाना साध रही हैं।

विपक्ष का नेतृत्व करेगा कौन? कांग्रेस या..

सुशांत कुमार– यह फैसला कांग्रेस पार्टी को करना है कि वह आगे बढ़ कर विपक्ष का नेतृत्व करेगी या दूसरी पार्टियों को नेतृत्व करने देगी? कांग्रेस के इसी फैसले से तय होगा कि उसका भविष्य क्या होना है। अब सवाल है कि कांग्रेस कैसे आगे बढ़ कर और किस तरह से विपक्ष का नेतृत्व करे? इसके लिए पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी की मिसाल दी जा सकती है। वे सही कर रही हैं या गलत? इसका उनको अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव में फायदा होगा या नुकसान? ये सब बातें बाद की हैं। फिलहाल यह स्थिति है कि वे हर दिन अपने राज्य के किसी न किसी हिस्से में प्रदर्शन कर रही हैं। संशोधित नागरिकता कानून पास होने के बाद उन्होंने लगातार सात दिन तक राजधानी कोलकाता में रैलियां कीं। उसके बाद वे कोलकाता से बाहर निकलीं और राज्य के अलग अलग हिस्सों में रैली करके लोगों को इस कानून के विरोध के लिए तैयार कर रही हैं। उन्होंने अपने को दांव पर लगाया है। वे हर रैली में यह बता रही हैं कि इस कानून के बाद नागरिकता रजिस्टर बनेगा और अंततः देश के हिंदू-मुस्लिम सहित पूरी आबादी परेशान होगी। वे बता रही हैं कि यह कानून देश… Continue reading विपक्ष का नेतृत्व करेगा कौन? कांग्रेस या..

पवार, ममता में से कौन नेतृत्व करेगा?

विपक्षी पार्टियों को कौन एकजुट करेगा और कौन उनका नेतृत्व करेगा, यह चर्चा अब दो नामों पर सिमटती दिख रही है। गैर कांग्रेस नेताओं में शरद पवार या ममता बनर्जी को इस काम के लिए सबसे उपयुक्त माना जा रहा है। दोनों नेता एक दूसरे के संपर्क में हैं और अपनी पोजिशनिंग भी कर रहे हैं।

विपक्ष अभी एकजुट नहीं होने जा रहा है

झारखंड में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के शपथ ग्रहण समारोह में विपक्षी पार्टियों के नेता जुटे। मंच पर विपक्षी पार्टियों के नेताओं की संख्या बेहद प्रभावशाली थी पर उनके बीच की केमिस्ट्री नदारद थी। ऐसा नहीं लग रहा था कि पार्टियां एक दूसरे का समर्थन करने वहां पहुंची थीं।

कश्मीर में चुनाव कब होंगे?

जम्मू कश्मीर में बाकी राज्यों की तरह विधानसभा का कार्यकाल पांच साल का नहीं है। वहां छह साल की विधानसभा होती है। यह अभी तक स्पष्ट नहीं है कि उसका विशेष राज्य का दर्ज खत्म होने के बाद विधानसभा के कार्यकाल में बदलाव करने का कोई प्रस्ताव सरकार मंजूर कर रही है या नहीं।

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