कांग्रेस अभी इंतजार के मूड में

कांग्रेस पार्टी 2024 के लोकसभा चुनाव को लेकर किसी जल्दी में नहीं है। ममता बनर्जी भले उसके लिए बहुत उत्साह दिखा रही हैं लेकिन कांग्रेस को हड़बड़ी नहीं है। कांग्रेस पार्टी अपना समय आने का इंतजार कर रही है। पार्टी को लग रहा है कि अगले साल होने वाले पांच राज्यों के चुनाव के बाद कांग्रेस की स्थिति बदल जाएगी।

पवार, यशवंत और अब ममता

विपक्ष के नेताओं का म्यूजिकल चेयर चल रहा है। सारे नेता एक आभासी कुर्सी के ईर्द-गिर्द संगीत की धुन पर चक्कर लगा रहे हैं। कुछ दिन पहले तक विपक्ष को एकजुट करने का प्रयास कर रहे नेता शरद पवार थे।

कांग्रेस नेतृत्व वाला यूपीए है कहां?

कह सकते हैं कि भाजपा के नेतृत्व वाला एनडीए भी कहां है! न कोई एनडीए का संयोजक है और न कहीं एनडीए के घटक दलों की बैठकें होती हैं और पिछले चार-पांच साल में एक एक करके पार्टियां एनडीए से अलग होती गई हैं।

कृषि कानून क्यों नहीं बदल रही सरकार?

changing the agriculture law : केंद्र सरकार के बनाए तीन कृषि कानूनों के विरोध में किसानों का आंदोलन शुरू होने के बाद संसद का दूसर सत्र शुरू होने वाला है। किसानों के साथ सरकार ने आखिरी बार 22 जनवरी को बात की थी। उसके बाद किसानों से बात करने और आंदोलन खत्म कराने का कोई प्रयास नहीं हुआ है। सरकार की ओर से बार बार कहा जा रहा है कि कानूनों को रद्द करने के अलावा बाकी हर मुद्दे पर वह किसानों से बात करने को तैयार है। अब तो किसानों के हितैषी और विपक्ष के महत्वपूर्ण नेता शरद पवार ने भी कह दिया है कि कानून पूरी तरह से रद्द करने की जरूरत नहीं है, बल्कि जिन प्रावधानों से किसानों को आपत्ति है उन्हें बदला जाए। यह भी पढ़ें: राजद्रोह-कानूनः लोकतंत्र का कलंक तभी सवाल है कि केंद्र सरकार इन कानूनों को बदलने की पहल क्यों नहीं कर रही है? सरकार ने किसानों के साथ आखिरी बार बातचीत से पहले कुछ बदलावों पर सहमति जताई थी। तीनों कानूनों को मिला कर कोई एक दर्जन प्रावधान थे, जिन्हें बदलने को सरकार तैयार थी। सरकार ने खुद कहा था कि वह कांट्रैक्ट पर खेती की मंजूरी देने वाले कानून में अदालत… Continue reading कृषि कानून क्यों नहीं बदल रही सरकार?

शिव सेना पर पवार का दांव

shiv sena sharad pawar : महाराष्ट्र के महाविकास अघाड़ी में शामिल एनसीपी के नेता शरद पवार का कोई खास सद्भाव कांग्रेस के प्रति नहीं है। वे शिव सेना के प्रति अपना सद्भाव दिखाते रहते हैं और मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे के साथ उनकी मुलाकातें भी होती रहती हैं। लेकिन जहां राजनीति की बात आती है वहां वे शिव सेना की लगाम कसे रखते हैं। उनको पता है कि शिव सेना के पास मुख्यमंत्री का पद है और इसलिए विधानसभा स्पीकर का पद किसी हाल में उसके पास नहीं जाना चाहिए। इसलिए जैसे ही शिव सेना के नेताओं ने स्पीकर पद की मांग की वैसे ही पवार ने दो टूक कहा कि स्पीकर का पद कांग्रेस के पास ही रहेगा। ध्यान रहे कांग्रेस ने नाना पटोले को स्पीकर बनवाया था लेकिन बाद में पार्टी ने उनको प्रदेश अध्यक्ष बना दिया। तब से स्पीकर का पद खाली है। दो दिन के विशेष सत्र में उपाध्यक्ष और शिव सेना के नेता भास्कर जाधव ने सदन का संचालन किया और हंगामा करने के नाम पर भाजपा के एक दर्जन विधायकों को एक साल के लिए निलंबित कर दिया। तब से शिव सेना के नेता स्पीकर पद की मांग कर रहे हैं। उन्होंने कहा है कि… Continue reading शिव सेना पर पवार का दांव

ममता को बंगाल में ही रोकने का प्रयास

भारतीय जनता पार्टी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी क्या ममता बनर्जी की महत्वाकांक्षा से चिंतित हैं और मान रहे हैं कि ममता वह कर सकती हैं, जो आज तक विपक्ष का कोई नहीं कर सका है? ध्यान रहे विपक्ष का कोई नेता लोकप्रियता और विश्वसनीयता के मामले में नरेंद्र मोदी को चुनौती नहीं दे सका है। अखिल भारतीय स्तर पर किसी नेता की वैसी पहचान और साख भी नहीं बनी है, जैसी मोदी की है। लेकिन बंगाल में लगातार तीसरी बार चुनाव जीतने और सीधे मुकाबले में मोदी और अमित शाह को हराने के बाद ममता चुनौती बन सकती हैं। यह भी पढ़ें: शिव सेना जानती है कांग्रेस की मजबूरी असल में ममता बनर्जी ने बंगाल में कई मिथक तोड़े हैं। मोदी की लोकप्रियता, शाह की रणनीति और भाजपा की ध्रुवीकरण कराने की क्षमता के मिथक टूट गए हैं। इसका असर दूरगामी होगा। ऊपर से ममता बनर्जी को दूसरे कई नेताओं के मुकाबले बहुत एडवांटेज हैं। उनके भतीजे को भ्रष्टाचार के आरोपों में घेरने की केंद्रीय एजेंसियों के तमाम प्रयासों के बावजूद ममता के भ्रष्ट होने का नैरेटिव नहीं बन पाया है। उनकी ईमानदारी और सादगी सहज रूप से स्वीकार्य है। दूसरे, वे महिला हैं और जुझारू हैं। तीसरे, कांग्रेस छोड़… Continue reading ममता को बंगाल में ही रोकने का प्रयास

शिव सेना जानती है कांग्रेस की मजबूरी

maharashtra politics mahavikas aghadi Sarkar : महा विकास अघाड़ी महाराष्ट्र की महा विकास अघाड़ी सरकार का नेतृत्व कर रही शिव सेना क्यों कांग्रेस पार्टी को ज्यादा महत्व नहीं दे रही है? क्यों शिव सेना के नेता एनसीपी के शरद पवार को तरजीह दे रहे हैं और कांग्रेस के खिलाफ बयान देते रहते हैं? क्यों शिव सेना ने राहुल गांधी को शरद पवार से सीखने की सलाह दी? शिव सेना क्यों कांग्रेस नेताओं जैसे नाना पटोले या भाई जगताप के बयानों पर ध्यान नहीं दे रही है? इन सब सवालों का एक ही जवाब है कि शिव सेना को कांग्रेस की मजबूरी पता है। उसे पता है कि कांग्रेस महा विकास अघाड़ी छोड़ कर कहीं नहीं जाने वाली है। कम से कम अगले दो साल तक कांग्रेस को किसी तरह से शिव सेना के साथ ही रहना है। शिव सेना छोड़ दे तो अलग बात है। यह भी पढ़ें: नरसिंह राव को याद करने का समय नहीं यह भी पढ़ें: स्वतंत्र निदेशकों के लिए भी कुछ नियम बने! दूसरी ओर एनसीपी के साथ ऐसी मजबूरी नहीं है। एनसीपी को भाजपा के साथ राजनीति करने में भी कोई दिक्कत नहीं है। पिछले कुछ दिनों से इस बात की चर्चा हो रही है… Continue reading शिव सेना जानती है कांग्रेस की मजबूरी

शरद पवार से नाराज कांग्रेस नेता

कांग्रेस पार्टी के नेता शरद पवार ( maharashtra politics sharad pawar ) से बहुत नाराज हैं। पहले ही जब उन्होंने राहुल गांधी के नेतृत्व को लेकर टिप्पणी की थी तभी नाराजगी शुरू हो गई थी लेकिन अब हद हो गई है। हालांकि बेचारे कांग्रेस नेता मजबूर हैं कुछ कर नहीं सकते हैं। वे सही मौके का इस्तेमाल कर रहे हैं। कांग्रेस के एक महत्वपूर्ण नेता ने माना कि महाराष्ट्र में कांग्रेस के नेता जो बयान दे रहे हैं उस पर आलाकमान की सहमति है और वह बयानबाजी सिर्फ शरद पवार की वजह से हो रही है। कांग्रेस नेता यह भी मान रहे हैं कि शरद पवार ही शिव सेना को भी भड़का रहे हैं। कांग्रेस के एक प्रवक्ता ने चुनिंदा पत्रकारों के सामने कहा कि शरद पवार नियमित रूप से उद्धव ठाकरे से मिलते हैं, जबकि कांग्रेस में ऐसा कोई सिस्टम नहीं है। अपनी मुलाकातों में पवार क्या खिचड़ी पकाते हैं यह किसी को पता नहीं है। यह भी पढ़ें: दिसंबर से पहले ही सबको वैक्सीन लगेगी! कांग्रेस के एक नेता ने नाराजगी जताते हुए कहा कि शरद पवार सिर्फ प्रासंगिक बने रहना चाहते हैं और विपक्ष की राजनीति को नियंत्रित करना चाहते हैं। वे सिर्फ पांच सांसदों वाली पार्टी… Continue reading शरद पवार से नाराज कांग्रेस नेता

ममता दीदी के भतीजे अभिषेक बनर्जी कहां राष्ट्रीय राजनीति करेंगे?

अभिषेक बनर्जी कहां राष्ट्रीय राजनीति करेंगे : नेताओं का आत्मविश्वास अक्सर हैरान करने वाला होता है। कई बार नासमझ नेता कोई बयान देते हैं, जैसे ई श्रीधरन ने कहा कि वे केरल के मुख्यमंत्री बनेंगे, तो ऐसे बयानों की अनदेखी करनी होती है। लेकिन कई बार बहुत जानकार और सीजन्ड नेता इस तरह के बयान देते हैं। जैसे ममता बनर्जी ने कहा है कि उनकी पार्टी अब राष्ट्रीय राजनीति करेगी। उन्होंने अपने भतीजे अभिषेक बनर्जी को राष्ट्रीय महासचिव बनाया है। नई जिम्मेदारी मिलने के बाद अभिषेक ने कहा कि वे पार्टी को पूरे देश में ले जाएंगे और चुनाव लड़ेंगे। अब सोचें, अभिषेक बनर्जी पार्टी को कहां राष्ट्रीय राजनीति करेंगे? क्या वे अगले साल उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब, गोवा और मणिपुर में पार्टी को चुनाव लड़ाएंगे? इससे उनको क्या हासिल होगा? ममता ने मोदी पर किया हमला तृणमूल कांग्रेस पहले भी इस तरह राष्ट्रीय राजनीति करने का प्रयास कर चुकी है। झारखंड में इधर-उधर के नेताओं को जुटा कर तृणमूल को खड़ा करने का प्रयास हुआ था। ममता बनर्जी भी रैली करने पहुंची थीं। लेकिन अंत नतीजा क्या हुआ? इधर-उधर से आए सारे नेता फिर इधर-उधर चले गए। बिल्कुल यहीं कहानी त्रिपुरा में भी दोहराई गई थी। ममता बनर्जी के… Continue reading ममता दीदी के भतीजे अभिषेक बनर्जी कहां राष्ट्रीय राजनीति करेंगे?

शरद पवार और विपक्ष : उम्मीद, भरोसा किस चेहरे से?

शरद पवार और विपक्ष : शरद पवार के घर पर कुछ विपक्षी पार्टियों और कुछ जाने-माने नागरिकों की जो बैठक हुई है उसका मकसद समझना मुश्किल नहीं है। बैठक के बाद भले पवार की पार्टी के नेता कहें कि यह बैठक उन्होंने नहीं बुलाई थी या यह कोई राजनीतिक बैठक नहीं थी लेकिन हकीकत सबको पता है। यह 2024 के लोकसभा चुनाव से पहले देश में लोगों के सामने एक विकल्प पेश करने, एक अलग विचारधारा दिखाने और देश के लोगों को एक अलग कहानी सुनाने के मकसद से हुई। आगे इसका स्वरूप और स्पष्ट होगा। थोड़े दिन के बाद यह भी साफ होगा कि इस समूह के नेता कांग्रेस के नेतृत्व वाले दूसरे मोर्चे का साथ किस तरह का चुनावी तालमेल करेंगे। यह भी पढ़ें: महाराष्ट्र में चुनाव की क्या जल्दी है? लेकिन उससे पहले सवाल है कि क्या इस समूह में ( शरद पवार और विपक्ष) कोई चेहरा ऐसा है, जो उम्मीद जगा सके या देश के लोगों को भरोसा दिलाए? यह प्रयास कुछ कुछ वैसा  ही है जैसा 2011 में अरविंद केजरीवाल ने किया था। उन्होंने इसी तरह देश भर के सामाजिक कार्यकर्ताओं को और जाने-माने लोगों को एक जगह इकट्ठा किया था और इंडिया अगेंस्ट करप्शन… Continue reading शरद पवार और विपक्ष : उम्मीद, भरोसा किस चेहरे से?

Yashwant Sinha Rashtramanch Meeting : भाजपा-विरोधी ‘राष्ट्रमंच’ की नाकामी

Yashwant Sinha Rashtramanch Meeting : तृणमूल कांग्रेस के उपाध्यक्ष और पूर्व केंद्रीय मंत्री यशवंत सिन्हा ने पहल की और अपने ‘राष्ट्रमंच’ की ओर से देश के राजनीतिक दलों की एक बैठक बुलाई। विपक्षी दलों की इस बैठक की हफ्ते भर से अखबारों में बड़ी चर्चा हो रही थी। कहा जा रहा था कि सारे विपक्षी दलों का जबर्दस्त गठबंधन खड़ा किया जाएगा, जो अगले आम चुनाव में नरेंद्र मोदी और भाजपा को चित्त कर देगा लेकिन हुआ क्या ? खोदा पहाड़ और उसमें से चुहिया भी नहीं निकली। यह भी पढ़ें: यह कैसा धर्मांतरण है ? चुहिया भी नहीं निकली, यह मैं इसलिए कह रहा हूं कि बैठक के बाद इसके प्रवक्ता ने एकदम शीर्षासन की मुद्रा धारण कर ली। उसने सबसे बड़ी बात यह कही कि यह बैठक उन्होंने वैकल्पिक सरकार बनाने के हिसाब से नहीं बुलाई थी और इसका लक्ष्य भाजपा सरकार का विरोध करना नहीं है। यदि ऐसा ही था तो फिर इसे क्यों बुलाया गया था ? इसमें सभी छोटी-मोटी पार्टियों को तो बुलाया गया था लेकिन भाजपा को आयोजक लोग कैसे भूल गए ? भाजपा को इसमें क्यों नहीं बुलाया गया ? देश की स्थिति सुधारने में क्या उसका कोई योगदान नहीं हो सकता है… Continue reading Yashwant Sinha Rashtramanch Meeting : भाजपा-विरोधी ‘राष्ट्रमंच’ की नाकामी

पवार के घर पर जुटे विपक्षी नेता

Sharad Pawar Yashwant Sinha Meeting : नई दिल्ली। एनसीपी के प्रमुख शरद पवार के घर पर मंगलवार को कई विपक्षी पार्टियों के नेता जुटे। तृणमूल कांग्रेस में शामिल हो गए भाजपा के पूर्व नेता यशवंत सिन्हा के बनाए राष्ट्र मंच के तहत विपक्षी नेताओं का यह जमावड़ा हुआ। इस बैठक में शरद पवार के अलावा यशवंत सिन्हा भी शामिल हुए। बैठक के बाद पवार की पार्टी के नेता माजिद मेमन ने सफाई देते हुए कहा कि यह तीसरे मोर्चे की बैठक नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि बैठक शरद पवार ने नहीं बुलाई थी। कांग्रेस पार्टी को इसमें नहीं बुलाया गया था। गौरतलब है कि ममता बनर्जी के चुनाव रणनीतिकार प्रशांत किशोर ने पिछले दो हफ्ते में दो बार शरद पवार से मुलाकात की है। सोमवार को भी वे पवार से मिले थे और उसके बाद ही यह बैठक बुलाई गई थी। हालांकि खुद प्रशांत किशोर ने सोमवार को ही कहा था कि अगले चुनाव में कोई तीसरा या चौथा मोर्चा नरेंद्र मोदी को नहीं हरा पाएगा। माना जा रहा है कि प्रशांत किशोर विपक्षी पार्टियों को एक मंच पर लाने का प्रयास कर रहे हैं। बहरहाल, मंगलवार को हुई बैठक के बाद माजिद मेमन ने कहा- मीडिया में… Continue reading पवार के घर पर जुटे विपक्षी नेता

कांग्रेस की कमान में दूसरा मोर्चा

कांग्रेस की कमान दूसरा मोर्चा : ममता बनर्जी की महत्वाकांक्षा और शरद पवार की तिकड़मी राजनीति ने कांग्रेस पार्टी खास कर राहुल गांधी और उनकी टीम की नींद उड़ाई है। उनको लगने लगा है कि विपक्ष की कई पार्टियां मिल कर मुख्य या सबसे बड़ी विपक्षी पार्टी के जगह से कांग्रेस को विस्थापित करना चाहती हैं। गैर कांग्रेस और गैर भाजपा दलों के बीच एक अनकही सहमति बन रही है। कांग्रेस के एक जानकार नेता का कहना है कि मौजूदा यूपीए भी अगले चुनाव तक इसी तरह बना रहेगा, इसकी संभावना कम है। कांग्रेस नेताओं को लग रह है कि यूपीए की कई पार्टियां अलग राजनीति कर सकती हैं और तीसरे मोर्चे के साथ जा सकती हैं। यह भी पढ़ें: इस बार लेफ्ट रहेगा दूसरे मोर्चे में इसलिए कांग्रेस पार्टी में दूसरा मोर्चा बनाने पर विचार हो रहा है। दूसरा मोर्चा राहुल गांधी उन नेताओं के साथ मिल कर बनाएंगे, जिनसे उनके निजी संबंध बहुत अच्छे हैं और जिनके बारे में उनको और उनकी टीम को यकीन है कि वे किसी हाल में भाजपा के साथ नहीं जाएंगे। दूसरे मोर्चे या गैर यूपीए राजनीति के लिए राहुल के पास तुरुप का पत्ता एमके स्टालिन हैं। तमिलनाडु के मुख्यमंत्री स्टालिन के… Continue reading कांग्रेस की कमान में दूसरा मोर्चा

इस बार लेफ्ट रहेगा दूसरे मोर्चे में

इस बार लेफ्ट रहेगा दूसरे मोर्चे में : आजाद भारत के इतिहास में वामपंथी पार्टियां हमेशा तीसरे मोर्चे की राजनीति का केंद्र रही हैं। जब कांग्रेस की सरकार होती थी और दूसरी धुरी भारतीय जनसंघ या स्वतंत्र पार्टी जैसी पार्टियां होती थीं तब तीसरा मोर्चा कम्युनिस्टों का होता था। समाजवादी पार्टियों के साथ टकराव के बावजूद कम्युनिस्ट हमेशा तीसरा मोर्चा बनाते रहे, जिसमें समाजवादी पार्टियां भी शामिल होती रहीं। इसके एकाध अपवाद रहे हैं। लेकिन इस बार कम्युनिस्ट पार्टियां तीसरे मोर्चे से बाहर हैं। ममता बनर्जी, शरद पवार, वाईएस जगन मोहन रेड्डी या के चंद्रशेखर राव जैसा कोई नेता वामपंथियों को नहीं पूछ रहा है। ऊपर से वामपंथी पार्टियों ने केरल में आमने-सामने की लड़ाई के बावजूद अपनी किस्मत कांग्रेस के साथ जोड़ ली है। यह भी पढ़ें: पत्रकारों को राहुल की चिंता इस बार लेफ्ट रहेगा दूसरे मोर्चे में ध्यान रहे इस समय कम्युनिस्ट पार्टियां दो राज्यों में कांग्रेस के साथ मिल कर सरकार का समर्थन कर रही हैं। बिहार और तमिलनाडु में कांग्रेस और कम्युनिस्ट एक साथ सत्तारूढ़ पक्ष में हैं और पश्चिम बंगाल में दोनों कई सालों से मिल कर चुनाव लड़ रहे हैं। सीपीएम महासचिव सीताराम येचुरी और सीपीआई के सबसे बड़े नेता डी राजा के… Continue reading इस बार लेफ्ट रहेगा दूसरे मोर्चे में

डेढ़ घंटे चली मोदी-उद्धव की मुलाकात

नई दिल्ली। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने मंगलवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की। मुख्यमंत्री बनने के बाद दूसरी बार उद्धव की प्रधानमंत्री से यह दूसरी मुलाकात थी। इस बार वे मराठा आरक्षण के मसले पर बात करने आए थे। इसके अलावा उन्होंने चक्रवाती तूफान ताउते से हुई तबाही के लिए मुआवजे के बारे में भी बात की। प्रधानमंत्री के साथ उनकी मुलाकात डेढ़ घंटे से ज्यादा चली। मुलाकात के बाद उद्धव ने कहा कि राजनीतिक रूप से वे भाजपा के साथ नहीं हैं पर मोदी से रिश्ता खत्म नहीं हो गया है। गौरतलब है कि पिछले दिनों सुप्रीम कोर्ट ने मराठा आरक्षण पर रोक लगा दी थी, जिसके बाद प्रदेश में राजनीति तेज हो गई है। मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने मराठा आरक्षण लागू करने के लिए प्रधानमंत्री से मदद मांगी। उसके अलावा उन्होंने वैक्सीनेशन और तूफान से हुए नुकसान के मुआवजे के बारे में बात की। एक दिन पहले ही यह मुलाकात तय हुई है और दोनों ने मीटिंग अकेले में की। ये बातचीत करीब एक घंटा चालीस मिनट तक चली मुलाकात के बाद इस बारे में पूछे जाने पर उद्धव ने कहा- भले ही राजनीतिक रूप से साथ नहीं हैं, लेकिन इसका यह मतलब नहीं है… Continue reading डेढ़ घंटे चली मोदी-उद्धव की मुलाकात

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