कार्यकर्ताओं का नमक व गोली दोनों खाना!

जब मैं पढाई कर रहा था तब पढ़ा था कि साहित्य समाज का दर्पण होता है। मतलब समाज में जो कुछ घट रहा होता है वह साहित्य में प्रतिबिंबित हो जाता है। बाद में जब शौले फिल्म देखी जिसमें खलनायक अपने करीबी साथियो को यह कहने पर कि हुजूर मैंने आपका नमक खाया है, तो सुनने वाले ने यह कहते ही उसे गोली मार देता है कि पहले नमक खाया है तो अब गोली खा।