विरोध का अधिकार कभी भी और हर जगह नहीं हो सकता : सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने पिछले वर्ष अक्टूबर में अपने एक महत्वपूर्ण फैसले में नागरिकता संशोधन कानून (सिटिजेनशिप अमेंडमेंट एक्ट – सीएए) के खिलाफ राष्ट्रीय राजधानी के शाहीन बाग में विरोध-प्रदर्शन को अवैध बताया था।

किसानों के मुद्दे पर कंगना पर भड़के मीका सिंह, कहा शर्म करो

गायक मीका सिंह अभिनेत्री कंगना रनौत से खासे नाराज हैं। दरअसल कंगना ने किसानों के विरोध प्रदर्शन में शामिल हुई एक सिख बुजुर्ग महिला को शाहीन बाग वाली बिलकिस बानो समझ लिया

किसानों के समर्थन में उतर सकती है शाहीन बाग की दबंग दादी, पहुंचेगी सिंघू बॉर्डर

कृषि कानूनों के खिलाफ विभिन्न राज्यों के कई किसान और किसान संगठन लगातार विरोध कर रहे हैं। अब इस आंदोलन में टाइम मैगजीन की 100 प्रभावशाली लोगों की लिस्ट में शामिल हुई शाहीन बाग की दादी भी उतरेंगी।

शाहीन बागः रास्ता रोक पर रोक

सर्वोच्च न्यायालय ने एक ऐसा फैसला दे दिया है, जिसके कारण सभी प्रदर्शनकारियों और धरनाधारियों को अब ज़रा सम्हलकर रहना होगा। शाहीन बाग में कई हफ्तों तक पड़ौसी देशों के शरणार्थियों के बारे में बने कानून के विरुद्ध धरना चलता रहा।

सार्वजनिक जगहों पर प्रदर्शन इजाजत नहीं

संशोधित नागरिकता कानून के विरोध में दिल्ली के शाहीन बाग में हुए धरने को लेकर सुप्रीम कोर्ट में दायर मुकदमे की सुनवाई पूरी हो गई है और अदालत ने फैसला सुरक्षित रख लिया है। इस मामले में प्रदर्शन करने के अधिकार को लेकर सुनवाई हुई है।

ये रिश्ता क्या कहलाता है?

शाहीन बाग प्रयोग में भी देश ने इन सबकी अराजकता देखी, और ढेरों दुर्दांत हत्याओं, बलात्कार, आगजनी, लूटमार के इतने महीनों बाद, अब जब दिल्ली पुलिस पिछले कुछ दिनों से चार्जशीट दाखिल कर रही है,

शाहीन बाग आखिर हुआ खाली

कोरोना वायरस के संकट से और कुछ हो या नहीं हो पर एक बड़ा काम हो गया है। नई दिल्ली का शाहीन बाग इलाका खाली हो गया है। हालांकि इसका तात्कालिक फायदा आम लोगों को नहीं है क्योंकि अभी तो वैसे भी दिल्ली में लॉकडाउन है और सड़कों पर ट्रैफिक नहीं है।

शाहीन बाग में आपस में भिड़े दो गुट

दिल्ली के शाहीन बाग धरनास्थल के पास रविवार सुबह एक अज्ञात व्यक्ति ने पेट्रोल बम फेंक दिया। पुलिस ने यह जानकारी दी।

जनता कर्फ्यू में शामिल नहीं होंगी शाहीन बाग की दादियां

नई दिल्ली। देश भर में जहां प्रधानमंत्री की सलाह के बाद रविवार को जनता कर्फ्यू की तैयारी चल रही है। वहीं शाहीन बाग में नागरिकता संशोधन कानून का विरोध कर रही महिलाओं का कहना है कि वे अपनी मांगें पूरी होने तक धरना नहीं छोड़ेंगी, और न ही जनता कर्फ्यू का हिस्सा बनेंगी। हालांकि कोरोनावायरस के संक्रमण को देखते हुए यहां प्रदर्शनकारी महिलाओं की संख्या कम कर दी गई है। मुख्य पंडाल में अब केवल 40-50 महिलाएं ही मौजूद हैं। शाहीन बाग की दादी के नाम से मशहूर आसमा खातून ने कहा, हम यहां से तब तक नहीं हिलेंगे जब तक की सीएए का काला कानून वापस नहीं लिया जाता। भले ही मुझे कोरोनावायरस संक्रमण हो जाए। मैं शाहीन बाग में मरना पसंद करूंगी, लेकिन हटूंगी नहीं। शाहीन बाग की दूसरी दादी बिलकिस बानो ने कहा, अगर प्रधानमंत्री को हमारी सेहत की इतनी ही चिंता है तो आज इस काले कानून को रद्द कर दें फिर हम भी रविवार के दिन को जनता कर्फ्यू में शामिल हो जाएंगे। यहां धरनास्थल पर मौजूद नूरजहां ने कहा, हमारे लिए एक तरफ कुआं और एक तरफ खाई जैसे हालात हैं। यह खबर भी पढ़ें:- शाहीन बाग और सवाल कोरोना जैसी बीमारी का खतरा… Continue reading जनता कर्फ्यू में शामिल नहीं होंगी शाहीन बाग की दादियां

विफल रही शाहीनबाग की महिलाओं और पुलिस की वार्ता

नई दिल्ली। दिल्ली पुलिस और शाहीनबाग की महिला प्रदर्शनकारियों के बीच मंगलवार को एक बार फिर वार्ता हुई। पुलिस अधिकारियों ने यहां नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ धरना दे रही महिलाओं से मुख्य सड़क मार्ग को खाली करने की अपील की, लेकिन प्रदर्शनकारी महिलाओं ने पुलिस की अपील को दरकिनार करते हुए प्रदर्शन जारी रखने का ऐलान किया है। इसके फलस्वरूप पुलिस और प्रदर्शनकारी महिलाओं के बीच चल रही है वार्ता एक बार फिर से विफल हो गई। इससे पहले भी कई मर्तबा दिल्ली पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी शाहीनबाग की मुख्य सड़क पर बैठी महिला प्रदर्शनकारियों से बात करने आ चुके हैं। मंगलवार को पुलिस और प्रदर्शनकारी महिलाओं के बीच वार्ता के लिए एक निष्पक्ष स्थान का चुनाव किया गया था। शाहीन बाग में चल रहे प्रदर्शन से करीब 100 मीटर दूर स्थित चौराहे पर पुलिस और महिला प्रदर्शनकारियों के बीच यह बातचीत हुई। यहां पुलिस की ओर से स्थानीय एसएचओ और एसीपी जगदीश यादव मौजूद थे। वहीं प्रदर्शनकारियों की ओर से करीब 20 महिलाएं इस वार्ता में शामिल हुईं। महिलाओं से बातचीत के दौरान एसीपी जगदीश यादव ने कहा “आप पिछले कई महीनों से यहां प्रदर्शन कर रही हैं, इस दौरान हमने आपको पूरी सुरक्षा मुहैया कराई है। हमारा… Continue reading विफल रही शाहीनबाग की महिलाओं और पुलिस की वार्ता

आंतकी की तरह व्यवहार कर रहे शाहीनबाग प्रदर्शनकारी: कपिल मिश्रा

नई दिल्ली। नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीएए) को लेकर विरोध प्रदर्शन कर रहे शाहीन बाग के प्रदर्शनकारियों के खिलाफ शुरुआत से ही हमलावर रहे भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेता कपिल मिश्रा ने एक बार फिर उन पर निशाना साधा। इस बार कोविड-19 के बढ़ते खतरे को लेकर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर मिश्रा ने ट्वीट कर कहा, पहले उन्होंने हमारे यातायात को रोका, हमें स्कूल-अस्पताल और कार्यालय जाने से भी रोका। अब शाहीन बाग के प्रदर्शनकारी आत्मघाती मिशन पर निकले आतंकवादियों की तरह व्यवहार कर रहे हैं। उन्होंने आगे कहा, शाहीन बाग अब दिल्ली के लाखों नागरिकों के जीवन के लिए सीधा खतरा बन गया है। यह एक आपराधिक कृत्य है। हैशटैग कोरोना। उनका यह बयान ऐसे समय में आया है, जब प्रदर्शनकारियों ने सरकार के सामाजिक दूरी बनाए रखने के निर्देशों को अनदेखा करते हुए कहा कि वह प्रदर्शनस्थल से नहीं हटेंगे। दिल्ली सरकार ने कोरोनवायरस संक्रमण के बढ़ते खतरे के मद्देनजर 50 या इससे अधिक लोगों के इकट्ठा होने पर रोक लगा दी है। गौरतलब है कि शाहीन बाग में महिलाएं नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीएए), प्रस्तावित नागरिको के राष्ट्रीय रजिस्टर (एनआरसी) और राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर (एनपीआर) के विरोध में प्रदर्शन कर रही हैं। कोविड-19 के बढ़ते संक्रमण को देखते… Continue reading आंतकी की तरह व्यवहार कर रहे शाहीनबाग प्रदर्शनकारी: कपिल मिश्रा

शाहीन बाग में दिन के समय नहीं जुट रही भीड़

शाहीन बाग में नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीएए) और राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (एनआरसी) के विरोध में पिछले 84 दिनों से चल रहा प्रदर्शन अब फीका पड़ने लगा है।

शाहीनबाग में धारा 144 लागू

शाहीन बाग में नागरिकता संशोधन कानून को लेकर करीब 3 महीने से सड़क पर प्रदर्शन चल रहा है, जिससे ओखला में रहने वाले लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

क्या हिंसा रोकनी मुश्किल थी?

दिल्ली में चार दिन तक चले दंगे को समझने के प्रयास में एक बात सबसे ज्यादा सोचने वाली है कि क्या सचमुच दंगा रोकना मुश्किल था? इसके जवाब के लिए पूरी क्रोनोलॉजी समझनी होगी। असल में दिल्ली में दंगे के हालात पिछले कई महीने से बन रहे थे। 11-12 दिसंबर को जब संसद में संशोधित नागरिकता कानून, सीएए पास हुआ तभी से तनाव बढ़ना शुरू हो गया था।

अमूल्य पटनायक के ऊपर ठीकरा

दिल्ली में हुए सांप्रदायिक दंगों की ठीकरा दिल्ली पुलिस के कमिश्नर अमूल्य पटनायक पर फोड़ा जा रहा है और इस बहाने केंद्र सरकार के एक शीर्ष अधिकारी भी निशाने पर आए हैं। आमतौर पर चुनाव के समय अगर किसी अधिकारी का कार्यकाल खत्म हो रहा होता है तो उसे चुनाव ड्यूटी से अलग कर दिया जाता है।

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