न हमें सरस्वती प्राप्त और न लक्ष्मी!

आज वसंत पंचमी है। सरस्वती उर्फ ज्ञान, बुद्धि, विद्या की देवी की पूजा का दिन। मैं पिछले तीन वर्षों से सोचता आ रहा हूं कि इस दिन से हम हिंदुओं के सनातनी ज्ञान, सत्व-तत्व, हिंदू ग्रंथों का आज की हिंदी, मौजूदा वक्त के परिप्रेक्ष्य, वक्त के मुहावरों-जुमलों, भाषा शैली, आधुनिक प्रकृति,माध्यमों में पुनर्लेखन का वह… Continue reading न हमें सरस्वती प्राप्त और न लक्ष्मी!

कल्पवास करने से मन, वचन और कर्म होते हैं शुद्ध

मोक्षदायिनी गंगा, श्यामल यमुना और अन्त: सलिला स्वरूप में प्रवाहित सरस्वती के विस्तीर्ण रेती पर बसे तंबुओं के आध्यातमिक नगरी “माघ मेला” में कल्पवासियों का कहना है कि कल्पवास करने से कर्म, वचन और मन तीनों की शुद्धता के साथ शरीर स्वस्थ और जीवन अनुशासित बनता है।