फेरबदल या ध्यान भटकाना?

केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार में फेरबदल की चर्चा एक बार फिर शुरू हो गई है। प्रधानमंत्री मंत्रालयों की समीक्षा कर रहे हैं और उनके साथ पार्टी अध्यक्ष जेपी नड्डा भी मौजूद रह रहे हैं। इसका मतलब है कि प्रधानमंत्री और पार्टी अध्यक्ष दोनों मंत्रियों के कामकाज की रिपोर्ट ले रहे हैं ताकि उनके प्रदर्शन का आकलन करके सरकार में फेरबदल का फैसला हो। दूसरी ओर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह सहयोगी दलों के नेताओं से मिल रहे हैं और उनकी मांगों पर विचार कर रहे हैं। मोदी के साथ शाह और नड्डा की बैठक से भी यह संकेत मिला कि सरकार में फेरबदल की तैयारी हो रही है। लेकिन क्या सचमुच इस बार मोदी सरकार का विस्तार होगा या इस बार की चर्चाएं भी फॉल्स अलार्म साबित होंगी? ध्यान रहे 30 मई 2019 को दूसरी बार शपथ लेने के बाद से ही सरकार में फेरबदल की चर्चा हो रही है। उसके बाद एक एक करके अनेक मंत्रियों के पद खाली हो गए। शिव सेना के अरविंद सावंत और अकाली दल की हरसिमरत कौर बादल सरकार से बाहर हो गए तो रामविलास पासवान और सुरेश अंगडी का निधन हो गया। एक दर्जन नेता एक या दो से ज्यादा मंत्रालयों के… Continue reading फेरबदल या ध्यान भटकाना?

आस लगाए बैठे हैं कई नेता

पता नहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपनी सरकार का विस्तार कब करेंगे, तब तक कई नेता आस लगाए बैठे हैं। ज्योतिरादित्य सिंधिया तो एक साल से ज्यादा समय से केंद्रीय मंत्री बनने की उम्मीद लगाए बैठे हैं। पिछले साल मार्च में उन्होंने कांग्रेस से दलबदल करा कर मध्य प्रदेश में भाजपा की सरकार बनवाई थी। उसके बाद से 14 महीने इंतजार में बीत गए। लंबे समय तक बीजू जनता दल में रहे बैजयंत जय पांडा भी दो बरस से ज्यादा समय से इंतजार कर रहे हैं। वे भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष हैं और उनको भी उम्मीद है कि इस बार कैबिनेट विस्तार में मौका मिल सकता है। हालांकि वे अभी किसी सदन के सदस्य नहीं हैं। इसलिए उनको मंत्री बनाने के लिए कहीं से राज्यसभा सीट का इंतजाम भी करना होगा। बिहार के पूर्व उप मुख्यमंत्री सुशील मोदी को भी इंतजार करते हुए छह महीने हो गए। बिहार में जदयू और भाजपा की साझा सरकार बनी तो इस बार उनको उप मुख्यमंत्री नहीं बना कर राज्यसभा में भेजा गया। वे तब से मंत्री बनने का इंतजार कर रहे हैं। असम के पूर्व मुख्यमंत्री सर्बानंद सोनोवाल भी राह देख रहे हैं। उनके पांच साल के कामकाज के नाम पर इस बार असम… Continue reading आस लगाए बैठे हैं कई नेता

मोदी मंत्रिमंडलः फेरबदल कब?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपनी सरकार में कब फेरबदल करेंगे? यह सवाल अब भाजपा नेताओं को परेशान करने लगा है। केंद्रीय मंत्रिमंडल में फेरबदल की अटकलें लगाते लगाते नेता अब थकने लगे हैं और इस बारे में बात करने से बचने लगे हैं। कई नेताओं को इंतजार तो फ्रस्ट्रेशन की हद तक पहुंच गया है। पर दूसरी ओर भाजपा के जानकार नेताओं का कहना है कि अमुक नेता मंत्री बनना चाहते हैं या अमुक नेता को मंत्री बनाने का वादा किया गया था, सिर्फ इसलिए मंत्रिमंडल में विस्तार नहीं किया जा सकता है। इसका मतलब है कि जिनको मंत्री बनना है वे बैठे इंतजार करें, जब सही समय आएगा तो विस्तार होगा। यह भी पढ़ें: सिंधिया, सुशील मोदी का लंबा इंतजार अब सवाल है कि सही समय कब आएगा? अब तो केंद्र सरकार के दो साल का जश्न भी मना लिया गया! पहले कहा जा रहा था कि सरकार के दो साल पूरे होने के मौके पर फेरबदल होगी। यह बात सरकार की पहली सालगिरह के समय भी कही गई थी लेकिन उससे ठीक पहले कोरोना वायरस की महामारी शुरू हो गई। तो क्या महामारी की वजह से सरकार में फेरबदल नहीं हो रही है? पार्टी के जानकार नेता इस बात… Continue reading मोदी मंत्रिमंडलः फेरबदल कब?

सिंधिया, सुशील मोदी का लंबा इंतजार

कांग्रेस छोड़ कर भाजपा में शामिल हुए ज्योतिरादित्य सिंधिया और बिहार छुड़ा कर केंद्र की राजनीति में लाए गए सुशील कुमार मोदी का इंतजार क्या खत्म होगा? सिंधिया पिछले साल मार्च से इंतजार कर रहे हैं। उनके और उनके समर्थकों का धीरज छूट रहा है तभी पिछले दिनों 21 मई को पूर्व प्रधानमंत्री दिवंगत राजीव गांधी की पुण्यतिथि के मौके पर सिंधिया ने उनको आधुनिक भारत का निर्माता बताते हुए ट्विट किया। यह भी पढ़ें: मोदी मंत्रिमंडलः फेरबदल कब? हालांकि बाद में उन्होंने ट्विट बदल दिया और आधुनिक भारत का निर्माता बताने वाली बात हटा दी। लेकिन उन्होंने मैसेज दे दिया कि उनको राजीव गांधी को आधुनिक भारत का निर्माता बताते देर नहीं लगेगी। वैसे भी मध्य प्रदेश में दमोह सीट के उपचुनाव में तमाम जोर लगाने के बाद भी भाजपा के हारने और कांग्रेस की जीत ने भाजपा की चिंता बढ़ाई है। सो, सिंधिया का इंतजार खत्म होने की संभावना दिख रही है। यह भी पढ़ें: तीन विधायक, केंद्रीय मंत्री के दावेदार! सुशील मोदी के लिए पिछले साल नवंबर से कहा जा रहा है कि उनको बिहार से दिल्ली इसलिए लाया गया है ताकि उनको मंत्री बनाया जा सके। वे मंत्री बनना तो तय मान रहे हैं पर ट्विटर… Continue reading सिंधिया, सुशील मोदी का लंबा इंतजार

तीन विधायक, केंद्रीय मंत्री के दावेदार!

देश के अलग अलग राज्यों के कम से कम तीन विधायक केंद्र सरकार में मंत्री बनने के दावेदार बताए जा रहे हैं। जानकार सूत्रों के मुताबिक असम के पूर्व मुख्यमंत्री सर्बानंद सोनोवाल को केंद्र में मंत्री बनना है। यह भी कहा जा रहा है कि पार्टी आलाकमान की ओर से उनको हरी झंडी मिली हुई है। यह भी पढ़ें: मोदी मंत्रिमंडलः फेरबदल कब? ध्यान रहे वे नरेंद्र मोदी की पहली सरकार में मंत्री थे और 2016 का विधानसभा चुनाव जीतने के बाद पार्टी ने उनको असम का मुख्यमंत्री बनाया था। इस बार भी उनके मुख्यमंत्री रहते पार्टी जीती है पर उनकी बजाय हिमंता बिस्वा सरमा को सीएम बनाया गया है। तभी से सोनोवाल को एक बार फिर दिल्ली लाने की चर्चा तेज हो गई है। वैसे भी प्रदेश की राजनीति में उनके लिए करने को कुछ नहीं बचा है। हिमंता सरमा के मुख्यमंत्री बनने के बाद किसी के पास करने को कुछ नहीं बचा है। यह भी पढ़ें: सिंधिया, सुशील मोदी का लंबा इंतजार बहरहाल, सोनोवाल के अलावा एक और पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत हैं, जिनको पिछले दिनों ही हटाया गया था। वे एक बार फिर सक्रिय हो गए हैं और कहा जा रहा है कि केंद्र में मंत्री… Continue reading तीन विधायक, केंद्रीय मंत्री के दावेदार!

कौन-कौन बनेगा केंद्र में मंत्री?

दिल्ली में एक बार फिर गेसिंग गेम शुरू हो गया है कि केंद्र में कौन कौन मंत्री बनेगा। हालांकि सबको पता है कि नरेंद्र मोदी सरकार बनने के बाद किसी पद के लिए जिसके नाम की ज्यादा चर्चा हो जाती है उसका पत्ता कट जाता है। फिर भी कई तरह की अटकलें चल रही हैं। नेता एक-दूसरे से जानकारी ले और दे रहे हैं। किसी को पक्की खबर नहीं है पर राजनीतिक समीकरण और राज्यों में सामाजिक संतुलन के समीकरण के हिसाब से कुछ नामों की अटकलें लगाई जा रही हैं। यह भी पढ़ें: मोदी मंत्रिमंडलः फेरबदल कब? दिल्ली की अटकलों के हिसाब से असम से सर्बानंद सोनोवाल का नाम पक्का माना जा रहा है और पश्चिम बंगाल से मुकुल रॉय के बनने की संभावना जताई जा रही है। कहा जा रहा है कि भाजपा आलाकमान की नजर पूर्वी भारत पर है इसलिए असम, बंगाल, ओड़िशा से नए मंत्री जरूर बनेंगे। झारखंड से भी एक मंत्री बनना लगभग तय है। ध्यान रहे पार्टी राज्य में 12 सीटों पर जीती है और हमेशा दो मंत्री बनते रहे हैं, जिसमें से एक आदिवासी समुदाय से तो दूसरा गैर आदिवासी समुदाय से होता है। पिछली बार जयंत सिन्हा मंत्री थे। इस बार गैर… Continue reading कौन-कौन बनेगा केंद्र में मंत्री?

हिमंता होंगे मुख्यमंत्री, आज लेंगे शपथ

गुवाहाटी। छह साल पहले कांग्रेस छोड़ कर भाजपा में शामिल हुए हिमंता बिस्वा सरमा का दबाव आखिरकार रंग लाया और भाजपा आलाकमान ने उनको मुख्यमंत्री बनाने की हरी झंडी दे दी। शनिवार को दिल्ली में पार्टी के शीर्ष नेताओं के साथ उनकी और मुख्यमंत्री सर्बानंद सोनोवाल की बैठक हुई थी। उसके बाद तीन केंद्रीय नेताओं की मौजूदगी में रविवार को गुवाहाटी में भाजपा विधायक दल की बैठक हुई, जिसमें सरमा को आम राय से विधायक दल का नेता चुना गया। वे सोमवार को 12 बजे अपने मंत्रिमंडल के साथ शपथ लेंगे। रविवार को हुई विधायक दल की बैठक में केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर, पार्टी महासचिव अरुण सिंह और भाजपा के असम प्रभारी बैजयंत पांडा मौजूद थे। इससे पहले मुख्यमंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने राज्यपाल जगदीश मुखी को अपना इस्तीफा सौंप दिया था। सरमा और सोनोवाल शनिवार को ही दिल्ली में हाईकमान से मिल कर लौटे थे। दिल्ली में भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्‌डा के आवास पर मीटिंग हुई थी, जिसमें गृह मंत्री अमित शाह और भाजपा के संगठन महासचिव बीएल संतोष की मौजूदगी में नए मुख्यमंत्री के नाम पर चर्चा हुई। बताया जा रहा है कि उसी बैठक में सरमा के नाम पर सहमति बन गई थी। नेता चुने… Continue reading हिमंता होंगे मुख्यमंत्री, आज लेंगे शपथ

अस्मिता की राजनीति कैसे करेगी भाजपा?

पश्चिम बंगाल के चुनाव नतीजों ने भारतीय जनता पार्टी की राजनीति की एक बड़ी फॉल्टलाइन जाहिर की है। यह फॉल्टलाइन भाजपा के साथ साथ राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ द्वारा पिछले कई दशकों से किए जा रहे प्रयासों की विफलता भी दिखाती है। वह विफलता यह है कि भाजपा के पास पश्चिम बंगाल में मतदाताओं के सामने पेश करने के लिए एक मजबूत और साख वाला चेहरा नहीं था। यही कहानी केरल की भी है, जहां संघ पिछले कई दशकों से पैर जमाने की कोशिश कर रहा है। असल में यह समूचे दक्षिण और पूर्वी भारत की कहानी है। इसके एकाध अपवाद होंगे लेकिन वास्तविकता यह है कि दक्षिण और पूर्वी भारत के ज्यादातर राज्यों में भाजपा के पास नेतृत्व की कमी है। इसी वजह से भाषायी अस्मिता की राजनीति वाले राज्यों में भाजपा को मुश्किलें आती रहेंगी। ऐसा नहीं है कि भाजपा ने पश्चिम बंगाल में मुख्यमंत्री पद का दावेदार पेश नहीं किया, इसलिए यह माना जाएगा कि उसके पास चेहरा नहीं है। मुख्यमंत्री का दावेदार तो उसने कई राज्यों में पेश नहीं किया, लेकिन उन राज्यों में भाजपा यह कहने की स्थिति में थी कि उसके पास एक से ज्यादा मजबूत चेहरे हैं, मुख्यमंत्री बनने के लिए। यह बात वो… Continue reading अस्मिता की राजनीति कैसे करेगी भाजपा?

सोनोवाल के चेहरे पर क्यों नहीं लड़ी भाजपा?

जिस तरह से पिछले सात साल में पहली बार भाजपा ने किसी मुख्यमंत्री को कार्यकाल के बीच में बदला है उसी तरह यह संभवतः पहली बार हुआ है कि भाजपा किसी मुख्यमंत्री के पद पर रहते उसके चेहरे पर चुनाव नहीं लड़ रही है।

हिमंता सरमा क्या मुख्यमंत्री बनेंगे?

सम में भी इन दिनों यह बात कही जा रही है कि अगर भाजपा को पूर्ण बहुमत आ गया तब तो सर्बानंद सोनोवाल ही फिर से मुख्यमंत्री बनेंगे लेकिन अगर त्रिशंकु विधानसभा बनती है और सरकार बनाने के लिए जोड़-तोड़ की जरूरत पड़ती है तो राज्य सरकार के मंत्री हिमंता बिस्वा सरमा मुख्यमंत्री बनेंगे।

हिमंता सरमा पर सबकी नजर

अगर असम में आंदोलन ठंडा नहीं पड़ता है तो मुख्यमंत्री सर्बानंद सोनोवाल की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। बताया जा रहा है कि पार्टी आलाकमान ने असम के हालात को लेकर गंभीरता से चर्चा की है। ध्यान रहे जब से नागरिकता कानून पर पूर्वोत्तर में आंदोलन शुरू हुआ है तब से सोनोवाल ज्यादा सक्रिय नहीं हैं।

सोनोवाल ने किया पूर्व उग्रवादियों को सब्सिडी का वितरण

असम के मुख्यमंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने सोमवार को दारांग जिले के छामुआपारा में स्वावलंबन योजना के तहत आतंकवादी संगठनों के पूर्व उग्रवादियों और बातचीत समर्थक सदस्यों को सब्सिडी वितारित की।

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