घाटी: इस्लाम का कलंक नहीं तो क्या?

इस्लाम यदि इंसान व इंसानियत का धर्म है तो क्योंकर कश्मीर घाटी अब बिना हिंदुओं के है? क्या घाटी के मौलानाओं, इमामों, जमायतियों, तबलीगियों और अब्दुला-मुफ्तीयों व आम मुसलमानों ने कभी सोचा कि कश्मीरियत खत्म करके, इस्लामियत बना कर उन्होने घाटी को पृथ्वी का स्वर्ग बनाया है या दोजख?

और ध्वस्त बाबरी मस्जिद!

साढ़े चार सौ साल पहले 1528 की घड़ी में मंदिर ध्वंस-मस्जिद निर्माण को भुलाया नहीं जा सका तो छह दिसंबर 1992 को भी सभ्यतागत संघर्ष के इतिहास में बतौर मस्जिद ध्वंस-मंदिर निर्माण की याद्दाश्त अमिट रहेगी। उस दिन जो हुआ वह 15 अगस्त 1947 को आधी रात की आजादी से बड़ी घटना थी।

अनुभव के भी विरुद्ध

वर्तमान भाजपा सरकारें इसी बात को अपनी खूबी मानती हैं कि वे एक्सपर्ट की बातें नहीं सुनतीं। बल्कि उनके नेता अपने रॉ विज्डम यानी कच्ची बुद्धि से चलना पसंद करते हैँ। जबकि भी प्रस्तावित कानून का असर यह होगा कि समाज में हाशिए पर मौजूद लोगों को भारी नुकसान होगा। papulation control policy BJP :… Continue reading अनुभव के भी विरुद्ध

लव जिहादः दुखद लेकिन रोचक

Love Jihad Hindu Muslim : नासिक में अभी-अभी लव जिहाद का दुखद लेकिन बड़ा रोचक किस्सा सामने आया है। वह रोचक इसलिए है कि 28 साल की एक हिंदू लड़की रसिका के माता-पिता ने सहमति दी कि वह अपने पुराने सहपाठी आसिफ खान के साथ शादी कर ले। आसिफ के माता-पिता की भी इससे सहमति… Continue reading लव जिहादः दुखद लेकिन रोचक

नीतीश को पंसद नहीं योगी का फॉर्मूला!

पटना। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को जनसंख्या नियंत्रण ( nitish kumar population policy ) का उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का फॉर्मूला पसंद नहीं आया है। उन्होंने कहा है कि देश की जनसंख्‍या को सिर्फ कानून बना कर नियंत्रित नहीं किया जा सकता, इसके लिए और भी उपाय करने होंगे। नीतीश ने अपनी… Continue reading नीतीश को पंसद नहीं योगी का फॉर्मूला!

जनसंख्या नीति राजनीतिक एजेंडा है!

population policy political agenda : सबसे पहले तो यह डिस्क्लेमर जरूरी है कि मैं जनसंख्या विस्फोट का समर्थन नहीं कर रहा हूं और न देश की बढ़ती आबादी पर नियंत्रण के उपायों का विरोधी हूं। आबादी को नियंत्रित करने के लिए निश्चित रूप से कुछ उपाय किए जाने चाहिए। यह भारत के लिए कई कारणों… Continue reading जनसंख्या नीति राजनीतिक एजेंडा है!

दो बच्चों की राजनीति

उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जनसंख्या नियंत्रण के लिए जो विधेयक ( politics of two children ) प्रस्तावित किया है, उसकी आलोचना विपक्षी दल इस आधार पर कर रहे हैं कि यह मुस्लिम-विरोधी है। यदि वह सचमुच मुस्लिम-विरोधी होता तो वह सिर्फ मुसलमानों पर ही लागू होता याने जिस मुसलमान के दो से ज्यादा… Continue reading दो बच्चों की राजनीति

सबके लिए एक-जैसा कानून कब बनेगा?

uniform code of conduct : दिल्ली उच्च न्यायालय ने एक बार फिर मांग की है कि सरकार देश के नागरिकों के लिए समान आचार संहिता ( uniform code of conduct  ) बनाए और संविधान की धारा 44 में जो अपेक्षा की है, उसे पूरा करे। समान आचार संहिता का अर्थ यह नहीं है कि देश… Continue reading सबके लिए एक-जैसा कानून कब बनेगा?

लड़ते हैं बाहर जाके ये शेख ओ बिरहमन . . .

ऐसे उदाहरणों की भरमार है जहां कृत्रिम बनाया हुआ हिंदू–मुसलमान का विभाजन जरा भी नहीं चला। हिंदू मृतक को श्मशान ले जाने के लिए परिवार वाले नहीं आए तो पड़ोसी मुसलमानों ने अपना कंधा दिया। हिंदू संस्कारों के हिसाब से मृतक का अंतिम संस्कार किया। उधर मुसलमान का अस्पताल में दम अटका था कि कोई… Continue reading लड़ते हैं बाहर जाके ये शेख ओ बिरहमन . . .

सीएए के नियम क्यों नहीं बना रही सरकार?

संशोधित नागरिकता कानून यानी सीएए संसद से पास होकर राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद कानून बन चुका है। लेकिन अभी तक केंद्र सरकार ने इस कानून के नियम नहीं अधिसूचित किए हैं इसलिए यह कानून लागू नहीं हो रहा है। इस कानून के तहत केंद्र सरकार ने यह प्रावधान किया है कि तीन पड़ोसी देशों-… Continue reading सीएए के नियम क्यों नहीं बना रही सरकार?

मलेरकोटलाः एक बेमिसाल मिसाल

पंजाब के मलेरकोटला कस्बे के बारे में ज्ञानी जैलसिंहजी मुझे बताया करते थे कि अब से लगभग 300 साल पहले जब गुरु गोविंदसिंह के दोनों बेटों को दीवार में जिंदा चिनवाया जा रहा था, तब मलेरकोटला के नवाब शेर मोहम्मद खान ने उसका डटकर विरोध किया था और भरे दरबार में उठकर उन्होंने कहा था… Continue reading मलेरकोटलाः एक बेमिसाल मिसाल

संघ-परिवार का उतरता रंग

इन दिनों संघ-परिवार पर हैरत बढ़ गई है। विशेषकर, शाहीनबाग पर सड़क कब्जा, जामिया-मिलिया से लेकर कई जगहों पर दिल्ली पुलिस पर हमले, लाल किला पर देश-विरोधी उपद्रव, और अब बंगाल में भाजपा समर्थकों का चुन-चुन कर मारा जाना, उन से लाखों रूपए की ‘जजिया’ वसूली, कुछ इलाकों को हिन्दुओं से खाली करा लेने, आदि… Continue reading संघ-परिवार का उतरता रंग

बुद्धि जब कलियुग से पैदल हो!

मेरे तो गिरधर गोपाल (मोदी) दूसरा न कोई-2:  हम हिंदू मानते है कि हम कलियुग में रह रहे है। कलियुग के उसके क्या त्रास, क्या कष्ट, क्या व्यथा है? भूख, भय और गुलामी। भूख कलियुग में लगातार लूटे जाने से। भय लगातार विधर्मियों, मुस्लिम हमलों से। गुलामी लगभग डेढ़ हजार साल से गुलाम बनवाए रखने… Continue reading बुद्धि जब कलियुग से पैदल हो!

संघ-वीएचपी वालों शर्म करो! अरबों रुपए के चंदे में कुछ तो हिंदुओं को सांस देने पर खर्च करो!

मैं हिंदू हूं। सनातनी सत्व-तत्व की जीवन आस्थाएं लिए हुए हूं और हिंदू होने के गर्व में जीवन जीया है। लेकिन अब मैं सोचने को विवश हूं कि कैसे हम हिंदू, कैसा हिंदू काल, जिसमें हिंदू प्राणी की सांस पर भी वे लोग, वे संगठन, वे धर्म गुरू, संरक्षक जन जानवर की तरह ठूंठ हैं,… Continue reading संघ-वीएचपी वालों शर्म करो! अरबों रुपए के चंदे में कुछ तो हिंदुओं को सांस देने पर खर्च करो!

मंदिर विज्ञान और सीनू जोसेफ

पहली ही पुस्तक से चर्चित लेखकों में सीनू जोसेफ का नाम भी जुड़ गया है। कैथोलिक क्रिश्चियन पृष्ठभूमि की सीनू ने इंजीनियरिंग पढ़ी। किन्तु बाद में लड़कियों की स्वास्थ्य शिक्षा कार्य को अपना लिया। जब सबरीमला मंदिर में रजस्वला आयु वाली स्त्रियों के जाने की पारंपरिक वर्जना पर कुछ एक्टिविस्टों ने आंदोलन किया, और सुप्रीम… Continue reading मंदिर विज्ञान और सीनू जोसेफ

जम्मू-कश्मीर में आबोहवा बदल रही

क्या जम्मू-कश्मीर अपनी मूल सांस्कृतिक विरासत की पुनर्स्थापना की ओर अग्रसर है? इसका उत्तर जम्मू-कश्मीर प्रशासन द्वारा लिए एक निर्णय में मिल जाता है। उपराज्यपाल मनोज सिन्हा की अध्यक्षता वाली प्रशासनिक परिषद ने एक अप्रैल को तिरुमाला तिरुपति देवस्थानम (टीटीडी) को जम्मू संभाग में 25 हेक्टेयर भूखंड पर तिरुपति बालाजी मंदिर की भांति देवालय बनाने… Continue reading जम्मू-कश्मीर में आबोहवा बदल रही

‘अच्छा हिंदू’ जाए विदेश, बने ‘अद्भुत’!

भारत में जीना विकल्पमय, अवसरमय, सत्यमय नहीं है। जुगाड़, कृपा, झूठ में जिंदगी खपानी है। एक वक्त मुझे लगता था कि देश और जीवन को बनवाने वाले अलग-अलग विचारों के विकल्प में जब हिंदू राजनीतिक दर्शन को मौका मिलेगा तो शायद हिंदुओं का जीना सुखमय बने।

अमित शाह गृह मंत्री और अंबानी से रंगदारी हिमाकत!

आप पूछ सकते हैं भला इसमें अमित शाह और मोदी की हिंदूशाही का क्या मतलब?  है और जबरदस्त है! इसलिए कि भारत जो देश है वह दिल्ली तख्त के मिजाज से धड़कता है।

ओछे राज के छोटे-छोटे डर

मगर स्वीडेन की वैश्विक संस्था वी-डेम ने बांग्लादेश के लोकतंत्र को भारत से बेहतर बताया है और भारत को पाकिस्तान सरीका और उसकी तिलमिलाहट में प्रताप भानु पर मोदीशाही की गाज गिरी है तो जान लें भारत की लोकतंत्र रियलिटी का यह दुनिया के आगे स्वंयस्फूर्त खुलासा है।

हिंदू का खत्म होता अच्छापन

क्या अंग्रेज, मुगल, औरगंजेब राज में ऐसे प्रसंग हैं, जिनमें वे प्रवृत्तियां साक्ष्य लिए हुए हों जो इस सदी में सन् 2014 के बाद दिल्ली में बनी हिंदूशाही के 56 इंची मोदी राज की पहचान में वैश्विक चर्चा लिए हुए है

भगवान के घर में भेद-भाव कैसा ?

यदि ईश्वर एक है तो सभी मनुष्य उसी एक ईश्वर के बच्चे है। मैं न तो मूर्ति-पूजा करता हूं, न नमाज पढ़ता हूं और न ही बाइबिल की आयतें लेकिन मुझे देश और दुनिया के मंदिरों, मस्जिदों, गिरजों, गुरुद्वारों और साइनेगागों में जाना बहुत अच्छा लगता है।

लव-जिहाद की अनदेखी न करें सभ्य समाज

गैर-मुस्लिम महिलाओं के लिए अधिकांश मुस्लिम पुरुषों का प्रेम मजहबी अभियान अधिक है। अर्थात्- यह इस्लाम के विस्तार हेतु जिहाद है। इस पृष्ठभूमि में क्या मजहब के नाम पर धोखे को स्वीकार करने से सभ्य समाज स्वस्थ रह सकता है?

भारत कैसे मजहबी उन्माद से निपटे?

आखिर कट्टरवादी-अलगाववादी इस्लामी मान्यताओं-आचरण से सभ्य समाज कैसे निपटें

खाई और गहरी व जिन्ना पैदा

सन् 2020 के 365 दिनों में भारत के टीवी चैनलों और मीडिया में खलनायक नंबर एक कौन था? कौन सी गाली सर्वाधिक हिट थी? देश की राजधानी दिल्ली में पानीपत की लड़ाई के मोहल्ले कौन से थे

केजरीवाल का भगवा साल

साल की शुरुआत अरविंद केजरीवाल की लगातार दूसरी बड़ी जीत से हुई। दिल्ली में जनवरी-फरवरी में विधानसभा के चुनाव हुए, जिसमें केजरीवाल की आम आदमी पार्टी ने पांच साल पहले वाली अपनी जीत दोहरा दी।

लव जिहाद कानून का शीर्षासन

धोखेबाजी, ज़ोर-जबर्दस्ती, लालच या भय के द्वारा धर्म-परिवर्तन करने को मैं पाप-कर्म मानता हूं लेकिन लव-जिहाद के कानून के बारे में जो शंका मैंने शुरु में ही व्यक्त की थी, वह अब सही निकली।

लव-जिहाद, यानी काफिर से नफरत!

इस्लाम मात्र एक धर्म नहीं वरन एक संपूर्ण सभ्यता है। इस के दायरे से जीवन का कोई भी पहलू अछूता नहीं। केवल मुसलमान ही नहीं

औवेसी और भाजपा की लड़ाई में भविष्य क्या?

हिन्दुओं के बाद अब मुसलमान भी प्रधानमंत्री मोदी और अमित शाह के जाल फंसने लगे हैं। जिस दो दलीय प्रणाली की बात आडवानी जी करते थे और जो वास्तव में दो ध्रुवीय राजनीति थी वह कामयाब होने लगी है।

गुरु नानक देवजी का कहां करें आत्मसात

“सतगुरु नानक प्रगट्या, मिटी धुंध जग चानन होया, कलतारण गुरु नानक आया..” आगामी 30 नवंबर को विश्वभर में सिख पंथ के संस्थापक श्री गुरु नानक देवजी (1469-1539) की 552वीं जयंती मनाई जाएगी। जब हम इस पवित्र दिन के बारे में सोचते है, तो एक राष्ट्र के रूप में हमने क्या भूल की है- उसका भी… Continue reading गुरु नानक देवजी का कहां करें आत्मसात

क्या आर.एस.एस. हिन्दू धर्म से दूर हो रहा है?

स्वामी विवेकानन्द ने कहा था कि धर्म के बारे में अंतिम बात कही जा चुकी है। सभी अन्य मनीषियों ने भी धर्म को केवल विभिन्न रूपों में समझाने का ही कार्य किया। किसी ने उसे सुधारने या बदलने की आवश्यकता नहीं बताई।