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Wednesday, April 14, 2021
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हिंसा

डोनाल्ड ट्रंप बच गए लेकिन…

यदि अमेरिकन सीनेट के 100 सदस्यों में से दो-तिहाई याने 67 सदस्य उनके विरुद्ध वोट दे देते तो वे हार जाते लेकिन 67 की बजाय 57 वोट ही उनके विरुद्ध पड़े। 10 वोट कम पड़ गए।

महाभियोग के आरोप से ट्रंप बरी

अमेरिकी सीनेट ने आज पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को 6 जनवरी को कैपिटल हिल में हुई हिंसा की घटना को लेकर चलाए गए महाभियोग से बरी कर दिया है।

यह देश का आंदोलन है!

केंद्र सरकार क्या किसान आंदोलन को इसी तरह चलते रहने देगी? दो अक्टूबर या उससे आगे तक? यह लाख टके का सवाल है, जिसका जवाब किसी के पास नहीं है।

किसान-आंदोलन की साख़ पर सवाल

ग्यारह दौर की वार्त्ता, निरंतर किसानों से संपर्क और संवाद साधे रखने के प्रयास, उनकी हर उचित-अनुचित माँगों को मानने की पेशकश, यहाँ तक की कृषि-क़ानून को अगले डेढ़ वर्ष तक स्थगित रखने  के प्रस्ताव के बावजूद सरकार और किसानों के मध्य गतिरोध ज्यों-का-त्यों बना हुआ है।

नैरेटिव पर छूटता कंट्रोल

किसान आंदोलन के चक्का कार्यक्रम के दिन यानी 6 फरवरी को एक खास बात यह रही कि प्रशासन ने उन जगहों पर भी शहर को लगभग जाम कर दिया, जिन्हें किसान संगठनों ने जाम से छूट दी थी

किसान संगठनों को बदनाम करने के उपाय

क्या केंद्र सरकार जान बूझकर ऐसे काम कर रही है, जिससे किसान संगठन बदनाम हों? किसान नेताओं ने ऐसे आरोप लगाए है कि सरकार किसानों को बदनाम करने वाले काम खुद करा रही है।

किसान और सरकारः फर्जी मुठभेड़

किसानों का चक्का-जाम बहुत ही शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हो गया और उसमें 26 जनवरी-- जैसी कोई घटना नहीं घटी, यह बहुत ही सराहनीय है। उत्तरप्रदेश के किसान नेताओं ने जिस अनुशासन और मर्यादा का पालन किया है

सरकार अपनी जीत न देखे!

यूं ही हमेशा उलझती रही है जुल्म से खल्क, न उनकी रस्म नई है न अपनी रीत नई, यूं ही हमेशा खिलाए हैं हमने आग में फूल, न उनकी हार नई है न अपनी जीत नई। फैज की एक मशहूर नज्म की ये लाइनें इन दिनों किसान आंदोलन के समर्थन में खूब सुनने को मिल रही हैं।

दिग्विजय सिंह ने उठाया नेताओं और पत्रकारों पर एफआईआर का मुद्दा

कांग्रेस सांसद दिग्विजय सिंह ने बुधवार को 26 जनवरी को दिल्ली में हुए किसानों की ट्रैक्टर रैली के दौरान हुई हिंसा को लेकर कांग्रेस सांसद शशि थरूर और कुछ पत्रकारों पर दर्ज मामले को राज्यसभा में उठाया।

संसद में विपक्ष लाए कानून रद्द का प्रस्ताव

केंद्र सरकार के बनाए तीन केंद्रीय कानून के विरोध में चल रहे आंदोलन का अंत नतीजा क्या होगा या केंद्रीय कानूनों का भविष्य क्या है इन सवालों पर चल रही अटकलों के बीच एक सवाल यह भी है कि विपक्ष क्या सिर्फ शोर मचाएगा या कोई सकारात्मक पहल करेगा
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