महाभियोग के आरोप से ट्रंप बरी

अमेरिकी सीनेट ने आज पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को 6 जनवरी को कैपिटल हिल में हुई हिंसा की घटना को लेकर चलाए गए महाभियोग से बरी कर दिया है।

यह देश का आंदोलन है!

केंद्र सरकार क्या किसान आंदोलन को इसी तरह चलते रहने देगी? दो अक्टूबर या उससे आगे तक? यह लाख टके का सवाल है, जिसका जवाब किसी के पास नहीं है।

किसान-आंदोलन की साख़ पर सवाल

ग्यारह दौर की वार्त्ता, निरंतर किसानों से संपर्क और संवाद साधे रखने के प्रयास, उनकी हर उचित-अनुचित माँगों को मानने की पेशकश, यहाँ तक की कृषि-क़ानून को अगले डेढ़ वर्ष तक स्थगित रखने  के प्रस्ताव के बावजूद सरकार और किसानों के मध्य गतिरोध ज्यों-का-त्यों बना हुआ है।

नैरेटिव पर छूटता कंट्रोल

किसान आंदोलन के चक्का कार्यक्रम के दिन यानी 6 फरवरी को एक खास बात यह रही कि प्रशासन ने उन जगहों पर भी शहर को लगभग जाम कर दिया, जिन्हें किसान संगठनों ने जाम से छूट दी थी

किसान संगठनों को बदनाम करने के उपाय

क्या केंद्र सरकार जान बूझकर ऐसे काम कर रही है, जिससे किसान संगठन बदनाम हों? किसान नेताओं ने ऐसे आरोप लगाए है कि सरकार किसानों को बदनाम करने वाले काम खुद करा रही है।

किसान और सरकारः फर्जी मुठभेड़

किसानों का चक्का-जाम बहुत ही शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हो गया और उसमें 26 जनवरी– जैसी कोई घटना नहीं घटी, यह बहुत ही सराहनीय है। उत्तरप्रदेश के किसान नेताओं ने जिस अनुशासन और मर्यादा का पालन किया है

सरकार अपनी जीत न देखे!

यूं ही हमेशा उलझती रही है जुल्म से खल्क, न उनकी रस्म नई है न अपनी रीत नई, यूं ही हमेशा खिलाए हैं हमने आग में फूल, न उनकी हार नई है न अपनी जीत नई। फैज की एक मशहूर नज्म की ये लाइनें इन दिनों किसान आंदोलन के समर्थन में खूब सुनने को मिल रही हैं।

दिग्विजय सिंह ने उठाया नेताओं और पत्रकारों पर एफआईआर का मुद्दा

कांग्रेस सांसद दिग्विजय सिंह ने बुधवार को 26 जनवरी को दिल्ली में हुए किसानों की ट्रैक्टर रैली के दौरान हुई हिंसा को लेकर कांग्रेस सांसद शशि थरूर और कुछ पत्रकारों पर दर्ज मामले को राज्यसभा में उठाया।

संसद में विपक्ष लाए कानून रद्द का प्रस्ताव

केंद्र सरकार के बनाए तीन केंद्रीय कानून के विरोध में चल रहे आंदोलन का अंत नतीजा क्या होगा या केंद्रीय कानूनों का भविष्य क्या है इन सवालों पर चल रही अटकलों के बीच एक सवाल यह भी है कि विपक्ष क्या सिर्फ शोर मचाएगा या कोई सकारात्मक पहल करेगा

आंदोलन चलेगा अक्टूबर तक

केंद्र सरकार के बनाए तीन कृषि कानूनों के खिलाफ पिछले 69 दिन से चल रहा आंदोलन अभी खत्म नहीं होने जा रहा है। आंदोलन का नेतृत्व कर रहे भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत ने कहा है कि यह आंदोलन अक्टूबर तक चलेगा।

दिल्ली की सीमा पर किलेबंदी

दिल्ली की सीमा पर पिछले 69 दिन से आंदोलन कर रहे किसानों को दिल्ली में घुसने से रोकने के लिए दिल्ली पुलिस सीमाओं की किलेबंद कर रही है। सात-सात स्तर के बैरिकेड्स लगाए जा रहे हैं।

कृषि कानूनों पर मध्य मार्ग की तलाश!

केंद्र सरकार के बनाए तीन कृषि कानूनों के विरोध में 68 दिन से आंदोलन कर रहे किसान क्या अब तीनों कानूनों को रद्द करने की मांग छोड़ कर बीच का रास्ता निकालना चाहते हैं

क्या किसान आंदोलन बंट जाएगा?

केंद्र सरकार के बनाए तीन कृषि कानूनों के विरोध में 68 दिन से चल रहे आंदोलन का केंद्र पिछले हफ्ते शिफ्ट हो गया। पहले इस आंदोलन का अघोषित मुख्यालय सिंघू बॉर्डर पर था, जहां पंजाब और हरियाणा के किसान डेरा डाले हुए थे

तिरंगे के अपमान का गढ़ा हुआ नैरेटिव

भारत सरकार को किसान आंदोलन को बदनाम करने का एक प्रतीक मिल गया है। सरकार आंदोलन शुरू होने के बाद पहले दिन से इसकी तलाश में थी।

रोया दीया और अचानक।।।वे क्षण, वह मूड!

दिन 28 जनवरी। वक्त कोई रात के 9.30 बजे। दिन भर दिल्ली की सिंघू सीमा पर किसानों का मूड समझने-बूझने के बाद मैं गाजीपुर के प्रदर्शनस्थल पर थी। सब कुछ नियंत्रित और शांत।

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