पीएम की नसीहत, कैबिनेट में शिकायत सुनों!

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा को बड़ी नसीहत दी है। सरमा ने बताया है कि प्रधानमंत्री ने उनको अपनी सरकार को अधिकतम लोकतांत्रिक बनाना चाहिए ताकि उनके पास तक निगेटिव फीडबैक पहुंचे। इसके लिए प्रधानमंत्री ने उनको कैबिनेट की बैठक में एक जीरो आवर यानी शून्य काल रखने को कहा। जिस तरह संसद और विधानसभाओं में शून्य काल के दौरान जरूरी मुद्दे उठाए जाते हैं उसी तरह से कैबिनेट की बैठक में शून्य काल के दौरान मंत्री अलग अलग स्रोत से मिली निगेटिव फीडबैक मुख्यमंत्री के सामने रखेंगे। निगेटिव फीडबैक का मतलब है कि सरकार के कामकाज को लेकर जनता की जो शिकायतें हैं वो मुख्यमंत्री के पास पहुंचेंगी। इसके लिए सारे मंत्री विधायकों से मिलते रहेंगे और उनसे उनके क्षेत्र के बारे में फीडबैक लेंगे और उनसे जो भी शिकायतें मिलेंगी उनको कैबिनेट की बैठक शुरू होने से पहले वरिष्ठ या इस काम के लिए निर्धारित मंत्री या मंत्रियों को दिया जाएगा और फिर वरिष्ठ मंत्री इस बारे में मुख्यमंत्री को बताएंगे। फिर तत्काल उन शिकायतों के समाधान पर विचार होगा। सोचें, कितनी अच्छी बात है। क्या प्रधानमंत्री इसे अपनी सरकार में भी लागू करेंगे? कम से कम अभी तक तो केंद्र सरकार में… Continue reading पीएम की नसीहत, कैबिनेट में शिकायत सुनों!

तीन विधायक, केंद्रीय मंत्री के दावेदार!

देश के अलग अलग राज्यों के कम से कम तीन विधायक केंद्र सरकार में मंत्री बनने के दावेदार बताए जा रहे हैं। जानकार सूत्रों के मुताबिक असम के पूर्व मुख्यमंत्री सर्बानंद सोनोवाल को केंद्र में मंत्री बनना है। यह भी कहा जा रहा है कि पार्टी आलाकमान की ओर से उनको हरी झंडी मिली हुई है। यह भी पढ़ें: मोदी मंत्रिमंडलः फेरबदल कब? ध्यान रहे वे नरेंद्र मोदी की पहली सरकार में मंत्री थे और 2016 का विधानसभा चुनाव जीतने के बाद पार्टी ने उनको असम का मुख्यमंत्री बनाया था। इस बार भी उनके मुख्यमंत्री रहते पार्टी जीती है पर उनकी बजाय हिमंता बिस्वा सरमा को सीएम बनाया गया है। तभी से सोनोवाल को एक बार फिर दिल्ली लाने की चर्चा तेज हो गई है। वैसे भी प्रदेश की राजनीति में उनके लिए करने को कुछ नहीं बचा है। हिमंता सरमा के मुख्यमंत्री बनने के बाद किसी के पास करने को कुछ नहीं बचा है। यह भी पढ़ें: सिंधिया, सुशील मोदी का लंबा इंतजार बहरहाल, सोनोवाल के अलावा एक और पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत हैं, जिनको पिछले दिनों ही हटाया गया था। वे एक बार फिर सक्रिय हो गए हैं और कहा जा रहा है कि केंद्र में मंत्री… Continue reading तीन विधायक, केंद्रीय मंत्री के दावेदार!

पूर्वोत्तर की चिंता में हिमंता को कमान

छह साल पहले कांग्रेस छोड़ कर भाजपा में शामिल हुए हिमंता बिस्वा सरमा को असम का मुख्यमंत्री बनाने का फैसला भाजपा के लिए आसान नहीं था। भाजपा ने वैचारिक प्रतिबद्धता की कसौटी को किनारे करके सरमा को मुख्यमंत्री बनवाया। भाजपा नेताओं को पता है कि सरमा की एकमात्र प्रतिबद्धता मुख्यमंत्री की कुर्सी है। आज वे भले बदरूद्दीन अजमल को गालियां देते हैं और उनके नाम पर ध्रुवीकरण की राजनीति करते हैं लेकिन एक समय था, जब कांग्रेस में रहते हुए हिमंता बिस्वा सरमा ने अजमल के साथ मिल कर तब के मुख्यमंत्री तरुण गोगोई की सत्ता पलटने का खेल रचा था। यह अलग बात है कि उसमें उनको सफलता नहीं मिली थी। सो, सरमा की वैचारिक प्रतिबद्धता और कुर्सी के लिए उनके मोह के बारे में जानते हुए भी भाजपा आलाकमान ने उनको मुख्यमंत्री बनवाया तो इसका कारण मजबूरी है। असम की भी मजबूरी और समूचे पूर्वोत्तर की चिंता में पार्टी ने उनको राज्य की कमान सौंपी है। जानकार सूत्रों का कहना है कि इस बार सरमा मुख्यमंत्री से कम किसी चीज पर राजी नहीं होने वाले थे। उन्होंने विधानसभा का चुनाव इसी शर्त पर लड़ा था कि चुनाव के बाद वे मुख्यमंत्री बनेंगे। अन्यथा उन्होंने चुनाव लड़ने से मना… Continue reading पूर्वोत्तर की चिंता में हिमंता को कमान

कांग्रेस से बाहर जाकर सीएम बनते नेता

अगर इस बात की पड़ताल की जाए कि सबसे ज्यादा किस पृष्ठभूमि का लोग मुख्यमंत्री हैं तो हैरान करने वाला नतीजा आएगा। इस समय भले 18 राज्यों में भाजपा या उसकी सहयोगी पार्टियों की सरकार है पर हकीकत यह है कि देश में इस समय सबसे ज्यादा मुख्यमंत्री कांग्रेस की पृष्ठभूमि वाले हैं। राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ की पृष्ठभूमि वालों के मुकाबले ज्यादा मुख्यमंत्री ऐसे हैं, जो या तो कांग्रेस के हैं या कांग्रेस छोड़ कर दूसरी पार्टी में गए हैं या कांग्रेस से अलग होकर अपनी पार्टी बनाई है। इस कड़ी में सबसे ताजा नाम हिमंता बिस्वा सरमा का है। उन्होंने तो महज छह साल पहले ही कांग्रेस छोड़ी। राहुल गांधी की अनदेखी से नाराज होकर उन्होंने 2015 में कांग्रेस छोड़ी थी और सोमवार को उन्होंने असम के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। भाजपा ने उनको मुख्यमंत्री बनाया है। इसी महीने में दो और नेताओं ने मुख्यमंत्री पद की शपथ, जो पहले कांग्रेस में थे। पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी और पुड्डुचेरी में एन रंगास्वामी ने इस महीने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। ये दोनों पहले कांग्रेस में थे और कांग्रेस से अलग होकर अपनी पार्टी बनाई थी। कांग्रेस से अलग होने के बाद रंगास्वामी दूसरी बार और ममता बनर्जी… Continue reading कांग्रेस से बाहर जाकर सीएम बनते नेता

हिमंता को नहीं बीरेंद्र सिंह को देखें सिंधिया

असम में हिमंता बिस्वा सरमा के मुख्यमंत्री बनने के बाद कांग्रेस के कई नेताओं की उम्मीद जग गई है। उनको लग रहा है कि एक दिन उनकी भी किस्मत खुल सकती है। पर मुश्किल यह है कि कांग्रेस से भाजपा में जाकर मुख्यमंत्री बनने या प्रदेश अध्यक्ष बनने या किसी अहम पद पर पहुंचने के लिए नेता को अपनी उपयोगिता साबित करनी पड़ती है। जैसे हिमंता बिस्वा सरमा ने की। उन्होंने पार्टी को मजबूर किया कि वह उनको मुख्यमंत्री बनाए। उनसे पहले भी भाजपा पूर्वोत्तर में कांग्रेस के तीन नेताओं को मुख्यमंत्री बना चुकी है। अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे पेमा खांडू पूरी पार्टी के साथ ही भाजपा में गए थे तो आज मुख्यमंत्री हैं। एन बीरेन सिंह और नेफ्यू रियो भी इसलिए मुख्यमंत्री बने क्योंकि भाजपा के पास उनका विकल्प नहीं था। यह स्थिति मध्य प्रदेश या महाराष्ट्र या उत्तर और पश्चिमी भारत के किसी दूसरे राज्य में नहीं है। इसलिए अगर ज्योतिरादित्य सिंधिया यह सोच रहे होंगे कि किसी दिन मध्य प्रदेश में उनकी भी किस्मत हिमंता की तरह चमक सकती है तो यह ख्याल उनको दिमाग से निकाल देना चाहिए। भाजपा ने तो पार्टी की संस्थापक रहीं राजमाता विजयराजे सिंधिया को कभी मुख्यमंत्री नहीं बनाया था तो… Continue reading हिमंता को नहीं बीरेंद्र सिंह को देखें सिंधिया

असम भाजपा में सब ठीक नहीं!

असम में भारतीय जनता पार्टी के अंदर सब कुछ ठीक नहीं दिख रहा है। पार्टी के संकटमोचन और समूचे पूर्वोत्तर में भाजपा की जड़ मजबूती से जमाने वाले पूर्व कांग्रेस नेता हिमंता बिस्वा सरमा ने कहा है कि वे अगले साल अप्रैल-मई में होने वाला विधानसभा चुनाव नहीं लड़ेंगे।

सरमा ने अजमल का भय दिखाया

संशोधित नागरिकता कानून, सीएए और राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर को लेकर आंदोलन कितना तीव्र है इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की असम यात्रा रद्द करनी पड़ी है। इससे पहले अमित शाह की पूर्वोत्तर की यात्रा रद्द की गई और गुवाहाटी में होने वाला भारत-जापान सम्मेलन भी रद्द करना पड़ा था।

कांग्रेस पार्टी में नए नेता कहां हैं?

नागरिकता कानून के विरोध में चल रहे आंदोलनों के बीच कांग्रेस से जुड़ी दो राजनीतिक तस्वीरों ने अपने खास महत्व की वजह से ध्यान खींचा है। पहली तस्वीर असम के पूर्व मुख्यमंत्री तरुण गोगोई की है, जिसमें वे वकील की ड्रेस में हैं। खुद सीनियर गोगोई और उनके सांसद बेटे गौरव गोगोई ने इस तस्वीर की खूब मार्केटिंग की, बताया कि नागरिकता कानून को चुनौती देने के लिए अरसे बाद तरुण गोगोई ने यह ड्रेस पहनी है।

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