स्वतंत्र बनो, स्वतंत्र बनाओ!

दिन आज ‘स्वतंत्रता दिवस’ और विचार मेरा कि स्वतंत्र बनो, स्वतंत्र बनाओ! कौन बने स्वतंत्र? देश या नागरिक? देश तो 15 अगस्त 1947 को आजाद हो चुका है। सोचें, आजादी से पहले भारत क्या था? अंग्रेजों का गुलाम।

आजादी की पहली शर्त निर्भयता है

आजाद होने की पहली शर्त निर्भय होना है और आजादी का पहला सुख भी निर्भय होना ही है। जिसे भय नहीं है वहीं आजादी का सुख ले सकता है। वैसे आजादी अपने आप में सापेक्षिक शब्द है। राजनीति के विद्यार्थी इस सापेक्षता को समझते हैं।

74वें वर्ष में एकालाप की अप्रासंगिकता

आज अंग्रेज़ों की हुक़ूमत से आज़ाद हुए तो हमें 73 साल पूरे हो गए, मगर हुक़्मरानों की ज़ेहनी ग़ुलामी करने से हम अपने को कब मुक्त करेंगे, कौन जाने

आजादी ने भय पैदा किया

बड़ी बिडंबना है कि साहस और निर्भयता के साथ अंग्रेजों से लड़ कर आजाद हुए भारत के लोग आजादी के सबसे चरम सुख- निर्भयता या साहस का बहुत कम समय तक आनंद ले सके।

आत्मनिर्भरता की थीम पर बोलेंगे मोदी?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हर साल 15 अगस्त को लाल किले से भाषण देने से पहले देश के लोगों से राय मांगते हैं। वे पूछते हैं कि उन्हें क्या बोलना चाहिए।

पीएम की वेशभूषा पर भी नजर होगी

कोरोना वायरस के संक्रमण की वजह से इस बार लाल किले पर होने वाला स्वतंत्रता दिवस का समारोह कम अतिथियों के साथ होगा।

अब आजादी दिवस समारोह की तैयारी

पिछले एक हफ्ते से पूरा देश अयोध्या में राम जन्मभूमि मंदिर के भूमिपूजन और शिलान्यास समारोह की तैयारियों और उसके उत्साह में डूबा था। बुधवार को उसकी चरम परिणति हुई, जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंदिर का शिलान्यास किया।

तो यही हाल होता है

जब सियासी जरूरतें हर चीज पर हावी हो जाएं, तो उसका पहला शिकार साख बनती है। यही भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) के मामले में हुआ है।

लाल किले के भाषण पर भी सवाल

संसद के मॉनसून सत्र को लेकर लगाई जा रही अटकलों के बीच एक सवाल यह भी है कि इस साल स्वतंत्रता दिवस का कार्यक्रम कैसे होगा? स्वतंत्रता दिवस के मौके पर प्रधानमंत्री लाल किले से भाषण देते हैं और बड़ी संख्या में गणमान्य अतिथि, विदेशी मेहमान, अधिकारी, स्कूली बच्चे इसमें शामिल होते हैं।

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