नौ बजे, नौ मिनट की नौ व्याख्याएं!

देश में ऐसे लोगों की एक बड़ी फौज खड़ी हो गई है, जो इस इंतजार में रहते हैं कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कुछ बोलें और वे उसकी दस तरह की सकारात्मक व्याख्या कर दें। कई बार तो खुद प्रधानमंत्री और उनके सलाहकारों भी हैरत में पड़ जाते होंगे कि अच्छा, इस बात की यह भी व्याख्या हो सकती है।