संसद नहीं चलने से किसका भला!

अमित शाह ने अपने खास अंदाज में घटना की क्रोनोलॉजी समझाते हुए कहा कि इस तरह की चीजों से कुछ लोग विकास को पटरी से उतारना चाहते हैं। मकसद तो सरकार ने बता दिया पर बड़ा सवाल है कि कौन ऐसा कर रहा है? सरकार उसका पता क्यों नहीं लगा रही है और सबसे बड़ा सवाल यह है कि संसद नहीं चलने का फायदा किसको होना है?

विपक्ष की साझेदारी कहां है

आम आदमी पार्टी को पंजाब में इस बार ज्यादा आक्रामक तरीके से चुनाव लड़ना है। तभी आप ने कृषि बिल पर चर्चा के लिए नोटिस दिया है। कायदे से कृषि कानूनों और किसानों का मुद्दा समूचे विपक्ष को साझा तौर पर उठाना चाहिए था। कांग्रेस, लेफ्ट, एनसीपी आदि पार्टियों को एक साथ मिल कर यह मुद्दा उठाना चाहिए था।

सरकार और किसान बात करें

किसान आंदोलन को चलते-चलते आज छह महिने पूरे हो गए हैं। ऐसा लगता था कि शाहीन बाग आंदोलन की तरह यह भी कोरोना के रेले में बह जाएगा लेकिन पंजाब, हरयाणा और पश्चिम उत्तरप्रदेश के किसानों का हौसला है कि अब तक वे अपनी टेक पर टिके हुए हैं। उन्होंने आंदोलन के छह महिने पूरे होने पर विरोध-दिवस आयोजित किया है। अभी तक जो खबरें आई हैं, उनसे ऐसा लगता है कि यह आंदोलन सिर्फ ढाई प्रांतों में सिकुड़कर रह गया है। पंजाब, हरयाणा और आधा उत्तरप्रदेश। इन प्रदेशों के भी सारे किसानों में भी यह फैल पाया है नहीं, यह भी नहीं कहा जा सकता। यह आंदोलन तो चौधरी चरणसिंह के प्रदर्शन के मुकाबले भी फीका ही रहा है। उनके आहवान पर दिल्ली में लाखों किसान इंडिया गेट पर जमा हो गए थे। यह भी पढ़ें: ये बादशाहत जरुरी नहीं दूसरे शब्दों में शक पैदा होता है कि यह आंदोलन सिर्फ खाते-पीते या मालदार किसानों तक ही तो सीमित नहीं है ? यह आंदोलन जिन तीन नए कृषि-कानूनों का विरोध कर रहा है, यदि देश के सारे किसान उसके साथ होते तो अभी तक सरकार घुटने टेक चुकी होती लेकिन सरकार ने काफी संयम से काम लिया है। उसने… Continue reading सरकार और किसान बात करें

किसान आंदोलन : आंधी व बारिश से धरना स्थल को हुआ नुकसान, अब करेंगे पक्का निर्माण

New Delhi: कोरोना की दूसरी लहर के बाद भी देश में किसानों का आंदोलन पूरी तरह से खत्म नहीं हुआ. केंद्र सरकार की लाख प्रयासों के बाद भी किसान अपने आंदोलन पर डटे रहे. इतना ही नहीं रिपोर्ट मेंम ये बात सामने भी आई थी कि आंदोलन के कारण हरियाणा में कोरोना के प्रसार में सहयोग हुआ है. अब एक बार फिर से किसान आंदोलन को लेकर किसान नेता के सख्त तेवर दिखा रहे हैं. किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत ने कहा है कि हम अपनी मांगों से पीछे हटने वाले नहीं हैं. उन्होंंने कहा कि अभी तो 6 महीने ही हुए हैं. हम तो 2024 तक आंदोलन जारी रखने के लिए तैयार हैं. जब तक तीनों कृषि कानून वापस नहीं होंगे तब तक वह पीछे नहीं हटेंगे. राकेश टिकैत बृहस्पतिवार को कृषि कानून विरोधियों के धरना स्थल पर पहुंचे थे. उन्होंने बुधवार को आई आंधी व बारिश से धरना स्थल पर हुए नुकसान का जायजा लिया. टिकैट ने कहा कि धरना स्थल पर आंधी और बारिश से काफी नुकसान हुआ है यदि संभव हुआ तो हम पक्का निर्माण कराएंगे. सरकार कैंप लगवाकर वैक्सीन लगवाए, किसी ने इनकार नहीं किया टिकैत ने कहा कि हिसार में सरकार व… Continue reading किसान आंदोलन : आंधी व बारिश से धरना स्थल को हुआ नुकसान, अब करेंगे पक्का निर्माण

Kisan Agitation : कृषि कानूनों के खिलाफ हो रहे किसान आंदोलन में आंदोलन स्थल पर नहीं दिख रहे किसान

कृषि कानूनों (Agricultural law) के खिलाफ हो रहे किसान आंदोलन (Kisan Agitation) को 134 दिन बीत जाने के बाद गाजीपुर बॉर्डर (Ghazipur Border) पर किसानों की संख्या अब बेहद कम होती नज़र आ रही है।

मोदी के फोन कॉल के इंतजार में हैं आंदोलनकारी किसान: कांग्रेस

कांग्रेस ने कहा है कृषि कानून देश में बड़ा आंदोलन बन कर उभर रहा है और किसान सौ दिनों से इन कानूनों को वापस लेने की मांग को लेकर दिल्ली की सीमाओं पर आंदोलन कर रहे हैं लेकिन सरकार उनके प्रति असंवेदनशील बनी हुई है।

गाजीपुर बॉर्डर बेहद कम हुई आंदोलनकारी किसानों की संख्या

कृषि कानून के खिलाफ तीन महीने से अधिक किसानों को प्रदर्शन करते हुए हो चुके हैं, ऐसे में बीते 27 जनवरी के दिन गाजीपुर बॉर्डर पर किसानों की संख्या जितनी थी

बॉर्डर पर किसानों के समर्थन में पहुंची चलती फिरती झोपड़ी

कृषि कानून के खिलाफ करीब तीन महीने से सीमाओं पर किसानों का विरोध प्रदर्शन जारी है, ऐसे में गाजीपुर बॉर्डर पर हरियाणा के रोहतक जिले से एक किसान चलती फिरती झोपड़ी लेकर किसानों के समर्थन में पहुंचा हुआ है।

बॉर्डर पर किसानों की संख्या कम होते देख टिकैत ने कहा, ‘लोग आते जाते रहेंगे’

कृषि कानून के खिलाफ दिल्ली की सीमाओं पर बीते 80 दिनों से अधिक समय से किसानों का विरोध प्रदर्शन जारी है। गाजीपुर बॉर्डर पर पहले के मुकाबले भीड़ हल्की हो गई है

आंदोलन के पक्ष में हो रही महापंचायत पर टिकैत ने रखी अपनी बात

कृषि कानून के खिलाफ दिल्ली की सीमाओं पर किसानों का विरोध प्रदर्शन जारी है ऐसे में आंदोलन को तेज और देशभर में फैलाने के लिए विभिन्न हिस्सों में महापंचायतें हो रही हैं, जिसमें राकेश टिकैत शामिल हो रहे हैं।

किसान आंदोलन के विरोध में उतरे स्थानीय निवासी

कृषि कानून के खिलाफ किसानों का 80 दिन से विरोध प्रदर्शन चल रहा है, ऐसे में गाजीपुर बॉर्डर पर आंदोलन के कारण स्थानीय सड़क बन्द है। जिससे आसपास के लोगों को परेशानी हो रही है।

कांग्रेस कृषि कानूनों को रद्द कराकर मानेगी : राहुल गांधी

कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर तीन नये कृषि कानूनों को लेकर हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि इससे 40 प्रतिशत किसान, छोटे व्यापारी एवं मजदूर बेरोजगार हो जायेंगे

सरकार को व्यापारी की चिंता ज्यादा, किसानों की कम : टिकैत

कृषि कानून के खिलाफ एक तरफ बॉर्डर पर किसानों का प्रदर्शन जारी है। दूसरी ओर कानूनों को लेकर किसान नेताओं ने गांव-गांव जाकर बताना शुरू कर दिया है, यही कारण है

कमल नाथ ने की शिवराज से मुलाकात, कृषि कानूनों पर हुई चर्चा

मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के प्रदेशाध्यक्ष कमलनाथ ने शुक्रवार को मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान से उनके निवास पर सौजन्य मुलाकात की। इस दौरान केंद्र सरकार के कृषि कानून

कृषि कानून की वापसी तक किसान आंदोलन को समर्थन : प्रियंका

दिल्ली में ट्रैक्टर रैली के दौरान जान गंवाने वाले किसान नवरीत सिंह की अंतिम अरदास में शिरकत करने पहुंची कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने कहा कि कृषि कानून वापस नहीं लेना

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