Farmer Protest: किसानों से बातचीत करेगी सरकार

Farmer Protest: किसानों से सरकार एक बार फिर बातचीत शुरू करने की तैयारी में है। केंद्र सरकार के बनाए तीन कृषि कानूनों के विरोध में पिछले सात महीने से आंदोलन कर रहे किसानों के साथ आखिरी बार 22 जनवरी को बातचीत हुई थी। उसके बाद गणतंत्र दिवस के दिए दिल्ली में हुए हंगामे के बाद बातचीत बंद हो गई। तब से प्रधानमंत्री और केंद्रीय कृषि व किसान कल्याण मंत्री ने कई बार कहा है कि किसानों से बातचीत के लिए तैयार हैं, लेकिन वार्ता नहीं शुरू हुई। फिर कृषि मंत्री ने अचानक यह शर्त रख दी कि कानूनों को रद्द करने के अलावा हर मुद्दे पर बातचीत के लिए सरकार तैयार है। यह भी पढ़ें: बंगाल की चुनावी लड़ाई अब अदालत में अब खबर है कि सरकार वार्ता शुरू करके अंतिम समाधान निकालने की तैयारी में है और इसका कारण उत्तर प्रदेश का चुनाव है। जानकार सूत्रों के मुताबिक उत्तर प्रदेश से भाजपा को बहुत निगेटिव फीडबैक मिली है। भाजपा के नेता और संघ के पदाधिकारी लगातार उत्तर प्रदेश की फीडबैक ले रहे हैं और उनको बताया गया है कि किसानों के आंदोलन का मुद्दा पार्टी को भारी पड़ सकता है। ध्यान रहे करीब दो हफ्ते पहले भाजपा के संगठन… Continue reading Farmer Protest: किसानों से बातचीत करेगी सरकार

सरकार और किसान बात करें

किसान आंदोलन को चलते-चलते आज छह महिने पूरे हो गए हैं। ऐसा लगता था कि शाहीन बाग आंदोलन की तरह यह भी कोरोना के रेले में बह जाएगा लेकिन पंजाब, हरयाणा और पश्चिम उत्तरप्रदेश के किसानों का हौसला है कि अब तक वे अपनी टेक पर टिके हुए हैं। उन्होंने आंदोलन के छह महिने पूरे होने पर विरोध-दिवस आयोजित किया है। अभी तक जो खबरें आई हैं, उनसे ऐसा लगता है कि यह आंदोलन सिर्फ ढाई प्रांतों में सिकुड़कर रह गया है। पंजाब, हरयाणा और आधा उत्तरप्रदेश। इन प्रदेशों के भी सारे किसानों में भी यह फैल पाया है नहीं, यह भी नहीं कहा जा सकता। यह आंदोलन तो चौधरी चरणसिंह के प्रदर्शन के मुकाबले भी फीका ही रहा है। उनके आहवान पर दिल्ली में लाखों किसान इंडिया गेट पर जमा हो गए थे। यह भी पढ़ें: ये बादशाहत जरुरी नहीं दूसरे शब्दों में शक पैदा होता है कि यह आंदोलन सिर्फ खाते-पीते या मालदार किसानों तक ही तो सीमित नहीं है ? यह आंदोलन जिन तीन नए कृषि-कानूनों का विरोध कर रहा है, यदि देश के सारे किसान उसके साथ होते तो अभी तक सरकार घुटने टेक चुकी होती लेकिन सरकार ने काफी संयम से काम लिया है। उसने… Continue reading सरकार और किसान बात करें

हिसार में लाठीचार्ज से भड़के किसान

नई दिल्ली/हिसार। हरियाणा के हिसार में किसानों के ऊपर लाठी चलाए जाने की घटना से किसान संगठन भड़के हैं और रविवार की शाम को कई जगह प्रदर्शन किया। संयुक्त किसान मोर्चे के नेता गुरनाम सिंह चढूनी ने किसानों से हरियाणा के सारे हाईवे जाम करने को कहा, जिसके बाद शाम पांच बजे से सात बजे तक  किसान कई जगह हाईवे जाम करके बैठे रहे। किसान नेता राकेश टिकैत ने भी ऐलान किया कि इस लाठीचार्ज के खिलाफ आंदोलन तेज होगा। गौरतलब है कि रविवार को हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर हिसार में एक पांच सौ बेड के अस्पताल का उद्घाटन करने पहुंचे थे। उसी समय केंद्र सरकार के तीन कृषि कानूनों का विरोध कर रहे किसान संगठनों के लोग वहां पहुंच गए और नारेबाजी करते हुए मुख्यमंत्री का  विरोध शुरू कर लिया। किसानों को वहां से हटाने के लिए पुलिस ने लाठी चलाई, जिसमें कई किसान घायल हुए। कुछ किसानों को हिरासत में भी लिया गया। इस प्रदर्शन की वजह से मुख्यमंत्री को आनन-फानन में अपना कार्यक्रम खत्म करके वहां से लौटना पड़ा। हिसार की इस घटना पर भारतीय किसान यूनियन के नेता राकेश टिकैत ने तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि किसानों पर हुए लाठीचार्ज के विरोध में… Continue reading हिसार में लाठीचार्ज से भड़के किसान

किसानों की बात नहीं सुन रही सरकार

केंद्र सरकार के बनाए तीन कृषि कानूनों के विरोध में देश के कई राज्यों के किसान दिल्ली क सीमा पर पांच महीने से ज्यादा समय से धरने पर बैठे हैं। हालांकि 26 जनवरी के बाद से आंदोलन की धार कमजोर हुई है और कोरोना वायरस की मार ने आंदोलन को कमजोर किया है। आंदोलन कर रहे किसान संगठनों ने पश्चिम बंगाल में चुनाव प्रचार किया था। उन्होंने अपनी सभाओं में भाजपा को हराने की अपील की थी। राकेश टिकैत से लेकर योगेंद्र यादव तक ने सभा की थी और कहा था कि भाजपा बंगाल में हारेगी तभी दिल्ली में किसानों की बात सुनेगी। तब माना जा रहा था कि बंगाल में हार जाने के बाद शायद सरकार सचमुच किसानों की बात सुने, लेकिन ऐसा कुछ होता नहीं दिख रहा है। असल में इसका उलटा हो रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा ने भी किसानों के बंगाल जाकर प्रचार करने और भाजपा को हराने की अपील करने को गंभीरता से लिया है। वे इस बात से नाराज हुए हैं कि सरकार के एक फैसले को लेकर किसानों ने इतना बड़ा राजनीतिक मुद्दा बनाया और कहा कि बंगाल में भाजपा हारेगी तो किसानों की बात सुनी जाएगी। ऐसा लग रहा है… Continue reading किसानों की बात नहीं सुन रही सरकार

किसान आंदोलन में किस बात का इंतजार?

भारत सरकार और सुप्रीम कोर्ट दोनों किसान आंदोलन के मामले में किस बात का इंतजार कर रहे हैं? आंदोलन खत्म कराने के लिए कोई प्रयास क्यों नहीं किया जा रहा है? देश के कई राज्यों के किसान 160 दिन से दिल्ली की सीमाओं पर बैठे हैं। वे केंद्र सरकार के बनाए तीन कृषि कानूनों का विरोध कर रहे हैं और उसे रद्द करने की मांग कर रहे हैं। केंद्र सरकार ने आखिरी बार किसानों के साथ 22 जनवरी को वार्ता की थी। उसके बाद बातचीत बंद है। यह अलग बात है कि प्रधानमंत्री और कृषि व किसान कल्याण मंत्री दोनों उसके बाद कई बार कह चुके हैं कि सरकार किसानों से बात करने को तैयार है पर किसानों से वार्ता के लिए कृषि मंत्रालय की ओर से कोई पहल नहीं हुई है। हैरानी की बात है कि सुप्रीम कोर्ट के एक आदेश के जरिए केंद्र के बनाए तीनों कानूनों पर रोक लगी है और सरकार यह रोक हटवाने का भी प्रयास नहीं कर रही है। सरकार के कथित आर्थिक जानकार बता रहे हैं कि अगर कानूनों पर अमल नहीं हुआ तो 2022 तक किसानों की आमदनी दोगुनी करने का लक्ष्य पूरा नहीं होगा। अगर सरकार इस लक्ष्य के प्रति गंभीर… Continue reading किसान आंदोलन में किस बात का इंतजार?

किसानों पर सुप्रीम कोर्ट भी चुप

केंद्र सरकार के बनाए तीन कृषि कानूनों के विरोध में 145 दिन से आंदोलन कर रहे किसानों के बारे में जल्दी किसी फैसले की जरूरत है। अगर केंद्र सरकार कोई फैसला नहीं करती है तो उसका कारण समझ में आता है। उसका राजनीतिक मकसद है और जिस कारोबारी मकसद के लिए उसने ये कानून बनाए हैं उसे भी पूरा करना है। कुछ चुनिंदा कारोबारियों के हितों के सामने किसानों के हित उसके लिए ज्यादा मायने नहीं रखते हैं। लेकिन क्या सुप्रीम कोर्ट के सामने भी ऐसी ही मजबूरी है, जो वह फैसला नहीं कर रही है। आखिर सुप्रीम कोर्ट ने तीन सदस्यों की एक कमेटी बनाई थी, जिसने अपनी रिपोर्ट अदालत को सौंप दी है पर अदालत उस पर कोई विचार क्यों नहीं कर रही है? यह सही है कि इन दिनों कोरोना वायरस के बढ़ते संक्रमण की वजह से अदालत का काम पूरी रफ्तार से नहीं हो रहा है और वर्चुअल सुनवाई करनी पड़ रही है। लेकिन सर्वोच्च अदालत को प्राथमिकता तय करनी होगी। उसकी बनाई तीन सदस्यों की कमेटी ने कोई दस दिन पहले अपनी रिपोर्ट अदालत को सौंप दी है। अदालत ने इस कमेटी को आठ हफ्ते का ही समय दिया था। हालांकि रिपोर्ट सौंपने में उससे… Continue reading किसानों पर सुप्रीम कोर्ट भी चुप

किसानों से बात करे सरकार

केंद्र सरकार को अपने बनाए कानूनों का विरोध कर रहे किसानों के प्रति दुश्मनी का भाव छोड़ देना चाहिए और उनके साथ तत्काल बातचीत करनी चाहिए। राजधानी दिल्ली में जिस तेजी से कोरोना वायरस का संक्रमण फैल रहा है उसे देखते हुए यह आशंका निराधार नहीं है कि किसानों के बीच महामारी फैल सकती है। किसान 144 दिन से धरने पर बैठे हैं। वे थक भी गए हैं और खेती-किसानी का उनका काम भी प्रभावित हो रहा है। कोरोना का खतरा अलग से बढ़ रहा है। ऐसे में सरकार उनसे बातचीत की शुरुआत करे और जिस शर्त पर होता है उनका आंदोलन खत्म कराने का प्रयास करे। भाजपा के सहयोगी और हरियाणा के उप मुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला ने केंद्र सरकार से आग्रह किया है कि वह आंदोलन कर रहे किसानों से बातचीत शुरू करे। भाजपा के अपने सांसद और पूर्व केंद्रीय मंत्री सुब्रह्मण्यम स्वामी ने ट्विट करके कहा कि सरकार किसानों से बात करे और आंदोलन खत्म कराए। उन्होंने तो अपनी पार्टी की सरकार को सुझाव भी दिया कि कैसे आंदोलन खत्म कराया जा सकता है। उन्होंने कहा कि सरकार किसानों से वादा करे कि जो भी राज्य इस कानून को लागू नहीं करना चाहता है वह इसे लागू नहीं… Continue reading किसानों से बात करे सरकार

सरकार ने किसानों से वार्ता के लिए रखी शर्त

नई दिल्ली। केंद्र सरकार के बनाए तीन कृषि कानूनों के विरोध में पिछले 136 दिन से आंदोलन कर रहे किसानों से सरकार की वार्ता बंद है। आखिरी बार 22 जनवरी को किसानों के साथ केंद्र की वार्ता हुई थी, जिसके बाद केंद्र ने बातचीत बंद कर दिया। हालांकि उसके बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दो बार कहा कि सरकार किसानों से वार्ता के लिए तैयार है, लेकिन कोई पहल नहीं की गई। अब केंद्रीय कृषि व किसान कल्याण मंत्री ने इस शर्त के साथ वार्ता की पेशकश की है कि किसान अपना आंदोलन स्थगित करें। दूसरी ओर किसानों ने साफ किया है कि उनका आंदोलन चलता रहेगा। केंद्रीय कृषि व किसान कल्याण मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने शनिवार को किसानों के सामने वार्ता का प्रस्ताव रखा। तोमर ने कहा कि किसानों के मन में असंतोष नहीं है, जो किसान संगठन इन बिलों के विरोध में है, उनसे सरकार बातचीत के लिए तैयार है। उन्होंने कहा- मैं किसान संगठनों से आग्रह करूंगा कि वे अपना आंदोलन स्थगित करे अगर वे बातचीत के लिए आएंगे तो सरकार उनसे बातचीत के लिए तैयार है। नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा है कि कृषि से जुड़े मुद्दों पर चर्चा करना और उनका निराकरण करना, हमेशा… Continue reading सरकार ने किसानों से वार्ता के लिए रखी शर्त

राहुल को अमेरिका से उम्मीद!

नई दिल्ली। कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने भारत में आजादी व लोकतंत्र खतरे में होने और संस्थाओं पर हमले को लेकर अमेरिका की चुप्पी पर सवाल उठाया और उससे उम्मीद भी जताई। विजन ऑन डेमोक्रेसी को लेकर एक ऑनलाइन चर्चा के दौरान अपने विचार साझा करते हुए राहुल कहा कि भारत में जो कुछ हो रहा है, उस पर अमेरिका ने चुप्पी साध रखी है। राहुल ने कहा- मैं इस बात में विश्वास करता हूं कि अमेरिका एक अर्थपूर्ण विचार है। भारत में अमेरिका के राजदूत रहे निकोलस बर्न्स के राहुल गांधी ने शुक्रवार को एक ऑनलाइन बातचीत में हिस्सा लिया। बर्न्स फिलहाल हार्वर्ड केनेडी स्कूल के प्रोफेसर हैं। बर्न्स की बातचीत का विषय चीन और रूस की ओर से पेश किए जा रहे कठोर विचारों के खिलाफ लोकतंत्र के विचार था। इसी मसले पर बर्न्स से राहुल गांधी ने कहा- भारत में जो कुछ भी हो रहा है, उस पर यूएस की सत्ता से कुछ भी सुनने को नहीं मिलता है। उन्होंने आगे कहा- अगर आप लोकतंत्र की भागीदारी की बात कर रहे हैं तो जो देश में हो रहा है, उस पर आपके क्या विचार हैं? मैं इस बात में विश्वास करता हूं कि अमेरिका एक… Continue reading राहुल को अमेरिका से उम्मीद!

मई में किसान करेंगे संसद मार्च

माना जा रहा है कि एक मई को मजदूर दिवस के मौके पर शायद किसान मार्च करें। 14 अप्रैल को संविधान बचाओ दिवस।

किसानों का भारत बंद, सड़क व रेल रोके

केंद्र सरकार के बनाए तीन कृषि कानूनों के विरोध में 121 दिन से आंदोलन कर रहे किसानों ने आंदोलन के चार महीने पूरे होने के मौके पर शुक्रवार को भारत बंद किया।

किसानों के साथ भी क्या शाहीन बाग होगा?

दिल्ली सरकार ने हाई कोर्ट को बताया है कि केसेज की बढ़ती संख्या की वजह से दिल्ली आपदा प्राधिकरण, डीएमए ने सार्वजनिक समारोहों पर रोक लगा दी है

सुप्रीम कोर्ट की कमेटी क्या रिपोर्ट देगी?

केंद्र सरकार के बनाए तीन कृषि कानूनों और उसके विरोध में चल रहे किसान आंदोलन पर विचार के लिए सुप्रीम कोर्ट की बनाई तीन सदस्यों की कमेटी किसी भी समय अपनी रिपोर्ट सर्वोच्च अदालत को सौंप सकती है।

समस्या की जड़ कहां है?

सवाल है कि अगर देश में लोकतांत्रिक संवाद का अभाव होता जाए और चुनावी बहुमत के आधार पर सरकार असहमति या असंतोष की किसी आवाज को सुनने से इनकार करे, तो असंतुष्ट समूहों के लिए क्या रास्ता रह जाता है? आखिर तब वे अपनी मुसीबत कहां और किसे बताने जाएंगे?

किसान आंदोलनः 100 दिन बाद

आंदोलनकारी किसानों के दिल्ली में डेरा डाले 100 से ज्यादा हो गए हैं। लेकिन गतिरोध जहां का तहां है। कई विश्लेषकों का आरंभ से अनुमान था कि इस आंदोलन का गतिरोध खत्म नहीं होगा।

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