झारखंड : भाजपा, आजसू के रार से गठबंधन को हुआ लाभ

झारखंड में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और ऑल झारखंड स्टूडेंट यूनियन (आजसू) का अलगाव कांग्रेस, राष्ट्रीय जनता दल (राजद) और झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के लिए काफी फायदे का साबित हुआ है।

झारखंड चुनाव: तीसरे चरण में भाजपा, झाविमो, आजसू की प्रतिष्ठा दांव पर

झारखंड विधानसभा के लिए तीसरे चरण का चुनाव न सिर्फ राज्य की राजनीति की दिशा तय करेगा बल्कि झारखंड विकास मोर्चा (झाविमो) प्रमुख पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी और ऑल झारखंड स्टूडेंट यूनियन

झारखंड : तीसरे चरण का मतदान तय करेगा आजसू का राजनीतिक भविष्य

झारखंड विधानसभा चुनाव के लिए दो चरण का मतदान संपन्न हो जाने के बाद सभी दल तीसरे चरण में 12 दिसंबर को होने वाले मतदान वाले क्षेत्रों में पूरा जोर लगा रहे हैं।

बागियों के वोट से झारखंड का फैसला

तू है हरजाई तो अपना भी यहीं तौर सही, तू नहीं और सही और नहीं और सही! हां, ऐसा ही है झारखंड में पार्टियों और नेताओं का आचर! जो कल कांग्रेस में था, आज भाजपा, जेएमएम या आजसू की टिकट से लड़ रहा है, जो जेएमएम में था वह भाजपा या आजसू की टिकट से लड़ रहा है।

झारखंड में झगड़े से भाजपा को नुकसान

झारखंड में भारतीय जनता पार्टी को बड़ा नुकसान हो सकता है। पार्टी को अपने अंदरूनी झगड़े और सहयोगी पार्टी आजसू के साथ हुई तनातनी का नुकसान उठाना पड़ेगा। अब तक राजनीति में यह होता रहा है कि पांच साल तक अगर पार्टी के अंदर झगड़ा चला हो तब भी चुनाव से पहले पार्टी के नेता उसे खत्म करके एकजुटता दिखाते हैं।

भाजपा, आजसू दोस्ती टूटने से बदले समीकरण

झारखंड बनने के बाद से साथ रही भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और ऑल झारखंड स्टूडेंट यूनियन (आजसू) की राहें इस चुनाव में जुदा हो गई हैं। राज्य में इसके बाद बदले सियासी परिदृश्य में जहां कई सीटों पर नए समीकरण उभरने लगे हैं तो कई पार्टियों के सामने नई चुनौतियां आ खड़ी हुई हैं।

 ‘बागी’ नेताओं की शरणस्थली बने आजसू, झामुमो

झारखंड विधानसभा चुनाव की घोषणा के बाद नेताओं के बीच टिकटों की मारामारी को लेकर मची भगदड़ में ऑल झारखंड स्टूडेंट यूनियन (आजसू) और झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) नेताओं के लिए ‘शरणस्थली’ बने हुए हैं।

झारखंड में भाजपा, आजसू की दोस्ती टूटी!

झारखंड बनने के बाद से करीब 19 सालों तक भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और ऑल झारखंड स्टूडेंट यूनियन (आजसू) के बीच चली दोस्ती अब टूट के कगार पर पहुंच गई है।

आखिर आजसू की जिद का क्या राज है?

झारखंड में भाजपा की पुरानी सहयोगी ऑल झारखंड स्टूडेंट यूनियन, आजसू ने भाजपा को गजब परेशान किया है।

भाजपा और आजसू का गठबंधन टूटा

भारतीय जनता पार्टी और 20 साल पुरानी उसकी सहयोगी पार्टी ऑल झारखंड स्टूडेंट यूनियन, आजसू का तालमेल टूट गया है।

सहयोगियों ने बढ़ाई भाजपा की परेशानी

भाजपा की सहयोगी पार्टियों ने पार्टी क परेशानी बढ़ा दी है। महाराष्ट्र से लेकर हरियाणा और झारखंड में सहयोगी दलों ने भाजपा पर दबाव बनाया है। महाराष्ट्र में तो खैर 30 साल पुरानी सहयोगी शिव सेना से तालमेल ही खत्म हो गया है और उसके केंद्रीय मंत्री ने सरकार से इस्तीफा दे दिया है।

झारखंड में भड़के भाजपा के सहयोगी

महाराष्ट्र के बाद अब झारखंड में भी भाजपा की सहयोगी पार्टियों ने तेवर दिखाए हैं। भाजपा को दो सहयोगी पार्टियों आजसू और लोजपा ने अकेले लड़ने का ऐलान किया है।

झारखंड में भाजपा, आजसू की 19 साल पुरानी दोस्ती में दरार!

झारखंड राज्य गठन के बाद से ही भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और ऑल झारखंड स्टूडेंट यूनियन (आजसू) की जारी दोस्ती में इस विधानसभा चुनाव में दरार पड़ गई है।

झारखंड चुनाव: आजसू के ‘डबल डिजिट’ से भाजपा भंवर में!

झारखंड में चुनावी रणभेरी बजने के साथ ही सभी राजनीतिक दलों ने संग्राम के लिए राजनीतिक ‘योद्धाओं’ की तलाश तेज कर दी है। अभी तक जो स्थिति उभरी है, उसमें यह माना जा रहा है