अली बाबा के जैक मा और सुअर

एक व्यापारी मर कर ऊपर पहुंचा। वहां उसकी मुलकात, पाप-पुण्य का हिसाब-किताब रखने वाले चित्रगुप्त से हुई। उन्हें यह तय करना था कि उसे स्वर्ग भेजा जाए अथवा नरक। चित्रगुप्त ने जब उसका खाता देखा तो पाया कि पाप, पुण्य का टाई हो गया, दोनों बराबर थे।