कहां गलत हुई भाजपा की रणनीति?

पश्चिम बंगाल के चुनाव नतीजों के बाद सोशल मीडिया में एक मजाक की खूब चर्चा है कि तृणमूल कांग्रेस राज्य की सभी 292 सीटों पर चुनाव जीत गई, 214 सीटों पर उसके उम्मीदवार दो पत्तियों के निशान पर जीते और बाकी कमल के फूल के निशान पर। यह बात भले मजाक में कही जा रही है पर यह भाजपा की सबसे बड़ी रणनीतिक भूल को दिखाती है। असल में भाजपा ने  पश्चिम बंगाल में सबसे बड़ी रणनीतिक गलती यही की थी कि तृणमूल कांग्रेस के लोगों के सहारे ही ममता बनर्जी को चुनौती दी थी।  तृणमूल कांग्रेस के पुराने लोग भाजपा की रणनीति भी बना रहे थे और चुनाव भी लड़ रहे थे। भाजपा के नेताओं के जिम्मे सिर्फ प्रचार का काम था। प्रधानमंत्री से लेकर केंद्रीय गृह मंत्री और भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष से लेकर राज्यों के मुख्यमंत्री तक सब प्रचार में लगे थे और जमीन पर तृणमूल कांग्रेस, कांग्रेस और लेफ्ट पार्टियों से आए नेता चुनाव लड़ रहे थे। सो, पहली रणनीतिक गलती यह थी कि दूसरी पार्टियों से आए नेताओं के सहारे भाजपा चुनाव लड़ने उतरी। दूसरे राज्यों में भी भाजपा विपक्षी पार्टियों को तोड़ कर उनके नेताओं को भाजपा में शामिल कराती रही है पर उसका… Continue reading कहां गलत हुई भाजपा की रणनीति?

मोदी की टक्कर में अब ममता

पांच अहिंदीभाषी राज्यों में हुए ये चुनाव थे तो प्रांतीय लेकिन इन्हें राष्ट्रीय स्वरुप देने का श्रेय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह को है। भाजपा के जितने नेता अकेले पश्चिम बंगाल में डटे रहे, आज तक किसी भी प्रांतीय चुनाव में राष्ट्रीय स्तर के इतने नेता कभी नहीं डटे। इसलिए अब इसके नतीजों का असर भी राष्ट्रीय राजनीति पर पड़ना अवश्यम्भावी है। ममता बेनर्जी अब नरेंद्र मोदी के लिए सबसे बड़ी चुनौती बन जाएंगी। अभी तक मोदी की टक्कर का एक भी नेता विपक्ष में उभर नहीं पाया था। दो पार्टियां अखिल भारतीय हैं। एक कांग्रेस और दूसरी मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी। कम्युनिस्ट पार्टी सिर्फ केरल में है। वह मलयाली उपराष्ट्रवाद का ज्यादा, मार्क्सवाद का कम प्रतिनिधित्व करती है। वह मोदी को कोई चुनौती नहीं दे सकती। हाँ, कांग्रेस जरुर एक अखिल भारतीय पार्टी है और इन पांच राज्यों के चुनाव में बंगाल के अलावा सर्वत्र वह अस्तित्ववान है लेकिन उसके पास प्रांतीय नेता तो हैं लेकिन उसके पास ऐसे अखिल भारतीय नेता का अभाव है, जो मोदी को चुनौती दे सके। कांग्रेस में अनेक अत्यंत अनुभवी और दक्ष नेता हैं, जो मोदी पर भारी पड़ सकते हैं लेकिन कांग्रेस का माँ-बेटा नेतृत्व उन्हें आगे नहीं आने देगा। आज… Continue reading मोदी की टक्कर में अब ममता

मोदी-शाह की हार है बंगाल में

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी नहीं, बल्कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह हारे हैं। भाजपा तो पिछले विधानसभा चुनाव में तीन सीट जीती थी, जिसमें कई सौ परसेंट का इजाफा हो गया है। दूसरी, बात यह है कि बंगाल में भाजपा चुनाव नहीं लड़ रही थी, बल्कि प्रधानमंत्री मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के साथ साथ भाड़े की वह सेना लड़ रही थी, जो तृणमूल कांग्रेस से उधार ली गई थी। इसलिए पश्चिम बंगाल में अगर भाजपा सत्ता से बहुत दूर रह गई है या ममता बनर्जी ने लगातार तीसरी बार भारी-भरकम जीत हासिल की है तो वह मोदी और शाह की हार है। असल में चुनाव से पहले ही यह तय हो गया था कि भाजपा नहीं लड़ेगी, मोदी और शाह के चेहरे पर बाहर से आए दूसरे नेता लड़ेंगे। इसका नतीजा यह हुआ है कि हर जिले में भाजपा में टूट हो गई। हालांकि यह खबर राष्ट्रीय मीडिया में नहीं दिखाई गई। हर जगह सिर्फ यह दिखाया गया कि ममता बनर्जी की पार्टी टूट रहे है। उसके अमुक विधायक भाजपा में चले गए तो अमुक सांसद भाजपा में चले गए। मीडिया यह नैरेटिव चला कि अमुक जी अधिकारी बहुत बड़े… Continue reading मोदी-शाह की हार है बंगाल में

मोदी, शाह के दावों पर कौन भरोसा करेगा?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पश्चिम बंगाल में पांचवें चरण के प्रचार में दावा किया था कि उनकी पार्टी ने शतक लगा लिया और ममता बनर्जी की विदाई हो गई है। इसके बाद छठे चरण के प्रचार के दौरान केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने दावा किया कि भाजपा ने डेढ़ सौ सीटें जीत ली हैं। उन्होंने पहले चरण के बाद ही बिल्कुल सटीक सीटों की भविष्यवाणी शुरू कर दी थी। हर चरण के बाद वे बताते थे कि भाजपा कितनी सीटों पर जीत चुकी है। उससे पहले उन्होंने दो सौ सीट का लक्ष्य तय किया था और हर चरण के प्रचार में दावा किया जाता था कि पार्टी लक्ष्य की तरफ बढ़ रही है। वैसे चुनाव प्रचार के दौरान हर पार्टी का नेता अपनी जीत का दावा करता है। लेकिन कोई नेता एक्जिट पोल करने वालों की तरह हर चरण के बाद सीटों की संख्या नहीं बताता है। इस बार प्रधानमंत्री मोदी और गृह मंत्री अमित शाह ने यह काम किया। दोनों हर चरण के बाद भाजपा इतनी सीटों पर जीत चुकी। अब सवाल है कि पांचवें चरण तक ही जब भाजपा शतक लगा चुकी थी या छठे चरण तक डेढ़ सौ सीट जीत चुकी थी तो वो सीटें कहां… Continue reading मोदी, शाह के दावों पर कौन भरोसा करेगा?

कोविड में विफलता का भी नुकसान

भारतीय जनता पार्टी के नेता मानें या न मानें पर पश्चिम बंगाल के विधानसभा चुनाव में कोरोना संक्रमण की महामारी एक बड़ा मुद्दा बन गई थी। खास कर आखिरी चार चरण में। इन्हीं चार चरणों में ममता बनर्जी की पार्टी को सबसे ज्यादा फायदा हुआ। असल में चार चरण का मतदान खत्म होने तक पूरे देश में कोरोना का विस्फोट हो गया था और पश्चिम बंगाल में भी कोरोना बम फूट चुका था। जहां-जहां मतदान हो गए थे वहां कोरोना के ढेरों मामले सामने आने लगे थे। भाजपा ने तो अपनी पीआर रणनीति के तहत मीडिया में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह की सभाओं की खूब कवरेज कराई थी। लेकिन वह उलटा पड़ गया। बंगाल में चार चरण का मतदान खत्म होने तक राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली से लेकर कई भाजपा शासित राज्यों जैसे गुजरात, मध्य प्रदेश आदि में कोरोना बेकाबू हो गया था और ऑक्सीजन की कमी से लोगों के मरने की खबरें आने लगी थीं। सो, बंगाल के आखिरी चार चरण के चुनाव में यह मैसेज बना कि भाजपा के नेता कोरोना रोक नहीं पा रहे हैं और उलटे बंगाल में कोरोना फैला रहे हैं। ममता ने इसका और प्रचार किया। उन्होंने कहा कि भाजपा के… Continue reading कोविड में विफलता का भी नुकसान

विधानसभा चुनाव हारे सांसद क्या करेंगे?

पश्चिम बंगाल में भारतीय जनता पार्टी ने पांच सांसदों को विधानसभा का चुनाव लड़ाया था। इनमें से एक राज्यसभा सांसद भी थे। पार्टी ने जाने-माने पत्रकार और राज्यसभा के मनोनीत सदस्य स्वप्न दासगुप्ता को तारकेश्वर सीट से विधानसभा का चुनाव लड़ाया था। वे चुनाव हार गए हैं। वैसे उन्होंने चुनाव लड़ने से पहले राज्यसभा की सीट से इस्तीफा दे दिया था। इसके बावजूद यह भाजपा के लिए बड़ी शर्मिंदगी वाली बात है कि उसने अपनी एक सीट बढ़ाने के लिए राज्यसभा के ऐसे मनोनीत सांसद को चुनाव में उतारा, जिसने पांच साल तक सांसद रहने के बावजूद अपने को भाजपा से जुड़ा नहीं बताया था। बहरहाल, भाजपा ने अपने एक सांसद और केंद्रीय मंत्री बाबुल सुप्रियो को भी विधानसभा का चुनाव लड़ाया था। वे फिल्मों से जुड़े रहे हैं और इसलिए उनको टॉलीगंज सीट से चुनाव लड़ाया गया था, जो बांग्ला फिल्मों का केंद्र है। वे चुनाव हार गए हैं। इसी तरह पार्टी ने फिल्मों से जुड़ी रहीं अपनी एक और सांसद चटर्जी को चुंचुरा सीट से चुनाव लड़ाया था। वे भी चुनाव हार गई हैं। अब सवाल है कि विधानसभा का चुनाव हार जाने वाले ये लोकसभा सदस्य आगे क्या करेंगे? क्या इनको लोकसभा से इस्तीफा नहीं देना चाहिए?… Continue reading विधानसभा चुनाव हारे सांसद क्या करेंगे?

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