तो माने तीसरी लहर नहीं आएगी?

कोरोना वायरस की दूसरी लहर का पीक चार मई 2021 को था, जिस दिन देश में चार लाख 14 हजार 188 नए केसेज मिले थे। उसके अगले दिन यानी पांच मई से दूसरी लहर कम होनी शुरू हुई।

एक्टिव केस घट कर दो लाख

देश में कोरोना वायरस के संक्रमितों की संख्या में कमी आने का सिलसिला जारी है। मंगलवार को लगातार दूसरे दिन संक्रमितों की संख्या 15 हजार के आसपास रही।

अवसर सिर्फ हमारी खाम-ख्याली में!

जिस वक्त ‘आत्म-निर्भर भारत’ की बात कह कर प्रधानमंत्री मोदी एक तरह से ‘मेक-इन-इंडिया’ योजना की नाकामी स्वीकार कर रहे हैं, उसी वक्त भारत के लिए दुनिया के मैनुफैक्चरिंग हब बनने के अवसर की भी बात कही जा रही है। आखिर ‘मेक-इन-इंडिया’ में क्या होना था? यही तो कि भारत में उत्पादन होता, जिसे दुनिया भर के बाजारों में बेचा जाता। ‘आत्म-निर्भर भारत’ में ‘लोकल के लिए वोकल’ होना है। स्थानीय उत्पादन और देश के अंदर उपभोग। इसमें नया क्या है? गांधीजी का पूरा दर्शन यही था और पंडित नेहरू भी आत्म-निर्भरता के मंत्र का पाठ करते हुए ही ‘आधुनिक भारत के मंदिरों’ के निर्माण के रास्ते पर आगे बढ़े थे। सत्येंद्र रंजन | नरेंद्र मोदी सरकार प्रतिकूल परिस्थितियों में भी अनुकूल सुर्खियां बटोर लेने में माहिर है- उसकी इस क्षमता से कोई इनकार नहीं करता। दरअसल, अपनी नाकामियों को कामयाबी के रूप में पेश करने और एक बड़े जन-समूह में उसे स्वीकृति दिलवा देना उसकी सबसे बड़ी राजनीतिक सफलता रही है। मीडिया पर पूर्ण नियंत्रण (या मेनस्ट्रीम मीडिया के लगभग पूर्ण समर्पण और सोशल मीडिया के प्रभावी उपयोग के कौशल) से ये काम उसके लिए आसान बनते गये है। इसके जरिए एक अलग आभासी यथार्थ के प्रति समाज के… Continue reading अवसर सिर्फ हमारी खाम-ख्याली में!

जिस तकलीफ़ से घर लौटा हूं, अब फिर जाने की हिम्मत नहीं होगी’

श्रमिक स्पेशल ट्रेन के किराये को लेकर सरकार के विभिन्न दावों के बीच गुजरात से बिहार लौटे कामगारों का कहना है कि उन्होंने टिकट ख़ुद खरीदा था। उन्होंने यह भी बताया कि डेढ़ हज़ार किलोमीटर और 31 घंटे से ज़्यादा के इस सफ़र में उन्हें चौबीस घंटों के बाद खाना दिया गया। उमेश कुमार राय | योगेश गिरि 4 महीने से गुजरात के बिठलापुर में एक मेटल फैक्ट्री में काम कर रह रहे हैं।6 मई की सुबह उनके पास उड़ती हुई खबर आई कि बिरमगाम रेलवे स्टेशन से बिहार के लिए श्रमिक स्पेशल ट्रेन चलने वाली है।लगभग डेढ़ महीने से घर की चहारदीवारी में कैद योगेश ये खबर फौरन रजिस्ट्रेशन कराने के लिए बैग कंधे पर टांगकर निकल पड़े, लेकिन गुजरात से बिहार के क्वारंटीन सेंटर तक पहुंचने की उनकी यात्रा किसी बुरे सपने से कम नहीं रही, जिसे वह शायद ही कभी भूल पाएंगे। यह भी पढ़ें : बुद्धि जब कलियुग से पैदल हो! 25 वर्षीय योगेश बताते हैं, ‘सुबह ज्यों ही हमें खबर मिली, हम लोग बैग लेकर पास के ही एक स्कूल में पहुंच गए। इस स्कूल में कामगारों का पंजीयन हो रहा था। लोगों की लंबी कतार लगी हुई थी। मेरे खयाल में ढाई से तीन… Continue reading जिस तकलीफ़ से घर लौटा हूं, अब फिर जाने की हिम्मत नहीं होगी’

महिला की सड़क पर हुई डिलीवरी, डेढ़ घंटे बाद फिर चलना शुरू किया

भोपाल– महाराष्ट्र के नासिक से मध्य प्रदेश के सतना तक की 11 सौ किलोमीटर की पैदल यात्रा के दौरान पिपरगांव में मां को प्रसव-पीड़ा हुई और रास्ते में ही बच्चे को जन्म दिया। यहीं नहीं, डेढ़ घंटे बाद उसने फिर पैदल चलना शुरू कर दिया। सेंधवा बॉर्डर से पुलिस अब इन्हें क्वरैंटाइन सेंटर में लेकर आई है। जिस महिला की रास्तेर में ही डिलीवरी हुई, उनके पति राकेश ने बताया पिपरंगाव में पेट दुखने लगा और डिलीवरी हो गई। महिलाओं ने पर्दा बनाकर डिलीवरी के काम को अंजाम दिया और डेढ़ घंटे बाद हमने फिर चलता शुरू कर दिया। घर लौट रहे इन लोगों में फूलचंद की पत्नी भी हैं, जिनको 8 महीने का गर्भ है ये भी नासिक से पैदल आ रहे हैं। वहां राशन पानी कुछ नहीं मिला इसलिए पैदल आना पड़ा। सेंधवा ग्रामीण के थाना प्रभारी वीडीएस परिहार ने कहा- ये 15-16 मजदूर हैं, साथ में 8-10 बच्चे भी हैं।ये महाराष्ट्रभ से आ रहे थे। नासिक-धुलिया के बीच रोड पर ही डिलीवरी हो गई। महिलाओं ने परदा बनाकर डिलीवरी कराई। करीब डेढ़ घंटे रुके और फिर ये लोग चल दिए। यहां आने पर पुलिस को देखकर भागने लगे। हमने अपने अधिकारियों से बात की है और इनके… Continue reading महिला की सड़क पर हुई डिलीवरी, डेढ़ घंटे बाद फिर चलना शुरू किया

जत्था गंगोत्री से 300 किमी पैदल चलकर पहुंचा सहारनपुर, एक ने तोड़ा दम

सहारनपुर। लॉकडाउन के चलते काम बंद हो गया, पैसे भी खत्म हो गए। ऐसे में भूखे मरने से बचने के लिए 11 मजदूरों का एक जत्था गंगोत्री से पैदल चलकर सहारनपुर तो पहुंचा, लेकिन एक मजदूर करीब 300 किलोमीटर के सफर की थकान बरदाश्त नहीं कर पाया और तबियत बिगड़ गई। उपचार के लिए सहारनपुर ले जाते समय उसने दम तोड़ दिया। भूखे पेट और लगातार चलने से बनी थकान को उसकी मौत की वजह माना जा रहा है। जत्था छह मई को वापस गांव के लिए चल दिए। चार दिन बाद गांव में पहुंचे तो अतर सिंह की हालत बिगड़ गई। अतर सिंह के बेटे ने बताया कि 10 मई की सुबह उन्हें मिर्जापुर ग्लोकल मेडिकल कॉलेज ले जाया गया, जहां से उन्हें सहारनपुर रेफर कर दिया। रास्ते में उनकी मौत हो गई। अतर सिंह के बेटे का कहना है कि 6 मई को जब उनके पिता जी अन्य लोगों के साथ चले तो रास्ते में उन्हें कही भी कुछ भी खाने को नहीं मिला, ना कोई ऐसी व्यवस्था की गई, जिससे कि वो अपने गांव पहुंच सकें। गांव आने के बाद उन्होंने थोड़ा सा खाना खाया और उसके बाद उन्हें पेट दर्द की शिकायत हुई परिजन जब अतर… Continue reading जत्था गंगोत्री से 300 किमी पैदल चलकर पहुंचा सहारनपुर, एक ने तोड़ा दम

‘घर’ पहुंचाने के लिए वसूल रहे तीन हजार रुपए, ट्रक में भरे 57 मजदूर फिर…

मुंबई | मजदूरों को अपने घर लौटने के दौरान भारी परेशानी का सामना कर रहा है।महाराष्ट्र में मुंबई-नासिक राजमार्ग पर एक ट्रक पुरुषों, महिलाओं और बच्चों से भरा होने के बावजूद और सवारियों के लिए इंतजार में खड़ा है। करीब 40 डिग्री की गर्मी के बीच इसे यूं ही खड़े हुए करीब पांच घंटे हो चुके हैं।57 प्रवासी मजदूरों को लिए ट्रक सुबह नौ बजे के आसपास रुका था। यह मुंबई से ठाणे पहुंचा है। यह अभी खड़ा हुआ है और ड्राइवर’और सवारियों’ की प्रतीक्षा कर रहा था। ट्रक में प्रति सवारी तीन हजार रुपए चार्ज किए जा रहे हैं। इसके बावजूद अधिक से अधिक कमाई के लिए इसे चलाने वाले चाह रहे हैं कि जितनी अधिक सवारी मिल जाएं उतना बेहतर है। हालत यह है कि ट्रक के पीछे कोई जगह नहीं है, जहां प्रवासी ज्यादातर खड़े रहते हुए यात्रा को मजबूर होंगे। एक दर्जन से अधिक छत पर चढ़ गए हैं। एक बुजुर्ग ने कहा- ड्राइवर यात्रा जारी रखना चाहता है लेकिन ट्रक मालिक उसे और यात्रियों की प्रतीक्षा करने के लिए कह रहा है। जब यह बताया गया कि कोई जगह नहीं थी, तो कहा गया- यह तुम्हारा काम नहीं कि मैं और सवारियों को किस तरह… Continue reading ‘घर’ पहुंचाने के लिए वसूल रहे तीन हजार रुपए, ट्रक में भरे 57 मजदूर फिर…

आठ महीने की गर्भवती बीवी व बेटी को 800 किमी खींचकर लाया मजदूर

New Delhi | यह बालाघाट का एक मजदूर है, जो हैदराबाद में नौकरी करता था। वह 800 किलोमीटर दूर से हाथ से बनी लकड़ी की एक गाड़ी में बैठा कर अपनी आठ महीने की गर्भवती पत्नी और दो साल की बेटी को लेकर गाड़ी खींचता हुआ बालाघाट पहुंचा है। कुछ दूर तक तो इस मजदूर ने अपनी बेटी को गोद में ले कर चलना शुरू किया था, लेकिन रास्ता लंबा होने के कारण रास्ते में लकड़ी और बांस के टुकड़े बीन कर उसने एक गाड़ी बनाई। उसमें उन्हें बैठा कर, खींचता हुआ वह 800 किलोमीटर दूर पैदल चला आया। यह भी पढ़ें : मेरे तो गिरधर गोपाल (मोदी), दूसरा न कोई! दो साल की मासूम अनुरागिनी को खींचता हुआ चला रामू नाम का यह मजदूर हैदराबाद से तपती दोपहरी में 17 दिन पैदल चल बालाघाट पहुंचा है। साथ में गर्भवती पत्नी भी है। जिले की रजेगांव सीमा पर जवानों ने इस दंपति को आते देखा। मासूम बिटिया के पैरों पर चप्पल तक न थी। पुलिस ने उसे खाने को बिस्किट और चप्पल दी और फिर यहां से उसके घर तक भिजवाने के लिए एक निजी गाड़ी का बंदोबस्त किया। मजदूर ने बताया कि वह घर वापसी के लिए तमाम मिन्नतें… Continue reading आठ महीने की गर्भवती बीवी व बेटी को 800 किमी खींचकर लाया मजदूर

Corona Virus Crisis | वायरस से पहले घायल भारत!

New Delhi | 25 मार्च से 15 मई के 52 दिनों में भारत में लोग इतना पैदल चले हैं, गर्मी में इतने झुलसे हैं, इतने प्यासे-भूखे रहे हैं, थके हैं, टूटे, मरे हैं कि मानवता की याददाश्त में महामारी से पूर्व की ऐसी दास्तां ढूंढे नहीं मिलेगी। कोविड-19 का वायरस लोगों को मारने लगे उससे पहले ही भारत में वह मूर्खता, वह असंवेदनशीलता दिखी, जिससे असंख्य परिवार, गरीब, दिहाड़ी पर जिंदगी जीने वाले लोग, मजदूर चलते-चलते, रोते-रोते बुरी तरह गर्मी में सूखे, घायल हुए। इन लोगों के आंसू कितने बहे, मां-बापऔर उनके साथ छोटे-छोटे मासूम कदमों में बच्चों पर क्या गुजरी, कितने मरे-घायल हुए, कितने भूख-प्यास से तड़पे इसका 21वीं सदी की सूचना क्रांति, टेक्नोलॉजी, टीवी चैनलों, अखबार या इंस्टाग्राम और सोशल मीडिया व भारत की सरकारों के पास कोई संग्रहित-इकठ्ठा रिकार्ड नहीं मिलेगा। यह भी पढ़ें : यमराज न करूणा, न संवेदना और न ख्याल! मानों तालाबंदी के बाड़े को तोड़ कर घर के लिए निकले चेहरे इंसान न हो भेड़-बकरी हों। यदि भारत के नेताओं, भारत की व्यवस्था, भारत की सरकारों में इनका बतौर नागरिक, बतौर इंसान मान-मूल्य होता तो कैसे वह सब होता जो 52 दिनों में भारत की सड़कों पर, हाईवे पर, रेल की पटरी पर… Continue reading Corona Virus Crisis | वायरस से पहले घायल भारत!

कोरोना के बाद क्या-क्या बदलेगा?

कोरोना वायरस की महामारी को लेकर गंभीर सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक विमर्श के साथ साथ कुछ हल्की-फुल्की चर्चाएं भी चल रही हैं। सब अपने हिसाब से अंदाजा लगा रहे हैं कि कोरोना वायरस खत्म हो जाएगा या जब सब लोग इसके साथ जीना सीख जाएंगे तो जीवन कैसा होगा।

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